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	<title>Sanjay Pathak &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>Sanjay Pathak &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>कटनी के विधायक संजय पाठक फिर कराएंगे ‘Janadesh’, 51% से कम वोट मिलने पर छोड़ेंगे पद</title>
		<link>https://swarajvani.com/bjp-mla-sanjay-pathak-to-conduct-fresh-janadesh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Apr 2026 10:40:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[BJP]]></category>
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					<description><![CDATA[BJP विधायक संजय पाठक फिर कराएंगे ‘Janadesh’, कहा- 51% से कम वोट मिलने पर छोड़ दूंगा पद कटनी जिले की विजयराघवगढ़ सीट से बीजेपी विधायक संजय पाठक ने एक बार ... <a title="कटनी के विधायक संजय पाठक फिर कराएंगे ‘Janadesh’, 51% से कम वोट मिलने पर छोड़ेंगे पद" class="read-more" href="https://swarajvani.com/bjp-mla-sanjay-pathak-to-conduct-fresh-janadesh/" aria-label="Read more about कटनी के विधायक संजय पाठक फिर कराएंगे ‘Janadesh’, 51% से कम वोट मिलने पर छोड़ेंगे पद">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>BJP विधायक संजय पाठक फिर कराएंगे ‘Janadesh’, कहा- 51% से कम वोट मिलने पर छोड़ दूंगा पद</strong></h1>
<p data-start="189" data-end="505">कटनी जिले की विजयराघवगढ़ सीट से बीजेपी विधायक संजय पाठक ने एक बार फिर जनता के बीच अपने पद की पुष्टि कराने का ऐलान किया है। रविवार रात कैमोर नगर परिषद के कार्यक्रम में विधायक पाठक ने कहा कि वे घर-घर जाकर लोगों से पूछेंगे कि क्या उन्हें विधायक बने रहना चाहिए। उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।</p>
<p data-start="507" data-end="837">संजय पाठक की यह पहल उनकी जवाबदेही और जनता के प्रति निष्ठा को दर्शाती है। मध्यप्रदेश में बीजेपी सरकार और पाठक की विधायकी को करीब ढाई साल पूरे हो चुके हैं। इस दौरान उन्होंने महसूस किया कि जनप्रतिनिधियों को समय-समय पर अपने कार्यों का मूल्यांकन कराना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे वास्तव में जनता की सेवा में सक्षम हैं।</p>
<h2 data-section-id="eeciua" data-start="844" data-end="882"><strong>ढाई साल के कार्यकाल का मूल्यांकन</strong></h2>
<p data-start="884" data-end="1260">संजय पाठक ने कहा कि दो साल से अधिक समय हो गया है, और अब यह जरूरी है कि जनता यह तय करे कि आगे भी उन्हें विधायक बने रहना चाहिए या नहीं। उन्होंने कहा कि मई-जून में वे अपना एक विशेष Janadesh अभियान चलाएंगे, जिसमें वह अपने कार्यकाल के हर पहलू को जनता के सामने रखेंगे। इस प्रक्रिया में जनता से पूछा जाएगा कि उनकी सेवाओं और प्रयासों को कितने अंक दिए जाते हैं और वे कितने संतुष्ट हैं।</p>
<p data-start="1262" data-end="1508">इस जनादेश के जरिए पाठक यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनकी लोकप्रियता और सेवा का मूल्यांकन निष्पक्ष तरीके से किया जाए। वे मानते हैं कि केवल सत्ता में बने रहना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनता के विश्वास और समर्थन को बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।</p>
<h3 data-section-id="1awvrv4" data-start="1515" data-end="1551"><strong>घर-घर जाकर पूछेंगे जनता की राय</strong></h3>
<p data-start="1553" data-end="1813">संजय पाठक ने इस जनादेश की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा, “मैं घर-घर जाकर लोगों से सीधे बात करूंगा। यह नहीं सिर्फ मेरे लिए, बल्कि पूरे लोकतंत्र के लिए भी जरूरी है कि जनता अपने प्रतिनिधियों की योग्यता और उनकी सेवाओं का मूल्यांकन कर सके।”</p>
<p data-start="1815" data-end="2012">उन्होंने यह भी कहा कि इस जनादेश में जनता के मत ही निर्णायक होंगे। यदि उन्हें 51% से कम समर्थन मिला, तो वे तुरंत विधायक पद छोड़ देंगे। इस कदम को राजनीतिक साहस और जवाबदेही का उदाहरण माना जा रहा है।</p>
<h3 data-section-id="tzs0if" data-start="2019" data-end="2055"><strong>51% से कम वोट मिलने पर इस्तीफा</strong></h3>
<p data-start="2057" data-end="2316">संजय पाठक ने साफ शब्दों में कहा कि अगर जनादेश में उन्हें जनता से 51% से कम वोट मिले, तो वे पद से इस्तीफा देंगे। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों का मुख्य उद्देश्य जनता की सेवा करना है और यदि जनता उन्हें पर्याप्त समर्थन नहीं देती, तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए।</p>
<p data-start="2318" data-end="2530">यह कदम भारतीय राजनीति में एक नई मिसाल पेश करता है, क्योंकि अक्सर नेताओं की जवाबदेही केवल चुनाव तक ही सीमित रहती है। संजय पाठक इस जनादेश के जरिए लगातार सेवा और नेतृत्व की क्षमता को जनता के सामने परखना चाहते हैं।</p>
<h3 data-section-id="1yfl7zj" data-start="2537" data-end="2570"><strong>2023 में भी कराया था Janadesh</strong></h3>
<p data-start="2572" data-end="2889">संजय पाठक ने याद दिलाया कि 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले भी उन्होंने जनादेश करवाया था। उस समय लोगों ने आश्चर्य जताया था और सवाल उठाए थे कि यह क्या कर रहे हैं। पाठक ने बताया कि उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वे चुनाव लड़ने के योग्य हैं या नहीं और जनता वास्तव में उन्हें अपना प्रतिनिधि बनाना चाहती है या नहीं।</p>
<p data-start="2891" data-end="3138">2023 के जनादेश में उन्हें 1,40,000 वोट मिले थे, जो उनके लिए एक सकारात्मक संकेत था। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया न केवल उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि वे अपने पद को सत्ता के लिए नहीं, बल्कि सेवा के लिए लेते हैं।</p>
<h3 data-section-id="14qrk8s" data-start="3145" data-end="3180"><strong>सेवा की योग्यता जनता तय करेगी</strong></h3>
<p data-start="3182" data-end="3466">संजय पाठक ने आगे कहा, “अब जब हमारे ढाई साल के कार्यकाल का मूल्यांकन करने का समय आया है, तो मैं जनता से पूछूंगा कि मेरी सेवाओं को वे कितने अंक देते हैं। यदि 51% से कम समर्थन मिला, तो मैं तुरंत पद छोड़ दूंगा। यदि जनता का समर्थन इससे अधिक है, तो मैं अगले पांच साल तक सेवा करता रहूंगा।”</p>
<p data-start="3468" data-end="3658">उन्होंने यह भी कहा कि जनता के बीच जाकर उनकी गलतियों और कमियों को सुनना उनके लिए महत्वपूर्ण है। इससे उन्हें न केवल सुधार का अवसर मिलेगा, बल्कि जनता के साथ सीधे संवाद करने का मौका भी मिलेगा।</p>
<h3 data-section-id="124p7om" data-start="3665" data-end="3702"><strong>विजयराघवगढ़ में राजनीतिक संदर्भ</strong></h3>
<p data-start="3704" data-end="4023">विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र कटनी जिले का एक महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र है। यहाँ की जनता पारंपरिक रूप से स्थानीय नेताओं की सेवा और उनके विकास कार्यों पर ध्यान देती है। संजय पाठक ने अपने कार्यकाल में विभिन्न सामाजिक और विकासात्मक योजनाओं को लागू किया है, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के सुधार शामिल हैं।</p>
<p data-start="4025" data-end="4207">उनका यह जनादेश अभियान न केवल उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता को परखने के लिए है, बल्कि यह क्षेत्र की जनता को यह संदेश भी देता है कि उनके प्रतिनिधि उनकी राय और संतुष्टि को महत्व देते हैं।</p>
<h3 data-section-id="vjaj1y" data-start="4214" data-end="4251"><strong>जनता के साथ सीधे संवाद का महत्व</strong></h3>
<p data-start="4253" data-end="4529">संजय पाठक की पहल यह दिखाती है कि नेता और जनता के बीच सीधे संवाद कितना महत्वपूर्ण है। अक्सर लोकतांत्रिक व्यवस्था में नेताओं और जनता के बीच दूरी बन जाती है। पाठक इस अभियान के माध्यम से यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि जनता की आवाज़ सीधे उनकी नीतियों और कार्यों में परिलक्षित हो।</p>
<p data-start="4531" data-end="4720">घर-घर जाकर राय लेने का यह तरीका पारंपरिक जनसंपर्क और चुनावी प्रचार से कहीं अधिक प्रभावशाली है। यह न केवल उनके नेतृत्व की जवाबदेही को मजबूत करता है, बल्कि जनता के बीच विश्वास भी बढ़ाता है।</p>
<h3 data-section-id="sisdxw" data-start="4727" data-end="4741"><strong>निष्कर्ष</strong></h3>
<p data-start="4743" data-end="4979">संजय पाठक का यह निर्णय यह दर्शाता है कि वे अपने पद को केवल सत्ता का माध्यम नहीं मानते, बल्कि जनता की सेवा और उनके विश्वास को सर्वोपरि मानते हैं। घर-घर जाकर जनादेश लेने की इस प्रक्रिया से उनके नेतृत्व और जवाबदेही की भावना साफ झलकती है।</p>
<p data-start="4981" data-end="5222">इस कदम को राजनीतिक विश्लेषकों ने भी सकारात्मक माना है। उनका कहना है कि ऐसे कदम भारतीय राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देते हैं। विजयराघवगढ़ की जनता के लिए यह अवसर है कि वे अपने प्रतिनिधि की सेवा और निष्ठा का मूल्यांकन कर सकें।</p>
<p data-start="5224" data-end="5469">संजय पाठक की यह पहल भारतीय लोकतंत्र में जनता और नेता के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी बनने जा रही है। यदि अन्य नेता भी इस तरह की पारदर्शी और जवाबदेह प्रक्रिया अपनाएं, तो यह पूरे राजनीतिक वातावरण को और अधिक लोकतांत्रिक और जनता-केंद्रित बना सकता है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>BJP विधायक संजय पाठक पर नया संकट, जज को फोन करने के मामले में कार्रवाई की मांग</title>
		<link>https://swarajvani.com/bjp-mla-sanjay-pathak-faces-fresh-controversy/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Mar 2026 08:05:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[BJP]]></category>
		<category><![CDATA[BJP MLA Controversy]]></category>
		<category><![CDATA[High Court Justice Vishal Mishra]]></category>
		<category><![CDATA[India Politics 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Judiciary Transparency]]></category>
		<category><![CDATA[Katni Illegal Mining]]></category>
		<category><![CDATA[Sanjay Pathak]]></category>
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					<description><![CDATA[संजय पाठक पर आरोप और याचिका कटनी जिले के BJP  विधायक संजय पाठक (Sanjay Pathak) इस समय एक गंभीर विवाद में फंसे हैं। उनकी मुश्किलें उस समय बढ़ गईं, जब ... <a title="BJP विधायक संजय पाठक पर नया संकट, जज को फोन करने के मामले में कार्रवाई की मांग" class="read-more" href="https://swarajvani.com/bjp-mla-sanjay-pathak-faces-fresh-controversy/" aria-label="Read more about BJP विधायक संजय पाठक पर नया संकट, जज को फोन करने के मामले में कार्रवाई की मांग">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>संजय पाठक पर आरोप और याचिका</strong></h1>
<p>कटनी जिले के BJP  विधायक <strong>संजय पाठक (Sanjay Pathak)</strong> इस समय एक गंभीर विवाद में फंसे हैं। उनकी मुश्किलें उस समय बढ़ गईं, जब यह सामने आया कि उन्होंने <strong>हाईकोर्ट के जज को फोन किया था</strong>। यह घटना अवैध उत्खनन से जुड़े मामलों के दौरान हुई, जिनमें पाठक परिवार की खदानों से संबंधित विवाद था।</p>
<p>कटनी निवासी <strong>आशुतोष दीक्षित (Ashutosh Dixit)</strong> ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें विधायक संजय पाठक के खिलाफ <strong>उचित कार्रवाई</strong> की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि जज से फोन पर संपर्क करने का प्रयास <strong>न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश</strong> माना जा सकता है।</p>
<h2><strong>जज ने सुनवाई से किया था इनकार</strong></h2>
<p>घटना की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट के जज <strong>विशाल मिश्रा (Justice Vishal Mishra)</strong> ने 1 सितंबर 2025 को इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। जज ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि विधायक ने उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश की थी।</p>
<p>जज विशाल मिश्रा ने मामले की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया और प्रकरण को <strong>हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा (Chief Justice Sanjeev Sachdeva)</strong> के समक्ष प्रशासनिक स्तर पर भेजा।</p>
<h3><strong>याचिकाकर्ता का पक्ष</strong></h3>
<p>आशुतोष दीक्षित की याचिका में कहा गया है कि उन्होंने इस पूरे प्रकरण को पहले ही <strong>संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत</strong> के रूप में दर्ज कराया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसलिए उन्होंने हाईकोर्ट में <strong>विधायक के खिलाफ कानूनी कदम उठाने</strong> की मांग की।</p>
<p>याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता <strong>अरविंद श्रीवास्तव और पुनीत श्रोती</strong> सुनवाई के दौरान उपस्थित रहे।</p>
<h3><strong>जज की निष्पक्षता और न्यायपालिका की पारदर्शिता</strong></h3>
<p>संजय पाठक द्वारा फोन करने की कोशिश के खुलासे के बाद जज विशाल मिश्रा ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। यह कदम <strong>न्यायपालिका की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने</strong> की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायिक अधिकारियों से <strong>अनधिकृत संपर्क</strong> करने का प्रयास केवल व्यक्तिगत स्तर का मामला नहीं है, बल्कि यह <strong>न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता</strong> और न्याय के प्रति जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकता है।</p>
<h3><strong>मामले की आगे की सुनवाई</strong></h3>
<p>चीफ जस्टिस <strong>संज़ीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ</strong> ने याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई की। अगली सुनवाई अब <strong>26 मार्च 2026</strong> को निर्धारित की गई है।</p>
<p>इस सुनवाई में यह तय होगा कि विधायक संजय पाठक के खिलाफ <strong>किस प्रकार की कार्रवाई की जाएगी</strong>। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर <strong>राजनीतिक और न्यायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण</strong> है।</p>
<h3><strong>राजनीतिक और कानूनी प्रभाव</strong></h3>
<p>इस प्रकरण से कई <strong>राजनीतिक और कानूनी निहितार्थ</strong> उभर कर सामने आए हैं:</p>
<ol>
<li>विधायक संजय पाठक की <strong>राजनीतिक छवि</strong> प्रभावित हो सकती है।</li>
<li>अवैध उत्खनन मामले में उनके खिलाफ <strong>न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप</strong> जुड़ गया है।</li>
<li>यह मामला अन्य राजनीतिक हस्तियों और जनता के बीच <strong>नैतिक और कानूनी उदाहरण</strong> बन सकता है।</li>
</ol>
<p>विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर याचिकाकर्ता की दलीलें मान ली जाती हैं, तो विधायक पर <strong>सख्त कानूनी कार्रवाई</strong> की जा सकती है।</p>
<h3><strong>अवैध उत्खनन और खनिज उद्योग</strong></h3>
<p>संजय पाठक परिवार से जुड़ी खदानों और अवैध उत्खनन की घटनाएं पहले भी मीडिया और न्यायपालिका के ध्यान में आ चुकी हैं। खनिज उद्योग में नियमों का पालन न करने और <strong>अनधिकृत उत्खनन</strong> जैसी घटनाओं ने क्षेत्र में चिंता पैदा की है।</p>
<p>यदि विधायक को इस मामले में दोषी पाया जाता है, तो यह न केवल उनके राजनीतिक करियर के लिए, बल्कि <strong>राज्य के खनिज उद्योग की पारदर्शिता</strong> के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत होगा।</p>
<h3><strong>न्यायपालिका की स्वतंत्रता और लोकतंत्र</strong></h3>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला <strong>भारत में न्यायपालिका की स्वतंत्रता</strong> और लोकतंत्र के लिए भी एक <strong>सशक्त संदेश</strong> है। किसी भी राजनीतिक व्यक्ति को न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।</p>
<p>जज विशाल मिश्रा द्वारा स्वयं को मामले से अलग करना और इसे प्रशासनिक स्तर पर चीफ जस्टिस के पास भेजना यह दिखाता है कि <strong>न्यायपालिका के भीतर पारदर्शिता और निष्पक्षता</strong> सर्वोपरि है।</p>
<h3><strong>निष्कर्ष</strong></h3>
<p>भाजपा विधायक संजय पाठक का मामला कई कारणों से महत्वपूर्ण है।</p>
<ul>
<li>यह <strong>राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से संवेदनशील</strong> मामला है।</li>
<li>न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल खड़ा होने की स्थिति में कदम उठाना आवश्यक है।</li>
<li>अगली सुनवाई <strong>26 मार्च 2026</strong> को निर्धारित है, जिसमें तय होगा कि विधायक के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी।</li>
</ul>
<p>यह मामला यह भी दर्शाता है कि भारत में <strong>कानून के सामने सभी समान हैं</strong>, चाहे वह किसी भी राजनीतिक पद पर क्यों न हों।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>दिग्विजय सिंह ने संजय पाठक पर लगाए गंभीर आरोप, कहा ‘सामंती’ और ‘ऐयाश’</title>
		<link>https://swarajvani.com/madhya-pradesh-politics/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Dec 2025 09:38:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[BJP]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Digvijay Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Madhya Pradesh Politics]]></category>
		<category><![CDATA[Political allegations]]></category>
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		<category><![CDATA[Sanjay Pathak]]></category>
		<category><![CDATA[Vijayraghavgarh]]></category>
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					<description><![CDATA[भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कटनी जिले की विजयराघवगढ़ ... <a title="दिग्विजय सिंह ने संजय पाठक पर लगाए गंभीर आरोप, कहा ‘सामंती’ और ‘ऐयाश’" class="read-more" href="https://swarajvani.com/madhya-pradesh-politics/" aria-label="Read more about दिग्विजय सिंह ने संजय पाठक पर लगाए गंभीर आरोप, कहा ‘सामंती’ और ‘ऐयाश’">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="167" data-end="406"><strong data-start="167" data-end="177">भोपाल:</strong> मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री <strong data-start="295" data-end="312">दिग्विजय सिंह</strong> ने कटनी जिले की विजयराघवगढ़ सीट से बीजेपी विधायक <strong data-start="362" data-end="375">संजय पाठक</strong> के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।</p>
<h4 data-start="408" data-end="448"><strong>‘सामंती’ और ‘ऐयाश’ कहकर लगाए आरोप</strong></h4>
<p data-start="449" data-end="772">दिग्विजय सिंह ने मीडिया से बातचीत और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट के जरिए संजय पाठक पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पाठक अपने क्षेत्र में कानून और संविधान को मानने से इंकार करते हैं और उन्होंने उनकी शिकायत <strong data-start="664" data-end="725">मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी और प्रवर्तन निदेशालय (ED)</strong> तक की है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।</p>
<h4 data-start="774" data-end="828"><strong>जमीन कब्जाने और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप</strong></h4>
<p data-start="829" data-end="1075">पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयराघवगढ़ के राजपरिवार की जमीन पर कब्जा करने के लिए संजय पाठक ने धमकाया। उनके दबाव के चलते परिवार के एक सदस्य को आत्महत्या करनी पड़ी। दिग्विजय ने आरोप लगाया कि पाठक अवैध रेत खनन और जमीनों पर कब्जे में भी शामिल हैं।</p>
<blockquote data-start="1077" data-end="1206">
<p data-start="1079" data-end="1206"><em><strong>“संजय पाठक के लिए न कोई कानून है, न कोई संविधान। वह खुद को कानून से ऊपर समझते हैं।” — दिग्विजय सिंह, राज्यसभा सांसद, कांग्रेस</strong></em></p>
<p data-start="1079" data-end="1206"><img fetchpriority="high" decoding="async" class=" wp-image-294966 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/12/Untitled-design-2025-12-06T013712.758-300x169.jpg" alt="Untitled design 2025 12 06T013712.758" width="540" height="304" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/12/Untitled-design-2025-12-06T013712.758-300x169.jpg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/12/Untitled-design-2025-12-06T013712.758-1024x576.jpg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/12/Untitled-design-2025-12-06T013712.758-768x432.jpg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/12/Untitled-design-2025-12-06T013712.758.jpg 1280w" sizes="(max-width: 540px) 100vw, 540px" /></p>
</blockquote>
<h4 data-start="1208" data-end="1243"><strong>242 करोड़ की संपत्ति पर सवाल</strong></h4>
<p data-start="1244" data-end="1427">दिग्विजय सिंह ने संजय पाठक की संपत्ति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पाठक ने अपने चुनावी हलफनामे में 242 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी और ED को इसकी गहन जांच करनी चाहिए।</p>
<h4 data-start="1429" data-end="1454"><strong>राजनीतिक पृष्ठभूमि</strong></h4>
<p data-start="1455" data-end="1684">संजय पाठक कभी कांग्रेस में थे और दिग्विजय सिंह की सरकार में मंत्री भी रहे। बाद में उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया। दिग्विजय ने कहा कि उन्होंने ही पाठक को राजनीति में आगे बढ़ाया था, लेकिन वे अब उनके दिखाए रास्ते से भटक गए हैं।</p>
<h4 data-start="1686" data-end="1709"><strong>बीजेपी का पलटवार</strong></h4>
<p data-start="1710" data-end="1971">बीजेपी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। प्रदेश बीजेपी के मीडिया प्रभारी <strong data-start="1776" data-end="1792">आशीष अग्रवाल</strong> ने कहा कि दिग्विजय सिंह हमेशा अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं और भ्रम फैलाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दिग्विजय केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए निराधार आरोप लगाते हैं।</p>
<p data-start="1973" data-end="2108">इस आरोप-प्रत्यारोप से प्रदेश का सियासी पारा बढ़ गया है और आने वाले दिनों में दोनों नेताओं के बीच टकराव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।</p>
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