तितिपुरा स्कूल में शिक्षक पर शराब के नशे में आने के आरोप, बच्चों को यूनिफॉर्म नहीं मिलने की भी शिकायत
रिपोर्ट: नरेन्द्र सिरवी
लोकेशन: तितिपुरा, धरमपुरी
धरमपुरी। धार जिले की धरमपुरी तहसील के ग्राम तितिपुरा स्थित शासकीय स्कूल को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल में पदस्थ शिक्षक अनिल बामनिया कथित तौर पर शराब का सेवन कर विद्यालय पहुंचते हैं और नशे की हालत में बच्चों को पढ़ाते हैं। इस शिकायत के सामने आने के बाद विद्यालय की कार्यप्रणाली और बच्चों की शिक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय बच्चों के भविष्य को संवारने का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन यदि शिक्षक ही नशे की हालत में स्कूल पहुंचेंगे तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनके व्यवहार पर पड़ सकता है। ग्रामीणों के अनुसार शिक्षक के कथित व्यवहार से विद्यालय का वातावरण भी प्रभावित हो रहा है और बच्चों के बीच अनुशासन एवं शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर चिंता बनी हुई है।
अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण की उम्मीद से सरकारी स्कूल भेजते हैं। ऐसे में यदि किसी शिक्षक के खिलाफ इस प्रकार की शिकायत सामने आती है तो शिक्षा विभाग को मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि आरोपों की वास्तविकता की जांच के लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा विद्यालय का निरीक्षण किया जाए और यदि शिकायत सही पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
बच्चों को यूनिफॉर्म नहीं मिलने की शिकायत
तितिपुरा के शासकीय स्कूल को लेकर केवल शिक्षक के कथित नशे में स्कूल आने का मामला ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म उपलब्ध नहीं होने की शिकायत भी सामने आई है। ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को अब तक यूनिफॉर्म नहीं मिल सकी है।
अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए शासन की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं का समय पर लाभ मिलना जरूरी है। यूनिफॉर्म विद्यार्थियों की स्कूल व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि बच्चों को समय पर यूनिफॉर्म नहीं मिलती है तो इसका असर विद्यालय में समानता और अनुशासन की व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से यह भी मांग की है कि स्कूल में विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं की स्थिति की जांच की जाए। इसके साथ ही यह भी देखा जाए कि शासन की योजनाओं के तहत बच्चों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्री समय पर विद्यार्थियों तक पहुंच रही है या नहीं।
बच्चों की पढ़ाई को लेकर अभिभावकों में चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की शिक्षा बच्चों के भविष्य की नींव तैयार करती है। इस उम्र में बच्चों को नियमित पढ़ाई, अनुशासन और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। ऐसे में विद्यालय में शिक्षक के व्यवहार को लेकर उठ रही शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
अभिभावकों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी शिक्षक को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना नहीं है, बल्कि बच्चों के हित में विद्यालय की व्यवस्था बेहतर बनाना है। यदि शिक्षक पर लगाए गए आरोप गलत हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए, और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय तक ऐसी स्थिति बनी रहने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि विद्यालय में शिक्षक नियमित रूप से उपस्थित रहें, विद्यार्थियों को जिम्मेदारी से पढ़ाएं और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाए, यही अभिभावकों की प्राथमिक
