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	<title>Khaleda Zia &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>Khaleda Zia &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>बांग्लादेश चुनाव में Bangladesh Nationalist Party की ऐतिहासिक जीत, 200 से ज्यादा सीटों पर बढ़त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 05:59:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bangladesh]]></category>
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					<description><![CDATA[Bangladesh की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हाल ही में संपन्न हुए आम चुनाव में प्रमुख विपक्षी दल Bangladesh Nationalist Party (BNP ) ने ऐतिहासिक जीत ... <a title="बांग्लादेश चुनाव में Bangladesh Nationalist Party की ऐतिहासिक जीत, 200 से ज्यादा सीटों पर बढ़त" class="read-more" href="https://swarajvani.com/bangladesh-nationalist-party-secures-victory/" aria-label="Read more about बांग्लादेश चुनाव में Bangladesh Nationalist Party की ऐतिहासिक जीत, 200 से ज्यादा सीटों पर बढ़त">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Bangladesh </span></span>की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हाल ही में संपन्न हुए आम चुनाव में प्रमुख विपक्षी दल <strong>Bangladesh Nationalist Party (BNP )</strong> ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए देश की 299 सीटों वाली राष्ट्रीय संसद <strong>Jatiya Sangsad</strong> में 200 से अधिक सीटों पर बढ़त हासिल कर ली है। इस परिणाम ने बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा को नई दिशा देने के संकेत दिए हैं। चुनाव परिणामों के बाद पार्टी नेतृत्व ने देशवासियों को धन्यवाद और शुभकामनाएं दी हैं, लेकिन साथ ही अपने समर्थकों से संयम बरतने और जश्न न मनाने की अपील भी की है।</p>
<h1><strong>संयम और शिष्टाचार का संदेश</strong></h1>
<p>BNP की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह जीत केवल पार्टी की नहीं, बल्कि पूरे देश की जनता की है, जिन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास जताया है। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की कि वे सड़कों पर विजय जुलूस या आतिशबाजी करने के बजाय शुक्रवार की नमाज में शामिल हों और पूर्व प्रधानमंत्री <strong>Khaleda Zia</strong> को याद करें। पार्टी के अनुसार, यह जीत उनके संघर्ष, बलिदान और नेतृत्व का परिणाम है।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीएनपी का यह कदम परिपक्व लोकतांत्रिक व्यवहार का संकेत है। चुनावी जीत के बाद संयम दिखाना राजनीतिक शिष्टाचार और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करता है। इससे यह संदेश भी जाता है कि पार्टी बदले की राजनीति के बजाय स्थिर और समावेशी शासन की ओर बढ़ना चाहती है।</p>
<h2><strong>तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय</strong></h2>
<p>चुनावी नतीजों के बाद सबसे अधिक चर्चा बीएनपी प्रमुख <strong>Tarique Rahman</strong> को लेकर हो रही है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। लगभग 17 वर्षों के निर्वासन के बाद उनकी वापसी और फिर सत्ता के शीर्ष तक पहुंचना बांग्लादेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।</p>
<p>तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगरा-6 दोनों संसदीय सीटों पर भारी अंतर से जीत दर्ज की है। यह दोहरी जीत उनके बढ़ते जनसमर्थन और संगठन पर मजबूत पकड़ को दर्शाती है। पार्टी के भीतर भी उनके नेतृत्व को लेकर स्पष्ट समर्थन दिखाई दे रहा है। वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि औपचारिक संसदीय प्रक्रिया पूरी होते ही उन्हें संसदीय दल का नेता चुना जाएगा, जिसके बाद वे प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।</p>
<h3><strong>शेख हसीना की प्रतिक्रिया</strong></h3>
<p>चुनाव परिणामों के बाद पूर्व प्रधानमंत्री <strong>Sheikh Hasina</strong> ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चुनाव को अवैध बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। उनका आरोप है कि कई स्थानों पर अनियमितताएं हुई हैं और निष्पक्ष माहौल सुनिश्चित नहीं किया गया। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से अब तक ऐसी किसी व्यापक गड़बड़ी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।</p>
<p>राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही राजनीतिक ध्रुवीकरण और बढ़ सकता है। ऐसे में नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राष्ट्रीय सहमति और स्थिरता बनाए रखना होगी।</p>
<h4><strong>जमात-ए-इस्लामी गठबंधन की स्थिति</strong></h4>
<p>इस चुनाव में <strong>Bangladesh Jamaat-e-Islami</strong> के नेतृत्व वाले गठबंधन को 68 सीटों पर सफलता मिली है। वोटों की गिनती अभी भी कुछ स्थानों पर जारी है। जमात के सहयोगी दलों ने कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।</p>
<p>नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के इलेक्शन स्टीयरिंग कमेटी के चेयरमैन आसिफ महमूद सजीब भुइयां ने आरोप लगाया है कि कुछ सीटों पर परिणामों में हेरफेर की कोशिश की गई। उनका कहना है कि 11 दलों के गठबंधन के उम्मीदवार मैदान में थे और कई जगहों पर मतगणना के दौरान अनियमितताएं देखी गईं।</p>
<p>इसी तरह, बांग्लादेश खिलाफत मजलिस के अमीर ममनुल हक ने ढाका-13 सीट पर बैलेट पेपर की डिजाइन को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि खराब डिजाइन के कारण उनके पक्ष में पड़े हजारों वोट रद्द कर दिए गए। उन्होंने कहा कि जमात ने देर रात इस संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है।</p>
<h5><strong>पाकिस्तान का समर्थन और क्षेत्रीय समीकरण</strong></h5>
<p>जमात-ए-इस्लामी को लेकर यह भी चर्चा है कि उसे पाकिस्तान से वैचारिक और नैतिक समर्थन प्राप्त है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्रीय राजनीति के संदर्भ में इस तरह की चर्चाएं अक्सर सामने आती रही हैं। बांग्लादेश की राजनीति में इस्लामी दलों की भूमिका और उनका बाहरी संबंध हमेशा से बहस का विषय रहा है।</p>
<p>नई सरकार के गठन के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विदेश नीति के मोर्चे पर क्या बदलाव आते हैं और भारत, पाकिस्तान तथा अन्य पड़ोसी देशों के साथ संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।</p>
<h6><strong>नई सरकार के सामने चुनौतियां</strong></h6>
<p>BNP की जीत भले ही ऐतिहासिक हो, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। आर्थिक मोर्चे पर महंगाई, बेरोजगारी और विदेशी निवेश को आकर्षित करना बड़ी प्राथमिकताएं होंगी। इसके अलावा कानून-व्यवस्था, न्यायिक सुधार और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे मुद्दे भी नई सरकार के एजेंडे में शामिल रहेंगे।</p>
<p>तारिक रहमान के नेतृत्व में सरकार को यह साबित करना होगा कि वह केवल राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि शासन की गुणवत्ता में भी सुधार ला सकती है। जनता की अपेक्षाएं काफी ऊंची हैं और चुनावी वादों को पूरा करना एक कठिन परीक्षा होगी।</p>
<pre><strong>लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण क्षण</strong></pre>
<p>यह चुनाव <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Bangladesh </span></span>के लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज किया जाएगा। सत्ता परिवर्तन लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है, बशर्ते यह शांतिपूर्ण और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हो। बीएनपी द्वारा संयम की अपील और समर्थकों को नमाज के माध्यम से आभार व्यक्त करने का संदेश राजनीतिक परिपक्वता का प्रतीक माना जा रहा है।</p>
<p>आने वाले दिनों में संसदीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई सरकार के गठन की औपचारिक घोषणा की जाएगी। पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब ढाका पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि बांग्लादेश की नई राजनीतिक यात्रा किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या यह बदलाव देश को स्थिरता, विकास और समावेशी शासन की ओर ले जा पाता है।</p>
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		<title>India -Bangladesh संबंधों में तनाव के बीच S. Jaishankar करेंगे बांग्लादेश का दौरा</title>
		<link>https://swarajvani.com/s-jaishankars-bangladesh-visit/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 31 Dec 2025 06:18:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bangladesh]]></category>
		<category><![CDATA[BNP]]></category>
		<category><![CDATA[Former Prime Minister]]></category>
		<category><![CDATA[India-Bangladesh Relations]]></category>
		<category><![CDATA[Khaleda Zia]]></category>
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		<category><![CDATA[State Mourning]]></category>
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					<description><![CDATA[India-Bangladesh संबंधों में तनाव के बीच S. Jaishankar करेंगे बांग्लादेश का दौरा भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar बुधवार को बांग्लादेश की यात्रा पर जा रहे हैं। इस दौरे का ... <a title="India -Bangladesh संबंधों में तनाव के बीच S. Jaishankar करेंगे बांग्लादेश का दौरा" class="read-more" href="https://swarajvani.com/s-jaishankars-bangladesh-visit/" aria-label="Read more about India -Bangladesh संबंधों में तनाव के बीच S. Jaishankar करेंगे बांग्लादेश का दौरा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1 data-start="64" data-end="146"><strong data-start="64" data-end="144">India-Bangladesh संबंधों में तनाव के बीच S. Jaishankar करेंगे बांग्लादेश का दौरा</strong></h1>
<p>भारत के विदेश मंत्री<strong> S. Jaishankar</strong> बुधवार को बांग्लादेश की यात्रा पर जा रहे हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य <strong>बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) की अध्यक्ष बेगम खालिदा जिया</strong> के अंतिम संस्कार में शामिल होना है। खालिदा जिया का मंगलवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 80 वर्ष की थीं। उनके निधन की खबर ने पूरे बांग्लादेश में शोक की लहर दौड़ा दी है। देशभर में राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में उनके योगदान को याद किया जा रहा है।</p>
<h3><strong>अंतिम संस्कार और राजकीय शोक</strong></h3>
<p>बेगम खालिदा जिया का अंतिम संस्कार <strong>बुधवार</strong> को किया जाएगा। उन्हें उनके पति और बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति <strong>जियाउर रहमान</strong> की कब्र के पास सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। उनके निधन पर बांग्लादेश सरकार ने तीन दिन का <strong>राजकीय शोक</strong> घोषित किया है। अंतिम संस्कार के दिन पूरे देश में <strong>सार्वजनिक अवकाश</strong> रहेगा।</p>
<p>बेगम खालिदा जिया लंबे समय तक बीएनपी की प्रमुख रही हैं और तीन बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में उन्होंने कई सुधारात्मक और सामाजिक परियोजनाओं को आगे बढ़ाया और देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा दिया। उनके निधन से बांग्लादेश में राजनीतिक और सामाजिक तौर पर गहरा शोक है।</p>
<h3><strong>प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक</strong></h3>
<p>भारत के प्रधानमंत्री <strong>नरेंद्र मोदी</strong> ने बेगम खालिदा जिया के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने उनके योगदान को यादगार बताया और कहा कि उन्होंने <strong>बांग्लादेश के विकास और भारत-बांग्लादेश संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई</strong>। पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि ढाका में पूर्व प्रधानमंत्री से 2015 में हुई अपनी मुलाकात याद है और उनकी सोच एवं विरासत दोनों देशों की साझेदारी को आगे दिशा देती रहेगी।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कठिन समय में भारत बांग्लादेश की जनता के साथ खड़ा है। उन्होंने खालिदा जिया के राजनीतिक करियर और उनके द्वारा निभाई गई सामाजिक और आर्थिक पहलों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से उनके साहस और देश के लिए समर्पण को याद किया।</p>
<h3><strong>अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस का संबोधन</strong></h3>
<p>बेगम खालिदा जिया के निधन के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार <strong>मोहम्मद यूनुस</strong> ने देश को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पूरा देश इस समय गहरे दुख में है। उन्होंने जनता से अपील की कि शोक की इस अवधि में <strong>धैर्य बनाए रखें</strong> और नमाज़-ए-जनाजा सहित सभी धार्मिक और आधिकारिक कार्यक्रमों को <strong>शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में सहयोग करें</strong>।</p>
<p>यूनुस ने कहा कि खालिदा जिया ने देश की राजनीति में महिलाओं की भूमिका को मजबूती दी और उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे इस कठिन समय में एकजुट रहें और उनके निधन का सम्मान करें।</p>
<h4 data-start="64" data-end="146"><strong data-start="64" data-end="144">India</strong><strong>-Bangladesh संबंधों में यह दौरा महत्वपूर्ण</strong></h4>
<p>S. Jaishankar का यह दौरा <strong>भारत-Bangladesh संबंधों</strong> में चल रहे तनाव के बीच विशेष महत्व रखता है। दोनों देशों के बीच कई राजनीतिक और कूटनीतिक मुद्दों पर असहमति रही है। ऐसे समय में भारत के विदेश मंत्री का व्यक्तिगत रूप से खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होना <strong>दोनों देशों के बीच सम्मान और सहयोग का संदेश</strong> माना जा रहा है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने बताया कि जयशंकर के दौरे का उद्देश्य केवल शोक व्यक्त करना ही नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच <strong>संबंधों को स्थिर और मजबूत बनाए रखने का संकेत</strong> भी देना है। इसके अलावा यह कदम दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और राजनीतिक संवाद को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक संकेत है।</p>
<h3><strong>बेगम खालिदा जिया का राजनीतिक और सामाजिक योगदान</strong></h3>
<p>बेगम खालिदा जिया बीएनपी की अध्यक्ष के रूप में लंबे समय तक बांग्लादेश की राजनीति में प्रभावशाली रही हैं। उन्होंने तीन बार प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में उन्होंने <strong>देश की आर्थिक, सामाजिक और शिक्षा परियोजनाओं</strong> को आगे बढ़ाया।</p>
<p>उनके योगदान में प्रमुख रूप से <strong>महिलाओं के सशक्तिकरण</strong>, <strong>शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार</strong> और <strong>देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को मजबूत करना</strong> शामिल रहा। खालिदा जिया का निधन बांग्लादेश के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण क्षति माना जा रहा है।</p>
<h3><strong>अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया</strong></h3>
<p>उनके निधन पर कई देशों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। भारत के अलावा अन्य दक्षिण एशियाई देशों ने भी खालिदा जिया के योगदान को याद किया और उनके परिवार तथा बांग्लादेश की जनता के प्रति संवेदनाएं प्रकट कीं।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि उनके निधन से बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि वे लंबे समय तक विपक्ष की मजबूत आवाज रही हैं। बीएनपी और अन्य राजनीतिक दल उनके विचारों और राजनीतिक दर्शन को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे।</p>
<h3><strong>खालिदा जिया की विरासत</strong></h3>
<p>खालिदा जिया की विरासत केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण रही है। उनके प्रयासों ने महिलाओं की भागीदारी, शिक्षा के विस्तार और देश की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को मजबूत किया। उनके निधन से बांग्लादेश को एक प्रभावशाली नेता खोना पड़ा, जिन्होंने अपने कार्यकाल में देश की नीतियों और सुधारों को दिशा दी।</p>
<p>उनकी सोच और कार्यशैली आज भी युवा नेताओं और छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। बीएनपी और उनके समर्थक उनकी नीतियों और विचारों को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत रहेंगे।</p>
<h3><strong>निष्कर्ष</strong></h3>
<p>Bangladesh की पूर्व प्रधानमंत्री <strong>बेगम खालिदा जिया</strong> का निधन न केवल उनके परिवार और पार्टी के लिए बल्कि पूरे देश के लिए शोक का विषय है। भारत के विदेश मंत्री <strong>एस. जयशंकर</strong> का उनका अंतिम संस्कार में शामिल होना <strong>दोनों देशों के बीच सम्मान और कूटनीतिक संवाद को बनाए रखने का संकेत</strong> है।</p>
<p>राजकीय शोक, सार्वजनिक अवकाश और पूरे देश में शोक की लहर यह दर्शाते हैं कि बेगम खालिदा जिया का राजनीतिक और सामाजिक योगदान हमेशा याद किया जाएगा। उनकी विरासत और योगदान दोनों देशों के संबंधों में एक सकारात्मक संदेश के रूप में जीवित रहेंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>Bangladesh की राजनीति में अपूरणीय क्षति: पूर्व पीएम Khaleda Zia’s का निधन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Dec 2025 07:32:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bangladesh]]></category>
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					<description><![CDATA[Bangladeshकी राजनीति में अपूरणीय क्षति: पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन ढाका/नई दिल्ली: Bangladesh की पहली महिला प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की दिग्गज नेता बेगम Khaleda Zia’s का निधन ... <a title="Bangladesh की राजनीति में अपूरणीय क्षति: पूर्व पीएम Khaleda Zia’s का निधन" class="read-more" href="https://swarajvani.com/bangladesh-mourns-former-pm-khaleda-zias-dies/" aria-label="Read more about Bangladesh की राजनीति में अपूरणीय क्षति: पूर्व पीएम Khaleda Zia’s का निधन">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>Bangladeshकी राजनीति में अपूरणीय क्षति: पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन</strong></h1>
<p><strong>ढाका/नई दिल्ली:</strong> Bangladesh की पहली महिला प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की दिग्गज नेता <strong>बेगम Khaleda Zia’s</strong> का निधन देश और दुनिया के लिए एक बड़ी क्षति है। 80 वर्षीय खालिदा जिया ने मंगलवार सुबह लगभग 6 बजे ढाका के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनकी मौत ने पूरे बांग्लादेश में शोक की लहर दौड़ा दी है और राजनीतिक हलकों में गहरा दुख फैल गया है।</p>
<p>खालिदा जिया पिछले कई सालों से <strong>लिवर सिरोसिस, किडनी फेलियर, हृदय संबंधी बीमारियां, डायबिटीज और गठिया</strong> जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। पिछले 20 दिनों से वे वेंटिलेटर पर थीं और डॉक्टर लगातार उनकी हालत पर नजर बनाए हुए थे। उनके निधन से उनके समर्थक, परिवार और राजनीतिक साथी बेहद दुखी हैं।</p>
<h2><strong>वेंटिलेटर पर रहते हुए भी दाखिल किया चुनावी नामांकन</strong></h2>
<p>Khaleda Zia’s की राजनीतिक प्रतिबद्धता अद्भुत रही। उनके निधन से एक दिन पहले, <strong>29 दिसंबर</strong> को उन्होंने बोगुरा-7 सीट से अपना चुनावी नामांकन दाखिल किया। उस समय उनकी हालत बेहद नाजुक थी, लेकिन पार्टी और समर्थकों ने उनकी राजनीतिक विरासत और लोकप्रियता को देखते हुए यह कदम उठाया।</p>
<p><strong>बोगुरा-7 वही सीट है</strong> जहां उनके पति और BNP के संस्थापक जियाउर रहमान का पैतृक घर है। Khaleda Zia’s ने इसी सीट से तीन बार (1991, 1996 और 2001) चुनाव जीतकर पार्टी और जनता की सेवा की। इस चुनावी कदम ने यह साबित किया कि उनकी राजनीतिक सक्रियता और जनता के प्रति जिम्मेदारी किसी भी स्वास्थ्य चुनौती से कमजोर नहीं हुई।</p>
<h3><strong>संघर्षपूर्ण राजनीतिक जीवन</strong></h3>
<p>Khaleda Zia’s का जन्म 1945 में <strong>अविभाजित भारत के जलपाईगुड़ी (अब पश्चिम बंगाल, भारत)</strong> में हुआ। परिवार में उन्हें प्यार से &#8216;पुतुल&#8217; कहा जाता था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दिनाजपुर में हुई और 1960 में उन्होंने सेना के अधिकारी <strong>जियाउर रहमान</strong> से विवाह किया। जियाउर रहमान बाद में बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने।</p>
<p>1981 में जियाउर रहमान की हत्या के बाद खालिदा जिया ने राजनीति में कदम रखा। उन्होंने पार्टी को संभाला और तानाशाही के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाई। <strong>1991 में वे बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री</strong> बनीं और मुस्लिम दुनिया में महिलाओं के लिए यह ऐतिहासिक उपलब्धि मानी गई।</p>
<p>उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल (1991-1996 और 2001-2006) के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और लोकतंत्र को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया। उनके नेतृत्व में कई सामाजिक और आर्थिक सुधार लागू किए गए।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class=" wp-image-299410 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/12/66b103ec505df-khaleda-zia-055448844-16x9-1-300x169.webp" alt="Bangladesh की राजनीति में अपूरणीय क्षति: पूर्व पीएम Khaleda Zia’s का निधन" width="383" height="216" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/12/66b103ec505df-khaleda-zia-055448844-16x9-1-300x169.webp 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/12/66b103ec505df-khaleda-zia-055448844-16x9-1-768x432.webp 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/12/66b103ec505df-khaleda-zia-055448844-16x9-1.webp 948w" sizes="(max-width: 383px) 100vw, 383px" /></p>
<h4><strong>स्वास्थ्य चुनौतियां और पारिवारिक संघर्ष</strong></h4>
<p>Khaleda Zia’s ने कई वर्षों तक गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना किया। उन्हें <strong>लिवर सिरोसिस, किडनी फेलियर, डायबिटीज, गठिया और सीने में संक्रमण</strong> जैसी कई समस्याएं थीं।</p>
<p>उनके पति <strong>जियाउर रहमान</strong> का 1981 में निधन हो गया था, जबकि छोटे बेटे <strong>अराफात रहमान</strong> 2015 में दुनिया छोड़ गए। बड़े बेटे <strong>तारिक रहमान</strong>, जो लंबे समय से लंदन में निर्वासन में थे, उन्होंने दिसंबर 2025 में ढाका लौटकर अपनी मां के अंतिम समय में उनका साथ दिया।</p>
<p>भले ही भ्रष्टाचार के आरोप और जेल की सजा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, उनकी लोकप्रियता और राजनीतिक प्रभाव कभी कम नहीं हुए। उनका साहस और दृढ़ नेतृत्व उन्हें समर्थकों के बीच आज भी आदर्श बनाता है।</p>
<h5><strong>वैश्विक नेताओं ने दी श्रद्धांजलि</strong></h5>
<p>Khaleda Zia’s   के निधन पर दुनिया भर के नेताओं ने शोक व्यक्त किया:</p>
<ul>
<li><strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (भारत):</strong> मोदी ने उन्हें ऐतिहासिक नेता बताया और 2015 में ढाका की मुलाकात का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि भारत इस दुख की घड़ी में बांग्लादेश के साथ खड़ा है।</li>
<li><strong>मोहम्मद यूनुस (अंतरिम प्रमुख, बांग्लादेश):</strong> उन्होंने कहा कि देश ने लोकतांत्रिक आंदोलन का एक बड़ा प्रतीक खो दिया। जिया सिर्फ नेता नहीं, बल्कि संघर्ष की मार्गदर्शक थीं।</li>
<li><strong>शहबाज शरीफ (प्रधानमंत्री, पाकिस्तान):</strong> उन्होंने खालिदा जिया को पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाली नेता बताया और उनके योगदान की सराहना की।</li>
</ul>
<h6><strong>अंतिम विदाई और राजनीतिक विरासत</strong></h6>
<p>Khaleda Zia’s का जाना बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा शून्य छोड़ गया है। वे दो बार प्रधानमंत्री रहीं और उनके कार्यकाल में शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और लोकतंत्र को विशेष रूप से बढ़ावा मिला।</p>
<p>उनकी लोकप्रियता और उनके समर्थकों की श्रद्धा का प्रतीक यह है कि उनके निधन के बाद बांग्लादेश सरकार ने <strong>राजकीय शोक</strong> की घोषणा की। समर्थक मानते हैं कि भले ही वे शारीरिक रूप से अब नहीं हैं, लेकिन &#8216;पुतुल&#8217; की राजनीतिक सोच और लोकतंत्र के लिए उनका संघर्ष हमेशा जीवित रहेगा।</p>
<p>Khaleda Zia’s की जीवनगाथा बांग्लादेश और दक्षिण एशिया के इतिहास में <strong>प्रेरणादायक उदाहरण</strong> के रूप में हमेशा याद रखी जाएगी। उनका साहस, दृढ़ संकल्प और जनता के प्रति प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक रहेगी।</p>
<p>उनकी राजनीतिक और सामाजिक योगदान की विरासत यह संदेश देती है कि लोकतंत्र और महिला सशक्तिकरण के लिए संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता। उनके जीवन और कार्यों ने बांग्लादेश की राजनीति को न केवल आकार दिया, बल्कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को भी मजबूत किया।</p>
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		<title>17 साल बाद ढाका लौटे BNP नेता तारिक रहमान, ढाका में हाई अलर्ट और राजनीतिक भूचाल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Dec 2025 07:02:58 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Bangladesh Election 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Bangladesh Politics]]></category>
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					<description><![CDATA[17 साल बाद बांग्लादेश लौटे BNP नेता तारिक रहमान, ढाका में हाई अलर्ट, चुनावी राजनीति में भूचाल ढाका। बांग्लादेश की राजनीति एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी हो गई है। बांग्लादेश ... <a title="17 साल बाद ढाका लौटे BNP नेता तारिक रहमान, ढाका में हाई अलर्ट और राजनीतिक भूचाल" class="read-more" href="https://swarajvani.com/bnp-leader-in-bangladesh/" aria-label="Read more about 17 साल बाद ढाका लौटे BNP नेता तारिक रहमान, ढाका में हाई अलर्ट और राजनीतिक भूचाल">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>17 साल बाद बांग्लादेश लौटे BNP नेता तारिक रहमान, ढाका में हाई अलर्ट, चुनावी राजनीति में भूचाल</strong></h1>
<p><strong>ढाका।</strong><br />
बांग्लादेश की राजनीति एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी हो गई है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री <strong>खालिदा जिया</strong> के पुत्र <strong>तारिक रहमान</strong> करीब <strong>17 वर्षों के निर्वासन</strong> के बाद गुरुवार को बांग्लादेश लौट आए। उनकी स्वदेश वापसी को देश में आगामी <strong>फरवरी 2026 के आम चुनावों</strong> की औपचारिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यह घटना न केवल BNP के लिए निर्णायक क्षण है, बल्कि पूरे देश में राजनीतिक हलचल पैदा कर रही है।</p>
<p>तारिक रहमान अपनी <strong>पत्नी डॉ. जुबैदा रहमान और बेटी जाइमा ज़रनाज़ रहमान</strong> के साथ बीमान बांग्लादेश एयरलाइंस की फ्लाइट से ढाका पहुंचे। उनकी फ्लाइट <strong>हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे</strong> पर स्थानीय समयानुसार सुबह <strong>11:55 बजे</strong> उतरी। एयरपोर्ट पर BNP समर्थकों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उनका स्वागत किया। उनके आगमन को देखते हुए राजधानी ढाका समेत पूरे देश में <strong>कड़े सुरक्षा इंतजाम</strong> किए गए हैं।</p>
<h2><strong>‘मातृभूमि की ओर’: भावनात्मक संदेश</strong></h2>
<p>लंदन से रवाना होते समय तारिक रहमान ने <strong>सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर)</strong> पर एक भावनात्मक संदेश पोस्ट किया—<br />
<strong>“मातृभूमि की ओर।”</strong><br />
इस संदेश ने समर्थकों में उत्साह की लहर दौड़ा दी। BNP ने इसे एक राजनीतिक संकेत के रूप में देखा कि पार्टी अब चुनावी अभियान को पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ाने वाली है। पार्टी कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से ढाका, चटगांव और सिलहट जैसे BNP के गढ़ों में सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<h3><strong>एयरपोर्ट से मंच तक: शक्ति प्रदर्शन की तैयारी</strong></h3>
<p>ढाका एयरपोर्ट से तारिक रहमान को <strong>300 फीट रोड पर बनाए गए अस्थायी मंच</strong> तक ले जाया गया, जहां उन्होंने समर्थकों और जनता को संबोधित किया। यह रैली केवल स्वागत समारोह नहीं थी, बल्कि BNP की राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन और समर्थकों को उत्साहित करने का माध्यम भी थी।</p>
<p>अपने संबोधन में उन्होंने लोकतंत्र, निष्पक्ष चुनाव और राजनीतिक अधिकारों की बहाली पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को अब राजनीतिक स्थिरता की नई दिशा में आगे बढ़ना होगा। उनके भाषण ने BNP कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार किया।</p>
<p><img decoding="async" class=" wp-image-298474 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/12/w-412h-232croprect-0x0x1600x900imgid-01kd4wpmqm5gseme8x7kdwk70dimgname-bangladesh-tarik-rahman-return-bnp-politics-election-2026-dhaka-1766469620468-300x169.jpg" alt="w 412h 232croprect 0x0x1600x900imgid 01kd4wpmqm5gseme8x7kdwk70dimgname bangladesh tarik rahman return bnp politics election 2026 dhaka 1766469620468" width="378" height="213" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/12/w-412h-232croprect-0x0x1600x900imgid-01kd4wpmqm5gseme8x7kdwk70dimgname-bangladesh-tarik-rahman-return-bnp-politics-election-2026-dhaka-1766469620468-300x169.jpg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/12/w-412h-232croprect-0x0x1600x900imgid-01kd4wpmqm5gseme8x7kdwk70dimgname-bangladesh-tarik-rahman-return-bnp-politics-election-2026-dhaka-1766469620468.jpg 412w" sizes="(max-width: 378px) 100vw, 378px" /></p>
<h4><strong>मां से मुलाकात और भावनात्मक पल</strong></h4>
<p>रैली के बाद तारिक रहमान <strong>बशुंधरा स्थित एवरकेयर अस्पताल</strong> गए और अपनी बीमार मां और पूर्व प्रधानमंत्री <strong>खालिदा जिया</strong> से मुलाकात की। खालिदा जिया लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं और सक्रिय राजनीति से दूर हैं।</p>
<p>इसके बाद तारिक रहमान गुलशन स्थित अपने आवास पर गए। आने वाले दिनों में वह अपने पिता और बांग्लादेश के संस्थापक राष्ट्रपति <strong>जियाउर रहमान</strong> की कब्र पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे, <strong>राष्ट्रीय शहीद स्मारक</strong> जाएंगे और हालिया राजनीतिक हिंसा में मारे गए छात्र नेता <strong>उस्मान हादी</strong> की कब्र पर भी जाएंगे।</p>
<h5><strong>सुरक्षा एजेंसियों को हिंसा की आशंका</strong></h5>
<p>तारिक रहमान की हाई-प्रोफाइल वापसी को देखते हुए <strong>इंटेलिजेंस एजेंसियों ने सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी</strong> जारी की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बड़ी संख्या में समर्थकों के सड़कों पर उतरने से रैलियों, विरोध प्रदर्शन और झड़पों की संभावना है।</p>
<p>इसके अलावा कुछ कट्टरपंथी इस्लामिस्ट गुट इस अवसर का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए ढाका पुलिस, रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। BNP नेता <strong>सलाहुद्दीन अहमद</strong> ने कहा कि पार्टी ने प्रशासन के साथ मिलकर कार्यक्रम की योजना बनाई है ताकि आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।</p>
<h6><strong>कौन हैं तारिक रहमान?</strong></h6>
<p>तारिक रहमान बांग्लादेश की राजनीति के सबसे प्रभावशाली परिवारों में से एक से ताल्लुक रखते हैं। वह <strong>बांग्लादेश के संस्थापक राष्ट्रपति जियाउर रहमान</strong> के बड़े बेटे हैं और BNP की अगली पीढ़ी का प्रमुख चेहरा माने जाते हैं।</p>
<p>2001 से 2006 तक BNP के शासनकाल में वह राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। 2008 में सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक विवादों के बाद वह लंदन चले गए। वहां रहते हुए उन पर कई गंभीर आरोप लगे, जिनमें <strong>मनी लॉन्ड्रिंग, भ्रष्टाचार और तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना पर हमले</strong> से जुड़ी घटनाएं शामिल थीं।</p>
<pre><strong>सत्ता परिवर्तन के बाद बदल गई तस्वीर</strong></pre>
<p>हाल ही में बांग्लादेश में हुए राजनीतिक घटनाक्रम और <strong>शेख हसीना सरकार के सत्ता से हटने</strong> के बाद अदालतों ने तारिक रहमान को सभी मामलों में बरी कर दिया। यह फैसला केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक परिदृश्य में नई दिशा की पुष्टि भी माना गया।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, अब तारिक रहमान BNP की पूरी रणनीति को नियंत्रित करेंगे और पार्टी की कमान सीधे उनके हाथों में होगी।</p>
<p><img decoding="async" class="size-medium wp-image-298475 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/12/35_1766587708-300x225.gif" alt="35 1766587708" width="300" height="225"></p>
<pre><strong>BNP के लिए निर्णायक क्षण</strong></pre>
<p>BNP के अंदर तारिक रहमान की वापसी को <strong>टर्निंग पॉइंट</strong> माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार वह अब:</p>
<ul>
<li>चुनावी रणनीति तय करेंगे</li>
<li>संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करेंगे</li>
<li>पार्टी की वित्तीय स्थिति का आकलन करेंगे</li>
<li>सहयोगी दलों के साथ संबंधों का पुनर्मूल्यांकन करेंगे</li>
</ul>
<p>विशेष रूप से <strong>जमात-ए-इस्लामी और अन्य सहयोगी दलों</strong> के साथ BNP के संबंधों में बदलाव आ सकता है, जो आगामी चुनावों की दिशा तय करेगा।</p>
<pre><strong>चुनावी परिदृश्य और संभावित प्रभाव</strong></pre>
<p>मौजूदा हालात में <strong>अवामी लीग को चुनावी प्रक्रिया से बाहर</strong> रखा गया है। ऐसे में BNP सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरी है। खालिदा जिया की खराब सेहत को देखते हुए संभावना है कि यदि BNP सत्ता में आती है, तो <strong>तारिक रहमान ही प्रधानमंत्री पद का चेहरा</strong> होंगे।</p>
<p>विश्लेषकों का कहना है कि उनकी वापसी से चुनावी मुकाबला तेज होगा, लेकिन इसके साथ ही <strong>कानून-व्यवस्था की चुनौतियां</strong> भी बढ़ेंगी। बड़े पैमाने पर रैलियां और विरोध प्रदर्शन होने की संभावना है, जिससे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।</p>
<p><strong>Read Also :  <a href="https://swarajvani.com/india-defence-brahmos-missile/?">450 मिलियन डॉलर के BrahMos Missile से एशिया-प्रशांत में भारत की बढ़ेगी ताकत</a></strong></p>
<pre><strong>भविष्य की राजनीतिक दिशा</strong></pre>
<p>तारिक रहमान की वापसी ने BNP और देश की राजनीतिक दिशा दोनों में महत्वपूर्ण बदलाव की शुरुआत कर दी है। समर्थकों के लिए वह <strong>उम्मीद और नया नेतृत्व</strong> हैं, जबकि विरोधियों के लिए यह एक चुनौती है। आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि उनकी राजनीति बांग्लादेश को <strong>स्थिरता की ओर ले जाएगी या नए टकराव और अस्थिरता की संभावना बढ़ाएगी</strong>।</p>
<pre><strong>निष्कर्ष</strong></pre>
<p>17 साल बाद तारिक रहमान की ढाका वापसी ने बांग्लादेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। यह केवल एक नेता की घर वापसी नहीं, बल्कि पूरे चुनावी परिदृश्य को प्रभावित करने वाली घटना है। BNP समर्थक इसे पार्टी के लिए निर्णायक क्षण मान रहे हैं, जबकि विरोधी इसे राजनीतिक टकराव की चेतावनी के रूप में देख रहे हैं।</p>
<p>अब सबकी नजरें <strong>फरवरी 2026 के आम चुनावों</strong> और तारिक रहमान की अगली राजनीतिक चाल पर टिकी हैं। यह वापसी बांग्लादेश के राजनीतिक भविष्य और सत्ता के समीकरण को पूरी तरह बदल सकती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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