उदार सागर जनकल्याण तीर्थ बड़ागांव में भव्य गजरथ महोत्सव संपन्न, हजारों श्रद्धालुओं ने देखा दिव्य आयोजन
टीकमगढ़ जिले के श्री सिद्ध क्षेत्र बड़ागांव स्थित उदार सागर जनकल्याण तीर्थ पर आयोजित आठ दिवसीय श्री मज्जिनेन्द्र जिन बिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं गजरथ महोत्सव भव्यता के साथ संपन्न हुआ। परम पूज्य ज्ञान रत्नाकर आचार्य श्री 108 उदार सागर जी महाराज एवं सेवाश्रमण मुनि श्री उपशांत सागर जी के दिव्य सान्निध्य में 23 से 30 नवंबर तक चले इस विराट आयोजन ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक उत्थान और धार्मिक उल्लास से भर दिया।
1051 प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा एवं मोक्ष कल्याणक सम्पन्न
आठ दिनों तक चले पंचकल्याणक समारोह के दौरान कुल 1051 जिनप्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा विधि-विधान से की गई।
अंतिम दिन मोक्ष कल्याणक के अवसर पर प्रातः 6 बजे मंत्र आराधना और नित्य पूजा संपन्न हुई। सुबह 7:40 बजे योगनिरोध, निर्वाण कल्याणक पूजा एवं विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन हुआ। इसके पश्चात 10:15 बजे श्री जिनबिंब स्थापना संपन्न हुई।
11 बजे से श्री 1008 श्री मुनिसुब्रतनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक सम्पन्न हुआ, जिसे देखने हजारों श्रद्धालु पहुंचे। अभिषेक के बाद विशाल वात्सल्य भोज का आयोजन किया गया, जिसमें आगंतुक धर्मावलंबियों सहित जैनेतर समाज के लोग भी सम्मिलित हुए।
गजरथ महोत्सव को देखने उमड़ा जनसैलाब
बड़ागांव और आसपास के सैकड़ों गांवों से श्रद्धालु दोपहर से ही गजरथ देखने के लिए आने लगे।
दोपहर 1 बजे के बाद बस स्टैंड से महोत्सव स्थल की ओर लगभग 3 किलोमीटर लंबा मुख्य मार्ग श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया। महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और बच्चों का ऐसा उत्साह देखने को मिला मानो पूरा क्षेत्र एक आध्यात्मिक पर्व में डूब गया हो। महोत्सव समिति ने गजरथ फेरी की सुचारू एवं दिव्य व्यवस्था की, जिसकी सभी ने सराहना की। भंडारा समिति द्वारा आठों दिनों तक जैनेतर समाज सहित सभी के लिए निःशुल्क सेवा, भोजन और स्वागत की व्यवस्थाएँ की गईं।
गजरथ फेरी की भव्यता—3 हाथी, 21 घोड़े, 11 बग्घी
दोपहर 2:30 बजे से प्रारंभ हुई गजरथ फेरी अपनी भव्यता और शौर्य-शोभा के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
सर्वप्रथम परम पूज्य आचार्य श्री उदारसागर जी महाराज ससंघ हाथी पर धर्म पताका लेकर आगे बढ़े। साथ में बाहर से पधारे सैकड़ों श्रेष्ठीगण भी शामिल थे।
पहला गजरथ
पहले रथ पर हुकमचंद हटैया, श्रीमती गजरा देवी सहित प्रमुख पात्र विराजमान थे।
साथ ही उदयपुर, राजस्थान का बैंड अपनी मनोहर धुनों से उत्सव को भक्ति रस से भर रहा था।
दूसरा गजरथ
दूसरे गजरथ पर पं. अजित कुमार जी के निर्देशन में महायज्ञनायक एवं अन्य प्रमुख पात्र बैठे हुए थे।
इनके पीछे टीकमगढ़ का रमेश बैंड चल रहा था, जबकि बड़ी संख्या में नर-नारी नाचते-थिरकते धार्मिक उल्लास का प्रदर्शन कर रहे थे। महिला महासभा की टोली भी बड़ी संख्या में शामिल रही।
तीसरा गजरथ
तीसरे रथ पर सनत कुमार इंद्र, महेंद्र इंद्र सहित दिव्य पात्र बैठे हुए थे।
इसके आगे बुंदेलखंड की प्रसिद्ध दलदल घोड़ी, अखाड़ा दल, दिव्य घोष वादन मंडलियां चल रही थीं।
पूरी शोभायात्रा में
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21 घोड़े
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3 हाथी
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11 बग्घी
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5 दिव्य घोष दल
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3 डीजे
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मोनिया दल
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सहयोगी संस्थाओं के अनेक मंडल
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स्थानीय व बाहरी संगीतकार
अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे।
अनेक गणमान्य अतिथि रहे उपस्थित
आयोजन के दौरान कई सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक क्षेत्र के प्रमुख जन भी उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से–
महेंद्र सिंघई, हुकमचंद हटैया, प्रकाश सिंघई, प्रसन्न चौधरी, डॉ. कैलाश नुना, भाजपा जिला अध्यक्ष सरोज राजपूत, नगर पंचायत अध्यक्ष रामलाल प्रजापति, अंकित जैन पिंटू (टीकमगढ़), उत्तम सिंघई (बड़ा मलहरा), तिलोकचंद जैन (मड़ावरा), उत्तमचंद (बण्डा), सौरभ जैन (शिवपुरी), प्रशांत जैन पत्रकार बड़ा मलहरा, अमित दीपू जैन वारव, जिनेंद्र जैन सहायक आबकारी, सिद्धार्थ जैन (सिद्धार्थ प्रेस बड़ा मलहरा) सहित अनेक विशिष्टजन शामिल थे।



