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नगर निगम को उधारी में Petrol-Diesel नहीं मिला, सभापति ई-रिक्शा से पहुंचे कार्यालय

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Published On: 8 April 2026
Petrol DieselShortage

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नगर निगम को उधारी में Petrol-Diesel न मिलने से प्रशासनिक परेशानी, सभापति ई-रिक्शा से कार्यालय पहुंचे

धमतरी। नगर निगम को Petrol-Diesel की आपूर्ति करने वाले संचालक ने उधारी पर ईंधन देना बंद कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप नगर निगम के महापौर, सभापति, आयुक्त और उपायुक्त समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को कार्यालय आने के लिए अपनी व्यक्तिगत व्यवस्था करनी पड़ी। यह स्थिति प्रशासन के लिए न केवल असुविधाजनक है, बल्कि यह निगम के बजट, संसाधन प्रबंधन और कार्यकुशलता पर भी असर डाल रही है।

नगर निगम की यह अस्थायी व्यवस्था ईंधन की कमी और वाहनों की खराब स्थिति से उत्पन्न हुई है। अधिकारियों के लिए अब कार्यालय तक पहुंचने के लिए निजी वाहन, ई-रिक्शा या अन्य विकल्प अपनाना अनिवार्य हो गया है। यह बदलाव न केवल दैनिक कार्यों में बदलाव ला रहा है, बल्कि निगम प्रशासन में खर्च नियंत्रण और संसाधनों के प्रबंधन को भी चुनौती दे रहा है।

वाहन खराब होने के कारण व्यक्तिगत व्यवस्था

नगर निगम के वाहन पिछले कुछ दिनों से खराब होने के कारण मरम्मत के लिए भेजे गए हैं। प्रत्येक वाहन की मरम्मत पर लगभग 1 से 2 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी मिली है। ऐसे में अधिकारियों को कार्यालय आने के लिए अपनी व्यक्तिगत व्यवस्था करना पड़ी।

मंगलवार को निगम सभापति कौशिल्या देवांगन को ई-रिक्शा से कार्यालय आना पड़ा। इस अवसर पर महापौर रामू रोहरा ने बताया कि पिछले कई दिनों से वे स्वयं की व्यवस्था कर अपने निजी वाहन से निगम कार्यालय आ रहे हैं। इसके अलावा निगम आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी अपनी व्यक्तिगत व्यवस्था के माध्यम से कार्यालय पहुंच रहे हैं।

यह स्थिति दर्शाती है कि निगम के वाहनों की नियमित रखरखाव और मरम्मत की व्यवस्था वर्तमान में अपर्याप्त है। वाहनों की खराब स्थिति और ईंधन की कमी ने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

उधारी बंद होने से ईंधन की खपत में कटौती

नगर निगम को पेट्रोल और डीजल की खपत को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने पड़े हैं। प्रतिदिन निगम में जेसीबी, सफाई वाहन और अन्य वाहनों के लिए लगभग 350 से 400 लीटर ईंधन की खपत होती थी। अब प्रशासन इसे घटाकर 100 से 200 लीटर प्रतिदिन तक लाने की योजना बना रहा है।

यह कदम आवश्यक सेवाओं पर प्रभाव डाले बिना खर्च में कटौती करने और संसाधनों की बचत सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस समय सभी को अपनी व्यक्तिगत व्यवस्था से कार्यालय आने की मजबूरी है, लेकिन यह अस्थायी उपाय निगम की वित्तीय दक्षता और ईंधन प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।

इस पहल का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सीमित संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो और गैर-जरूरी खर्चों को रोका जा सके। ईंधन की बचत से निगम अपने अन्य आवश्यक कार्यों में निवेश कर सकता है और आर्थिक संसाधनों की बेहतर योजना बना सकता है।

मरम्मत और नए वाहनों की योजना

खराब वाहनों की मरम्मत पर प्रति वाहन 1–2 लाख रुपये खर्च होते हैं। निगम प्रशासन ने इस समय तक सभी खराब वाहनों को मरम्मत के लिए भेज दिया है। भविष्य में नए वाहनों की खरीद या राज्य सरकार से अतिरिक्त वाहन की मांग पर भी विचार किया जा रहा है।

इस योजना के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए कार्यालय पहुंचने का विकल्प हमेशा उपलब्ध रहे। इससे ईंधन की खपत नियंत्रित होगी और नियमित कार्यकुशलता सुनिश्चित की जा सकेगी।

निगम प्रशासन का मानना है कि बार-बार मरम्मत कराने से खर्च और समय की बर्बादी होती है। इस समय तक सभी को अपनी व्यक्तिगत व्यवस्था से कार्यालय आना पड़ रहा है। यह अस्थायी व्यवस्था निगम प्रशासन के लिए सीख और चेतावनी दोनों का काम करेगी कि भविष्य में संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक योजना बनाना आवश्यक है।

खर्च नियंत्रण और संसाधन प्रबंधन

नगर निगम में प्रतिमाह पेट्रोल-डीजल पर लगभग आठ लाख रुपये खर्च होते हैं। ईंधन की खपत और खर्च को नियंत्रित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। उधारी बंद होने और ईंधन की कमी ने यह सुनिश्चित किया कि अधिकारी और कर्मचारियों को संसाधनों का उपयोग अधिक जिम्मेदारी से करना पड़े।

फिलहाल, अस्थायी उपाय अपनाए गए हैं, जिनमें ईंधन की खपत कम करने के लिए वाहनों की सीमित चलाना, आवश्यक कार्यों के लिए ही ईंधन का उपयोग करना और व्यक्तिगत परिवहन का उपयोग शामिल है। इससे खर्च में कमी आएगी और निगम के बजट पर दबाव कम होगा।

भविष्य में नए वाहनों की खरीद और ईंधन प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक योजना बनाई जाएगी। इस योजना के तहत निगम के सभी वाहन समय पर मरम्मत और रखरखाव के लिए निर्धारित किए जाएंगे।

ईंधन की उपलब्धता और पेट्रोल पंप संचालकों की भूमिका

महापौर रामू रोहरा ने बताया कि हाल ही में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच युद्ध के कारण पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। पेट्रोल पंपों में ईंधन की उपलब्धता संतोषजनक नहीं रही, जिसके कारण कई संचालकों ने उधारी पर ईंधन देना बंद कर दिया।

धमतरी नगर निगम को पेट्रोल और डीजल उपलब्ध कराने वाला पंप संचालक भी अब उधारी देना बंद कर चुका है। ऐसे में निगम प्रशासन को नकद भुगतान के साथ ईंधन खरीदने की आवश्यकता पड़ी है। नकद में ईंधन खरीदना महंगा और मुश्किल हो गया है, इसलिए खपत में कमी और खर्च नियंत्रण को प्राथमिकता दी गई है।

दैनिक कार्य प्रभावित होने की संभावना

ईंधन की खपत में कटौती का उद्देश्य केवल खर्च कम करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि आवश्यक सेवाओं जैसे सफाई, जेसीबी कार्य, आपातकालीन वाहन संचालन आदि प्रभावित न हों।

प्रतिदिन नगर निगम में जेसीबी, सफाई वाहन और अन्य आवश्यक वाहनों के लिए लगभग 400 लीटर पेट्रोल-डीजल की खपत होती थी। नई पहल के अनुसार इसे घटाकर 100 से 200 लीटर प्रतिदिन लाने का प्रयास किया जा रहा है।

इस उपाय से केवल गैर-जरूरी कार्य प्रभावित होंगे, जबकि आवश्यक सेवाओं की सुचारु कार्यवाही जारी रहेगी। यह कदम निगम प्रशासन की लागत-कुशलता और संसाधन प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

निष्कर्ष

नगर निगम प्रशासन ने सीमित संसाधनों में सुधार करते हुए ईंधन बचत और खर्च नियंत्रण के लिए अस्थायी उपाय अपनाए हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अपनी व्यक्तिगत व्यवस्था से कार्यालय पहुंचना अनिवार्य हो गया है।

हालांकि यह अस्थायी उपाय है, लेकिन यह निगम के लिए दीर्घकालिक संसाधन प्रबंधन और वित्तीय दक्षता की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है। भविष्य में नए वाहनों की खरीद, मरम्मत और ईंधन प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक योजना बनाना आवश्यक होगा।

इस पहल से न केवल खर्च में कमी आएगी, बल्कि निगम प्रशासन की कार्यकुशलता, संसाधन प्रबंधन और वित्तीय योजना में भी सुधार होगा। यह स्थिति नगर निगम प्रशासन के लिए सीख और चेतावनी दोनों का काम करेगी।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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