जनजाति रंग में रंगा इंदौर: भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर जनजाति गौरव दिवस की भव्य धूम
इंदौर: जनजाति रंग में रंगे इंदौर में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और जनजाति गौरव दिवस बड़े ही भव्य और गरिमामय माहौल में मनाया गया। पूरा शहर जनजातीय परंपराओं, लोक संस्कृति और उत्साह से सराबोर नजर आया। दो अलग-अलग स्थानों से निकली जनजातीय यात्राएँ जब टंट्या मामा भील चौराहा पहुंचीं तो जनजातीय परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, टंट्या मामा भील, और भारत माता के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। जनजातीय समाज के हजारों लोग पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और सांस्कृतिक धुनों के साथ एकत्रित हुए।
इंदौर में जनजाति गौरव दिवस की धूम
इंदौर महानगर में इस वर्ष का जनजाति गौरव दिवस (Tribal Pride Day Indore) ऐतिहासिक रहा। जनजाति समाज की विभिन्न संस्थाओं और संगठनों ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया।
जनजातीय विकास मंच इंदौर महानगर के संयोजक श्री राधेश्याम जामले ने बताया कि जनजातीय समाज के भाई-बहनों ने दो स्थानों से यात्रा प्रारंभ की। हजारों जनजातीय लोग पारंपरिक ध्वज, नगाड़ों और डफली की ताल पर चलते हुए टंट्या मामा भील चौराहा पहुंचे।
चौराहे पर स्थित टंट्या मामा भील की प्रतिमा स्थल पर सभी ने भारत माता, टंट्या मामा और भगवान बिरसा मुंडा की आरती कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान ‘धरती आबा अमर रहें’, ‘जय टंट्या मामा’ और ‘भारत माता की जय’ जैसे गगनभेदी नारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा।
पारंपरिक नृत्य और जनजातीय संस्कृति की शानदार प्रस्तुति
इस अवसर पर जनजाति–आदिवासी नृत्य दलों ने पारंपरिक वेशभूषा में मनमोहक और ऊर्जावान प्रस्तुतियाँ दीं।
ढोल, मांदल, नगाड़ा, धुम्मा और तुरही की अनोखी लय के बीच जनजातीय नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया। आयोजन समिति के अनुसार इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम न सिर्फ परंपरा को जीवंत रखते हैं बल्कि नई पीढ़ी में जनजातीय इतिहास और गौरव का भाव भी जगाते हैं।
आयोजकों ने कहा कि जनजाति गौरव दिवस केवल एक जनजातीय उत्सव नहीं, बल्कि यह पूरे देश का गौरव है। जनजातीय वीरों के बलिदान, संघर्ष और संस्कृति को स्मरण करने का यह दिन भारत की एकता को और मजबूती देता है।
बिरसा मुंडा: भारत के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी
इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने भगवान बिरसा मुंडा के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने अपने अल्प जीवन में ही ब्रिटिश अत्याचारों के खिलाफ जनजाति समुदाय को संगठित कर एक बड़े आंदोलन की नींव रखी।
बिरसा मुंडा ने ‘उलगुलान’ (महाजागरण) का आह्वान कर अंग्रेजी शासन की नींद उड़ा दी थी। यही कारण है कि उन्हें धरती आबा की उपाधि मिली।
आज जब उनकी 150वीं जयंती मनाई जा रही है, तब पूरा राष्ट्र उनके जीवन-मूल्यों और आदर्शों को आत्मसात करने की प्रेरणा ले रहा है। उनके विचार—
“धरती हमारी मां है”,
“समानता और स्वाभिमान”,
“अत्याचार के खिलाफ संघर्ष”
आज भी समाज और राष्ट्र निर्माण में प्रेरणा देते हैं।
यात्रा और आयोजन का सफल संचालन
इस भव्य कार्यक्रम के संचालन में कई प्रमुख जनजातीय प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।
कार्यक्रम का संचालन श्री विक्रम जी मस्कोले ने किया।
वहीं दोनों यात्राओं का नेतृत्व और प्रबंधन श्री महेंद्र परते, रामेश्वर जामले, अशोक बारिया, आशीष कटारा, दुर्गेश गोलकर ने किया।
विशेष रूप से उपस्थित अतिथियों में—
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डॉ. अनुराग पनवेल
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श्रीमती सोनल दरबार
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श्रीमती सोनम निनामा
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श्रीमती अनिता ठाकुर
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श्रीमती नेहा डाबर
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श्री अजमेर सिंह भाभर
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श्री पूंजालाल निनामा
इन सभी ने भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, उनके संघर्ष और जनजातीय गौरव को आगे बढ़ाने की दिशा में अपने महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए।
समरसता, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण का संदेश
इंदौर में मनाया गया जनजाति गौरव दिवस सिर्फ एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं था, बल्कि यह भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश भी था।
जनजातीय समाज ने यह संदेश भी दिया कि उनके नायक सिर्फ जनजातियों के नहीं बल्कि पूरे भारत के नायक हैं।
आज जब भारत समरस, सशक्त और उत्कृष्ट भारत की ओर बढ़ रहा है, तब भगवान बिरसा मुंडा के आदर्श और बलिदान हर भारतीय के लिए प्रेरणा बनकर सामने आते हैं।
निष्कर्ष
150वीं जयंती के इस पावन अवसर पर इंदौर में मनाया गया भगवान बिरसा मुंडा जयंती समारोह और जनजाति गौरव दिवस जनजातीय संस्कृति, एकता, परंपरा और राष्ट्रभक्ति का भव्य उदाहरण बना।
जनजातीय समाज की विशाल उपस्थिति और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने यह साबित किया कि भारत की विविधताओं में छिपा लोक जीवन आज भी उतना ही जीवंत है।
इंदौर का यह भव्य आयोजन आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।



