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	<title>Ghatasthapana &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>Ghatasthapana &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<item>
		<title>मंदिरों से घरों तक गूंजे माता के जयकारे, पड़ाना में जगह-जगह हुई घट स्थापना, चल समारोह के साथ पहुंची मां दुर्गा की प्रतिमा</title>
		<link>https://swarajvani.com/chants-of-goddess-echo-temples-to-homes-in-padana/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 Oct 2026 11:50:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Sarangpur]]></category>
		<category><![CDATA[Ghatasthapana]]></category>
		<category><![CDATA[Maa Ashapuri Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Maa Shailputri]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Padana News]]></category>
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					<description><![CDATA[मंदिरों से घरों तक गूंजे माता के जयकारे, पड़ाना में जगह-जगह हुई घट स्थापना, चल समारोह के साथ पहुंची मां दुर्गा की प्रतिमा नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की ... <a title="मंदिरों से घरों तक गूंजे माता के जयकारे, पड़ाना में जगह-जगह हुई घट स्थापना, चल समारोह के साथ पहुंची मां दुर्गा की प्रतिमा" class="read-more" href="https://swarajvani.com/chants-of-goddess-echo-temples-to-homes-in-padana/" aria-label="Read more about मंदिरों से घरों तक गूंजे माता के जयकारे, पड़ाना में जगह-जगह हुई घट स्थापना, चल समारोह के साथ पहुंची मां दुर्गा की प्रतिमा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2 dir="ltr"><strong>मंदिरों से घरों तक गूंजे माता के जयकारे, पड़ाना में जगह-जगह हुई घट स्थापना, चल समारोह के साथ पहुंची मां दुर्गा की प्रतिमा</strong></h2>
<p dir="ltr"><strong>नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा, मंदिरों में अखंड ज्योत प्रज्वलित, गांधी चौक पर महाआरती</strong></p>
<p dir="ltr"><strong>पड़ाना।</strong> नगर और आसपास के क्षेत्रों में मां दुर्गा की आराधना शुरू हो गई। नवरात्र के पहले दिन मां के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की गई। सुबह से मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही रही और माता के जयकारों से परिसर गूंज उठे। भक्तों ने व्रत रखकर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>गांवों में भी दिखा उत्साह</strong></h3>
<p dir="ltr">पड़ाना सहित मऊ, मगराना, आसारेटा, पंवार, रामपुरिया, करौंदी, गुलावता और सुल्तानिया समेत आसपास के गांवों में नवरात्र को लेकर उत्साह रहा।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>मंदिरों में मंत्रोच्चार के साथ घट स्थापना</strong></h3>
<p dir="ltr">नगर के समीप जंगल में स्थित मां आशापुरी मंदिर में अलसुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। सदर बाजार स्थित अंबे माता मंदिर, नरसिंह मंदिर और माली मोहल्ला स्थित माताजी मंदिर में मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कर घट स्थापना की गई। मंदिरों में अखंड ज्योत भी प्रज्वलित की गई।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>मां को अर्पित की पूजन सामग्री, भजनों से गूंजा मंदिर</strong></h3>
<p dir="ltr">पहले दिन भक्तों ने मां शैलपुत्री को लाल चुनरी, नारियल, पुष्प, फल और श्रृंगार सामग्री अर्पित की। सदर बाजार के अंबे माता मंदिर में महिलाओं ने भजन-गीत गाकर आराधना की और घर-परिवार में सुख-शांति व समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना की। झिरी स्थान आश्रम स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर में सुबह 5 बजे से श्रद्धालुओं ने नवाह्न पाठ प्रारंभ किया।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>चल समारोह के साथ पहुंची मां दुर्गा की प्रतिमा</strong></h3>
<p dir="ltr">शाम को गांधी चौक बस स्टैंड पर मां आशापुरी मंच पर नवरात्र का उल्लास दिखा। आशापुरी मित्र मंडल और ग्रामवासियों के सहयोग से डीजे, ढोल और आतिशबाजी के बीच ट्रैक्टर में विराजित मां दुर्गा की प्रतिमा का चल समारोह निकला। प्रतिमा को मंच पर लाया गया, जहां पंडित गौरव शर्मा ने वैदिक रीति से पूजा-अर्चना कर घट स्थापना कराई। इसके बाद महाआरती हुई और श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>नौ दिन चलेगा भक्ति का सिलसिला</strong></h3>
<p dir="ltr">नवरात्र के शुभारंभ के साथ नगर और आसपास भक्तिमय माहौल है। आगामी नौ दिनों तक मंदिरों और पंडालों में पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन होते रहेंगे।</p>
<p dir="ltr">
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पड़ाना गांधी चौक पर मां आशापुरी मंच में हुई मां दुर्गा प्रतिमा की घट स्थापना</title>
		<link>https://swarajvani.com/maa-durga-idol-installed-at-maa-ashapuri-stage-in/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 Oct 2026 11:44:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Padana]]></category>
		<category><![CDATA[ana]]></category>
		<category><![CDATA[Ghatasthapana]]></category>
		<category><![CDATA[Maa Ashapuri]]></category>
		<category><![CDATA[Maa Durga]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri]]></category>
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					<description><![CDATA[पड़ाना गांधी चौक पर मां आशापुरी मंच में हुई मां दुर्गा प्रतिमा की घट स्थापना डीजे और ढोल-नगाड़ों के साथ निकला चल समारोह, भजनों पर झूमते हुए पंडाल पहुंचे श्रद्धालु ... <a title="पड़ाना गांधी चौक पर मां आशापुरी मंच में हुई मां दुर्गा प्रतिमा की घट स्थापना" class="read-more" href="https://swarajvani.com/maa-durga-idol-installed-at-maa-ashapuri-stage-in/" aria-label="Read more about पड़ाना गांधी चौक पर मां आशापुरी मंच में हुई मां दुर्गा प्रतिमा की घट स्थापना">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>पड़ाना गांधी चौक पर मां आशापुरी मंच में हुई मां दुर्गा प्रतिमा की घट स्थापना</strong></h1>
<h2><strong>डीजे और ढोल-नगाड़ों के साथ निकला चल समारोह, भजनों पर झूमते हुए पंडाल पहुंचे श्रद्धालु</strong></h2>
<p><strong>पड़ाना।</strong> शारदीय नवरात्र महोत्सव नगर और आसपास के क्षेत्रों में धूमधाम से मनाया जा रहा है। रविवार को आशापुरी मित्र मंडल की ओर से मां दुर्गा की विशाल प्रतिमा का चल समारोह निकाला गया। तलेन-आसारेटा रोड से शुरू हुए इस समारोह में प्रतिमा को ट्रैक्टर पर विराजित किया गया। डीजे, ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के बीच श्रद्धालु धार्मिक भजनों पर झूमते हुए आगे बढ़े।</p>
<p>चल समारोह नगर के नाना गोया और सदर बाजार से होते हुए गांधी चौक तथा बस स्टैंड स्थित मां आशापुरी पंडाल पहुंचा। रास्तेभर भक्तिमय माहौल बना रहा। भजनों की धुन और ढोल-नगाड़ों की आवाज के साथ श्रद्धालु माता के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। ट्रैक्टर पर सजी मां दुर्गा की प्रतिमा चल समारोह का मुख्य आकर्षण रही। आतिशबाजी के बीच नगर के प्रमुख मार्गों से निकली यात्रा के बाद प्रतिमा को पंडाल में स्थापित किया गया।</p>
<h3><strong>विधि-विधान से हुई प्रतिमा स्थापना</strong></h3>
<p>रविवार रात करीब 8 बजे बस स्टैंड स्थित मां आशापुरी मंच पर पंडित गौरव शर्मा ने विधि-विधान के साथ मां दुर्गा प्रतिमा की स्थापना कराई। पूजा-अर्चना के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक विधियां संपन्न हुईं। भूपेंद्र परमार, राजेंद्र परमार, मंडल के मंत्री और सदस्यों ने पूजा में भाग लेकर घट स्थापना की। इसके साथ ही पंडाल में नवरात्र महोत्सव की धार्मिक गतिविधियों की शुरुआत हुई।</p>
<p>आशापुरी मित्र मंडल के सदस्यों और श्रद्धालुओं ने प्रतिमा स्थापना के अवसर पर मां दुर्गा की आराधना की। पूजा के बाद भक्तों ने माता के जयकारे लगाए। नवरात्र के पहले दिन से ही नगर में धार्मिक उत्साह दिखाई दे रहा है। मंदिरों और पंडालों में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।</p>
<h3><strong>भजनों के साथ निकली यात्रा</strong></h3>
<p>चल समारोह में शामिल श्रद्धालु धार्मिक भजनों पर थिरकते हुए आगे बढ़े। डीजे के साथ ढोल-नगाड़ों की संगत ने यात्रा को उत्सवमय बनाया। तलेन-आसारेटा रोड से निकली यह यात्रा नाना गोया और सदर बाजार से गुजरकर गांधी चौक पहुंची। इसके बाद प्रतिमा को बस स्टैंड स्थित मां आशापुरी पंडाल में लाया गया। आयोजन के दौरान भक्तों ने पूरे मार्ग में माता के जयकारे लगाए और नवरात्र की शुभकामनाएं साझा कीं।</p>
<p>मां दुर्गा की प्रतिमा को पंडाल तक लाने और स्थापना की तैयारियों में आशापुरी मित्र मंडल के सदस्यों ने सहभागिता की। पंडित गौरव शर्मा के मार्गदर्शन में पूजा की प्रक्रिया पूरी की गई। प्रतिमा स्थापना के बाद श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर परिवार और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।</p>
<h3><strong>नगर में बना भक्तिमय माहौल</strong></h3>
<p>शारदीय नवरात्र के अवसर पर पड़ाना सहित आसपास के इलाकों में भी उत्साह का माहौल है। नगर में निकले चल समारोह और पंडाल में प्रतिमा स्थापना के साथ नवरात्र महोत्सव ने गति पकड़ ली है। धार्मिक भजनों, जयकारों और पूजा-अर्चना से गांधी चौक तथा बस स्टैंड क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा।</p>
<p>आशापुरी मित्र मंडल की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रतिमा स्थापना के दौरान मंडल के पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने पंडाल पहुंचकर मां दुर्गा की पूजा की। नवरात्र के दौरान नगर में धार्मिक कार्यक्रमों का क्रम जारी रहेगा। प्रतिमा स्थापना के साथ ही पंडाल में मां दुर्गा की आराधना शुरू हो गई और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक महोत्सव में भाग लिया।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि, पहले दिन शुक्र–मंगल के केंद्र दृष्टि योग की चर्चा</title>
		<link>https://swarajvani.com/sharadiya-navratri-begins-october-11-venus-mars-alignment-draws-astrological/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 11:05:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[religious]]></category>
		<category><![CDATA[Astrology]]></category>
		<category><![CDATA[Ghatasthapana]]></category>
		<category><![CDATA[Kendra Drishti Yoga]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Sharadiya Navratri]]></category>
		<category><![CDATA[Shukra Mangal Yoga]]></category>
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					<description><![CDATA[11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि, पहले दिन शुक्र–मंगल के केंद्र दृष्टि योग की चर्चा धर्म डेस्क। शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से होगा। मां दुर्गा की आराधना ... <a title="11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि, पहले दिन शुक्र–मंगल के केंद्र दृष्टि योग की चर्चा" class="read-more" href="https://swarajvani.com/sharadiya-navratri-begins-october-11-venus-mars-alignment-draws-astrological/" aria-label="Read more about 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि, पहले दिन शुक्र–मंगल के केंद्र दृष्टि योग की चर्चा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong style="font-family: inherit; font-size: 42px; font-style: inherit;">11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि, पहले दिन शुक्र–मंगल के केंद्र दृष्टि योग की चर्चा</strong></p>
<div>
<p><strong>धर्म डेस्क।</strong> शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से होगा। मां दुर्गा की आराधना के इस पर्व की शुरुआत घटस्थापना के साथ होती है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार पूजा, व्रत और दुर्गा पाठ करते हैं। इस वर्ष नवरात्रि के पहले दिन शुक्र और मंगल के बीच ‘केंद्र दृष्टि योग’ बनने का दावा भी सामने आया है। साझा ज्योतिषीय खबर में इस संयोग को कुछ राशियों के लिए शुभ बताया गया है। हालांकि, धन लाभ और भाग्योदय संबंधी बातें ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।</p>
<h2><strong>घटस्थापना के साथ शुरू होगी आराधना</strong></h2>
<p>नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। कलश स्थापना के साथ श्रद्धालु मां दुर्गा की उपासना का संकल्प लेते हैं। घरों और मंदिरों में पूजा की तैयारी की जाती है तथा परिवार अपनी परंपरा के अनुसार अनुष्ठान करते हैं।</p>
<p>घटस्थापना का समय तय करते हुए स्थानीय पंचांग देखना आवश्यक है। अलग-अलग स्थानों के सूर्योदय और पंचांगीय गणना के कारण समय में अंतर हो सकता है। इसलिए किसी दूसरे शहर के मुहूर्त को बिना जाँच अपने स्थान पर लागू करने के बजाय स्थानीय जानकारी लें।</p>
<h2><strong>शुक्र और मंगल के संयोग का दावा</strong></h2>
<p>साझा समाचार अंश के अनुसार, 11 अक्टूबर को शुक्र और मंगल के बीच केंद्र दृष्टि योग बनेगा। खबर में इसे नवरात्रि की शुरुआत के साथ बनने वाला विशेष ज्योतिषीय संयोग बताया गया है। उपलब्ध अंश में इसकी विस्तृत गणना अथवा सटीक समय नहीं दिया गया है।</p>
<p>ज्योतिषीय लेखों में ग्रहों की स्थिति और उनके आपसी संबंधों के आधार पर फल बताए जाते हैं। ऐसे विवरण धार्मिक और ज्योतिषीय व्याख्या का हिस्सा हैं। किसी योग को शुभ कहे जाने का अर्थ यह नहीं है कि उससे प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में समान परिणाम आएंगे।</p>
<h2><strong>आर्थिक लाभ के संकेत कैसे समझें?</strong></h2>
<p>मूल खबर के शीर्षक में चार राशियों के लिए धन लाभ का दावा किया गया है। लेकिन दिए गए अंश में उन राशियों के नाम और उनका अलग-अलग फल उपलब्ध नहीं है। इसलिए किसी राशि का नाम अनुमान से जोड़ना सही नहीं होगा।</p>
<p>‘पैसों की बारिश’ जैसी अभिव्यक्ति को निश्चित आर्थिक लाभ का वादा भी नहीं समझना चाहिए। ज्योतिषीय भाषा में ऐसी बातें संभावित शुभ फल के रूप में लिखी जाती हैं। वास्तविक आय, कारोबार और नौकरी की स्थिति व्यक्ति की परिस्थितियों, प्रयासों तथा अवसरों से जुड़ी होती है।</p>
<h2><strong>राशि के साथ व्यक्तिगत संदर्भ भी जरूरी</strong></h2>
<p>सामान्य राशिफल किसी राशि से जुड़े अनेक लोगों के लिए लिखा जाता है। सभी की उम्र, काम, पारिवारिक स्थिति और आर्थिक परिस्थितियां अलग होती हैं। इसी वजह से सामान्य भविष्यफल को हर व्यक्ति पर बिल्कुल समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता।</p>
<p>ज्योतिषीय परंपरा में भी व्यक्तिगत फल बताते समय जन्मकुंडली और अन्य स्थितियों की चर्चा की जाती है। इसलिए किसी एक ग्रहयोग की खबर पढ़कर नौकरी में पदोन्नति, कारोबार में बड़ा लाभ या अचानक धन मिलने का निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।</p>
<h2><strong>नवरात्रि का धार्मिक महत्व</strong></h2>
<p>शारदीय नवरात्रि मां दुर्गा की भक्ति और आराधना का पर्व है। श्रद्धालु इसे आस्था, आत्मसंयम और साधना से जोड़कर मनाते हैं। पूजा की विधि और पारिवारिक परंपराओं में अंतर हो सकता है, लेकिन देवी उपासना इस पर्व का मुख्य केंद्र रहती है।</p>
<p>कई परिवारों में नियमित आरती, मंत्र जाप और धार्मिक पाठ किए जाते हैं। श्रद्धालु अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार पूजा करते हैं। किसी विशेष ग्रहयोग की चर्चा के साथ भी नवरात्रि का मूल धार्मिक भाव भक्ति और श्रद्धा से जुड़ा रहता है।</p>
<h2><strong>पूजा की तैयारी में किन बातों का ध्यान रखें?</strong></h2>
<p>पूजा शुरू करने से पहले आवश्यक सामग्री व्यवस्थित कर लें। घटस्थापना की विधि अथवा समय को लेकर संशय हो तो स्थानीय जानकार से जानकारी लें। सोशल मीडिया पर प्रसारित अलग-अलग समय और दावों को साझा करने से पहले उनका संदर्भ देखना उपयोगी है।</p>
<p>विशेष रूप से राशियों के नाम, ग्रहयोग का समय और लाभ संबंधी विवरण उसी स्रोत से लें जिसमें पूरी जानकारी उपलब्ध हो। अधूरे समाचार अंश के आधार पर अतिरिक्त भविष्यफल जोड़ने से पाठकों तक गलत जानकारी पहुंच सकती है।</p>
<h2><strong>शुभ योग को मान्यता के रूप में देखें</strong></h2>
<p>इस वर्ष नवरात्रि की शुरुआत के साथ शुक्र–मंगल के केंद्र दृष्टि योग की चर्चा सामने आई है। इसे ज्योतिषीय मान्यता के रूप में समझा जा सकता है। उपलब्ध सामग्री से चार लाभकारी राशियों के नाम स्पष्ट नहीं होते।</p>
<p>श्रद्धालु स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा की तैयारी करें। आर्थिक लाभ से जुड़े भविष्यफल को संभावना के रूप में पढ़ें और धन संबंधी निर्णय वास्तविक जानकारी के आधार पर लें। नवरात्रि का पर्व श्रद्धा, अनुशासन और देवी आराधना के साथ मनाएं।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र, हाथी पर होगा मां दुर्गा का आगमन; सुख-समृद्धि का प्रतीक है गज सवारी</title>
		<link>https://swarajvani.com/sharadiya-navratri-2026-begins-october-11-maa-durgas-elephant-arrival-symbolizes/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 07 Oct 2026 09:54:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[religious]]></category>
		<category><![CDATA[Durga Puja]]></category>
		<category><![CDATA[Elephant Arrival]]></category>
		<category><![CDATA[Ghatasthapana]]></category>
		<category><![CDATA[Maa Durga]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri October 11]]></category>
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					<description><![CDATA[11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र, हाथी पर होगा मां दुर्गा का आगमन; सुख-समृद्धि का प्रतीक है गज सवारी धर्म डेस्क। शक्ति की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र इस वर्ष 11 ... <a title="11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र, हाथी पर होगा मां दुर्गा का आगमन; सुख-समृद्धि का प्रतीक है गज सवारी" class="read-more" href="https://swarajvani.com/sharadiya-navratri-2026-begins-october-11-maa-durgas-elephant-arrival-symbolizes/" aria-label="Read more about 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र, हाथी पर होगा मां दुर्गा का आगमन; सुख-समृद्धि का प्रतीक है गज सवारी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र, हाथी पर होगा मां दुर्गा का आगमन; सुख-समृद्धि का प्रतीक है गज सवारी</strong></h1>
<p><strong>धर्म डेस्क।</strong> शक्ति की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र इस वर्ष 11 अक्टूबर, रविवार से प्रारंभ होगा। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होने वाले इस पर्व में श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना करेंगे। दी गई जानकारी के अनुसार, नवरात्र का शुभारंभ चित्रा नक्षत्र में होगा। रविवार से नवरात्र शुरू होने के कारण धार्मिक परंपरा में मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जाएगा। गज सवारी को सुख, समृद्धि, स्थायित्व और वैभव का प्रतीक माना जाता है।</p>
<h3><strong>हाथी पर आगमन का धार्मिक महत्व</strong></h3>
<p>नवरात्र में देवी के आगमन की सवारी को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता रहती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्र आरंभ होने वाले दिन के आधार पर देवी की आगमन सवारी निर्धारित मानी जाती है। इस बार रविवार होने के कारण हाथी को मां के आगमन का वाहन बताया गया है।</p>
<p>हाथी पर देवी का आगमन श्रद्धालुओं के लिए शुभ संकेत माना जाता है। इसे आर्थिक प्रगति, खुशहाली और लोककल्याण से जोड़कर देखा जाता है। ये फल धार्मिक आस्था और परंपरा का हिस्सा हैं। भक्त मां दुर्गा से परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन में सकारात्मकता की प्रार्थना करते हैं।</p>
<h3><strong>नौ स्वरूपों की होगी आराधना</strong></h3>
<p>शारदीय नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इनमें शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं। प्रत्येक स्वरूप के साथ अलग धार्मिक महत्व और उपासना परंपरा जुड़ी है।</p>
<p>श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजन, मंत्र जाप, दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। अनेक भक्त व्रत रखकर देवी की साधना करते हैं। नवरात्र को श्रद्धा के साथ संयम, अनुशासन और मन की शुद्धि का अवसर भी माना जाता है। पूजा का केंद्र देवी के प्रति भक्ति और समर्पण रहता है।</p>
<h3><strong>घटस्थापना से शुरू होगा पूजन</strong></h3>
<p>नवरात्र के प्रथम दिन घटस्थापना अथवा कलश स्थापना के साथ देवी पूजन का शुभारंभ किया जाता है। श्रद्धालु पूजा स्थल की साफ-सफाई कर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करते हैं। इसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार कलश स्थापना, दीप प्रज्ज्वलन और पूजा का संकल्प लिया जाता है।</p>
<p>कुछ परिवारों में अखंड ज्योति जलाने की परंपरा है, जबकि अन्य श्रद्धालु सुबह और शाम नियमित आरती करते हैं। घटस्थापना के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ समय की जानकारी लेना उचित रहेगा। उपलब्ध समाचार विवरण में घटस्थापना का निश्चित मुहूर्त नहीं दिया गया है, इसलिए किसी अनुमानित समय को मुहूर्त नहीं माना जाना चाहिए।</p>
<h3><strong>साधना में शुभ योगों का महत्व</strong></h3>
<p>धार्मिक मान्यताओं में नवरात्र के दौरान बनने वाले शुभ योगों को साधना और पूजन के लिए विशेष माना जाता है। अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का उल्लेख इसी संदर्भ में किया जाता है। श्रद्धालु इन अवसरों पर देवी आराधना और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।</p>
<p>दी गई खबर के अनुसार, इस बार महाअष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इसे पूजा और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। हालांकि, योग के आरंभ और समाप्ति का समय उपलब्ध विवरण में नहीं है। विशेष अनुष्ठान करने वाले श्रद्धालु स्थानीय पंचांग या जानकार पुरोहित से समय की पुष्टि कर सकते हैं।</p>
<h3><strong>श्रद्धा और सेवा का पर्व</strong></h3>
<p>नवरात्र में अष्टमी या नवमी पर पारिवारिक परंपरा के अनुसार कन्या पूजन और भोजन कराने का विधान भी प्रचलित है। श्रद्धालु देवी आराधना के साथ जरूरतमंदों की सहायता और सेवा कार्य करते हैं। पर्व का संदेश भक्ति, करुणा और सद्भाव से भी जुड़ा है।</p>
<p>11 अक्टूबर से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र में भक्त मां दुर्गा से सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करेंगे। हाथी पर आगमन की मान्यता इस वर्ष के पर्व को श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व प्रदान करती है।</p>
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