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Supreme Court Stray Dogs Case: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, खतरनाक आवारा कुत्तों को इंजेक्शन देकर मारने की अनुमति

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Published On: 19 May 2026
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Supreme Court Stray Dogs Case: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला,

देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों के बीच Supreme Court of India ने मंगलवार को आवारा कुत्तों से जुड़े अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने इस मुद्दे पर दाखिल सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए साफ कहा कि आम नागरिकों, खासकर बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई आवारा कुत्ता बेहद खतरनाक, हिंसक या गंभीर रूप से बीमार है, तो उसे इंजेक्शन देकर मारा जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान देशभर में तेजी से बढ़ रहे डॉग बाइट मामलों पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि कई राज्यों से बेहद चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं, जो सार्वजनिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं।

डॉग बाइट मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने राजस्थान के श्रीगंगानगर का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल एक महीने के भीतर वहां डॉग बाइट के 1084 मामले दर्ज किए गए। इन घटनाओं में कई छोटे बच्चे गंभीर रूप से घायल हुए, जिनके चेहरे और शरीर पर गहरे जख्म आए।

कोर्ट ने कहा कि लगातार बढ़ रहे ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। अदालत के मुताबिक, स्थानीय प्रशासन और नगर निकायों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

तमिलनाडु के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। अदालत के अनुसार, साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में राज्य में करीब 2 लाख डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं। कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति बेहद गंभीर है और इससे यह स्पष्ट होता है कि आवारा कुत्तों की समस्या अब राष्ट्रीय स्तर की चुनौती बन चुकी है।

सुप्रीम Court की बेंच ने की सुनवाई

इस मामले की सुनवाई जस्टिस Vikram Nath, जस्टिस Sandeep Mehta और जस्टिस N. V. Anjaria की बेंच ने की।

बेंच ने साफ शब्दों में कहा कि कानून का उद्देश्य केवल पशु संरक्षण नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा भी है। यदि कोई जानवर सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बनता है, तो प्रशासन को कार्रवाई करने का अधिकार है।

कोर्ट ने अधिकारियों को दी चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी राज्य या स्थानीय प्रशासन के अधिकारी अदालत के निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।

कोर्ट ने नगर निगमों और स्थानीय निकायों को निर्देश दिया कि वे आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाएं।

सुप्रीम कोर्ट के संभावित 9 प्रमुख निर्देश

सुनवाई के दौरान अदालत ने आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  1. खतरनाक और गंभीर रूप से बीमार कुत्तों की पहचान की जाए
  2. जरूरत पड़ने पर ऐसे कुत्तों को इंजेक्शन देकर मारा जा सके
  3. बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए
  4. स्थानीय निकाय नियमित निगरानी करें
  5. डॉग बाइट मामलों का रिकॉर्ड तैयार किया जाए
  6. अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन की पर्याप्त व्यवस्था हो
  7. आवारा कुत्तों की नसबंदी अभियान तेज किया जाए
  8. अदालत के आदेशों का सख्ती से पालन हो
  9. लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए

बच्चों की सुरक्षा पर कोर्ट की विशेष चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में छोटे बच्चों पर आवारा कुत्तों के हमले तेजी से बढ़ रहे हैं। कई मामलों में बच्चों के चेहरे और सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाएं बेहद दर्दनाक हैं और इन्हें रोकना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है।

पशु प्रेमियों और आम लोगों के बीच बहस तेज

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पशु अधिकार संगठनों और आम नागरिकों के बीच बहस तेज हो गई है। एक ओर लोग बच्चों और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं, वहीं कई पशु प्रेमी संगठनों का कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान नसबंदी और पुनर्वास कार्यक्रमों के जरिए निकाला जाना चाहिए।

देशभर में क्यों बढ़ रहे हैं डॉग बाइट मामले?

विशेषज्ञों के अनुसार, देश में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके पीछे कई कारण हैं:

  • कचरा प्रबंधन की खराब व्यवस्था
  • नसबंदी कार्यक्रमों की धीमी गति
  • शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आबादी
  • पशु नियंत्रण नीतियों का सही तरीके से पालन न होना
  • खुले में फेंका जाने वाला खाद्य कचरा

क्या बदल सकती है स्थानीय प्रशासन की नीति?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब कई राज्यों और नगर निगमों की नीतियों में बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रशासन को अब डॉग बाइट मामलों पर अधिक सख्ती दिखानी पड़ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में आवारा कुत्तों की पहचान, नसबंदी और पुनर्वास के लिए बड़े अभियान शुरू किए जा सकते हैं।


निष्कर्ष

Supreme Court of India का यह फैसला देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों के बीच बेहद अहम माना जा रहा है। अदालत ने साफ कर दिया है कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और यदि कोई आवारा कुत्ता गंभीर खतरा बनता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि राज्य सरकारें और स्थानीय प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को किस तरह लागू करते हैं और क्या इससे डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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