पार्षद मुजीब सुपारीवाला बोले—“मंदिर भी बचे, मस्जिद भी बचे”; स्थानीय नागरिकों से अभियान में शामिल होने की अपील
Ujjain , 16 सितंबर। शहर में सड़क चौड़ीकरण को लेकर शाही मस्जिद को संभावित रूप से प्रभावित होने से बचाने की मांग के बीच बुधवार शाम 4 बजे से हस्ताक्षर अभियान शुरू किया जाएगा। अभियान के माध्यम से स्थानीय नागरिकों से हस्ताक्षर करवाकर शाही मस्जिद के संरक्षण की मांग प्रशासन के समक्ष रखी जाएगी।
अभियान से जुड़े आयोजकों ने स्थानीय नागरिकों से बड़ी संख्या में इसमें शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि शहर के विकास और यातायात व्यवस्था के लिए सड़क चौड़ीकरण जरूरी हो सकता है, लेकिन विकास कार्यों की योजना बनाते समय धार्मिक स्थलों की आस्था, पहचान और महत्व को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
पार्षद ने कहा—“मंदिर भी बचे, मस्जिद भी बचे”
हस्ताक्षर अभियान को लेकर पार्षद मुजीब सुपारीवाला ने कहा कि शहर का विकास आवश्यक है, लेकिन विकास के साथ धार्मिक स्थलों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मंदिर भी बचे, मस्जिद भी बचे।”
उन्होंने विकास कार्यों के लिए ऐसा समाधान तलाशने की बात कही, जिससे यातायात और सड़क की जरूरतें पूरी हों तथा धार्मिक स्थलों को भी सुरक्षित रखा जा सके।
नागरिकों से हस्ताक्षर करने की अपील
अभियान के माध्यम से नागरिकों से शाही मस्जिद को सड़क चौड़ीकरण की संभावित जद से बचाने के समर्थन में हस्ताक्षर करवाए जाएंगे। आयोजकों का कहना है कि हस्ताक्षरों के माध्यम से नागरिकों की मांग को प्रशासन तक पहुंचाया जाएगा।
उनका कहना है कि चौड़ीकरण की योजना बनाते समय वैकल्पिक विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए। यदि तकनीकी रूप से संभव हो तो ऐसी व्यवस्था तैयार की जाए, जिससे सड़क का विकास भी हो और धार्मिक स्थल भी प्रभावित न हो।
उज्जैन में धार्मिक स्थलों से जुड़े मुद्दे चर्चा में
गौरतलब है कि उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण और विकास कार्यों से जुड़े धार्मिक स्थलों के मुद्दे हाल के दिनों में चर्चा में रहे हैं। खड़े हनुमान मंदिर को लेकर भी श्रद्धालुओं ने मंदिर को हटाने के बजाय उसके संरक्षण और भव्य स्वरूप देने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। संतों के नेतृत्व में SDM को ज्ञापन भी सौंपा गया था।
अब शाही मस्जिद को चौड़ीकरण से बचाने के लिए हस्ताक्षर अभियान शुरू किया जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि विकास कार्यों के साथ शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण भी जरूरी है।
हस्ताक्षर अभियान के बाद प्रशासन की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाया जाता है, इस पर स्थानीय नागरिकों की नजर रहेगी। फिलहाल अभियान के आयोजकों ने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग दर्ज कराने और प्रशासन के समक्ष व्यावहारिक समाधान की मांग रखने की अपील की है।
दैनिक स्वराज वाणी
प्रियंका गुजराती
