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	<title>Ladli Behna Scheme &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>Ladli Behna Scheme &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>Ladli Behna Yojana: तीन साल बाद सरकार करेगी योजना के असर का बड़ा आकलन, 1.25 करोड़ महिलाओं के जीवन में कितना आया बदलाव?</title>
		<link>https://swarajvani.com/ladli-behna-yojana-mp-government-to-assess-three-year-impact-on-1-25-crore-women/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Aug 2026 12:10:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhopal news]]></category>
		<category><![CDATA[Ladli Behna Scheme]]></category>
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		<category><![CDATA[MP Government Schemes]]></category>
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					<description><![CDATA[Ladli Behna Yojana: तीन साल बाद सरकार करेगी योजना के असर का बड़ा आकलन, 1.25 करोड़ महिलाओं के जीवन में कितना आया बदलाव? आर्थिक मदद से आत्मनिर्भरता तक होगा मूल्यांकन, ... <a title="Ladli Behna Yojana: तीन साल बाद सरकार करेगी योजना के असर का बड़ा आकलन, 1.25 करोड़ महिलाओं के जीवन में कितना आया बदलाव?" class="read-more" href="https://swarajvani.com/ladli-behna-yojana-mp-government-to-assess-three-year-impact-on-1-25-crore-women/" aria-label="Read more about Ladli Behna Yojana: तीन साल बाद सरकार करेगी योजना के असर का बड़ा आकलन, 1.25 करोड़ महिलाओं के जीवन में कितना आया बदलाव?">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>Ladli Behna Yojana: तीन साल बाद सरकार करेगी योजना के असर का बड़ा आकलन, 1.25 करोड़ महिलाओं के जीवन में कितना आया बदलाव?</strong></h1>
<h6><strong>आर्थिक मदद से आत्मनिर्भरता तक होगा मूल्यांकन, परिवार में निर्णय लेने की भूमिका और खर्च-बचत की आदतों का भी होगा अध्ययन</strong></h6>
<p><strong>भोपाल।</strong> मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी <strong>मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना</strong> को शुरू हुए करीब तीन वर्ष पूरे हो चुके हैं। अब सरकार इस योजना से महिलाओं को मिल रही आर्थिक सहायता के वास्तविक प्रभाव का विस्तृत अध्ययन कराने जा रही है। सरकार यह जानना चाहती है कि हर महीने सीधे बैंक खाते में पहुंचने वाली राशि से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में कितना बदलाव आया है और क्या इस सहायता ने उन्हें परिवार के स्तर पर अधिक आत्मनिर्भर और निर्णय लेने में सक्षम बनाया है।</p>
<p>योजना के प्रभाव का यह अध्ययन <strong>अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान (एआईजीजीपीए)</strong> के माध्यम से कराया जाएगा। अध्ययन में योजना से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति के साथ-साथ उनके खर्च, बचत, घरेलू निर्णयों में भागीदारी और जीवन स्तर में आए बदलाव का आकलन किया जाएगा।</p>
<h2><strong>1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं तक पहुंची योजना</strong></h2>
<p>मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की शुरुआत <strong>मार्च 2023</strong> में की गई थी। योजना का उद्देश्य प्रदेश की पात्र महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। शुरुआत के बाद से योजना का दायरा लगातार बढ़ता गया और वर्तमान में करीब <strong>1.25 करोड़ महिलाएं</strong> इससे जुड़ी हुई हैं।</p>
<p>सरकार की ओर से लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में प्रतिमाह सहायता राशि सीधे ट्रांसफर की जाती है। अब तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद सरकार योजना के केवल आंकड़ों को नहीं, बल्कि इसके वास्तविक सामाजिक और आर्थिक परिणामों को भी समझना चाहती है।</p>
<h2><strong>1,000 रुपये से शुरू हुई राशि अब 1,500 रुपये प्रतिमाह</strong></h2>
<p>लाड़ली बहना योजना के तहत शुरुआत में महिलाओं को <strong>1,000 रुपये प्रतिमाह</strong> की आर्थिक सहायता दी जाती थी। बाद में सरकार ने इस राशि में वृद्धि की। सितंबर 2023 से सहायता राशि बढ़ाकर <strong>1,250 रुपये प्रतिमाह</strong> कर दी गई।</p>
<p>इसके बाद नवंबर 2025 से पात्र लाभार्थी महिलाओं को <strong>1,500 रुपये प्रतिमाह</strong> दिए जाने लगे। इस तरह योजना के माध्यम से महिलाओं को मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता में समय के साथ वृद्धि हुई है।</p>
<p>अब सरकार यह भी समझना चाहती है कि बढ़ी हुई राशि का महिलाओं और उनके परिवारों पर किस तरह का असर पड़ा है और उन्होंने इस रकम का इस्तेमाल किन जरूरतों को पूरा करने में किया।</p>
<h2><strong>पैसा मिलने के बाद महिलाओं के खर्च में क्या बदला?</strong></h2>
<p>प्रस्तावित अध्ययन में महिलाओं के खर्च करने के तरीके को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया जाएगा। इसमें यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि योजना से प्राप्त राशि का इस्तेमाल महिलाएं मुख्य रूप से किन कार्यों के लिए कर रही हैं।</p>
<p>घरेलू जरूरतों, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन, दवाइयों, कपड़ों और अन्य आवश्यक खर्चों के अलावा यह भी देखा जा सकता है कि कितनी महिलाएं इस राशि का कुछ हिस्सा बचत के रूप में रख रही हैं।</p>
<p>यदि नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं की बचत की क्षमता बढ़ी है, तो इसे योजना के महत्वपूर्ण प्रभावों में शामिल किया जा सकता है।</p>
<h2><strong>आर्थिक आत्मनिर्भरता पर रहेगा खास फोकस</strong></h2>
<p>लाड़ली बहना योजना का प्रभाव केवल परिवार के खर्च तक सीमित है या इससे महिलाओं में आर्थिक आत्मनिर्भरता भी बढ़ी है, यह अध्ययन का अहम हिस्सा रहेगा।</p>
<p>अध्ययन के माध्यम से यह समझने की कोशिश की जाएगी कि क्या आर्थिक सहायता मिलने के बाद महिलाएं अपने व्यक्तिगत खर्चों के लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर कम निर्भर हुई हैं। इसके अलावा स्वरोजगार, छोटे कारोबार, घरेलू व्यवसाय या आय बढ़ाने वाली गतिविधियों से जुड़ने में भी कोई बदलाव आया है या नहीं, इसे भी देखा जा सकता है।</p>
<p>सरकार के लिए यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण होगी क्योंकि इससे भविष्य में महिला-केंद्रित योजनाओं की रूपरेखा और अधिक प्रभावी तरीके से तैयार करने में मदद मिल सकती है।</p>
<h2><strong>परिवार के फैसलों में महिलाओं की भूमिका का भी होगा आकलन</strong></h2>
<p>योजना के सामाजिक प्रभाव को समझने के लिए महिलाओं की <strong>घरेलू निर्णय लेने की भूमिका</strong> का भी अध्ययन किया जाएगा। इसमें बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य संबंधी फैसले, घरेलू खरीदारी, बचत, खर्च और परिवार की अन्य जरूरतों से जुड़े निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी को देखा जाएगा।</p>
<p>सरकार यह जानना चाहती है कि नियमित रूप से स्वयं के बैंक खाते में आर्थिक सहायता मिलने से महिलाओं में निर्णय लेने का आत्मविश्वास बढ़ा है या नहीं।</p>
<p>यदि आर्थिक सहायता के साथ परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में महिलाओं की भूमिका मजबूत हुई है, तो इसे योजना के व्यापक सामाजिक प्रभाव के तौर पर देखा जा सकता है।</p>
<h2><strong>जीवन स्तर में बदलाव भी अध्ययन का हिस्सा</strong></h2>
<p>अध्ययन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी होगा कि लाड़ली बहना योजना से लाभ लेने वाली महिलाओं के जीवन स्तर में कितना बदलाव आया है। इसमें परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने की क्षमता, स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च तथा आर्थिक सुरक्षा जैसे पहलुओं को शामिल किया जा सकता है।</p>
<p>तीन साल की अवधि में लगातार मिलने वाली आर्थिक सहायता ने परिवारों को छोटी आर्थिक जरूरतों से निपटने में कितनी मदद की, इसका भी मूल्यांकन किया जा सकता है।</p>
<h2><strong>पात्र महिलाओं को लाभ क्यों नहीं मिल रहा, इसकी भी होगी पड़ताल</strong></h2>
<p>अध्ययन में केवल उन महिलाओं पर ध्यान नहीं दिया जाएगा जिन्हें योजना का लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही ऐसी महिलाओं की स्थिति को भी समझने का प्रयास किया जा सकता है जो पात्र होने के बावजूद योजना से जुड़ नहीं पाई हैं।</p>
<p>दस्तावेजों की कमी, बैंक खाते से संबंधित समस्या, पंजीयन प्रक्रिया, तकनीकी परेशानी या अन्य कारणों से यदि कोई पात्र महिला योजना से बाहर रह गई है, तो उसकी पहचान भविष्य की नीति के लिए उपयोगी हो सकती है।</p>
<p>इससे सरकार को योजना की पहुंच में मौजूद कमियों को समझने और पात्र महिलाओं तक लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।</p>
<h2><strong>सरकार को मिलेगी योजना की जमीनी तस्वीर</strong></h2>
<p>तीन वर्ष पूरे होने के बाद कराया जा रहा यह प्रभाव अध्ययन सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे केवल यह पता नहीं चलेगा कि कितनी महिलाओं को कितनी राशि दी गई, बल्कि यह भी समझने में मदद मिलेगी कि उस राशि ने महिलाओं के जीवन में वास्तविक स्तर पर क्या बदलाव किया।</p>
<p>आर्थिक आत्मनिर्भरता, खर्च और बचत, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, घरेलू निर्णयों में भागीदारी और जीवन स्तर जैसे पहलुओं से मिलने वाले निष्कर्षों के आधार पर सरकार भविष्य में योजना में बदलाव या नई महिला कल्याण नीतियों की दिशा तय कर सकती है।</p>
<p>फिलहाल लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश में महिला केंद्रित प्रमुख योजनाओं में शामिल है और करीब <strong>1.25 करोड़ महिलाओं</strong> तक इसकी पहुंच हो चुकी है। अब इसके तीन वर्ष के प्रभाव का अध्ययन योजना की सफलता को जमीनी स्तर पर समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
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			</item>
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		<title>Madhya Pradesh : लाडली बहना योजना की तर्ज पर विधवा, विकलांग और वृद्ध महिलाओं की पेंशन 600 से बढ़ाकर 1500 करने की मांग उठी</title>
		<link>https://swarajvani.com/demand-rises-in-madhya-pradesh-to-increase/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 May 2026 13:01:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[MADHAY PRADESH NEWS]]></category>
		<category><![CDATA[Disabled Pension]]></category>
		<category><![CDATA[Elderly Pension]]></category>
		<category><![CDATA[Ladli Behna Scheme]]></category>
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					<description><![CDATA[ Madhya Pradesh में पेंशन बढ़ोतरी की मांग तेज: विधवा, विकलांग और वृद्ध महिलाओं को 1500 रुपए मासिक देने का प्रस्ताव चर्चा में  Madhya Pradesh में एक बार फिर सामाजिक सुरक्षा ... <a title="Madhya Pradesh : लाडली बहना योजना की तर्ज पर विधवा, विकलांग और वृद्ध महिलाओं की पेंशन 600 से बढ़ाकर 1500 करने की मांग उठी" class="read-more" href="https://swarajvani.com/demand-rises-in-madhya-pradesh-to-increase/" aria-label="Read more about Madhya Pradesh : लाडली बहना योजना की तर्ज पर विधवा, विकलांग और वृद्ध महिलाओं की पेंशन 600 से बढ़ाकर 1500 करने की मांग उठी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong style="font-family: inherit; font-size: 42px; font-style: inherit;"> Madhya Pradesh में पेंशन बढ़ोतरी की मांग तेज: विधवा, विकलांग और वृद्ध महिलाओं को 1500 रुपए मासिक देने का प्रस्ताव चर्चा में</strong></p>
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<p data-start="124" data-end="504"> Madhya Pradesh में एक बार फिर सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लेकर बहस तेज हो गई है। लाडली बहना योजना के तहत महिलाओं को दी जा रही आर्थिक सहायता के बाद अब राज्य में विधवा, विकलांग और वृद्ध महिलाओं की मासिक पेंशन बढ़ाने की मांग उठने लगी है। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष और भाजपा नेता अनिल दसेड़ा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इन वर्गों की पेंशन 600 रुपए से बढ़ाकर 1500 रुपए करने की अपील की है।</p>
<p data-start="506" data-end="728">यह मांग ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण योजनाओं को विस्तार देने पर जोर दे रही है। दसेड़ा ने इस मुद्दे को केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक सम्मान और समानता से जुड़ा विषय बताया है।</p>
<h2 data-section-id="5hd2re" data-start="735" data-end="780"><strong>लाडली बहना योजना का हवाला देकर रखी गई मांग</strong></h2>
<p data-start="782" data-end="1035">अनिल दसेड़ा ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लाडली बहना योजना के तहत प्रदेश की एक करोड़ से अधिक महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। इसी मॉडल की तर्ज पर समाज के अन्य कमजोर वर्गों को भी समान लाभ मिलना चाहिए।</p>
<p data-start="1037" data-end="1244">उन्होंने कहा कि यदि सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1500 रुपए तक की सहायता दी जा सकती है, तो विधवा, विकलांग और वृद्ध महिलाओं को केवल 600 रुपए देना उचित नहीं है। यह राशि वर्तमान महंगाई के समय में पर्याप्त नहीं है।</p>
<p data-start="1246" data-end="1429">उनका कहना है कि सरकार ने महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, लेकिन अब जरूरत इस बात की है कि समाज के सबसे कमजोर वर्गों को भी समान रूप से मजबूत किया जाए।</p>
<h2 data-section-id="iadc4k" data-start="1436" data-end="1475"><strong>600 रुपए की पेंशन को बताया अत्यंत कम</strong></h2>
<p data-start="1477" data-end="1696">दसेड़ा ने मौजूदा पेंशन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि 600 रुपए की मासिक पेंशन से किसी भी जरूरतमंद महिला का जीवन यापन संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि आज के समय में यह राशि दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में भी नाकाफी है।</p>
<p data-start="1698" data-end="1853">उन्होंने इसे “ऊंट के मुंह में जीरे” के समान बताया और कहा कि महंगाई के इस दौर में दवाइयों, राशन और अन्य जरूरी खर्चों को देखते हुए यह राशि बेहद अपर्याप्त है।</p>
<p data-start="1855" data-end="1994">विधवा, वृद्ध और विकलांग महिलाओं की स्थिति को देखते हुए यह आवश्यक है कि उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जाए ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।</p>
<h2 data-section-id="1wyqrqf" data-start="2001" data-end="2031"><strong>अन्य राज्यों से की गई तुलना</strong></h2>
<p data-start="2033" data-end="2275">अपने पत्र और बयान में अनिल दसेड़ा ने मध्यप्रदेश की पेंशन व्यवस्था की तुलना पड़ोसी राज्यों से भी की। उन्होंने कहा कि गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों में विधवा, वृद्ध और विकलांग महिलाओं को 1000 रुपए से अधिक मासिक पेंशन दी जा रही है।</p>
<p data-start="2277" data-end="2416">ऐसे में मध्यप्रदेश में केवल 600 रुपए की राशि देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य को सामाजिक सुरक्षा के मामले में भी अग्रणी बनना चाहिए।</p>
<p data-start="2418" data-end="2553">उनके अनुसार, यदि अन्य राज्य अधिक सहायता दे सकते हैं तो मध्यप्रदेश भी अपनी नीतियों में बदलाव कर जरूरतमंद वर्ग को राहत प्रदान कर सकता है।</p>
<h2 data-section-id="pe64fd" data-start="2560" data-end="2603"><strong>मुख्यमंत्री और जनप्रतिनिधियों से की अपील</strong></h2>
<p data-start="2605" data-end="2773">अनिल दसेड़ा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक मांग नहीं बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ा विषय है।</p>
<p data-start="2775" data-end="2930">उन्होंने प्रदेश के सभी 29 सांसदों और 165 विधायकों से भी आग्रह किया कि वे इस प्रस्ताव को समर्थन दें और सरकार को इस दिशा में निर्णय लेने के लिए प्रेरित करें।</p>
<p data-start="2932" data-end="3075">दसेड़ा ने कहा कि “सबका साथ, सबका विकास और सबका सम्मान” का सिद्धांत तभी सार्थक होगा जब समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक इसका लाभ पहुंचे।</p>
<h2 data-section-id="ntevbk" data-start="3082" data-end="3118"><strong>सामाजिक सुरक्षा और सम्मान का सवाल</strong></h2>
<p data-start="3120" data-end="3361">इस मांग को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इसे सामाजिक सम्मान से भी जोड़ा जा रहा है। समाजशास्त्रियों का मानना है कि विधवा, वृद्ध और विकलांग महिलाओं को केवल सहायता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सम्मान की आवश्यकता होती है।</p>
<p data-start="3363" data-end="3500">अनिल दसेड़ा ने भी कहा कि इन वर्गों को मजबूत बनाना सरकार की जिम्मेदारी है ताकि वे किसी पर निर्भर न रहें और आत्मसम्मान के साथ जीवन जी सकें।</p>
<h2 data-section-id="g7iu2n" data-start="3507" data-end="3545"><strong>बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की चुनौती</strong></h2>
<p data-start="3547" data-end="3701">वर्तमान समय में बढ़ती महंगाई ने आम जनता के जीवन को प्रभावित किया है। खाद्य पदार्थों, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है।</p>
<p data-start="3703" data-end="3876">ऐसे में 600 रुपए की पेंशन को अपर्याप्त बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह राशि केवल प्रतीकात्मक सहायता रह गई है, जिससे वास्तविक जीवन में बहुत अधिक राहत नहीं मिलती।</p>
<h2 data-section-id="1vqw4k8" data-start="3883" data-end="3909"><strong>राजनीतिक और सामाजिक बहस</strong></h2>
<p data-start="3911" data-end="4109">इस मुद्दे के सामने आने के बाद राज्य में राजनीतिक और सामाजिक बहस भी शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे सरकार की सकारात्मक योजनाओं की निरंतरता मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे नीति में सुधार की आवश्यकता बता रहे हैं।</p>
<p data-start="4111" data-end="4237">लाडली बहना योजना की सफलता के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या राज्य सरकार अन्य वर्गों के लिए भी इसी तरह की व्यापक योजना लाएगी।</p>
<h2 data-section-id="fcgqqj" data-start="4244" data-end="4283"><strong>महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में कदम</strong></h2>
<p data-start="4285" data-end="4454">मध्यप्रदेश सरकार पहले से ही महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चला रही है। लाडली बहना योजना इसका प्रमुख उदाहरण है, जिसने लाखों महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की है।</p>
<p data-start="4456" data-end="4597">अब यह मांग उठ रही है कि इसी तरह की पहल विधवा, वृद्ध और विकलांग महिलाओं के लिए भी की जाए, ताकि समाज के हर वर्ग को समान अवसर और सहायता मिल सके।</p>
<h3 data-section-id="1j8d2pj" data-start="4604" data-end="4615"><strong>निष्कर्ष</strong></h3>
<p data-start="4617" data-end="4768">मध्यप्रदेश में पेंशन बढ़ोतरी की यह मांग अब एक बड़े सामाजिक मुद्दे का रूप लेती जा रही है। अनिल दसेड़ा की अपील ने इस विषय को फिर से चर्चा में ला दिया है।</p>
<p data-start="4770" data-end="4981">एक तरफ सरकार की कल्याणकारी योजनाएं महिलाओं को आर्थिक मजबूती दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर कमजोर वर्ग की पेंशन में वृद्धि की मांग यह संकेत देती है कि अभी भी सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में सुधार की गुंजाइश बनी हुई है।</p>
<p data-start="4983" data-end="5138" data-is-last-node="" data-is-only-node="">अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और क्या विधवा, विकलांग और वृद्ध महिलाओं को भी 1500 रुपए मासिक पेंशन का लाभ मिल पाता है या नहीं।</p>
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