UCC पर साबिर फिटवेल का बयान चर्चा में है। Jhabua में कांग्रेस प्रवक्ता साबिर फिटवेल ने कहा कि समान नागरिक संहिता के नाम पर मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने यूसीसी समिति से धार्मिक स्वतंत्रता और पर्सनल लॉ की रक्षा की मांग की।
UCC पर साबिर फिटवेल का बयान: पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं
Jhabua प्रतिनिधि: मनीष कुमट
Jhabua। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा तैयार करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति विभिन्न जिलों से सुझाव और आपत्तियां प्राप्त कर रही है। इसी बीच प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता साबिर फिटवेल ने यूसीसी को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि पर्सनल लॉ में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।साबिर फिटवेल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि समान नागरिक संहिता और पर्सनल लॉ दो अलग-अलग विषय हैं। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता की बात करता है, लेकिन इसका अर्थ किसी विशेष धर्म के पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप नहीं है।
पर्सनल लॉ धार्मिक स्वतंत्रता का हिस्सा
उन्होंने कहा कि विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे विषय विभिन्न धर्मों के पर्सनल लॉ के अंतर्गत आते हैं और भारतीय संविधान सभी नागरिकों को अपने धर्म और रीति-रिवाजों के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता देता है।साबिर फिटवेल के अनुसार विभिन्न धर्मों के पर्सनल लॉ संविधान के बाहर नहीं बल्कि संविधान के दायरे में ही संचालित होते हैं। ऐसे में धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप उचित नहीं माना जा सकता।
नीति निदेशक तत्वों का चयनात्मक उपयोग क्यों?
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सरकार यूसीसी के पक्ष में संविधान के नीति निदेशक तत्वों का हवाला देती है, लेकिन उन्हीं तत्वों में वर्णित अन्य विषयों जैसे पूर्ण शराबबंदी, समान कार्य के लिए समान वेतन और आर्थिक समानता को लागू करने पर कोई गंभीर प्रयास नहीं दिखाई देता।उन्होंने कहा कि यदि नीति निदेशक तत्वों को आधार बनाया जा रहा है तो अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।
लिव-इन रिलेशनशिप और सामाजिक मूल्यों पर चिंता
साबिर फिटवेल ने कहा कि न्यायपालिका के कुछ निर्णयों जैसे लिव-इन रिलेशनशिप और व्यभिचार से जुड़े मामलों पर भी व्यापक सामाजिक चर्चा होनी चाहिए। उनका कहना है कि भारत को विदेशी कानूनों की नकल करने के बजाय अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों के अनुरूप कानून बनाने चाहिए।
आदिवासी समुदाय को बाहर रखने पर सवाल
उन्होंने कहा कि एक ओर पूरे देश में समान नागरिक संहिता की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ राज्यों में अलग-अलग मॉडल लागू किए जा रहे हैं। साथ ही आदिवासी समाज के बड़े वर्ग को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जा रहा है, जो समानता के सिद्धांत के विपरीत प्रतीत होता है।
व्यापक परामर्श की मांग
साबिर फिटवेल ने कहा कि यूसीसी पर किसी भी निर्णय से पहले सभी धर्मों और समुदायों से व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। उन्होंने समिति से मुस्लिम पर्सनल लॉ का गहन अध्ययन करने की भी मांग की।उनका कहना है कि इस्लाम में निकाह, तलाक और विरासत के स्पष्ट और व्यवस्थित नियम मौजूद हैं तथा इन व्यवस्थाओं में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है।
शराबबंदी और गौ-संरक्षण पर भी रखी राय
साबिर फिटवेल ने कहा कि प्रदेश और देश में पूर्ण शराबबंदी लागू करने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने गौ-संरक्षण से जुड़े सख्त कानूनों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
निष्कर्ष
Jhubua मध्य प्रदेश में यूसीसी को लेकर सुझाव और आपत्तियां प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी है। ऐसे समय में कांग्रेस प्रवक्ता साबिर फिटवेल का यह बयान राजनीतिक और सामाजिक बहस को नया आयाम दे सकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता और पर्सनल लॉ से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की दखलंदाजी स्वीकार नहीं की जाएगी।
