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	<title>Amritrasa Shriji Maharaj &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>Amritrasa Shriji Maharaj &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>छोटे से महिदपुर रोड में 52 तपस्वियों ने रचा नया इतिहास, कंकू छापा वधामणे में उमड़ी आस्था</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 06 Sep 2026 16:24:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महिदपुर रोड कंकू छापा वधामणा में 52 सिद्धि तप तपस्वियों का भव्य वधामणा हुआ। श्रद्धालु आस्था, भक्ति और गुलाल के रंग में रंगकर नाचते-गाते नजर आए। महिदपुर रोड में कंकू ... <a title="छोटे से महिदपुर रोड में 52 तपस्वियों ने रचा नया इतिहास, कंकू छापा वधामणे में उमड़ी आस्था" class="read-more" href="https://swarajvani.com/mahidpur-road-kanku-chhapa-vadhamna/" aria-label="Read more about छोटे से महिदपुर रोड में 52 तपस्वियों ने रचा नया इतिहास, कंकू छापा वधामणे में उमड़ी आस्था">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>महिदपुर रोड कंकू छापा वधामणा में 52 सिद्धि तप तपस्वियों का भव्य वधामणा हुआ। श्रद्धालु आस्था, भक्ति और गुलाल के रंग में रंगकर नाचते-गाते नजर आए।</p>
<h1>महिदपुर रोड में कंकू छापा वधामणे का भव्य आयोजन, 52 सिद्धि तप तपस्वियों ने रचा नया इतिहास</h1>
<p class="isSelectedEnd"><strong>महिदपुर रोड।</strong> <strong>कंकू छापा वधामणे का भव्य आयोजन</strong> महिदपुर रोड नगर में श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। 52 सिद्धि तप तपस्वियों के सप्त दिवसीय वधामणे के मंगलकारी आयोजन के अंतिम दिवस कुमकुम छापा वधामणा आयोजित किया गया। दो घंटे तक चले इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालु आस्था, भक्ति और गुलाल के रंग में रंगकर नाचते-गाते भक्ति में सराबोर नजर आए।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>रिपोर्टर – सचिन भंडारी, महिदपुर रोड</strong></p>
<p class="isSelectedEnd">पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब आदि ठाणा का चातुर्मास हेतु महिदपुर रोड नगर में मंगल प्रवेश होने के बाद से ही पूरे नगर का माहौल धर्ममय बना हुआ है। चातुर्मास में जैन समाज के साथ-साथ पूरा नगर धर्म और आस्था के रंग में रंगा हुआ है। त्याग, तपस्या, धर्म आराधना, साधना और ज्ञान गंगा की झड़ी लगी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रतिदिन सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं प्रवचन एवं धार्मिक गतिविधियों से जुड़कर धर्म लाभ प्राप्त कर अपने मनुष्य जीवन को सफल बना रहे हैं।</p>
<p><a href="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-06-at-4.32.17-PM-2.jpeg"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-354368" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-06-at-4.32.17-PM-2.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026 09 06 at 4.32.17 PM 2" width="1280" height="591" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-06-at-4.32.17-PM-2.jpeg 1280w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-06-at-4.32.17-PM-2-300x139.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-06-at-4.32.17-PM-2-1024x473.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-06-at-4.32.17-PM-2-768x355.jpeg 768w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></a></p>
<h2>52 सिद्धि तप तपस्वियों का कंकू छापा वधामणा</h2>
<p class="isSelectedEnd">जैन समाज मीडिया प्रभारी <strong>सचिन भंडारी</strong> ने बताया कि 52 सिद्धि तप तपस्वियों के सप्त दिवसीय वधामणे के मंगलकारी आयोजन के अंतिम दिवस <strong>कुमकुम छापा वधामणा का भव्य आयोजन</strong> किया गया। इसमें सभी तपस्वियों को कुमकुम के छापे लगाए गए।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस मंगलकारी आयोजन का लाभ चौरडिया परिवार की बहन-बेटी <strong>सुलोचना रांका इंदौर, अमित ओस्तवाल ताल, अर्चना मेहता नामली, पायल चत्तर नामली और सोनम भंडारी महिदपुर रोड</strong> के द्वारा लिया गया।</p>
<h2>धार्मिक भक्ति प्रभावना में परिवारों ने लिया लाभ</h2>
<p class="isSelectedEnd">आज की धार्मिक भक्ति प्रभावना का लाभ <strong>सुनील कुमार, गौरव कुमार, प्रीतेशकुमार भंडारी परिवार</strong> ने लिया। सिद्धि तप एवं मासक्षमण तपस्वियों की प्रभावना का लाभ <strong>अशोक कुमार, दिलीप कुमार तलेरा परिवार</strong> द्वारा लिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रवचन प्रभावना का लाभ <strong>जितेंद्र कुमार, अतुल कुमार रांका परिवार इंदौर</strong> तथा <strong>दिलीप कुमार, मनोज कुमार नंदेचा परिवार नागदा जंक्शन</strong> द्वारा लिया गया।</p>
<h2>दो घंटे तक भक्ति और आस्था के रंग में रंगे श्रद्धालु</h2>
<p class="isSelectedEnd">करीब दो घंटे चले <strong>कंकू छापा वधामणे के भव्य आयोजन</strong> में सभी श्रद्धालुओं ने आस्था, भक्ति और गुलाल के रंग में रंगकर नाचते-गाते हुए अपनी श्रद्धा व्यक्त की। पूरा वातावरण धर्ममय और भक्तिमय हो गया। तपस्वियों के प्रति श्रद्धा और अनुमोदना का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।</p>
<p>इस मंगलकारी अवसर पर <strong>सकल जैन श्री संघ</strong> ने उपस्थित होकर धर्म लाभ प्राप्त किया और आयोजन को सफल बनाया। महिदपुर रोड जैसे छोटे से नगर में तपस्वियों की साधना और धार्मिक आयोजनों ने नया इतिहास रच दिया है। चातुर्मास के दौरान लगातार हो रहे त्याग, तपस्या, साधना, आराधना और प्रवचनों से नगर में धर्म की प्रभावना बढ़ रही है।</p>
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		<title>सिद्धि तप के तृतीय दिवस तपस्वियों का अक्षत से हुआ वधामणा, धर्मसभा में उमड़े श्रद्धालु</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 08:31:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[Amritrasa Shriji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Mahidpur Road]]></category>
		<category><![CDATA[Mahidpur Road News]]></category>
		<category><![CDATA[Sadhvi Dr Amritrasa Shriji]]></category>
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					<description><![CDATA[सिद्धि तप के तृतीय दिवस तपस्वियों का अक्षत से हुआ वधामणा, धर्मसभा में उमड़े श्रद्धालु साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा- ज्ञान अर्जन का प्रमुख माध्यम है धार्मिक पाठशाला, बच्चों ... <a title="सिद्धि तप के तृतीय दिवस तपस्वियों का अक्षत से हुआ वधामणा, धर्मसभा में उमड़े श्रद्धालु" class="read-more" href="https://swarajvani.com/siddhi-tap-in-mahidpur-road-religious-pathshala-is-the-key-source-of-spiritual-knowledge-says-sadhvi-dr-amritrasa-shriji/" aria-label="Read more about सिद्धि तप के तृतीय दिवस तपस्वियों का अक्षत से हुआ वधामणा, धर्मसभा में उमड़े श्रद्धालु">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>सिद्धि तप के तृतीय दिवस तपस्वियों का अक्षत से हुआ वधामणा, धर्मसभा में उमड़े श्रद्धालु</strong></h1>
<h2><strong>साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा- ज्ञान अर्जन का प्रमुख माध्यम है धार्मिक पाठशाला, बच्चों में धार्मिक संस्कार विकसित करने के लिए पाठशाला भेजना जरूरी</strong></h2>
<p><strong>महिदपुर रोड।</strong> श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के लिए विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब के पावन सान्निध्य में सिद्धि तप के तृतीय दिवस विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर सिद्धि तप करने वाले तपस्वियों का अक्षत के माध्यम से वधामणा किया गया। बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं ने आयोजन में शामिल होकर तपस्वियों की अनुमोदना की और धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
<p>बुधवार को आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब ने जीवन में धार्मिक ज्ञान और संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि धर्म की साधना और आराधना को सही रूप में समझने के लिए ज्ञान आवश्यक है। ज्ञान के अभाव में केवल क्रिया करने से उसके वास्तविक उद्देश्य को समझना कठिन हो जाता है।</p>
<h3><strong>धार्मिक ज्ञान जीवन के लिए परम आवश्यक</strong></h3>
<p>साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा कि जीवन में धर्म का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने धर्मसभा में संदेश देते हुए कहा, <strong>“ज्ञान बिना सब क्रिया झूठी, करें आवश्यक अनुसारी।”</strong> इसका आशय समझाते हुए उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति को धार्मिक क्रियाओं का ज्ञान और उनके पीछे का उद्देश्य समझ में नहीं आता, तब तक केवल बाहरी क्रियाएं करना पर्याप्त नहीं है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि ज्ञान व्यक्ति को सही और गलत के बीच अंतर समझने की क्षमता प्रदान करता है। धार्मिक जीवन में भी ज्ञान के साथ की गई आराधना साधक को उसके वास्तविक उद्देश्य की ओर आगे बढ़ाती है।</p>
<h3><strong>बच्चों को धार्मिक पाठशाला भेजने का किया आह्वान</strong></h3>
<p>साध्वी श्रीजी ने वर्तमान पीढ़ी में धार्मिक संस्कारों की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को धार्मिक ज्ञान देने के लिए धार्मिक पाठशालाएं महत्वपूर्ण माध्यम हैं। यदि हम चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी अपने धर्म, संस्कृति और संस्कारों से जुड़ी रहे तो बच्चों को नियमित रूप से धार्मिक पाठशाला भेजना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बच्चों के मन में छोटी उम्र से ही अच्छे संस्कारों के बीज बोना जरूरी है। बचपन में प्राप्त धार्मिक शिक्षा जीवनभर व्यक्ति के आचरण और विचारों को प्रभावित करती है।</p>
<p>साध्वी श्रीजी ने कहा कि वर्तमान में धर्म प्रभावना कर रहे अनेक बड़े आचार्य, साधु-साध्वी और धर्माचार्यों ने भी अपने जीवन के प्रारंभिक समय में पाठशालाओं से धार्मिक अध्ययन किया। यही ज्ञान आगे चलकर उनकी साधना और आध्यात्मिक यात्रा का आधार बना।</p>
<h3><strong>मानव जीवन भक्त से भगवान बनने के लिए मिला</strong></h3>
<p>धर्मसभा के दौरान साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने मानव जीवन के महत्व को समझाते हुए कहा कि यह मानव भव अत्यंत दुर्लभ है। मनुष्य को मिला शरीर केवल सांसारिक सुख-सुविधाओं के लिए नहीं, बल्कि आत्मकल्याण और धर्म आराधना के लिए भी है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मानव जीवन हमें <strong>“भक्त से भगवान बनने”</strong> की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता है। मनुष्य को तन और मन मिला है तो उसका उपयोग धर्म, साधना, संयम और आत्मकल्याण के लिए करना चाहिए।</p>
<p>जीवन में धार्मिक संस्कार और आध्यात्मिक चेतना व्यक्ति को अपने वास्तविक स्वरूप को समझने में सहायता करते हैं। इसलिए सांसारिक जिम्मेदारियों के साथ धर्म आराधना के लिए भी समय निकालना आवश्यक है।</p>
<h3><strong>कृष्ण महाराजा का प्रसंग सुनाकर समझाई भावों की महत्ता</strong></h3>
<p><img decoding="async" class="wp-image-352532 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/sdsa-300x135.jpeg" alt="sdsa" width="520" height="234" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/sdsa-300x135.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/sdsa-1024x461.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/sdsa-768x346.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/sdsa.jpeg 1152w" sizes="(max-width: 520px) 100vw, 520px" /><br />
साध्वी श्रीजी ने धर्मसभा में कृष्ण महाराजा से जुड़ा धार्मिक प्रसंग सुनाते हुए भावों की महत्ता समझाई। उन्होंने कहा कि कृष्ण महाराजा ने 18 हजार साधुओं को शुद्ध भाव से वंदन कर पुण्य का उपार्जन किया।</p>
<p>इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि धर्म में केवल बाहरी क्रिया नहीं, बल्कि उसके पीछे मौजूद शुद्ध भाव का भी अत्यधिक महत्व है। सच्चे और निर्मल भाव से की गई वंदना, आराधना और सेवा व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम बन सकती है।</p>
<h3><strong>हर जीव में शिव के दर्शन करने की प्रेरणा</strong></h3>
<p>साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब ने जीव दया और समभाव का संदेश देते हुए कहा कि हमें प्रत्येक जीव में शिव के दर्शन करने चाहिए। संसार में चींटी से लेकर हाथी तक प्रत्येक जीव में आत्मा विद्यमान है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जैन दर्शन प्रत्येक जीव के प्रति करुणा, अहिंसा और समानता की भावना रखने की प्रेरणा देता है। किसी जीव को छोटा या बड़ा समझने के बजाय उसके भीतर मौजूद आत्मतत्व को देखने का प्रयास करना चाहिए।</p>
<p>जब मनुष्य प्रत्येक जीव के प्रति दया और करुणा की भावना विकसित करता है, तभी अहिंसा का वास्तविक स्वरूप उसके जीवन में दिखाई देता है।</p>
<h3><strong>तृतीय दिवस तपस्वियों का अक्षत से किया वधामणा</strong></h3>
<p>सिद्धि तप के तृतीय दिवस के मंगलकारी अवसर पर तपस्वियों के अक्षत वधामणा का विशेष आयोजन किया गया। लाभार्थी परिवारों एवं समाजजनों ने अक्षत के माध्यम से तपस्वियों का वधामणा कर उनकी कठिन तपस्या की अनुमोदना की।</p>
<p>धार्मिक वातावरण के बीच आयोजित कार्यक्रम में समाजजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। तपस्वियों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके तप की सुख-साता पूछी गई और मंगलकामनाएं की गईं।</p>
<h3><strong>बरडिया परिवार ने लिया संपूर्ण दिवस का लाभ</strong></h3>
<p>जैन समाज के मीडिया प्रभारी <strong>सचिन भंडारी</strong> ने जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार को आयोजित साधार्मिक भक्ति, प्रभावना एवं संपूर्ण दिवस का लाभ <strong>कांतिलाल, राजेश कुमार, संदीप कुमार और कुलदीप कुमार बरडिया परिवार</strong> द्वारा लिया गया।</p>
<p>वहीं सिद्धि तप के तृतीय दिवस आयोजित अक्षत वधामणा का लाभ <strong>जैन श्वेतांबर सोशल ग्रुप केसरिया यूनिक शाखा, महिदपुर रोड</strong> द्वारा लिया गया।</p>
<h3><strong>दो घंटे तक चला धार्मिक आयोजन</strong></h3>
<p>करीब दो घंटे तक चले धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में जैन समाज के महिला-पुरुष, युवा एवं वरिष्ठजन उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब के प्रवचनों का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
<p>पूरे आयोजन के दौरान धर्म, तप, ज्ञान, जीवदया और संस्कारों का संदेश दिया गया। विशेष रूप से बच्चों को धार्मिक पाठशालाओं से जोड़ने की प्रेरणा देते हुए साध्वी श्रीजी ने समाज से आह्वान किया कि नई पीढ़ी को धार्मिक ज्ञान और संस्कार प्रदान करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।</p>
<p>सिद्धि तप के तृतीय दिवस का आयोजन तपस्वियों के सम्मान, धर्म आराधना और साध्वी श्रीजी के प्रेरणादायी संदेशों के साथ धर्ममय वातावरण में संपन्न हुआ।</p>
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