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	<title>Bhojshala Dhar &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>Bhojshala Dhar &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>धार भोजशाला को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान, केंद्र सरकार ने स्मारक डाक टिकट जारी करने के प्रस्ताव को दी मंजूरी</title>
		<link>https://swarajvani.com/centre-clears-proposal-for-commemorative-stamp-on-dhar-bhojshal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 03 Aug 2026 13:01:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Dhar]]></category>
		<category><![CDATA[Bhojshala Dhar]]></category>
		<category><![CDATA[Commemorative Stamp India]]></category>
		<category><![CDATA[Jyotiraditya Scindia]]></category>
		<category><![CDATA[Madhya Pradesh News]]></category>
		<category><![CDATA[Savitri Thakur]]></category>
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					<description><![CDATA[धार भोजशाला को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान, केंद्र सरकार ने स्मारक डाक टिकट जारी करने के प्रस्ताव को दी मंजूरी धार। मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले ... <a title="धार भोजशाला को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान, केंद्र सरकार ने स्मारक डाक टिकट जारी करने के प्रस्ताव को दी मंजूरी" class="read-more" href="https://swarajvani.com/centre-clears-proposal-for-commemorative-stamp-on-dhar-bhojshal/" aria-label="Read more about धार भोजशाला को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान, केंद्र सरकार ने स्मारक डाक टिकट जारी करने के प्रस्ताव को दी मंजूरी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>धार भोजशाला को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान, केंद्र सरकार ने स्मारक डाक टिकट जारी करने के प्रस्ताव को दी मंजूरी</strong></h1>
<p><strong>धार।</strong> मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले <strong>भोजशाला परिसर</strong> को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने जा रही है। केंद्र सरकार ने भोजशाला के सम्मान में <strong>स्मारक डाक टिकट (Commemorative Postage Stamp)</strong> जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री <strong>सावित्री ठाकुर</strong> की पहल पर केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री <strong>ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया</strong> ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। इस फैसले को धार जिले, मध्य प्रदेश और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।</p>
<p>स्मारक डाक टिकट जारी होने के बाद भोजशाला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी और इसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत को देश-विदेश तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। साथ ही इससे प्रदेश में सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।</p>
<h2><strong>भोजशाला पर जारी होगा स्मारक डाक टिकट</strong></h2>
<p>केंद्रीय संचार मंत्रालय ने भोजशाला पर स्मारक डाक टिकट जारी करने के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी है। मंत्रालय की ओर से इस संबंध में स्वीकृति पत्र भी जारी किया गया है।</p>
<p>यह निर्णय लंबे समय से उठाई जा रही उस मांग के बाद लिया गया है, जिसमें भोजशाला की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने की बात कही गई थी।</p>
<p>स्मारक डाक टिकट किसी भी ऐतिहासिक स्थल, महान व्यक्तित्व या राष्ट्रीय महत्व की धरोहर को सम्मानित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। ऐसे टिकट देश की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।</p>
<h2><strong>केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर की पहल लाई रंग</strong></h2>
<p>भोजशाला पर डाक टिकट जारी कराने की पहल केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री <strong>सावित्री ठाकुर</strong> ने की थी।</p>
<p>उन्होंने <strong>1 जून 2026</strong> को केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया को पत्र लिखकर भोजशाला की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता का उल्लेख करते हुए इस स्थल पर स्मारक डाक टिकट जारी करने का अनुरोध किया था।</p>
<p>पत्र में उन्होंने कहा था कि भोजशाला भारतीय सभ्यता, संस्कृति और इतिहास की अमूल्य धरोहर है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर विशेष सम्मान मिलना चाहिए।</p>
<h2><strong>सिंधिया से व्यक्तिगत मुलाकात में रखा था प्रस्ताव</strong></h2>
<p>केवल पत्र लिखने तक ही यह पहल सीमित नहीं रही।</p>
<p>सावित्री ठाकुर ने बाद में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर भी इस विषय पर विस्तार से चर्चा की।</p>
<p>उन्होंने भोजशाला की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक महत्व और क्षेत्र की जनभावनाओं से जुड़े पक्षों को विस्तार से रखा।</p>
<p>बताया जाता है कि मंत्री ने इस प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।</p>
<h2><strong>केंद्रीय संचार मंत्रालय ने दी मंजूरी</strong></h2>
<p>केंद्रीय संचार मंत्रालय ने प्रस्ताव की समीक्षा के बाद इसे राष्ट्रीय महत्व का विषय मानते हुए स्वीकृति प्रदान कर दी।</p>
<p>मंत्रालय की ओर से <strong>29 जुलाई 2026</strong> को जारी पत्र के माध्यम से इस प्रस्ताव की मंजूरी की औपचारिक जानकारी दी गई।</p>
<p>इसके बाद धार सहित पूरे मध्य प्रदेश में इस निर्णय का स्वागत किया जा रहा है।</p>
<h2><strong>क्या होता है स्मारक डाक टिकट?</strong></h2>
<p>स्मारक डाक टिकट (Commemorative Stamp) भारत सरकार द्वारा विशेष अवसरों, ऐतिहासिक स्थलों, महान व्यक्तित्वों, सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय आंदोलनों या महत्वपूर्ण घटनाओं के सम्मान में जारी किया जाता है।</p>
<p>इन डाक टिकटों का उद्देश्य केवल डाक सेवा तक सीमित नहीं होता बल्कि यह देश की विरासत, इतिहास और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी माध्यम बनते हैं।</p>
<p>फिलेटली (डाक टिकट संग्रह) के क्षेत्र में ऐसे टिकटों का विशेष महत्व होता है और इन्हें संग्रहकर्ता भी संजोकर रखते हैं।</p>
<h2><strong>भोजशाला का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व</strong></h2>
<p>धार स्थित भोजशाला भारत के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में से एक मानी जाती है।</p>
<p>इतिहासकारों के अनुसार यह स्थल <strong>परमार वंश के महान शासक राजा भोज</strong> से जुड़ा हुआ है।</p>
<p>भोजशाला को भारतीय ज्ञान, शिक्षा, संस्कृति और स्थापत्य कला की महत्वपूर्ण धरोहर माना जाता है।</p>
<p>इस स्थल का उल्लेख लंबे समय से इतिहास, पुरातत्व और सांस्कृतिक अध्ययनों में किया जाता रहा है।</p>
<p>इसके कारण भोजशाला देशभर के इतिहास प्रेमियों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी रहती है।</p>
<h2><strong>राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी नई पहचान</strong></h2>
<p>स्मारक डाक टिकट जारी होने के बाद भोजशाला की पहचान केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि देश और विदेश में भी इसे नई पहचान मिलेगी।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि डाक टिकट पर किसी ऐतिहासिक स्थल का चित्र प्रकाशित होना उसके महत्व को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम होता है।</p>
<p>इससे पर्यटन और सांस्कृतिक अध्ययन दोनों को लाभ मिलेगा।</p>
<h2><strong>सावित्री ठाकुर ने क्या कहा?</strong></h2>
<p>केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने इस निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा—</p>
<blockquote><p><strong>&#8220;भोजशाला केवल धार या मध्य प्रदेश की धरोहर नहीं है, बल्कि यह भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत का अमूल्य प्रतीक है।&#8221;</strong></p></blockquote>
<p>उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक स्थल पर स्मारक डाक टिकट जारी होने से देश-विदेश में इसकी पहचान और मजबूत होगी।</p>
<p>साथ ही नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति, इतिहास और विरासत के प्रति अधिक जागरूक होगी।</p>
<h2><strong>पर्यटन को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन</strong></h2>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय का सबसे बड़ा लाभ पर्यटन क्षेत्र को मिल सकता है।</p>
<p>जब किसी ऐतिहासिक स्थल को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष सम्मान मिलता है तो वहां पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना रहती है।</p>
<p>धार जिले में आने वाले पर्यटक भोजशाला के साथ-साथ मांडू और आसपास के अन्य ऐतिहासिक स्थलों का भी भ्रमण करते हैं।</p>
<p>इससे स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग, परिवहन और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा।</p>
<h2><strong>स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल</strong></h2>
<p>केंद्र सरकार के इस निर्णय के बाद धार जिले के नागरिकों, सामाजिक संगठनों और इतिहास प्रेमियों में खुशी का माहौल है।</p>
<p>लोगों का मानना है कि यह फैसला जिले की ऐतिहासिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करेगा।</p>
<p>स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी इस पहल का स्वागत किया है।</p>
<h2><strong>भारतीय विरासत को मिलेगा नया सम्मान</strong></h2>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहरों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करना आवश्यक है।</p>
<p>स्मारक डाक टिकट केवल एक डाक टिकट नहीं बल्कि इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक होता है।</p>
<p>ऐसे प्रयासों से देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलती है।</p>
<h2><strong>आगे की प्रक्रिया क्या होगी?</strong></h2>
<p>प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब डाक विभाग द्वारा स्मारक डाक टिकट की डिजाइन, प्रकाशन और जारी करने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।</p>
<p>इसके बाद आधिकारिक रूप से भोजशाला पर आधारित स्मारक डाक टिकट जारी किया जाएगा।</p>
<p>टिकट जारी होने की तिथि और उससे जुड़े कार्यक्रम की घोषणा संबंधित विभाग द्वारा अलग से की जाएगी।</p>
<h2><strong>धार के लिए क्यों है यह ऐतिहासिक फैसला?</strong></h2>
<p>धार जिले के लिए यह निर्णय कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है—</p>
<ul>
<li>भोजशाला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।</li>
<li>ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।</li>
<li>सांस्कृतिक पर्यटन को गति मिलेगी।</li>
<li>स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी।</li>
<li>देश-विदेश में धार की पहचान मजबूत होगी।</li>
</ul>
<h2><strong>निष्कर्ष</strong></h2>
<p>केंद्र सरकार द्वारा धार की ऐतिहासिक भोजशाला पर स्मारक डाक टिकट जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी देना मध्य प्रदेश के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर की पहल और केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया की स्वीकृति के बाद अब भोजशाला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह निर्णय न केवल भारतीय सांस्कृतिक विरासत के सम्मान का प्रतीक है, बल्कि इससे धार जिले में पर्यटन, ऐतिहासिक जागरूकता और सांस्कृतिक संरक्षण को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>धार की भोजशाला की Jain पहचान पर राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ का आधिकारिक बयान</title>
		<link>https://swarajvani.com/national-jinshasan-ekta-sangh-presents-official-stand-on-jain/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Mar 2026 11:11:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[JAINS]]></category>
		<category><![CDATA[Bhojshala Dhar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain heritage Madhya Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[Jain identity Bhojshala]]></category>
		<category><![CDATA[National Jinshasan Ekta Sangh]]></category>
		<category><![CDATA[Salekchand Jain research]]></category>
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					<description><![CDATA[धार की ऐतिहासिक भोजशाला की Jain पहचान: राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ का आधिकारिक पक्ष धार (मध्य प्रदेश): धार स्थित ऐतिहासिक स्थल भोजशाला को लेकर राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने अपना ... <a title="धार की भोजशाला की Jain पहचान पर राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ का आधिकारिक बयान" class="read-more" href="https://swarajvani.com/national-jinshasan-ekta-sangh-presents-official-stand-on-jain/" aria-label="Read more about धार की भोजशाला की Jain पहचान पर राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ का आधिकारिक बयान">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1 data-start="174" data-end="258"><strong>धार की ऐतिहासिक भोजशाला की Jain पहचान: राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ का आधिकारिक पक्ष</strong></h1>
<p data-start="260" data-end="284"><strong data-start="260" data-end="282">धार (मध्य प्रदेश):</strong></p>
<p data-start="286" data-end="661">धार स्थित ऐतिहासिक स्थल <strong data-start="310" data-end="321">भोजशाला</strong> को लेकर राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने अपना आधिकारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। संघ के वरिष्ठ प्रतिनिधि <strong data-start="426" data-end="445">राजेश जैन दद्दू</strong> और <strong data-start="449" data-end="461">मयंक जैन</strong> ने बताया कि समाज के प्रतिष्ठित शोधकर्ता एवं समाजसेवी <strong data-start="515" data-end="538">श्री सलेकचंद जी जैन</strong> ने वर्षों के शोध और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट किया है कि भोजशाला <strong data-start="615" data-end="655">मूलतः जैन धर्म और संस्कृति का हिस्सा</strong> है।</p>
<p data-start="663" data-end="932">संघ ने शासन-प्रशासन से अपील की है कि इस पावन स्थल की <strong data-start="716" data-end="730">जैन विरासत</strong> को संरक्षित किया जाए और इसके ऐतिहासिक महत्व को व्यापक रूप से स्वीकार किया जाए। यह स्थल न केवल धार का बल्कि पूरे भारत के जैन समाज के लिए सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।</p>
<h2 data-start="939" data-end="969"><strong>ब्रिटिश म्यूजियम के प्रमाण</strong></h2>
<p data-start="971" data-end="1276">श्री सलेकचंद जी Jain के अनुसार, <strong data-start="1002" data-end="1033">लंदन स्थित ब्रिटिश म्यूजियम</strong> में संरक्षित अम्बिका देवी और जैन सरस्वती देवी की प्रतिमाएं, जिनमें <strong data-start="1101" data-end="1130">5 तीर्थंकरों की प्रतिमाएं</strong> शामिल हैं, मूलतः धार स्थित भोजशाला से ही प्राप्त हुई थीं। ब्रिटिश म्यूजियम के रिकॉर्ड में इन्हें “<strong>Jain प्रतिमा</strong>” के रूप में दर्ज किया गया है।</p>
<p data-start="1278" data-end="1488">यह तथ्य स्पष्ट करता है कि भोजशाला केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं है, बल्कि यह <strong data-start="1352" data-end="1395">जैन धर्म की प्राचीन और सांस्कृतिक धरोहर</strong> का प्रतीक है। इसे सामान्य सांस्कृतिक स्थल के रूप में मान लेना ऐतिहासिक दृष्टि से गलत होगा।</p>
<h3 data-start="1495" data-end="1537"><strong>ऐतिहासिक संदर्भ और विद्वानों का समर्थन</strong></h3>
<p data-start="1539" data-end="1765">सलेकचंद जी जैन ने ब्रिटिश विद्वान <strong data-start="1573" data-end="1584">फर्गुसन</strong> की पुस्तक <strong data-start="1595" data-end="1620">‘Indian Architecture’</strong> और ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा किए गए दौरों का हवाला देते हुए यह सिद्ध किया कि भोजशाला का निर्माण <strong data-start="1717" data-end="1749">जैन स्थापत्य और मंदिर परंपरा</strong> पर आधारित है।</p>
<p data-start="1767" data-end="2006">स्थल पर पाए गए अवशेषों और स्थापत्य कला के प्रमाण यह दर्शाते हैं कि यह स्थल प्राचीन काल से <strong data-start="1857" data-end="1903">जैन धार्मिक गतिविधियों और सांस्कृतिक आयोजन</strong> का केंद्र रहा है। यह स्थल जैन धर्म के इतिहास और स्थापत्य कला को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।</p>
<h3 data-start="2013" data-end="2056"><strong>भोजशाला में सर्वेक्षण और स्थापत्य पहचान</strong></h3>
<p data-start="2058" data-end="2160">वर्तमान सर्वेक्षण में पाए गए अवशेषों के आधार पर सलेकचंद जी जैन ने निम्नलिखित विशेषताएं उजागर की हैं:</p>
<ol data-start="2162" data-end="2762">
<li data-start="2162" data-end="2340">
<p data-start="2165" data-end="2340"><strong data-start="2165" data-end="2185">प्राकृत शिलालेख:</strong><br data-start="2185" data-end="2188" />भोजशाला में पाए गए शिलालेखों की भाषा <strong data-start="2228" data-end="2239">प्राकृत</strong> है, जो जैन आगमों की पवित्र भाषा रही है। यह स्पष्ट रूप से इस स्थल की जैन पहचान को प्रमाणित करता है।</p>
</li>
<li data-start="2342" data-end="2529">
<p data-start="2345" data-end="2529"><strong data-start="2345" data-end="2369">तीर्थंकरों के लांछन:</strong><br data-start="2369" data-end="2372" />शंख, कछुआ, अश्व और मकर जैसे प्रतीक स्पष्ट रूप से जैन तीर्थंकरों से जुड़े हैं। इन्हें केवल सांस्कृतिक प्रतीक मान लेना <strong data-start="2492" data-end="2521">ऐतिहासिक दृष्टि से अनुचित</strong> होगा।</p>
</li>
<li data-start="2531" data-end="2762">
<p data-start="2534" data-end="2762"><strong data-start="2534" data-end="2554">कला और स्थापत्य:</strong><br data-start="2554" data-end="2557" />भोजशाला में पाए गए शिल्प और स्तंभों की बनावट <strong data-start="2605" data-end="2642">माउंट आबू के देलवाड़ा जैन मंदिरों</strong> जैसी है। इस स्थापत्य शैली से स्पष्ट होता है कि भोजशाला की पहचान <strong data-start="2707" data-end="2743">जैन धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा</strong> से जुड़ी हुई है।</p>
</li>
</ol>
<p data-start="2764" data-end="3017">राजेश जैन दद्दू ने पूरे जैन समाज से अपील की कि वे <strong data-start="2814" data-end="2871">धरोहर के संरक्षण और जागरूकता फैलाने में सक्रिय योगदान</strong> दें। मयंक जैन ने कहा कि यद्यपि जैन और हिंदू समाज सदैव सहोदर रहे हैं, परंतु इस पावन भूमि की <strong data-start="2963" data-end="2985">वास्तविक जैन पहचान</strong> को अक्षुण्ण रखना अनिवार्य है।</p>
<h3 data-start="3024" data-end="3056"><strong>संघ का संदेश और समाज से अपील</strong></h3>
<p data-start="3058" data-end="3235"><strong data-start="3058" data-end="3088">राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ</strong> का कहना है कि भोजशाला की <strong data-start="3114" data-end="3145">जैन विरासत को संरक्षित करना</strong> केवल स्थानीय समाज के लिए नहीं, बल्कि पूरे भारत के जैन समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।</p>
<p data-start="3237" data-end="3265">संघ ने अपने संदेश में कहा:</p>
<blockquote data-start="3266" data-end="3467">
<p data-start="3268" data-end="3467"><em><strong>&#8220;सलेकचंद जी जैन ने जिस निष्ठा और मेहनत से भोजशाला की जैन विरासत को संरक्षित करने का संकल्प लिया है, वह पूरे भारत के जैन समाज के लिए प्रेरणास्पद है। हमारी प्राचीन धरोहर के प्रति चुप रहना अन्याय होगा।&#8221;</strong></em></p>
</blockquote>
<p data-start="3469" data-end="3590">संघ सभी जैन धर्मावलंबियों से अनुरोध करता है कि वे <strong data-start="3519" data-end="3550">शांति और संवैधानिक तरीके से</strong> इस पावन स्थल की रक्षा में योगदान दें।</p>
<h3 data-start="3597" data-end="3639"><strong>भोजशाला की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्वता</strong></h3>
<p data-start="3641" data-end="3738">भोजशाला केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं है, बल्कि यह <strong data-start="3689" data-end="3732">जैन धर्म और संस्कृति की पहचान का प्रतीक</strong> है।</p>
<ul data-start="3740" data-end="4020">
<li data-start="3740" data-end="3824">
<p data-start="3742" data-end="3824">यह स्थल प्राचीन जैन मंदिरों और तीर्थंकरों के अवशेषों का प्रमाण प्रस्तुत करता है।</p>
</li>
<li data-start="3825" data-end="3911">
<p data-start="3827" data-end="3911">भोजशाला की स्थापत्य कला और शिल्प शैली जैन धर्म की प्राचीन परंपरा की झलक दिखाती है।</p>
</li>
<li data-start="3912" data-end="4020">
<p data-start="3914" data-end="4020">यह स्थल जैन समाज के लिए <strong data-start="3938" data-end="3982">धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जागरूकता</strong> फैलाने में अहम भूमिका निभा सकता है।</p>
</li>
</ul>
<h3 data-start="4027" data-end="4055"><strong>सलेकचंद जी Jain की भूमिका</strong></h3>
<p data-start="4057" data-end="4310">श्री सलेकचंद जी Jain ने भोजशाला की जैन विरासत को बचाने और संरक्षित करने के लिए वर्षों तक शोध और प्रयास किए हैं। उनके प्रयास यह दिखाते हैं कि <strong data-start="4197" data-end="4242">संरक्षण, जागरूकता और प्रमाण आधारित अध्ययन</strong> के माध्यम से प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सकता है।</p>
<p data-start="4312" data-end="4490">उनके शोध ने यह सिद्ध किया कि भोजशाला में पाए गए अवशेष और स्थापत्य शैली <strong data-start="4383" data-end="4420">माउंट आबू के देलवाड़ा जैन मंदिरों</strong> से मिलती-जुलती है, जिससे इस स्थल की जैन पहचान और भी स्पष्ट होती है।</p>
<h3 data-start="4497" data-end="4509"><strong>निष्कर्ष</strong></h3>
<p data-start="4511" data-end="4805">धार की <strong data-start="4518" data-end="4529">भोजशाला</strong> की जैन पहचान को प्रमाणित करना और उसकी सुरक्षा करना <strong data-start="4581" data-end="4611">राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ</strong> और सलेकचंद जी जैन का प्रमुख उद्देश्य है। यह पहल न केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को <strong data-start="4742" data-end="4783">जैन धर्म और स्थापत्य की प्राचीन धरोहर</strong> से परिचित कराती है।</p>
<p data-start="4807" data-end="4942">संघ और सलेकचंद जी जैन का प्रयास यह संदेश देता है कि <strong data-start="4859" data-end="4898">धरोहर का संरक्षण और जागरूकता फैलाना</strong> प्रत्येक जैन समाज सदस्य की जिम्मेदारी है।</p>
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