उज्जैन चिमनी ब्लास्ट में 22 किलो बारूद से 150 फीट ऊंची 45 साल पुरानी चिमनी को सुरक्षित तरीके से गिराया गया। वीडियो वायरल।
उज्जैन चिमनी ब्लास्ट: 22 किलो बारूद से 45 साल पुरानी चिमनी जमींदोज
उज्जैन चिमनी ब्लास्ट शनिवार देर शाम शहर में चर्चा का बड़ा विषय बन गया, जब लोकमान्य तिलक विद्यालय क्षेत्र में स्थित 45 साल पुरानी विशाल चिमनी को विस्फोट के जरिए सुरक्षित तरीके से गिरा दिया गया। यह कार्रवाई उज्जैन नगर निगम और विस्फोट विशेषज्ञों की मौजूदगी में पूरी की गई, जिसका वीडियो और ड्रोन फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
उज्जैन में लंबे समय से जर्जर हालत में खड़ी यह चिमनी किसी भी वक्त बड़ा हादसा बन सकती थी, इसी वजह से प्रशासन ने इसे ध्वस्त करने का फैसला लिया।
45 साल पुरानी, 150 फीट ऊंची चिमनी बनी थी खतरा
उज्जैन चिमनी ब्लास्ट का केंद्र रही यह चिमनी करीब 150 फीट ऊंची थी और इसका घेरा लगभग 16 मीटर बताया गया। यह चिमनी लोकमान्य तिलक विद्यालय के पास खाली पड़ी भूमि पर स्थित थी और वर्षों से अनुपयोगी व जर्जर हालत में खड़ी थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश, नमी और समय के साथ इसकी संरचना कमजोर हो चुकी थी, जिससे आसपास के रहवासी इलाकों के लिए यह गंभीर खतरा बन गई थी।

22 किलो बारूद से 3 चरणों में हुआ चिमनी ब्लास्ट
विस्फोट विशेषज्ञ शरद सरवटे ने बताया कि उज्जैन चिमनी ब्लास्ट के लिए कुल 22 किलो बारूद का इस्तेमाल किया गया।
ब्लास्ट की प्रक्रिया:
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पहला चरण: कम मात्रा में विस्फोट कर चिमनी को कमजोर किया गया
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दूसरा चरण: मुख्य स्ट्रक्चर को गिराने का प्रयास
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तीसरा चरण: जरूरत पड़ने पर अंतिम विस्फोट
विशेषज्ञों के अनुसार, जब चिमनी का आधार दो-तिहाई कमजोर हो जाता है, तो वह स्वतः नीचे गिर जाती है, और ठीक ऐसा ही उज्जैन में हुआ।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, पुलिस-प्रशासन रहा अलर्ट
उज्जैन चिमनी ब्लास्ट से पहले पुलिस और प्रशासन की मदद से आसपास के लोगों को सुरक्षित दूरी पर भेजा गया। क्षेत्र को पूरी तरह खाली कराया गया और किसी भी प्रकार की जनहानि न हो, इसके लिए सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया।
नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह प्लानिंग और विशेषज्ञों की निगरानी में की गई।
28 साल का अनुभव, 300 से ज्यादा इमारतें ध्वस्त
विस्फोट विशेषज्ञ शरद सरवटे ने जानकारी दी कि उनकी टीम ने वर्ष 1996 से अब तक देश के विभिन्न राज्यों में 300 से अधिक जर्जर इमारतें, चिमनियां और भवन सुरक्षित तरीके से ध्वस्त किए हैं।
इस उपलब्धि के लिए टीम का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुका है। आने वाले समय में अन्य अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड एजेंसियां भी टीम से संपर्क में हैं।
नगर निगम अब चिन्हित करेगा अन्य जर्जर भवन
उज्जैन चिमनी ब्लास्ट के बाद नगर निगम ने शहरभर में जर्जर भवनों की पहचान करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। ऐसे सभी भवन, जो भविष्य में हादसे का कारण बन सकते हैं, उन्हें सूचीबद्ध कर चरणबद्ध तरीके से ध्वस्त किया जाएगा।
वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर चर्चा
ब्लास्ट का ड्रोन वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। लोग प्रशासन की इस कार्रवाई को “समय रहते उठाया गया सही कदम” बता रहे हैं।
