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	<title>Maa Shailputri &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>Maa Shailputri &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>मंदिरों से घरों तक गूंजे माता के जयकारे, पड़ाना में जगह-जगह हुई घट स्थापना, चल समारोह के साथ पहुंची मां दुर्गा की प्रतिमा</title>
		<link>https://swarajvani.com/chants-of-goddess-echo-temples-to-homes-in-padana/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 Oct 2026 11:50:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Sarangpur]]></category>
		<category><![CDATA[Ghatasthapana]]></category>
		<category><![CDATA[Maa Ashapuri Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Maa Shailputri]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Padana News]]></category>
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					<description><![CDATA[मंदिरों से घरों तक गूंजे माता के जयकारे, पड़ाना में जगह-जगह हुई घट स्थापना, चल समारोह के साथ पहुंची मां दुर्गा की प्रतिमा नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की ... <a title="मंदिरों से घरों तक गूंजे माता के जयकारे, पड़ाना में जगह-जगह हुई घट स्थापना, चल समारोह के साथ पहुंची मां दुर्गा की प्रतिमा" class="read-more" href="https://swarajvani.com/chants-of-goddess-echo-temples-to-homes-in-padana/" aria-label="Read more about मंदिरों से घरों तक गूंजे माता के जयकारे, पड़ाना में जगह-जगह हुई घट स्थापना, चल समारोह के साथ पहुंची मां दुर्गा की प्रतिमा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2 dir="ltr"><strong>मंदिरों से घरों तक गूंजे माता के जयकारे, पड़ाना में जगह-जगह हुई घट स्थापना, चल समारोह के साथ पहुंची मां दुर्गा की प्रतिमा</strong></h2>
<p dir="ltr"><strong>नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा, मंदिरों में अखंड ज्योत प्रज्वलित, गांधी चौक पर महाआरती</strong></p>
<p dir="ltr"><strong>पड़ाना।</strong> नगर और आसपास के क्षेत्रों में मां दुर्गा की आराधना शुरू हो गई। नवरात्र के पहले दिन मां के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की गई। सुबह से मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही रही और माता के जयकारों से परिसर गूंज उठे। भक्तों ने व्रत रखकर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>गांवों में भी दिखा उत्साह</strong></h3>
<p dir="ltr">पड़ाना सहित मऊ, मगराना, आसारेटा, पंवार, रामपुरिया, करौंदी, गुलावता और सुल्तानिया समेत आसपास के गांवों में नवरात्र को लेकर उत्साह रहा।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>मंदिरों में मंत्रोच्चार के साथ घट स्थापना</strong></h3>
<p dir="ltr">नगर के समीप जंगल में स्थित मां आशापुरी मंदिर में अलसुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। सदर बाजार स्थित अंबे माता मंदिर, नरसिंह मंदिर और माली मोहल्ला स्थित माताजी मंदिर में मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कर घट स्थापना की गई। मंदिरों में अखंड ज्योत भी प्रज्वलित की गई।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>मां को अर्पित की पूजन सामग्री, भजनों से गूंजा मंदिर</strong></h3>
<p dir="ltr">पहले दिन भक्तों ने मां शैलपुत्री को लाल चुनरी, नारियल, पुष्प, फल और श्रृंगार सामग्री अर्पित की। सदर बाजार के अंबे माता मंदिर में महिलाओं ने भजन-गीत गाकर आराधना की और घर-परिवार में सुख-शांति व समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना की। झिरी स्थान आश्रम स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर में सुबह 5 बजे से श्रद्धालुओं ने नवाह्न पाठ प्रारंभ किया।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>चल समारोह के साथ पहुंची मां दुर्गा की प्रतिमा</strong></h3>
<p dir="ltr">शाम को गांधी चौक बस स्टैंड पर मां आशापुरी मंच पर नवरात्र का उल्लास दिखा। आशापुरी मित्र मंडल और ग्रामवासियों के सहयोग से डीजे, ढोल और आतिशबाजी के बीच ट्रैक्टर में विराजित मां दुर्गा की प्रतिमा का चल समारोह निकला। प्रतिमा को मंच पर लाया गया, जहां पंडित गौरव शर्मा ने वैदिक रीति से पूजा-अर्चना कर घट स्थापना कराई। इसके बाद महाआरती हुई और श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>नौ दिन चलेगा भक्ति का सिलसिला</strong></h3>
<p dir="ltr">नवरात्र के शुभारंभ के साथ नगर और आसपास भक्तिमय माहौल है। आगामी नौ दिनों तक मंदिरों और पंडालों में पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन होते रहेंगे।</p>
<p dir="ltr">
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>Shardiya Navratri 2026: कल से नवरात्रि, जानें घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और राहुकाल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 Oct 2026 11:39:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhopal]]></category>
		<category><![CDATA[Bhopal Panchang]]></category>
		<category><![CDATA[Indore Panchang]]></category>
		<category><![CDATA[Kalash Sthapana]]></category>
		<category><![CDATA[Maa Shailputri]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri Dates]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri Ghatasthapana Muhurat]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri Puja]]></category>
		<category><![CDATA[Rahu Kaal 2026]]></category>
		<category><![CDATA[rdiya Navratri 2026]]></category>
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					<description><![CDATA[Shardiya Navratri 2026: कल से नवरात्रि, जानें घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और राहुकाल  भोपाल। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर से होगी। पहले दिन घरों और मंदिरों में ... <a title="Shardiya Navratri 2026: कल से नवरात्रि, जानें घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और राहुकाल" class="read-more" href="https://swarajvani.com/english-heading-shardiya-navratri-2026-begins-on-october-11-check-kalash-sthapana-muhurat-and-rahu/" aria-label="Read more about Shardiya Navratri 2026: कल से नवरात्रि, जानें घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और राहुकाल">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>Shardiya Navratri 2026: कल से नवरात्रि, जानें घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और राहुकाल </strong></h1>
<p><strong>भोपाल।</strong> शारदीय नवरात्रि की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर से होगी। पहले दिन घरों और मंदिरों में मां शैलपुत्री की पूजा के साथ घट स्थापना की जाएगी। इस साल नवरात्रि 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक रहेगी। पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात तक रहेगी।</p>
<p>घट स्थापना को नवरात्रि के आरंभ का प्रमुख अनुष्ठान माना जाता है। श्रद्धालु पूजा स्थल पर कलश स्थापित कर नौ दिनों तक देवी के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करते हैं। मुहूर्त शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार बदल सकता है, इसलिए भोपाल और इंदौर के समय में कुछ मिनटों का अंतर है।</p>
<h2><strong>भोपाल और इंदौर में घट स्थापना का समय</strong></h2>
<p>भोपाल के लिए घट स्थापना का शुभ समय सुबह करीब <strong>6:15 बजे से 10:10 बजे तक</strong> बताया गया है। इसके बाद वैकल्पिक अभिजीत मुहूर्त <strong>सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक</strong> रहेगा। इंदौर में घट स्थापना का समय <strong>सुबह 6:22 बजे से 10:16 बजे तक</strong> है, जबकि अभिजीत मुहूर्त <strong>सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक</strong> रहेगा। ये समय संबंधित शहरों के स्थानीय पंचांग पर आधारित हैं।</p>
<p>पंचांग के अनुसार, घट स्थापना के लिए दिन का पहला एक-तिहाई भाग प्राथमिक माना जाता है। यदि इस अवधि में पूजा संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त को विकल्प के रूप में देखा जा सकता है। कलश स्थापना का समय तय करते समय प्रतिपदा तिथि और अपने शहर के पंचांग को ध्यान में रखें।</p>
<h2><strong>दोपहर या शाम में कलश रख सकते हैं?</strong></h2>
<p>अभिजीत मुहूर्त दोपहर के आसपास आता है और इसे सुबह का समय निकल जाने पर विकल्प माना जाता है। हालांकि, देर दोपहर या शाम को घट स्थापना का सामान्य मुहूर्त नहीं बताया गया है। इसलिए पूजा की तैयारी सुबह ही कर लेना बेहतर होगा। यदि किसी कारण से समय बदलना पड़े, तो स्थानीय मंदिर के पुजारी या पंचांग से मुहूर्त की पुष्टि कर लें।</p>
<h2><strong>कब रहेगा राहुकाल?</strong></h2>
<p>भोपाल के पंचांग के अनुसार, 11 अक्टूबर को राहुकाल <strong>शाम 4:30 बजे से 5:58 बजे तक</strong> रहेगा। इंदौर सहित आसपास के शहरों में सूर्योदय-सूर्यास्त के अंतर के कारण समय में थोड़ा बदलाव हो सकता है। परंपरागत मान्यता के अनुसार, राहुकाल में शुभ कार्य शुरू करने से बचा जाता है। घट स्थापना सुबह या अभिजीत मुहूर्त में करने की योजना बनाएं और अपने शहर का समय जरूर जांचें। <a href="https://www.astrovidhi.com/hindu-panchang/2026-october-11.html?p_place=bhopal&amp;utm_source=chatgpt.com" rel="nofollow noopener" target="_blank">Bhopal</a></p>
<h2><strong>पहले दिन होगी मां शैलपुत्री की पूजा</strong></h2>
<p>नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की जाती है। श्रद्धालु घर में पूजा स्थल को साफ कर कलश स्थापना करते हैं और नौ दिनों तक पूजा, आरती तथा व्रत का संकल्प लेते हैं। कई परिवार अखंड दीपक भी जलाते हैं। पूजा की परंपरा परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है।</p>
<p>नवरात्रि के दौरान भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं। मंदिरों में विशेष सजावट और पूजा की तैयारियां की जाती हैं, जबकि घरों में भी लोग घट स्थापना के लिए पूजन सामग्री पहले से जुटाते हैं। मुहूर्त के समय में स्थान के अनुसार अंतर होने के कारण भोपाल का समय इंदौर या किसी अन्य शहर में ज्यों का त्यों लागू न मानें।</p>
<p>&nbsp;</p>
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