Ladli Behna Yojana: तीन साल बाद सरकार करेगी योजना के असर का बड़ा आकलन, 1.25 करोड़ महिलाओं के जीवन में कितना आया बदलाव?
आर्थिक मदद से आत्मनिर्भरता तक होगा मूल्यांकन, परिवार में निर्णय लेने की भूमिका और खर्च-बचत की आदतों का भी होगा अध्ययन
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को शुरू हुए करीब तीन वर्ष पूरे हो चुके हैं। अब सरकार इस योजना से महिलाओं को मिल रही आर्थिक सहायता के वास्तविक प्रभाव का विस्तृत अध्ययन कराने जा रही है। सरकार यह जानना चाहती है कि हर महीने सीधे बैंक खाते में पहुंचने वाली राशि से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में कितना बदलाव आया है और क्या इस सहायता ने उन्हें परिवार के स्तर पर अधिक आत्मनिर्भर और निर्णय लेने में सक्षम बनाया है।
योजना के प्रभाव का यह अध्ययन अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान (एआईजीजीपीए) के माध्यम से कराया जाएगा। अध्ययन में योजना से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति के साथ-साथ उनके खर्च, बचत, घरेलू निर्णयों में भागीदारी और जीवन स्तर में आए बदलाव का आकलन किया जाएगा।
1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं तक पहुंची योजना
मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की शुरुआत मार्च 2023 में की गई थी। योजना का उद्देश्य प्रदेश की पात्र महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। शुरुआत के बाद से योजना का दायरा लगातार बढ़ता गया और वर्तमान में करीब 1.25 करोड़ महिलाएं इससे जुड़ी हुई हैं।
सरकार की ओर से लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में प्रतिमाह सहायता राशि सीधे ट्रांसफर की जाती है। अब तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद सरकार योजना के केवल आंकड़ों को नहीं, बल्कि इसके वास्तविक सामाजिक और आर्थिक परिणामों को भी समझना चाहती है।
1,000 रुपये से शुरू हुई राशि अब 1,500 रुपये प्रतिमाह
लाड़ली बहना योजना के तहत शुरुआत में महिलाओं को 1,000 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जाती थी। बाद में सरकार ने इस राशि में वृद्धि की। सितंबर 2023 से सहायता राशि बढ़ाकर 1,250 रुपये प्रतिमाह कर दी गई।
इसके बाद नवंबर 2025 से पात्र लाभार्थी महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह दिए जाने लगे। इस तरह योजना के माध्यम से महिलाओं को मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता में समय के साथ वृद्धि हुई है।
अब सरकार यह भी समझना चाहती है कि बढ़ी हुई राशि का महिलाओं और उनके परिवारों पर किस तरह का असर पड़ा है और उन्होंने इस रकम का इस्तेमाल किन जरूरतों को पूरा करने में किया।
पैसा मिलने के बाद महिलाओं के खर्च में क्या बदला?
प्रस्तावित अध्ययन में महिलाओं के खर्च करने के तरीके को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया जाएगा। इसमें यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि योजना से प्राप्त राशि का इस्तेमाल महिलाएं मुख्य रूप से किन कार्यों के लिए कर रही हैं।
घरेलू जरूरतों, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन, दवाइयों, कपड़ों और अन्य आवश्यक खर्चों के अलावा यह भी देखा जा सकता है कि कितनी महिलाएं इस राशि का कुछ हिस्सा बचत के रूप में रख रही हैं।
यदि नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं की बचत की क्षमता बढ़ी है, तो इसे योजना के महत्वपूर्ण प्रभावों में शामिल किया जा सकता है।
आर्थिक आत्मनिर्भरता पर रहेगा खास फोकस
लाड़ली बहना योजना का प्रभाव केवल परिवार के खर्च तक सीमित है या इससे महिलाओं में आर्थिक आत्मनिर्भरता भी बढ़ी है, यह अध्ययन का अहम हिस्सा रहेगा।
अध्ययन के माध्यम से यह समझने की कोशिश की जाएगी कि क्या आर्थिक सहायता मिलने के बाद महिलाएं अपने व्यक्तिगत खर्चों के लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर कम निर्भर हुई हैं। इसके अलावा स्वरोजगार, छोटे कारोबार, घरेलू व्यवसाय या आय बढ़ाने वाली गतिविधियों से जुड़ने में भी कोई बदलाव आया है या नहीं, इसे भी देखा जा सकता है।
सरकार के लिए यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण होगी क्योंकि इससे भविष्य में महिला-केंद्रित योजनाओं की रूपरेखा और अधिक प्रभावी तरीके से तैयार करने में मदद मिल सकती है।
परिवार के फैसलों में महिलाओं की भूमिका का भी होगा आकलन
योजना के सामाजिक प्रभाव को समझने के लिए महिलाओं की घरेलू निर्णय लेने की भूमिका का भी अध्ययन किया जाएगा। इसमें बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य संबंधी फैसले, घरेलू खरीदारी, बचत, खर्च और परिवार की अन्य जरूरतों से जुड़े निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी को देखा जाएगा।
सरकार यह जानना चाहती है कि नियमित रूप से स्वयं के बैंक खाते में आर्थिक सहायता मिलने से महिलाओं में निर्णय लेने का आत्मविश्वास बढ़ा है या नहीं।
यदि आर्थिक सहायता के साथ परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में महिलाओं की भूमिका मजबूत हुई है, तो इसे योजना के व्यापक सामाजिक प्रभाव के तौर पर देखा जा सकता है।
जीवन स्तर में बदलाव भी अध्ययन का हिस्सा
अध्ययन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी होगा कि लाड़ली बहना योजना से लाभ लेने वाली महिलाओं के जीवन स्तर में कितना बदलाव आया है। इसमें परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने की क्षमता, स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च तथा आर्थिक सुरक्षा जैसे पहलुओं को शामिल किया जा सकता है।
तीन साल की अवधि में लगातार मिलने वाली आर्थिक सहायता ने परिवारों को छोटी आर्थिक जरूरतों से निपटने में कितनी मदद की, इसका भी मूल्यांकन किया जा सकता है।
पात्र महिलाओं को लाभ क्यों नहीं मिल रहा, इसकी भी होगी पड़ताल
अध्ययन में केवल उन महिलाओं पर ध्यान नहीं दिया जाएगा जिन्हें योजना का लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही ऐसी महिलाओं की स्थिति को भी समझने का प्रयास किया जा सकता है जो पात्र होने के बावजूद योजना से जुड़ नहीं पाई हैं।
दस्तावेजों की कमी, बैंक खाते से संबंधित समस्या, पंजीयन प्रक्रिया, तकनीकी परेशानी या अन्य कारणों से यदि कोई पात्र महिला योजना से बाहर रह गई है, तो उसकी पहचान भविष्य की नीति के लिए उपयोगी हो सकती है।
इससे सरकार को योजना की पहुंच में मौजूद कमियों को समझने और पात्र महिलाओं तक लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
सरकार को मिलेगी योजना की जमीनी तस्वीर
तीन वर्ष पूरे होने के बाद कराया जा रहा यह प्रभाव अध्ययन सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे केवल यह पता नहीं चलेगा कि कितनी महिलाओं को कितनी राशि दी गई, बल्कि यह भी समझने में मदद मिलेगी कि उस राशि ने महिलाओं के जीवन में वास्तविक स्तर पर क्या बदलाव किया।
आर्थिक आत्मनिर्भरता, खर्च और बचत, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, घरेलू निर्णयों में भागीदारी और जीवन स्तर जैसे पहलुओं से मिलने वाले निष्कर्षों के आधार पर सरकार भविष्य में योजना में बदलाव या नई महिला कल्याण नीतियों की दिशा तय कर सकती है।
फिलहाल लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश में महिला केंद्रित प्रमुख योजनाओं में शामिल है और करीब 1.25 करोड़ महिलाओं तक इसकी पहुंच हो चुकी है। अब इसके तीन वर्ष के प्रभाव का अध्ययन योजना की सफलता को जमीनी स्तर पर समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
