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	<title>Patient Safety &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>Indore MY अस्पताल: गंदगी और फफूंदी से बढ़ा हॉस्पिटल जनित संक्रमण का खतरा</title>
		<link>https://swarajvani.com/indore-my-hospital-patients-at-risk-of-infections/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 08:30:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Indore News]]></category>
		<category><![CDATA[Antibiotic Resistance]]></category>
		<category><![CDATA[Hospital Hygiene]]></category>
		<category><![CDATA[Indore]]></category>
		<category><![CDATA[Infection Risk]]></category>
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					<description><![CDATA[Indore का MY अस्पताल: इलाज के साथ मरीजों को संक्रमण का खतरा Indore का सबसे बड़ा एमवाय अस्पताल अब मरीजों को केवल इलाज नहीं दे रहा, बल्कि उन्हें संक्रमण का ... <a title="Indore MY अस्पताल: गंदगी और फफूंदी से बढ़ा हॉस्पिटल जनित संक्रमण का खतरा" class="read-more" href="https://swarajvani.com/indore-my-hospital-patients-at-risk-of-infections/" aria-label="Read more about Indore MY अस्पताल: गंदगी और फफूंदी से बढ़ा हॉस्पिटल जनित संक्रमण का खतरा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>Indore का MY अस्पताल: इलाज के साथ मरीजों को संक्रमण का खतरा</strong></h1>
<p>Indore का सबसे बड़ा <strong>एमवाय अस्पताल</strong> अब मरीजों को केवल इलाज नहीं दे रहा, बल्कि उन्हें <strong>संक्रमण का गंभीर खतरा</strong> भी पैदा कर रहा है। अस्पताल के विभिन्न वार्डों में मरीज जहां उपचार ले रहे हैं, वहीं <strong>दीवारों और उपकरणों पर रिसाव और फफूंदी</strong> नजर आ रही है। खासकर वे दीवारें जिन पर <strong>मल्टीपारा मॉनिटर, ऑक्सीजन लाइन और अन्य मेडिकल उपकरण</strong> लगे हैं, वहां शौचालयों का पानी रिस रहा है और फंगस भी जम गया है। यह स्थिति मरीजों के लिए <strong>हॉस्पिटल जनित संक्रमण</strong> का खतरा बढ़ा रही है।</p>
<h2><strong>वार्डों की स्थिति और गंभीर समस्याएं</strong></h2>
<p>MY के <strong>मेडिसिन और सर्जरी वार्ड</strong> में दीवारों पर टॉयलेट के पानी का रिसाव और फफूंदी साफ दिखाई दे रही है। न्यूरो सर्जरी वार्ड नंबर तीन में तो सीलन इतनी ज्यादा है कि दीवारों का प्लास्टर उखड़ रहा है। हड्डी रोग वार्ड और डिजिटल एक्स-रे कक्ष में भी यही हाल है।</p>
<p>अस्पताल में <strong>मेडिकल वेस्ट (संक्रमित कचरा) के लिए उचित व्यवस्था नहीं</strong> है। अधिकांश वार्डों में केवल काली प्लास्टिक बैग में कचरा डाला जा रहा है। सिरिंज, संक्रमित कपड़ा और सामान्य कचरा एक साथ रखे जाने से संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। हड्डी रोग विभाग में कार्डबोर्ड बक्से में इस्तेमाल हुई सलाइन की बोतलें और संक्रमित कपड़े रखे जाते हैं, वहीं पास में पार्टिशन पर्दे भी रखे हैं।</p>
<p>इस प्रकार इस्तेमाल होने वाले पर्दे और उपकरण <strong>मरीजों के लिए संक्रमण का माध्यम</strong> बन सकते हैं।</p>
<h3><strong>साफ-सफाई और रखरखाव में कमी</strong></h3>
<ul>
<li>वार्डों के गद्दे फटे हुए हैं और लंबे समय से बदले नहीं गए।</li>
<li>मरीजों के लोहे के बेड गंदे हैं और रंग-रोगन नहीं हुआ।</li>
<li>बेड के नीचे दवा के लिए रखे गए बाक्स साफ नहीं हैं।</li>
<li>अस्पताल परिसर के पिछले हिस्से में मलबा और अनुपयोगी गद्दे फैले हुए हैं।</li>
<li>डॉक्टर्स की पार्किंग के पास संक्रमित ग्लव्स खुले में रखे गए हैं।</li>
</ul>
<p>मरीजों के परिजन बताते हैं कि <strong>चादर, तकिया और कंबल</strong> नहीं मिल रहे। कई लोग अपने घर से चादर और कंबल लेकर आते हैं।</p>
<h4><strong>विशेषज्ञों की चिंता</strong></h4>
<p><strong>डॉ. संजय दीक्षित</strong>, पूर्व डीन एमजीएम मेडिकल कॉलेज, कहते हैं कि अस्पताल में स्वच्छता न होने के कारण मरीज में <strong>एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट संक्रमण</strong> फैलने का खतरा रहता है। यदि किसी मरीज में पहले से दवा के प्रति प्रतिरोध है, तो दूषित वातावरण से यह प्रतिरोध और बढ़ सकता है। इसका सीधा असर मरीज के <strong>उपचार की गति और सुधार</strong> पर पड़ता है।</p>
<h5><strong>प्रशासन की प्रतिक्रिया</strong></h5>
<p><strong>डॉ. अशोक यादव</strong>, अधीक्षक एमवाय अस्पताल, ने बताया कि अस्पताल में <strong>40 से अधिक टॉयलेट्स से लीकेज</strong> की समस्याएं हैं। उन्होंने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को सुधार के लिए बार-बार कहा, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वार्ड के पुराने पलंग का रंगरोगन जल्द करवाया जाएगा।</p>
<h6><strong>संक्रमण के कारण और प्रभाव</strong></h6>
<p>सरकारी अस्पतालों में <strong>स्वच्छता की कमी</strong> से संक्रमण एक मरीज से दूसरे में तेजी से फैल सकता है। यदि किसी मरीज में पहले से <strong>एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट बैक्टीरिया</strong> मौजूद हैं, तो दूषित वातावरण में यह और मजबूत हो सकते हैं। इससे मरीजों में <strong>उपचार में देरी और जटिलताएं</strong> बढ़ जाती हैं।</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि स्वच्छता और संक्रमित कचरे का उचित प्रबंधन न होने पर अस्पताल में <strong>सुपरबग जैसी खतरनाक स्थिति</strong> भी पैदा हो सकती है।</p>
<pre><strong>प्रमुख खामियां संक्षेप में</strong></pre>
<ol>
<li>दीवारों पर <strong>सीलन और फफूंदी</strong>।</li>
<li>मेडिकल उपकरण के पास <strong>रिसाव और गंदगी</strong>।</li>
<li>मेडिकल वेस्ट के लिए <strong>उचित बिन का अभाव</strong>।</li>
<li>बेड, गद्दे और वार्ड की सफाई में कमी।</li>
<li>संक्रमित उपकरण और पर्दों का <strong>गलत उपयोग</strong>।</li>
<li>अस्पताल परिसर में <strong>मलबा और अनुपयोगी सामान</strong> फैला।</li>
<li>मरीजों को <strong>चादर, तकिया और कंबल</strong> नहीं मिल रहे।</li>
</ol>
<h3><strong>निष्कर्ष</strong></h3>
<p>Indore का MY अस्पताल, शहर का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य संस्थान होने के बावजूद, <strong>संक्रमण फैलाने का केंद्र बनता जा रहा है</strong>। मरीज केवल इलाज नहीं, बल्कि <strong>संक्रमण और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट बीमारियों</strong> के खतरे का सामना कर रहे हैं।</p>
<p>स्वच्छता और रखरखाव में सुधार न होने पर अस्पताल में संक्रमण की आशंका और बढ़ेगी। विशेषज्ञ और प्रशासन दोनों मानते हैं कि <strong>संक्रमण को नियंत्रित करना और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना</strong> अभी सबसे बड़ी चुनौती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सावधान! Gwalior में 12वीं पास ने किया एलोपैथिक इलाज, स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई कर क्लीनिक सील किए</title>
		<link>https://swarajvani.com/alert-12th-pass-treating-patients-in-gwalior/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 07:26:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Gwalior]]></category>
		<category><![CDATA[12th Pass]]></category>
		<category><![CDATA[Fake Doctors]]></category>
		<category><![CDATA[Health Department Action]]></category>
		<category><![CDATA[Illegal Clinics]]></category>
		<category><![CDATA[Medical Fraud]]></category>
		<category><![CDATA[Patient Safety]]></category>
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					<description><![CDATA[Gwalior: मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में स्वास्थ्य विभाग ने अवैध रूप से संचालित हो रहे फर्जी क्लीनिकों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। जिले के मोतीझील और रायरू इलाकों ... <a title="सावधान! Gwalior में 12वीं पास ने किया एलोपैथिक इलाज, स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई कर क्लीनिक सील किए" class="read-more" href="https://swarajvani.com/alert-12th-pass-treating-patients-in-gwalior/" aria-label="Read more about सावधान! Gwalior में 12वीं पास ने किया एलोपैथिक इलाज, स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई कर क्लीनिक सील किए">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Gwalior:</strong><br />
मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में स्वास्थ्य विभाग ने अवैध रूप से संचालित हो रहे फर्जी क्लीनिकों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। जिले के मोतीझील और रायरू इलाकों में अचानक पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ऐसे कई क्लीनिकों का भंडाफोड़ किया, जहां बिना किसी वैध पंजीकरण और योग्य चिकित्सक के मरीजों का इलाज हो रहा था। इस कार्रवाई से क्लीनिक संचालकों में हड़कंप मच गया और कुछ तो मौके से भागने की कोशिश भी करने लगे।</p>
<p>जांच के दौरान यह सामने आया कि इन क्लीनिकों में काम कर रहे कई लोग मेडिकल शिक्षा या प्रशिक्षण में पात्र नहीं थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कुछ क्लीनिक संचालक केवल 12वीं पास थे, फिर भी एलोपैथिक दवाओं के माध्यम से मरीजों का इलाज कर रहे थे। ये दवाएं गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती थीं।</p>
<h1><strong>12वीं पास लोगों द्वारा मरीजों का इलाज – गंभीर धोखाधड़ी</strong></h1>
<p>रायरू इलाके में बंगाली क्लीनिक संचालक प्रदीप राय, जो सिर्फ 12वीं पास हैं, एलोपैथिक दवाओं के माध्यम से मरीजों का इलाज कर रहे थे। इसके अलावा मोतीझील और पुरानी छावनी क्षेत्र में कई एएनएम और जीएनएम कर्मी भी गैरकानूनी रूप से एलोपैथिक उपचार कर रहे थे। यह पूरी तरह से नियमों और कानून के खिलाफ था, क्योंकि एलोपैथिक दवा देने के लिए संबंधित चिकित्सा पद्धति में प्रमाणित प्रशिक्षण और योग्यताएँ आवश्यक हैं।</p>
<p>स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर यह सुनिश्चित किया कि ऐसे क्लीनिकों के संचालकों के खिलाफ तुरंत दंडात्मक कार्रवाई की जाए। विभाग ने बताया कि मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करना प्राथमिकता है, और इसके लिए किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे।</p>
<h2><strong>क्लीनिकों की जांच और सीलिंग</strong></h2>
<p>जांच में यह भी पता चला कि इन क्लीनिकों के पास न तो सीएमएचओ कार्यालय का वैध पंजीकरण था और न ही उनके पास चिकित्सक की मान्यता या योग्यता का प्रमाणपत्र। ऐसे हालात में मरीजों को इलाज दिलाना गंभीर अपराध है। इसी वजह से विभाग ने अब तक पांच अवैध क्लीनिकों को सील कर दिया है और संचालकों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।</p>
<p>स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इन क्लीनिकों में मरीजों को दी जाने वाली दवाइयाँ खतरनाक हो सकती थीं। यदि समय रहते कार्रवाई न होती, तो गंभीर स्वास्थ्य हादसों का खतरा बन सकता था। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी हाल में गैरकानूनी मेडिकल प्रैक्टिस को बख्शा नहीं जाएगा।</p>
<h3><strong>स्वास्थ्य विभाग का सख्त संदेश</strong></h3>
<p>स्वास्थ्य विभाग ने ग्वालियर जिले के सभी नागरिकों के लिए स्पष्ट संदेश जारी किया है कि कोई भी व्यक्ति बिना वैध पंजीकरण और बिना किसी चिकित्सा पद्धति में योग्यताएँ प्राप्त किए चिकित्सा प्रैक्टिस करेगा, तो उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ऐसे औचक निरीक्षण लगातार किए जाएंगे ताकि किसी भी तरह की चिकित्सा धोखाधड़ी पर रोक लगाई जा सके।</p>
<p>विभाग के अनुसार, यह कार्रवाई न केवल अवैध क्लीनिकों के खिलाफ है, बल्कि यह नागरिकों को जागरूक करने और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम आवश्यक था।</p>
<h4><strong>Gwalior में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौती</strong></h4>
<p>Gwalior में पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां बिना योग्यताओं के लोग चिकित्सा सेवाएं दे रहे थे। इस कारण नागरिकों में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति भरोसा कम हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, बिना प्रशिक्षण के दवाइयाँ देना गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार मरीजों के लिए यह विशेष रूप से खतरनाक है।</p>
<p>स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि सभी अवैध क्लीनिक संचालकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ मरीजों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए जाएंगे। विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि लोग केवल वैध और प्रमाणित क्लीनिकों में ही इलाज करवाएँ।</p>
<h5><strong>नागरिकों के लिए चेतावनी</strong></h5>
<p>स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी ऐसे क्लीनिक में इलाज न करवाएँ, जहां डॉक्टर की योग्यता प्रमाणित न हो और क्लीनिक का पंजीकरण वैध न हो। किसी भी शंका की स्थिति में विभाग की हेल्पलाइन या स्थानीय स्वास्थ्य कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।</p>
<h6><strong>भविष्य में रोकथाम</strong></h6>
<p>स्वास्थ्य विभाग ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए जिले में नियमित और औचक निरीक्षण किए जाएंगे। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी नागरिक सुरक्षित, योग्य और प्रमाणित चिकित्सा सेवाएँ प्राप्त कर सकें।</p>
<p>इस कार्रवाई के बाद, ग्वालियर में नागरिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कदम चिकित्सा क्षेत्र में गंभीर धोखाधड़ी को रोकने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।</p>
<p><strong>निष्कर्ष</strong><br />
Gwalior में स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अवैध मेडिकल प्रैक्टिस को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 12वीं पास व्यक्तियों द्वारा इलाज करने जैसी घटनाएँ गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करती हैं। विभाग ने न केवल क्लीनिकों को सील किया है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की भी घोषणा की है।</p>
<p>यह कदम ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा। नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभाग का यह अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी तरह की अवैध चिकित्सा गतिविधियों पर नकेल कसी जाएगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
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