**जैनेश्वरी दीक्षा का ऐतिहासिक क्षण: जिस घड़ी का इंतजार था, वह घड़ी आ गई
थूबोनजी अतिशय क्षेत्र में 23 नवंबर 2025 को होगा भव्य आयोजन**
इंदौर के प्रख्यात समाजसेवी और धर्म प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि पूरे जैन समाज को जिस पावन क्षण की प्रतीक्षा थी, वह शुभ घड़ी अब आ चुकी है।
युग-शिरोमणी, राष्ट्रीय संत, आचार्य भगवंत 108 श्री विद्यासागर जी महाराज के 53वें आचार्य पदारोहण दिवस को अविस्मरणीय बनाने के लिए अतिशय क्षेत्र दर्शनोदय तीर्थ—थूबोनजी में एक भव्य और दिव्य आयोजन होने जा रहा है।
इस पावन अवसर पर थूबोनजी में विराजित बड़े बाबा 1008 श्री आदिनाथ भगवान के चरणों में, तथा तीर्थ उद्धारक, तीर्थ चक्रवर्ती, राष्ट्रसंत, मुनिपुंगव, निर्यापक श्रमण 108 श्री सुधासागर जी महामुनिराज की पवित्र सन्निधि में “जैनेश्वरी दीक्षा समारोह” का आयोजन होगा। इस अवसर पर अनेक श्रावक-श्राविकाएँ अपने जीवन को धर्ममार्ग में समर्पित करते हुए भव्य जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगे।
थूबोनजी में दिव्यता का संगम — तीनों लोकों के देवता के समान पवित्र धरा
थूबोनजी अतिशय क्षेत्र इतिहास, चमत्कार और दिव्यता का अनोखा संगम है।
यह वही धरा है जहाँ आने मात्र से भक्तों के कष्ट हर जाते हैं और आत्मा शांति से भर उठती है।
राजेश जैन दद्दू ने बताया कि इस बार का आयोजन तीनों लोकों के देवता के समान माने जाने वाले बड़े बाबा के पावन सान्निध्य में होने जा रहा है। यहाँ भव्य तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं और पूरा क्षेत्र एक आध्यात्मिक उत्सव की तरह सजाया जा रहा है।
उन्होंने कहा—
“जैनेश्वरी दीक्षा समारोह थूबोनजी की महानता को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। यह अवसर केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्धि और मुक्ति के मार्ग पर अग्रसर करने वाला दिव्य पर्व है। पूज्य गुरुदेव के कर-कमलों से दीक्षा ग्रहण करना अनादि काल का दुर्लभ सौभाग्य है।”
दीक्षा की तैयारियों में पूरा भारत—भक्तों में अपार उत्साह
पूरे भारत ही नहीं, विदेशों में बसे जैन समुदाय में भी इस समारोह को लेकर अपार उत्साह है।
जिस क्षण का वर्षों से इंतजार था, वह अब सिर्फ कुछ ही दिनों की दूरी पर है।
23 नवंबर 2025, रविवार को थूबोनजी में श्रद्धालुओं का विशाल सैलाब उमड़ने की संभावना है।
समाज में यह बात बड़े गर्व से कही जा रही है कि…
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आचार्य भगवन 108 श्री विद्यासागर जी महाराज के 53वें आचार्य पदारोहण दिवस पर ऐसा भव्य आयोजन पहली बार हो रहा है।
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गुरुदेव के पावन कर-कमलों से जैनेश्वरी दीक्षा प्राप्त करना करोड़ों जन्मों का संचित पुण्य है।
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थूबोनजी का भूमि स्वयं सिद्ध है—अतिशय, चमत्कार और मोक्षमार्ग की निरंतर प्रेरणा देने वाला स्थान।
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सुधासागर जी महामुनिराज स्वयं सैकड़ों तीर्थों के पुनरुद्धारकर्ता और अनगिनत जनों के जीवन पथ बदलने वाले संत हैं।
भक्त इस दिन को अपने जीवन का “भाग्य उदय” मान रहे हैं। हजारों साधक, श्रावक-श्राविकाएँ इस आयोजन हेतु प्रतिदिन थूबोनजी पहुँच रहे हैं।
जैनेश्वरी दीक्षा: आत्मा को जगाने वाला उत्सव
जैनेश्वरी दीक्षा केवल एक अनुष्ठान भर नहीं—यह आत्मा का पुनर्जन्म है।
यह वह दिन है जब साधक अपने जीवन की सभी सांसारिक बाधाओं, इच्छाओं और मोह-माया को त्यागकर आत्मा को श्रेष्ठतम पथ पर अग्रसर करते हैं।
दीक्षा ग्रहण करने वाले साधक अपनी आत्मा की सदियों पुरानी यात्रा को नया अध्याय देते हैं।
इस समारोह में—
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मुनियों के मार्गदर्शन में दीक्षा विधान,
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महामंत्रों का जप,
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शास्त्रों का पाठ,
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अगाध श्रद्धा और भक्ति के साथ परंपरागत दीक्षा संस्कार,
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और गुरुदेव का मंगल आशीर्वाद
भक्तों को एक अनोखा आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करेगा।
समाजसेवी राजेश जैन दद्दू की विशेष भूमिका
इंदौर के प्रख्यात समाजसेवी राजेश जैन दद्दू इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।
वे वर्षों से जैन समाज में धर्मप्रचार, तीर्थ सेवा और सामाजिक उत्थान के लिए कार्य करते आए हैं।
इस भव्य समारोह को लेकर उन्होंने कहा—
“यह अवसर केवल दीक्षा का नहीं, बल्कि जैन समाज की आध्यात्मिक चेतना का जागरण है। हम सब सौभाग्यशाली हैं कि ऐसे दिव्य आयोजन के साक्षी बनेंगे।”
23 नवंबर 2025 — आध्यात्मिक इतिहास लिखने वाला दिन
दिनांक 23 नवंबर 2025, रविवार, प्रातः काल से ही थूबोनजी में घोषणाएँ, स्तुति-भक्ति, मंत्रों की ध्वनि और भक्तों के जयघोष से वातावरण शिवमय होगा।
देशभर से साधु-संत, आचार्यश्री के अनुयायी, समाज के प्रमुख गण और हजारों श्रद्धालु इस दिन की प्रतीक्षा में हैं।
यह आयोजन जैन समाज के आध्यात्मिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित होगा।
