उदार सागर जनकल्याण तीर्थ, बड़ागांव में पंचकल्याणक महोत्सव का छठवां दिन — तप कल्याणक में उमड़ा जनसागर
उदार सागर जनकल्याण तीर्थ, बड़ागांव में आयोजित श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक जिनबिंब प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव का छठवां दिन तप कल्याणक की दिव्यता और अध्यात्म से सराबोर रहा। 23 से 30 नवंबर तक चल रहे इस विराट धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है, लेकिन छठवें दिन तप कल्याणक महोत्सव में अपार जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिससे संपूर्ण तीर्थभूमि भक्ति और श्रद्धा की ऊर्जा से ओत–प्रोत दिखाई दी।
जैन ही नहीं, जैनत्तर श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में शामिल
इस महोत्सव की सबसे विशेष बात यह रही कि केवल जैन धर्मावलंबी ही नहीं, बल्कि जैनत्तर समुदायों के लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचकर एक साथ धर्म की गंगा में डुबकी लगाते दिखाई दिए।
आचार्य परंपरा के तेजस्वी संत परम पूज्य आचार्य श्री 108 उदार सागर जी महाराज, तथा सेवाश्रमण मुनि श्री उपशांत सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में हो रहे इस महोत्सव ने सामाजिक–धार्मिक समरसता की एक अद्वितीय मिसाल पेश की।
भोर से ही श्रद्धालुओं का तांता – सुबह 6 बजे मंत्र–आराधना की शुरुआत
छठवें दिन की शुरुआत प्रातः 6:00 बजे मंत्र आराधना, नित्यमय अभिषेक और शांतिधारा के साथ हुई। दूर-दूर से पधारे हजारों भक्त सुबह से ही तीर्थस्थल पर पहुंचने लगे, जिससे आयोजन स्थल खचाखच भर गया।
9:15 बजे विशाल धर्मसभा – आचार्य श्री का प्रेरक प्रवचन
सुबह 9:15 बजे से आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री 108 उदार सागर जी महाराज ने तप, संयम और आत्मकल्याण पर आधारित अमृतमयी वाणी से उपस्थित जनसमूह को कृतार्थ किया।
सभा में उपस्थित श्रद्धालु जैन–जैनेतर सभी संत वाणी का रसपान करते हुए आध्यात्मिक अनुभूति में डूबे रहे।
10 बजे श्री महामुनि आदिनाथ का प्रथम आहार
प्रातः 10 बजे महोत्सव का महत्वपूर्ण धार्मिक कार्यक्रम श्री महामुनि आदिनाथ भगवान का प्रथम आहार विधिपूर्वक संपन्न हुआ। आहार समारोह में भक्तों की भावनाएं चरम पर थीं।
दोपहर के कार्यक्रम – अधिवासना, तिलकदान व प्राण प्रतिष्ठा
दोपहर 12:30 बजे से तप कल्याणक के विभिन्न मंगलकारी कार्यक्रम—
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अधिवासना,
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तिलकदान,
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प्राण प्रतिष्ठा,
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केवलज्ञान की उत्पत्ति का वृतांत—
पूरी श्रद्धा, वेदपाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सम्पन्न हुए।
3 बजे अखिल भारतीय दिगंबर जैन विद्वत परिषद का अधिवेशन
दोपहर 3 बजे अखिल भारतीय दिगंबर जैन विद्वत परिषद का सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें देशभर से आए विद्वानों ने भाग लिया। धर्म–शास्त्र, संस्कृति संरक्षण, अध्यात्म और आधुनिक समाज में जैन दर्शन की उपयोगिता पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।
शाम की महाआरती – भक्ति में थिरक उठा जनसमुदाय
शाम 7 बजे महोत्सव के मुख्य आकर्षणों में से एक श्रीजी की भव्य महाआरती का आयोजन हुआ।
इस दौरान ख्यातनाम संगीतकार संजय एंड पार्टी (देवराहा) ने अपनी मधुर भक्ति धुनों से ऐसा वातावरण बना दिया कि भक्तगण घंटों तक आरती–नृत्य में मंत्रमुग्ध होकर झूमते रहे।
शास्त्र सभा और भजन संध्या ने मन मोहा
शाम 7:45 बजे शास्त्र सभा प्रवचन हुए, जिनमें आध्यात्मिक ज्ञान और जैन मूल्यों पर गहन चर्चा की गई।
इसके बाद 8:30 बजे राष्ट्रीय स्तर की भजन संध्या ने संपूर्ण परिसर में भक्ति की अनुपम लहर प्रवाहित कर दी।
महोत्सव समिति का स्वागत–सत्कार और आगामी गजरथ महोत्सव का निमंत्रण
पूरे महोत्सव की अनुशासित और दिव्य व्यवस्था का श्रेय महोत्सव समिति बड़ागांव को जाता है। समिति के अध्यक्ष श्री महेंद्र जैन बड़ागांव, हुकुमचंद हटैया, वैद्य ऋषभ कुमार, प्रसन्न चौधरी, प्रकाश सिंघई, राकेश केसरिया, प्रशांत जैन मुंबई, विजय जैन, आलोक जैन, डॉ. कैलाश चंद्र नुना, शाह राजेश जैन, धीरज जैन पटवारी, जिनेंद्र जैन सहायक आबकारी, सौरभ जैन शिवपुरी सहित संपूर्ण जैन समाज ने देश भर से आने वाले अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया।
महोत्सव समिति ने बताया कि आवास, सुरक्षा, भक्ति–सह भोजन सहित सभी व्यवस्थाएं विशेष रूप से बेहतर और व्यवस्थित रखी गई हैं।
साथ ही समिति ने श्रद्धालुओं से निवेदन किया कि वे 30 नवंबर को बड़ागांव के इतिहास में पहली बार आयोजित होने जा रहे भव्य एवं दिव्य आलोकित गजरथ महोत्सव में अनिवार्य रूप से पधारकर पुण्य लाभ अर्जित करें।

