Hormuz जलडमरूमध्य से भारत के जहाजों की आवाजाही तेज, 3 दिनों में 9 जहाजों ने किया पार, 15 अभी इंतजार में
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से भारत से जुड़े जहाजों की आवाजाही एक बार फिर शुरू हो गई है। कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति से जुड़े इस अहम समुद्री मार्ग पर हाल के दिनों में गतिविधियां बढ़ी हैं, जिससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को राहत मिलती दिख रही है।
तीन दिनों में 9 जहाजों ने पार किया होर्मुज
ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछले 72 घंटों यानी तीन दिनों में भारत और अन्य देशों के झंडे वाले कुल 9 जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार किया है। इनमें से 7 जहाज ऐसे हैं जो भारत के लिए विभिन्न प्रकार का माल लेकर आ रहे हैं, जबकि शेष जहाज अन्य देशों से जुड़े हुए हैं।
इनमें से 4 जहाजों पर भारतीय ध्वज (Indian Flag) लगा हुआ था, जबकि 5 जहाज विदेशी झंडे के तहत संचालित हो रहे थे। यह संकेत देता है कि भारत की समुद्री आपूर्ति श्रृंखला धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रही है।
भारत के लिए महत्वपूर्ण 44 जहाज पहले ही पार कर चुके मार्ग
28 फरवरी 2026 को पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनावपूर्ण स्थिति शुरू होने के बाद से अब तक कुल 44 जहाज ऐसे रहे हैं, जो भारत के लिए माल लेकर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजर चुके हैं।
इन जहाजों की आवाजाही से स्पष्ट है कि संघर्ष और तनाव के बावजूद व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह बाधित नहीं हुई हैं, बल्कि सुरक्षा चिंताओं के बीच नियंत्रित तरीके से जारी हैं।
15 जहाज अभी भी इंतजार में
फारस की खाड़ी क्षेत्र में फिलहाल भारत से जुड़े लगभग 15 जहाज ऐसे हैं, जो सुरक्षित मार्ग खुलने या अनुकूल परिस्थितियों का इंतजार कर रहे हैं। इन जहाजों में से लगभग 10 पर भारतीय ध्वज लगा हुआ है।
इनमें से कई जहाजों पर महत्वपूर्ण माल लदा हुआ है, जिसमें उर्वरक (fertilizer), ऊर्जा संसाधन और अन्य औद्योगिक वस्तुएं शामिल हैं। अनुमान के अनुसार इनमें से 4 जहाजों में फर्टिलाइजर लदा हुआ है, जबकि एक जहाज ऊर्जा (energy cargo) से जुड़ा हुआ है।
प्रमुख जहाजों की आवाजाही
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय ध्वज वाला बल्क कैरियर जहाज “APJ प्रीति 2”, जिसमें लगभग 65,000 टन उर्वरक लदा था, हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर भारत की ओर बढ़ चुका है।
इसके अलावा अन्य दो महत्वपूर्ण जहाजों—“देश सुरक्षा”, जिसमें करीब एक लाख टन कच्चा तेल लदा हुआ था, और “प्रभु पार्वती”, जिसमें लगभग 18,732 टन कार्गो शामिल था—ने भी इस मार्ग को पार किया है।
तनावपूर्ण हालात और समुद्री सुरक्षा
हाल ही में होर्मुज क्षेत्र में एक जहाज पर हमले की घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियां और संबंधित देश स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
गुरुवार को हुए हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
पहले की तुलना में बढ़ी आवाजाही
सरकारी और शिपिंग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, 1 मार्च से 17 जून के बीच केवल 19 जहाज इस मार्ग से गुजर पाए थे। लेकिन बाद में हालात में कुछ सुधार और कूटनीतिक समझौतों के बाद जहाजों की संख्या में वृद्धि देखी गई।
17 जून के बाद से भारत की ओर आने वाले जहाजों की संख्या बढ़कर लगभग 25 तक पहुंच गई है। यह बदलाव समुद्री व्यापार के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
विभिन्न प्रकार के जहाजों की स्थिति
समुद्री निगरानी के आंकड़ों के अनुसार, अब तक इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों में विभिन्न श्रेणियां शामिल हैं—
- 15 बल्क कैरियर
- 13 एलपीजी (LPG) कैरियर
- 11 कच्चे तेल (Crude Oil) टैंकर
- 2 एलएनजी (LNG) कैरियर
यह दर्शाता है कि ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति से जुड़े जहाज इस मार्ग के माध्यम से लगातार आवाजाही कर रहे हैं।
भारत के लिए रणनीतिक महत्व
Hormuz जलडमरूमध्य भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, क्योंकि देश की बड़ी मात्रा में तेल और गैस आपूर्ति इसी रास्ते से होकर आती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव या बाधा सीधे तौर पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर असर डाल सकती है।
निष्कर्ष
हाल के तीन दिनों में 9 जहाजों का Hormuz जलडमरूमध्य को पार करना और 15 जहाजों का इंतजार में होना यह संकेत देता है कि क्षेत्र में हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं, लेकिन धीरे-धीरे स्थिरता की ओर बढ़ रहे हैं।
भारत के लिए यह स्थिति मिश्रित संकेत देती है—एक ओर आपूर्ति श्रृंखला में सुधार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय तनाव अभी भी वैश्विक व्यापार के लिए जोखिम बना हुआ है।
