—Advertisement—

ताम्रपत्र षट्खण्डागम अवलोकन इंदौर: अद्भुत ऐतिहासिक क्षण, पहली बार दिव्य ग्रंथ दर्शन का स्वर्णिम अवसर

Author Picture
Published On: 30 April 2026
WhatsApp Image 2026 04 30 at 5.57.22 AM 2

—Advertisement—

ताम्रपत्र षट्खण्डागम अवलोकन इंदौर में 1 मई 2026 को होगा, जहां इस प्राचीन जैन ग्रंथ का दिव्य दर्शन समाजजनों को मिलेगा।

ताम्रपत्र षट्खण्डागम अवलोकन इंदौर – परिचय

ताम्रपत्र षट्खण्डागम अवलोकन इंदौर एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक घटना के रूप में सामने आ रहा है, जिसमें जैन धर्म के अत्यंत प्राचीन और महत्वपूर्ण ग्रंथ को ताम्रपत्र पर संरक्षित कर समाज के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संस्कृति, ज्ञान और विरासत के संरक्षण का अद्भुत उदाहरण है।ताम्रपत्र पर अंकित ‘षट्खण्डागम’ का 1 मई शुक्रवार को होगा अवलोकन, स्वप्न हुआ साकार

राजेश जैन दद्दू

इंदौर, दिगंबर जैन परंपरा के प्रथम लिपिबद्ध ग्रंथ शास्त्र ‘षट्खण्डागम’ को चिरकाल तक सुरक्षित रखने का स्वप्न साकार हो गया है। आचार्य श्री पुष्पदंत जी एवं आचार्य भूतबली जी द्वारा रचित इस महान ग्रंथ को ताम्रपत्र पर अंकित कर संरक्षित किया गया है। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि श्रंमण संस्कृति के महामहिम पट्टाचार्य आचार्य चर्चा शिरोमणि आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं कुल गोरव मुनि श्रुत संवेगी श्रमणमुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज ससंघ की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन से यह ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुआ है।शुक्रवार, 1 मई 2026 को पूर्णिमा शांतिनाथ भगवान के कलशाभिषेक के पावन अवसर पर यह ताम्रपत्र संस्करण समाजजनों के अवलोकनार्थ प्रस्तुत किया जाएगा। अशोक खासगीवाल, आजाद जी जैन ने समाज से आह्वान करते हुए कहा कि पधारकर ताम्रपत्रों पर लिखेगंए ग्रंथ का अवलोकन कर अपने जीवन को धन्य करें

कार्यक्रम:
दिनांक: शुक्रवार, 1 मई 2026
समय: प्रातः 7:30 बजे से अवलोकन
स्थान: समवशरण मंदिर, कंचनबाग, इंदौर

षट्खण्डागम का ऐतिहासिक महत्व

ताम्रपत्र षट्खण्डागम अवलोकन इंदौर के संदर्भ में यह समझना आवश्यक है कि षट्खण्डागम जैन धर्म का अत्यंत प्राचीन और मूलभूत ग्रंथ है। इसे दिगंबर जैन परंपरा का पहला लिपिबद्ध शास्त्र माना जाता है।यह ग्रंथ केवल धार्मिक नहीं, बल्कि दार्शनिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें कर्म सिद्धांत, आत्मा की शुद्धि और मोक्ष मार्ग का गहन विश्लेषण मिलता है।

ताम्रपत्र पर अंकन क्यों महत्वपूर्ण है

ताम्रपत्र षट्खण्डागम अवलोकन इंदौर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस ग्रंथ को ताम्रपत्र पर अंकित किया गया है।इसके लाभ:

  • हजारों वर्षों तक सुरक्षित रहता है
  • नष्ट होने की संभावना अत्यंत कम
  • ऐतिहासिक प्रमाण के रूप में उपयोगी
  • संस्कृति का स्थायी संरक्षण

यह कार्य वास्तव में एक धार्मिक विरासत संरक्षण अभियान है।

आयोजन का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व

यह आयोजन केवल एक दर्शन कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव है।मुख्य विशेषताएं:

  • पूर्णिमा का पावन अवसर
  • शांतिनाथ भगवान का कलशाभिषेक
  • ताम्रपत्र ग्रंथ का प्रथम सार्वजनिक अवलोकन

ताम्रपत्र षट्खण्डागम अवलोकन इंदौर समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करेगा।

आचार्यों का योगदान

इस ऐतिहासिक कार्य के पीछे महान संतों का मार्गदर्शन रहा:

  • आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज
  • मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज

इनके आशीर्वाद से यह कार्य संभव हो पाया, जो जैन धर्म के लिए गौरव का विषय है।

समाज के लिए संदेश

अशोक खासगीवाल एवं आजाद जी जैन द्वारा समाज से किया गया आह्वान अत्यंत महत्वपूर्ण है:इस आयोजन में भाग लेकर
जिनवाणी का दर्शन कर
अपने जीवन को धन्य बनाएं

भविष्य की पीढ़ियों के लिए धरोहर

ताम्रपत्र षट्खण्डागम अवलोकन इंदौर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर है।यह पहल सुनिश्चित करेगी कि:

  • जैन शास्त्र सुरक्षित रहें
  • ज्ञान की परंपरा जारी रहे
  • धर्म का प्रचार-प्रसार बढ़े

निष्कर्ष

ताम्रपत्र षट्खण्डागम अवलोकन इंदौर न केवल एक आयोजन है, बल्कि यह आस्था, ज्ञान और संस्कृति का संगम है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगी, जिससे जैन धर्म की अमूल्य विरासत सुरक्षित रह सके।

राजेश जैन दद्दू
धर्म समाज प्रचारक, इंदौर
मो. 9425321169
नमोस्तु शासन जयवंत हो

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp