जहां से शुरू हुआ शिक्षा का सफर, वहीं से सम्मान के साथ हुई विदाई: 40 वर्षों की निष्कलंक सेवा के बाद प्रधानाध्यापक करण सिंह सिंदल सेवानिवृत्त, बग्गी में निकली भावुक विदाई यात्रा
संवाददाता: सोनू मंसूरी
पीपलरावा (देवास)। किसी भी शिक्षक के जीवन का सबसे गौरवपूर्ण क्षण वह होता है जब उसके दशकों के समर्पण, अनुशासन और सेवा को समाज खुले दिल से सम्मान देता है। ऐसा ही भावुक और ऐतिहासिक दृश्य शुक्रवार को देवास जिले के पीपलरावा नगर में देखने को मिला, जब शासकीय बालक प्राथमिक विद्यालय के सहायक शिक्षक (प्रधानाध्यापक) करण सिंह सिंदल लगभग 40 वर्षों की निष्कलंक शैक्षणिक सेवा पूर्ण करने के बाद सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए।
सेवानिवृत्ति केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं रही, बल्कि यह पूरे नगर के लिए एक उत्सव बन गई। जिस विद्यालय से उन्होंने वर्ष 1986 में अपने शिक्षक जीवन की शुरुआत की थी, उसी विद्यालय से उन्होंने अपनी सेवाओं का समापन भी किया। इस विशेष अवसर पर नगरवासियों, विद्यार्थियों, पूर्व विद्यार्थियों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों तथा सामाजिक संगठनों ने उन्हें भावभीनी विदाई देते हुए उनके योगदान को याद किया।
घर से बग्गी में निकले, पूरे नगर ने किया आत्मीय स्वागत
सेवानिवृत्ति के अंतिम कार्यदिवस पर करण सिंह सिंदल अपने परिवार के साथ पारंपरिक बग्गी में सवार होकर विद्यालय पहुंचे। उनके साथ पिता रतनलाल सिंदल, पत्नी मंजुलता सिंदल तथा बेटी इंजीनियर भावना सिंदल मौजूद थीं।
बग्गी यात्रा ने पूरे नगर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। रास्ते भर नगरवासियों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया। अनेक स्थानों पर सामाजिक संगठनों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं तथा नागरिकों ने उनका अभिनंदन किया।
नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए यह सम्मान यात्रा शिक्षा के प्रति समाज के सम्मान का प्रतीक बन गई।
अपने गुरुओं के चरण स्पर्श कर लिया आशीर्वाद
विद्यालय पहुंचने के बाद करण सिंह सिंदल ने सबसे पहले अपने उन शिक्षकों का सम्मान किया, जिन्होंने उनके बचपन में उन्हें शिक्षा दी थी।
उन्होंने अपने गुरुजनों—
- ताराचंद्र नाहर
- मनमोहन जोशी
- प्रेमनारायण कुमरावत
- घासीराम मालवीय
- सज्जन सिंह धाकड़
- मांगीलाल चौधरी
—के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया।
यह दृश्य उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर गया। आज के समय में जब गुरु-शिष्य परंपरा कमजोर होती दिखाई देती है, ऐसे में अपने शिक्षकों के प्रति यह सम्मान नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक संदेश बन गया।
विद्यालय के बच्चों को भेंट की स्टडी किट
अपने अंतिम कार्यदिवस को यादगार बनाते हुए करण सिंह सिंदल ने विद्यालय के विद्यार्थियों को उपहार स्वरूप स्टडी किट वितरित की।
उन्होंने बच्चों से कहा कि शिक्षा ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। यदि विद्यार्थी ईमानदारी और मेहनत से अध्ययन करेंगे तो वे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
विद्यार्थियों ने भी अपने प्रिय शिक्षक को पुष्पगुच्छ भेंट कर भावभीनी विदाई दी।
अनोखा दृश्य: जिन गुरुओं ने पढ़ाया, उन्हें भी बग्गी में बैठाकर निकाली यात्रा
समारोह का सबसे भावुक और अनूठा दृश्य तब देखने को मिला जब करण सिंह सिंदल ने अपने गुरुजनों को भी सम्मानपूर्वक बग्गी में बैठाकर अपने साथ नगर भ्रमण कराया।
नगरवासियों ने बताया कि पीपलरावा के इतिहास में शायद यह पहला अवसर था जब कोई सेवानिवृत्त शिक्षक अपने गुरुजनों को अपने सम्मान जुलूस का हिस्सा बनाकर उनके प्रति सार्वजनिक सम्मान व्यक्त कर रहा था।
इस दृश्य ने हर व्यक्ति का मन जीत लिया।
देशभक्ति गीतों पर झूमते नजर आए छात्र
विदाई यात्रा के दौरान विद्यालय के छात्र-छात्राएं भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
डीजे पर बज रहे देशभक्ति गीतों की धुन पर विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। बच्चे अपने प्रिय शिक्षक के सम्मान में नृत्य करते हुए दिखाई दिए।
इस दौरान पूरे नगर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
40 वर्षों तक एक ही विद्यालय में दी सेवाएं
करण सिंह सिंदल ने 4 दिसंबर 1986 को शासकीय बालक प्राथमिक विद्यालय, पीपलरावा में सहायक शिक्षक के रूप में अपनी सेवा प्रारंभ की थी।
लगभग चार दशक तक उन्होंने इसी विद्यालय में कार्य किया और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई।
इतने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की। उनकी पहचान एक अनुशासित, शांत, सहनशील और विद्यार्थियों के प्रति समर्पित शिक्षक के रूप में रही।
उनकी कार्यशैली हमेशा सरल, ईमानदार और जिम्मेदार रही।
विद्यालय परिवार ने किया सम्मान

सेवानिवृत्ति समारोह की शुरुआत विद्यालय परिवार द्वारा सम्मान समारोह से हुई।
विद्यालय की ओर से शिक्षिका ज्योति शर्मा एवं शिक्षक लालजीराम शिंदे ने करण सिंह सिंदल को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान का सम्मान किया।
सहकर्मियों ने कहा कि सिंदल सर ने हमेशा टीम भावना से कार्य किया और विद्यालय को परिवार की तरह आगे बढ़ाया।
पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा— सेवानिवृत्ति केवल कार्यक्षेत्र बदलती है, व्यक्तित्व नहीं
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने अपने संबोधन में कहा—
“सेवानिवृत्ति केवल व्यक्ति का कार्यक्षेत्र बदलती है, उसका व्यक्तित्व नहीं।”
उन्होंने कहा कि करण सिंह सिंदल ने पूरे उत्साह, समर्पण और ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन किया।
उन्होंने कहा कि अब उनके सामने समाज और परिवार के लिए और अधिक समय देने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में उनके अनुभव का लाभ आने वाली पीढ़ियों को भी मिलना चाहिए।
भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. रायसिंह सेंधव ने की शिक्षकीय जीवन की सराहना
भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. रायसिंह सेंधव ने कहा कि करण सिंह सिंदल ने शिक्षा को केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रखा।
उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन के संस्कार, अनुशासन, मेहनत और नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी।
उन्होंने कहा—
“एक अच्छे शिक्षक की पहचान केवल पढ़ाने से नहीं होती, बल्कि वह अपने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण से होती है। करण सिंह सिंदल ने अपने पूरे सेवाकाल में यही कार्य किया है।”
उन्होंने कहा कि उनका सादा जीवन, समय की पाबंदी और विद्यार्थियों के प्रति प्रेम हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।
शिक्षा अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने दी शुभकामनाएं
कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा अनेक जनप्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
उन्होंने करण सिंह सिंदल के शैक्षणिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा के माध्यम से समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इन गणमान्य लोगों की रही विशेष उपस्थिति
समारोह में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे—
- पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा
- भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. रायसिंह सेंधव
- अखिल भारतीय बलाई महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज परमार
- सोनकच्छ विधायक राजेश सोनकर के प्रतिनिधि त्रिलोक चंद्र सोनकर
- जिला शिक्षा अधिकारी राजीव सूर्यवंशी
- ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सज्जन सिंह मालवीय
- भेरूलाल अटारिया
- तरुण हाथिया
- शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी
- सामाजिक कार्यकर्ता
- नगर के गणमान्य नागरिक
स्वागत, संचालन और आभार
कार्यक्रम का स्वागत भाषण पूर्व पार्षद शंकर सिंदल ने दिया।
मंच संचालन फारुख खान एवं पत्रकार अनिल राठौर ने संयुक्त रूप से किया।
कार्यक्रम के अंत में करण सिंह सिंदल की पुत्री इंजीनियर भावना सिंदल ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, नागरिकों तथा आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।
शिक्षक का सम्मान, समाज का सम्मान
समारोह केवल एक शिक्षक की विदाई नहीं था, बल्कि शिक्षा के प्रति समाज के सम्मान का प्रतीक बन गया।
जिस विद्यालय में कभी एक बालक के रूप में करण सिंह सिंदल ने शिक्षा प्राप्त की, उसी विद्यालय में शिक्षक बने और लगभग 40 वर्षों तक हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संवारने के बाद उसी संस्था से सम्मानपूर्वक विदाई लेना अपने आप में एक प्रेरणादायक उपलब्धि है।
उनकी बग्गी यात्रा, गुरुजनों का सम्मान, विद्यार्थियों को स्टडी किट का वितरण और पूरे नगर का आत्मीय अभिनंदन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती। ऐसे शिक्षक केवल विद्यालय की धरोहर नहीं होते, बल्कि पूरे समाज की अमूल्य पूंजी बन जाते हैं।
