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	<title>Government Primary School &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>Government Primary School &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>Damoh: बिजोरी की प्राथमिक शाला में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, पानी और शौचालय के लिए परेशान विद्यार्थी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Oct 2026 11:04:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Damoh]]></category>
		<category><![CDATA[Bijori Primary School]]></category>
		<category><![CDATA[Damoh Education News]]></category>
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					<description><![CDATA[Damoh: बिजोरी की प्राथमिक शाला में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, पानी और शौचालय के लिए परेशान विद्यार्थी दैनिक स्वराज वाणी, कोमल अहिरवार (जिला ब्यूरो चीफ) स्कूल भवन के आसपास भरे ... <a title="Damoh: बिजोरी की प्राथमिक शाला में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, पानी और शौचालय के लिए परेशान विद्यार्थी" class="read-more" href="https://swarajvani.com/damoh-bijori-primary-school-faces/" aria-label="Read more about Damoh: बिजोरी की प्राथमिक शाला में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, पानी और शौचालय के लिए परेशान विद्यार्थी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>Damoh: बिजोरी की प्राथमिक शाला में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, पानी और शौचालय के लिए परेशान विद्यार्थी</strong></h1>
<p><em><strong>दैनिक स्वराज वाणी,</strong></em><br />
<em><strong>कोमल अहिरवार (जिला ब्यूरो चीफ)</strong></em></p>
<p><strong>स्कूल भवन के आसपास भरे पानी और झाड़ियों से बच्चों की सुरक्षा पर सवाल, ग्रामीणों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की; जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच कराने का आश्वासन दिया</strong></p>
<p><strong>Damoh।</strong> मध्य प्रदेश के दमोह तहसील अंतर्गत ग्राम बिजोरी की प्राथमिक शाला में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर ग्रामीणों ने चिंता जताई है। ग्रामीणों और विद्यार्थियों के अनुसार, स्कूल में पेयजल, शौचालय और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण जैसी आवश्यक सुविधाओं का अभाव है। इन समस्याओं के कारण बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर व्यवस्था सुधारने की मांग की है।</p>
<h2><strong>स्कूल भवन के आसपास सुरक्षा का खतरा</strong></h2>
<p>ग्रामीणों के मुताबिक, प्राथमिक शाला के पास पानी से भरा एक गहरा गड्ढा है, जिससे छोटे बच्चों के उसमें गिरने का खतरा बना रहता है। आसपास जमा पानी के कारण मच्छरों की समस्या भी बताई गई है। इसके अलावा, स्कूल परिसर के चारों ओर घास और कांटेदार झाड़ियां उगी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन परिस्थितियों में जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना रहता है।</p>
<p>अभिभावकों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए स्कूल परिसर की साफ-सफाई कराने, झाड़ियों को हटाने और पानी से भरे गड्ढे के आसपास सुरक्षा के इंतजाम करने की मांग की है।</p>
<h2><strong>पेयजल और शौचालय की सुविधा नहीं होने का आरोप</strong></h2>
<p>ग्रामीणों और विद्यार्थियों के अनुसार, स्कूल में पीने के पानी और शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं है। उनका कहना है कि स्कूल में लगे पेयजल नल और शौचालय को असामाजिक तत्वों द्वारा क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। इसके कारण बच्चों को पानी पीने के लिए स्कूल से दूर स्थित माता मंदिर तक जाना पड़ता है। वहीं, शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से विद्यार्थियों को स्कूल के बाहर जाना पड़ता है।</p>
<p>प्राथमिक स्तर पर पढ़ने वाले बच्चों के लिए स्वच्छ पेयजल और सुरक्षित शौचालय की सुविधा बेहद जरूरी है। ऐसे में ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से इन व्यवस्थाओं को जल्द दुरुस्त कराने की मांग की है, ताकि विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान असुविधा का सामना न करना पड़े।</p>
<h2><strong>मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल</strong></h2>
<p>ग्रामीणों ने स्कूल में बच्चों को दिए जाने वाले मध्यान्ह भोजन को लेकर भी शिकायत की है। उनका आरोप है कि विद्यार्थियों को भोजन के नाम पर कभी-कभी एक या दो सूखी रोटियां ही दी जाती हैं। यदि यह शिकायत सही पाई जाती है, तो यह बच्चों के पोषण और सरकारी मध्यान्ह भोजन योजना के क्रियान्वयन से जुड़ा गंभीर विषय है।</p>
<p>ग्रामीणों ने मांग की है कि भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और नियमित वितरण की जांच कराई जाए, ताकि विद्यार्थियों को निर्धारित मानकों के अनुसार भोजन मिल सके।</p>
<h2><strong>शिक्षकों की उपस्थिति और पढ़ाई पर उठाए सवाल</strong></h2>
<p>ग्रामवासियों ने स्कूल में शिक्षण व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि शिक्षक ऑनलाइन हाजिरी दर्ज कराने के लिए स्कूल आते हैं और इसके बाद चले जाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, विद्यार्थियों की पढ़ाई का स्तर भी संतोषजनक नहीं है। उन्होंने लंबे समय से पदस्थ शिक्षक धर्मेंद्र दुबे और अन्य संबंधित कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की जांच कराने की मांग की है।</p>
<p>ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षक धर्मेंद्र दुबे के राजनीतिक संबंधों के कारण शिकायत करने में लोग हिचकिचाते हैं और शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं हो पाती। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित शिक्षक और अन्य कर्मचारियों का पक्ष सामने आने पर मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।</p>
<h2><strong>जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच का दिया आश्वासन</strong></h2>
<p>मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी सत्यम चौरसिया से संपर्क किया गया। उन्होंने बताया कि वह फिलहाल बैठक में हैं। उन्होंने संबंधित समस्याओं की जानकारी अपने व्हाट्सऐप नंबर पर भेजने को कहा और आश्वासन दिया कि मामले की जल्द जांच कराई जाएगी।</p>
<p>अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन बिजोरी की प्राथमिक शाला में पेयजल, शौचालय, साफ-सफाई, भवन के आसपास सुरक्षा और मध्यान्ह भोजन से जुड़ी शिकायतों पर कितनी जल्दी कार्रवाई करते हैं।</p>
<h2><strong>बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शिक्षा का इंतजार</strong></h2>
<p>प्राथमिक शिक्षा बच्चों के भविष्य की नींव होती है। ऐसे में स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी और शिक्षण व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासनिक जांच के बाद वास्तविक स्थिति सामने आएगी और आवश्यक सुधार किए जाएंगे, ताकि ग्राम बिजोरी के विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जहां से शुरू हुआ शिक्षा का सफर, वहीं से सम्मान के साथ हुई विदाई: 40 वर्षों की निष्कलंक सेवा के बाद प्रधानाध्यापक करण सिंह सिंदल सेवानिवृत्त, बग्गी में निकली भावुक विदाई यात्रा</title>
		<link>https://swarajvani.com/teacher-who-began-his-career-at-the-same-school-retires-with-honour-after-40-years/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 12:55:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Madhya Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[Government Primary School]]></category>
		<category><![CDATA[Government School MP]]></category>
		<category><![CDATA[Headmaster Retirement]]></category>
		<category><![CDATA[Madhya Pradesh News]]></category>
		<category><![CDATA[Peepalrawa News]]></category>
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					<description><![CDATA[जहां से शुरू हुआ शिक्षा का सफर, वहीं से सम्मान के साथ हुई विदाई: 40 वर्षों की निष्कलंक सेवा के बाद प्रधानाध्यापक करण सिंह सिंदल सेवानिवृत्त, बग्गी में निकली भावुक ... <a title="जहां से शुरू हुआ शिक्षा का सफर, वहीं से सम्मान के साथ हुई विदाई: 40 वर्षों की निष्कलंक सेवा के बाद प्रधानाध्यापक करण सिंह सिंदल सेवानिवृत्त, बग्गी में निकली भावुक विदाई यात्रा" class="read-more" href="https://swarajvani.com/teacher-who-began-his-career-at-the-same-school-retires-with-honour-after-40-years/" aria-label="Read more about जहां से शुरू हुआ शिक्षा का सफर, वहीं से सम्मान के साथ हुई विदाई: 40 वर्षों की निष्कलंक सेवा के बाद प्रधानाध्यापक करण सिंह सिंदल सेवानिवृत्त, बग्गी में निकली भावुक विदाई यात्रा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>जहां से शुरू हुआ शिक्षा का सफर, वहीं से सम्मान के साथ हुई विदाई: 40 वर्षों की निष्कलंक सेवा के बाद प्रधानाध्यापक करण सिंह सिंदल सेवानिवृत्त, बग्गी में निकली भावुक विदाई यात्रा</strong></h1>
<p><strong>संवाददाता: सोनू मंसूरी<br />
पीपलरावा (देवास)।</strong> किसी भी शिक्षक के जीवन का सबसे गौरवपूर्ण क्षण वह होता है जब उसके दशकों के समर्पण, अनुशासन और सेवा को समाज खुले दिल से सम्मान देता है। ऐसा ही भावुक और ऐतिहासिक दृश्य शुक्रवार को देवास जिले के पीपलरावा नगर में देखने को मिला, जब <strong>शासकीय बालक प्राथमिक विद्यालय</strong> के सहायक शिक्षक (प्रधानाध्यापक) <strong>करण सिंह सिंदल</strong> लगभग <strong>40 वर्षों की निष्कलंक शैक्षणिक सेवा</strong> पूर्ण करने के बाद सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए।</p>
<p>सेवानिवृत्ति केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं रही, बल्कि यह पूरे नगर के लिए एक उत्सव बन गई। जिस विद्यालय से उन्होंने वर्ष <strong>1986</strong> में अपने शिक्षक जीवन की शुरुआत की थी, उसी विद्यालय से उन्होंने अपनी सेवाओं का समापन भी किया। इस विशेष अवसर पर नगरवासियों, विद्यार्थियों, पूर्व विद्यार्थियों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों तथा सामाजिक संगठनों ने उन्हें भावभीनी विदाई देते हुए उनके योगदान को याद किया।</p>
<h2><strong>घर से बग्गी में निकले, पूरे नगर ने किया आत्मीय स्वागत</strong></h2>
<p>सेवानिवृत्ति के अंतिम कार्यदिवस पर करण सिंह सिंदल अपने परिवार के साथ पारंपरिक बग्गी में सवार होकर विद्यालय पहुंचे। उनके साथ पिता <strong>रतनलाल सिंदल</strong>, पत्नी <strong>मंजुलता सिंदल</strong> तथा बेटी <strong>इंजीनियर भावना सिंदल</strong> मौजूद थीं।</p>
<p>बग्गी यात्रा ने पूरे नगर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। रास्ते भर नगरवासियों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया। अनेक स्थानों पर सामाजिक संगठनों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं तथा नागरिकों ने उनका अभिनंदन किया।</p>
<p>नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए यह सम्मान यात्रा शिक्षा के प्रति समाज के सम्मान का प्रतीक बन गई।</p>
<h2><strong>अपने गुरुओं के चरण स्पर्श कर लिया आशीर्वाद</strong></h2>
<p>विद्यालय पहुंचने के बाद करण सिंह सिंदल ने सबसे पहले अपने उन शिक्षकों का सम्मान किया, जिन्होंने उनके बचपन में उन्हें शिक्षा दी थी।</p>
<p>उन्होंने अपने गुरुजनों—</p>
<ul>
<li>ताराचंद्र नाहर</li>
<li>मनमोहन जोशी</li>
<li>प्रेमनारायण कुमरावत</li>
<li>घासीराम मालवीय</li>
<li>सज्जन सिंह धाकड़</li>
<li>मांगीलाल चौधरी</li>
</ul>
<p>—के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया।</p>
<p>यह दृश्य उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर गया। आज के समय में जब गुरु-शिष्य परंपरा कमजोर होती दिखाई देती है, ऐसे में अपने शिक्षकों के प्रति यह सम्मान नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक संदेश बन गया।</p>
<h2><strong>विद्यालय के बच्चों को भेंट की स्टडी किट</strong></h2>
<p>अपने अंतिम कार्यदिवस को यादगार बनाते हुए करण सिंह सिंदल ने विद्यालय के विद्यार्थियों को उपहार स्वरूप <strong>स्टडी किट</strong> वितरित की।</p>
<p>उन्होंने बच्चों से कहा कि शिक्षा ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। यदि विद्यार्थी ईमानदारी और मेहनत से अध्ययन करेंगे तो वे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।</p>
<p>विद्यार्थियों ने भी अपने प्रिय शिक्षक को पुष्पगुच्छ भेंट कर भावभीनी विदाई दी।</p>
<h2><strong>अनोखा दृश्य: जिन गुरुओं ने पढ़ाया, उन्हें भी बग्गी में बैठाकर निकाली यात्रा</strong></h2>
<p>समारोह का सबसे भावुक और अनूठा दृश्य तब देखने को मिला जब करण सिंह सिंदल ने अपने गुरुजनों को भी सम्मानपूर्वक बग्गी में बैठाकर अपने साथ नगर भ्रमण कराया।</p>
<p>नगरवासियों ने बताया कि पीपलरावा के इतिहास में शायद यह पहला अवसर था जब कोई सेवानिवृत्त शिक्षक अपने गुरुजनों को अपने सम्मान जुलूस का हिस्सा बनाकर उनके प्रति सार्वजनिक सम्मान व्यक्त कर रहा था।</p>
<p>इस दृश्य ने हर व्यक्ति का मन जीत लिया।</p>
<h2><strong>देशभक्ति गीतों पर झूमते नजर आए छात्र</strong></h2>
<p>विदाई यात्रा के दौरान विद्यालय के छात्र-छात्राएं भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।</p>
<p>डीजे पर बज रहे देशभक्ति गीतों की धुन पर विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। बच्चे अपने प्रिय शिक्षक के सम्मान में नृत्य करते हुए दिखाई दिए।</p>
<p>इस दौरान पूरे नगर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।</p>
<h2><strong>40 वर्षों तक एक ही विद्यालय में दी सेवाएं</strong></h2>
<p>करण सिंह सिंदल ने <strong>4 दिसंबर 1986</strong> को शासकीय बालक प्राथमिक विद्यालय, पीपलरावा में सहायक शिक्षक के रूप में अपनी सेवा प्रारंभ की थी।</p>
<p>लगभग चार दशक तक उन्होंने इसी विद्यालय में कार्य किया और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई।</p>
<p>इतने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की। उनकी पहचान एक अनुशासित, शांत, सहनशील और विद्यार्थियों के प्रति समर्पित शिक्षक के रूप में रही।</p>
<p>उनकी कार्यशैली हमेशा सरल, ईमानदार और जिम्मेदार रही।</p>
<h2><strong>विद्यालय परिवार ने किया सम्मान</strong></h2>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class=" wp-image-341194 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/07/hgtf-300x225.jpeg" alt="hgtf" width="444" height="333" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/07/hgtf-300x225.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/07/hgtf.jpeg 720w" sizes="(max-width: 444px) 100vw, 444px" /><br />
सेवानिवृत्ति समारोह की शुरुआत विद्यालय परिवार द्वारा सम्मान समारोह से हुई।</p>
<p>विद्यालय की ओर से शिक्षिका <strong>ज्योति शर्मा</strong> एवं शिक्षक <strong>लालजीराम शिंदे</strong> ने करण सिंह सिंदल को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान का सम्मान किया।</p>
<p>सहकर्मियों ने कहा कि सिंदल सर ने हमेशा टीम भावना से कार्य किया और विद्यालय को परिवार की तरह आगे बढ़ाया।</p>
<h2><strong>पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा— सेवानिवृत्ति केवल कार्यक्षेत्र बदलती है, व्यक्तित्व नहीं</strong></h2>
<p>कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री <strong>सज्जन सिंह वर्मा</strong> ने अपने संबोधन में कहा—</p>
<blockquote><p><strong>&#8220;सेवानिवृत्ति केवल व्यक्ति का कार्यक्षेत्र बदलती है, उसका व्यक्तित्व नहीं।&#8221;</strong></p></blockquote>
<p>उन्होंने कहा कि करण सिंह सिंदल ने पूरे उत्साह, समर्पण और ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अब उनके सामने समाज और परिवार के लिए और अधिक समय देने का अवसर है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में उनके अनुभव का लाभ आने वाली पीढ़ियों को भी मिलना चाहिए।</p>
<h2><strong>भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. रायसिंह सेंधव ने की शिक्षकीय जीवन की सराहना</strong></h2>
<p>भाजपा जिलाध्यक्ष <strong>डॉ. रायसिंह सेंधव</strong> ने कहा कि करण सिंह सिंदल ने शिक्षा को केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रखा।</p>
<p>उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन के संस्कार, अनुशासन, मेहनत और नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी।</p>
<p>उन्होंने कहा—</p>
<blockquote><p>&#8220;एक अच्छे शिक्षक की पहचान केवल पढ़ाने से नहीं होती, बल्कि वह अपने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण से होती है। करण सिंह सिंदल ने अपने पूरे सेवाकाल में यही कार्य किया है।&#8221;</p></blockquote>
<p>उन्होंने कहा कि उनका सादा जीवन, समय की पाबंदी और विद्यार्थियों के प्रति प्रेम हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।</p>
<h2><strong>शिक्षा अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने दी शुभकामनाएं</strong></h2>
<p>कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा अनेक जनप्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।</p>
<p>उन्होंने करण सिंह सिंदल के शैक्षणिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा के माध्यम से समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<h2><strong>इन गणमान्य लोगों की रही विशेष उपस्थिति</strong></h2>
<p>समारोह में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे—</p>
<ul>
<li>पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा</li>
<li>भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. रायसिंह सेंधव</li>
<li>अखिल भारतीय बलाई महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज परमार</li>
<li>सोनकच्छ विधायक राजेश सोनकर के प्रतिनिधि त्रिलोक चंद्र सोनकर</li>
<li>जिला शिक्षा अधिकारी राजीव सूर्यवंशी</li>
<li>ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सज्जन सिंह मालवीय</li>
<li>भेरूलाल अटारिया</li>
<li>तरुण हाथिया</li>
<li>शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी</li>
<li>सामाजिक कार्यकर्ता</li>
<li>नगर के गणमान्य नागरिक</li>
</ul>
<h2><strong>स्वागत, संचालन और आभार</strong></h2>
<p>कार्यक्रम का स्वागत भाषण पूर्व पार्षद <strong>शंकर सिंदल</strong> ने दिया।</p>
<p>मंच संचालन <strong>फारुख खान</strong> एवं <strong>पत्रकार अनिल राठौर</strong> ने संयुक्त रूप से किया।</p>
<p>कार्यक्रम के अंत में करण सिंह सिंदल की पुत्री <strong>इंजीनियर भावना सिंदल</strong> ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, नागरिकों तथा आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।</p>
<h2><strong>शिक्षक का सम्मान, समाज का सम्मान</strong></h2>
<p>समारोह केवल एक शिक्षक की विदाई नहीं था, बल्कि शिक्षा के प्रति समाज के सम्मान का प्रतीक बन गया।</p>
<p>जिस विद्यालय में कभी एक बालक के रूप में करण सिंह सिंदल ने शिक्षा प्राप्त की, उसी विद्यालय में शिक्षक बने और लगभग 40 वर्षों तक हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संवारने के बाद उसी संस्था से सम्मानपूर्वक विदाई लेना अपने आप में एक प्रेरणादायक उपलब्धि है।</p>
<p>उनकी बग्गी यात्रा, गुरुजनों का सम्मान, विद्यार्थियों को स्टडी किट का वितरण और पूरे नगर का आत्मीय अभिनंदन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती। ऐसे शिक्षक केवल विद्यालय की धरोहर नहीं होते, बल्कि पूरे समाज की अमूल्य पूंजी बन जाते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>औचक निरीक्षण में बंद मिला सरकारी प्राथमिक विद्यालय, अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद ने उठाए शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल</title>
		<link>https://swarajvani.com/school-found-closed-during-inspection-action-sought-against-negligence-in-vidisha/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 12:42:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Madhya Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[Vidisha]]></category>
		<category><![CDATA[Chhota Bharnakheda School]]></category>
		<category><![CDATA[Government Primary School]]></category>
		<category><![CDATA[Rajkumar Vishwakarma]]></category>
		<category><![CDATA[Shamshabad News]]></category>
		<category><![CDATA[Vidisha News]]></category>
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					<description><![CDATA[यह रहा समाचार वेबसाइट के लिए विस्तृत, SEO-अनुकूल और 1000+ शब्दों में पुनर्लेखित समाचार: औचक निरीक्षण में बंद मिला सरकारी प्राथमिक विद्यालय, अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद ने उठाए शिक्षा व्यवस्था पर ... <a title="औचक निरीक्षण में बंद मिला सरकारी प्राथमिक विद्यालय, अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद ने उठाए शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल" class="read-more" href="https://swarajvani.com/school-found-closed-during-inspection-action-sought-against-negligence-in-vidisha/" aria-label="Read more about औचक निरीक्षण में बंद मिला सरकारी प्राथमिक विद्यालय, अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद ने उठाए शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>यह रहा समाचार वेबसाइट के लिए विस्तृत, SEO-अनुकूल और 1000+ शब्दों में पुनर्लेखित समाचार:</p>
<h1><strong>औचक निरीक्षण में बंद मिला सरकारी प्राथमिक विद्यालय, अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद ने उठाए शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल</strong></h1>
<p><strong>रिपोर्ट: राजकुमार विश्वकर्मा</strong><br />
<strong>स्थान: शमशाबाद, जिला विदिशा</strong></p>
<h2><strong>प्रांत अध्यक्ष के निरीक्षण में खुली शिक्षा विभाग की लापरवाही की परतें</strong></h2>
<p><strong>शमशाबाद (विदिशा)।</strong> शमशाबाद तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम <strong>छोटा भरनाखेड़ा</strong> स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में कथित लापरवाही का मामला सामने आया है। अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत अध्यक्ष <strong>राजकुमार विश्वकर्मा</strong> के औचक निरीक्षण के दौरान विद्यालय परिसर बंद मिला और मुख्य द्वार पर ताला लगा हुआ था। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने भी शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की तथा विद्यालय के नियमित संचालन पर सवाल उठाए।</p>
<p>विद्यालय के बंद मिलने की सूचना ने स्थानीय स्तर पर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्कूल समय पर नहीं खुलते और शिक्षक नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते, तो इसका सीधा प्रभाव बच्चों की शिक्षा पर पड़ता है।</p>
<h2><strong>ग्रामीण क्षेत्र के दौरे के दौरान सामने आया मामला</strong></h2>
<p>जानकारी के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत अध्यक्ष राजकुमार विश्वकर्मा अपने शमशाबाद प्रवास के दौरान क्षेत्र की शैक्षणिक व्यवस्थाओं का जायजा लेने विभिन्न गांवों का भ्रमण कर रहे थे। इसी क्रम में वे ग्राम छोटा भरनाखेड़ा स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय पहुंचे।</p>
<p>निरीक्षण के दौरान विद्यालय का मुख्य द्वार बंद मिला और परिसर पर ताला लगा हुआ था। उस समय विद्यालय में कोई शिक्षक या कर्मचारी मौजूद नहीं दिखाई दिया। इस स्थिति को देखकर उन्होंने स्थानीय लोगों से विद्यालय के संचालन के संबंध में जानकारी प्राप्त की।</p>
<h2><strong>विद्यालय बंद मिलने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका</strong></h2>
<p>विद्यालय बंद होने के कारण उस दिन पढ़ाई नहीं हो सकी। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ बच्चे विद्यालय पहुंचे थे, लेकिन स्कूल बंद होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा।</p>
<p>यदि विद्यालय निर्धारित समय पर संचालित नहीं होते हैं, तो इससे विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई बाधित होती है। विशेष रूप से प्राथमिक स्तर पर शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों के लिए नियमित कक्षाएं अत्यंत आवश्यक मानी जाती हैं, क्योंकि इसी स्तर पर उनकी बुनियादी शिक्षा विकसित होती है।</p>
<h2><strong>ग्रामीणों ने नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग उठाई</strong></h2>
<p>निरीक्षण के दौरान उपस्थित ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय के संचालन को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें सामने आई हैं। उनका कहना था कि समय पर स्कूल न खुलना और शिक्षकों की अनुपस्थिति जैसी समस्याओं से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।</p>
<p>ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी शिक्षक निर्धारित समय पर उपस्थित होकर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करें।</p>
<h2><strong>शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता पर उठे सवाल</strong></h2>
<p>इस घटना के बाद क्षेत्र में सरकारी विद्यालयों की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।</p>
<p>शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार द्वारा विद्यालयों में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने, नामांकन बढ़ाने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। ऐसे में यदि किसी विद्यालय में संचालन संबंधी अनियमितताएं सामने आती हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है।</p>
<p>विद्यालयों की नियमित निगरानी और समय-समय पर औचक निरीक्षण से ऐसी स्थितियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।</p>
<h2><strong>अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद ने की जांच की मांग</strong></h2>
<p>अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत अध्यक्ष राजकुमार विश्वकर्मा ने इस मामले को गंभीर बताते हुए संबंधित अधिकारियों से इसकी जांच कराने की मांग की है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यालय में निर्धारित समय पर शैक्षणिक गतिविधियां संचालित नहीं हो रही हैं, तो इसकी वस्तुनिष्ठ जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।</p>
<h2><strong>बच्चों के भविष्य से जुड़ा है शिक्षा का प्रश्न</strong></h2>
<p>राजकुमार विश्वकर्मा ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा किसी भी विद्यार्थी के जीवन की मजबूत नींव होती है। यदि प्रारंभिक स्तर पर ही शिक्षा बाधित होती है, तो उसका प्रभाव बच्चों के संपूर्ण शैक्षणिक विकास पर पड़ सकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका प्रभाव विद्यालयों में नियमित शिक्षण कार्य के रूप में दिखाई देना चाहिए। समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए।</p>
<h2><strong>प्रशासन से प्रभावी निगरानी व्यवस्था की अपेक्षा</strong></h2>
<p>स्थानीय नागरिकों का मानना है कि विद्यालयों में नियमित निरीक्षण की व्यवस्था और डिजिटल उपस्थिति प्रणाली जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, जिससे शिक्षकों की उपस्थिति और विद्यालय संचालन की पारदर्शिता बनी रहे।</p>
<p>उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि विद्यालयों की समय-समय पर समीक्षा कर कमियों को दूर किया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।</p>
<h2><strong>ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा सुधार की आवश्यकता</strong></h2>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए केवल भवन और संसाधन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि नियमित शिक्षण, जिम्मेदार प्रशासनिक निगरानी और समुदाय की भागीदारी भी आवश्यक है।</p>
<p>यदि स्थानीय स्तर पर स्कूलों के संचालन पर निरंतर निगरानी रखी जाए, तो विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ेगी, अभिभावकों का विश्वास मजबूत होगा और शिक्षा का स्तर भी बेहतर होगा।</p>
<h2><strong>निष्पक्ष जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट</strong></h2>
<p>विद्यालय बंद मिलने की घटना को लेकर विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि इस मामले में संबंधित शिक्षा विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया या जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।</p>
<p>स्थानीय लोगों और विद्यार्थी परिषद ने अपेक्षा जताई है कि संबंधित अधिकारी मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेंगे तथा आवश्यकता पड़ने पर नियमानुसार उचित कार्रवाई करेंगे। साथ ही भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रह सके।</p>
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