उज्जैन टाइम और स्पेस ग्लोबल सेंटर बनने की राह पर: CM मोहन यादव आज करेंगे “महाकाल: मास्टर ऑफ टाइम” इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का भव्य शुभारंभ। ISRO-DRDO संग उज्जैन साइंस सेंटर का लोकार्पण।
उज्जैन: आस्था से विज्ञान तक का महाकुंभ
मध्य प्रदेश के सांस्कृतिक और वैज्ञानिक इतिहास में आज का दिन स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। उज्जैन टाइम और स्पेस ग्लोबल सेंटर बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए, आज यानी 3 अप्रैल से “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हो रही है। यह सिर्फ एक सम्मेलन नहीं, बल्कि एक ऐसा पुल है जो प्राचीन भारतीय कालगणना और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान को जोड़ता है।
उज्जैन टाइम और स्पेस ग्लोबल सेंटर’ क्यों?
उज्जैन को प्राचीन काल से ही ‘नाभि देश’ (नाभि ऑफ द अर्थ) कहा गया है। यहीं पर वेधशाला (जंतर मंतर) स्थित है, जहां समय की गणना सूर्य की छाया से की जाती थी। अब सरकार की मंशा इसी ज्ञान को वैश्विक मंच पर ले जाने की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस निर्णय ने उज्जैन को उज्जैन टाइम और स्पेस ग्लोबल सेंटर के रूप में स्थापित करने का सपना साकार कर दिया है। यहां समय (टाइम) और अंतरिक्ष (स्पेस) दोनों के गहन अध्ययन के लिए एक इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है।
CM मोहन यादव आज करेंगे ऐतिहासिक शुरुआत
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज दोपहर डोंगला डिजिटल प्लेनेटेरियम परिसर पहुंचेंगे। वे न सिर्फ इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे, बल्कि अत्याधुनिक उज्जैन साइंस सेंटर का भी लोकार्पण करेंगे। सीएम ने कहा, “उज्जैन केवल महाकाल का शहर नहीं है, यह कालगणना का वैज्ञानिक केंद्र है। हम इसे वैश्विक पहचान देंगे।” इसके साथ ही सीएम ने जोर देकर कहा कि उज्जैन टाइम और स्पेस ग्लोबल सेंटर बने, इसके लिए हर संभव संसाधन जुटाए जाएंगे।
सम्मेलन में कौन-कौन होंगे शामिल?
इस तीन दिवसीय सम्मेलन (3-5 अप्रैल) में केवल धार्मिक विद्वान ही नहीं, बल्कि कठोर वैज्ञानिक भी शिरकत करेंगे।
-
इसरो (ISRO): भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के वरिष्ठ वैज्ञानिक नवीनतम स्पेस टेक्नोलॉजी पर चर्चा करेंगे।
-
डीआरडीओ (DRDO): रक्षा अनुसंधान के विशेषज्ञ समय और रक्षा प्रौद्योगिकी के समन्वय पर बात करेंगे।
-
सीएसआईआर (CSIR) और नीति आयोग: ये संस्थान नीति-निर्धारण में विज्ञान और परंपरा के मेल को समझेंगे।
देश-विदेश से आए 50 से अधिक शोधार्थी अपने रिसर्च पेपर प्रस्तुत करेंगे, जिससे उज्जैन टाइम और स्पेस ग्लोबल सेंटर के विचार को अकादमिक मजबूती मिलेगी।
डोंगला डिजिटल प्लेनेटेरियम: आधुनिक स्पेस टेक्नोलॉजी का संगम
डोंगला क्षेत्र में स्थित यह डिजिटल प्लेनेटेरियम अब उज्जैन टाइम और स्पेस ग्लोबल सेंटर की रीढ़ बनेगा। यहां लगी अत्याधुनिक 4K प्रोजेक्शन प्रणाली ब्रह्मांड का यथार्थ अनुभव कराएगी। सम्मेलन के दौरान यहां स्पेस टेक्नोलॉजी पर वर्कशॉप्स आयोजित होंगी, जहां छात्र सीधे वैज्ञानिकों से रूबरू होंगे।
![डोंगला प्लेनेटेरियम में स्पेस टेक्नोलॉजी वर्कशॉप]
Alt Text: उज्जैन टाइम और स्पेस ग्लोबल सेंटर के अंतर्गत डोंगला प्लेनेटेरियम में चल रही वर्कशॉप
सिंहस्थ 2028: तैयारियों को नई दिशा
उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ (कुंभ) का आयोजन होना है। इस विशाल आयोजन से पहले उज्जैन टाइम और स्पेस ग्लोबल सेंटर की स्थापना एक रणनीतिक कदम है। सरकार का लक्ष्य है कि 2028 तक उज्जैन दुनिया का पहला ऐसा तीर्थ स्थल बन जाएगा, जहां आस्था के साथ अत्याधुनिक खगोल विज्ञान का केंद्र होगा। सीएम ने कहा कि सिंहस्थ के दौरान दुनियाभर के श्रद्धालु यहां आकर स्पेस साइंस सीख सकेंगे।
तीन दिन का शेड्यूल
-
दिन 1 (3 अप्रैल): उद्घाटन, सीएम का संबोधन, ‘प्राचीन भारत में कालगणना’ विषय पर की-नोट स्पीच।
-
दिन 2 (4 अप्रैल): ISRO और DRDO के साथ इंटरएक्टिव सेशन। ‘स्पेस टेक्नोलॉजी फॉर फ्यूचर’ पर वर्कशॉप।
-
दिन 3 (5 अप्रैल): शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण, उज्जैन टाइम और स्पेस ग्लोबल सेंटर के विस्तार पर पैनल डिस्कशन और समापन समारोह।
निष्कर्ष: एक नए युग की शुरुआत
उज्जैन टाइम और स्पेस ग्लोबल सेंटर बनने की यह घोषणा सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक वैश्विक ब्रांडिंग है। जहां एक तरफ महाकाल समय के देवता हैं, वहीं इसरो जैसी संस्थाएं समय और स्पेस को मापती हैं। यह सम्मेलन उसी सहजीवन का प्रतीक है। कल जो केवल एक ऐतिहासिक शहर था, वह आज उज्जैन टाइम और स्पेस ग्लोबल सेंटर बनकर विश्व मानचित्र पर चमकने को तैयार है।
