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State Women Commission Chairperson Controversy: MP में 6 साल से अटकी नियुक्ति, कानूनी अड़चन बनी बड़ी वजह

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Published On: 30 April 2026
Women Commission

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State Women Commission Chairperson Controversy: मध्यप्रदेश में राज्य महिला आयोग का गठन और उसके शीर्ष पदों पर नियुक्तियां पिछले लगभग छह वर्षों से अधर में लटकी हुई हैं। अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली होने के कारण आयोग की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है। महिला सुरक्षा, शिकायत निवारण और नीतिगत मामलों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

कब से खाली हैं पद

राज्य महिला आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। इस स्थिति के चलते आयोग की नियमित बैठकों, सुनवाई और निर्णय प्रक्रिया पर असर पड़ा है। महिला संबंधी मामलों में तेजी से कार्रवाई न होने की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं।

शोभा ओझा की नियुक्ति और विवाद की शुरुआत

कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में कांग्रेस नेता शोभा ओझा को राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति मार्च 2020 में हुई थी। हालांकि, कुछ समय बाद राजनीतिक बदलाव हुआ और राज्य में सरकार बदल गई।

शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री बनने के बाद 23 मार्च को शोभा ओझा को पद से हटा दिया गया। इसी निर्णय के बाद यह पूरा विवाद कानूनी मोड़ पर पहुंच गया।

कोर्ट केस बना सबसे बड़ा अड़चन

पद से हटाए जाने के बाद शोभा ओझा ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया। तभी से यह मामला न्यायालय में लंबित है।

इसी केस के चलते राज्य सरकार आयोग में नई नियुक्तियां नहीं कर पा रही है। कानूनी स्थिति स्पष्ट न होने के कारण नियुक्ति प्रक्रिया लगातार अटकी हुई है।

मोहन सरकार के कार्यकाल में भी स्थिति जस की तस

वर्तमान में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार को ढाई वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन राज्य महिला आयोग में नियुक्तियों की स्थिति अब भी वैसी ही बनी हुई है।

सरकार चाहकर भी नियुक्ति प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा पा रही है क्योंकि मामला अदालत में विचाराधीन है।

कानूनी पेच बना सबसे बड़ी बाधा

शोभा ओझा से जुड़ा यह कोर्ट केस अब नियुक्तियों में सबसे बड़ा रोड़ा बन गया है। सरकार को यह स्पष्ट नहीं है कि नियुक्तियां अदालत के अंतिम निर्णय से पहले की जाएं या नहीं।

इसी वजह से पूरे मामले में कानूनी सलाह और प्रक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

सरकार ने तय किए नए नाम

सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार ने आयोग के लिए नए नामों का चयन कर लिया है।

रेखा यादव को अध्यक्ष पद के लिए नामित किया गया है, जबकि साधना स्थापक और समीक्षा गुप्ता को सदस्य पद पर नियुक्त करने की योजना है।

लेकिन इन नामों पर अंतिम मुहर अदालत के मामले के निपटारे के बाद ही लग पाएगी।

महाधिवक्ता से लिया गया मार्गदर्शन

सरकार ने इस संवेदनशील मामले में आगे की रणनीति तय करने के लिए महाधिवक्ता (Advocate General) से राय मांगी है।

कानूनी विशेषज्ञ यह तय कर रहे हैं कि क्या सरकार अदालत से शीघ्र सुनवाई की मांग कर नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है या फिर कोर्ट के आदेश का इंतजार करना होगा।

दो संभावित रास्ते सामने

वर्तमान स्थिति में सरकार के सामने दो विकल्प हैं:

  1. अदालत में अर्जेंट सुनवाई की मांग कर मामले का शीघ्र निपटारा कराया जाए
  2. या फिर न्यायालय के अंतिम आदेश के अनुसार नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए

इन दोनों विकल्पों में से किसी एक पर निर्णय आने के बाद ही आयोग में नई नियुक्तियां संभव होंगी।

 Women Commission की भूमिका प्रभावित

लंबे समय से अध्यक्ष और सदस्यों की अनुपस्थिति के कारण राज्य महिला आयोग की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है।

महिला उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और अन्य शिकायतों के मामलों में निर्णय लेने की प्रक्रिया धीमी हो गई है, जिससे पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है।

प्रशासनिक और सामाजिक असर

इस विवाद का असर केवल प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव महिलाओं से जुड़े मामलों पर भी पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संवैधानिक आयोगों में लंबे समय तक रिक्तियां रहना प्रशासनिक असंतुलन को दर्शाता है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि भी अहम

यह मामला राजनीतिक बदलाव से भी जुड़ा हुआ है। सरकार बदलने के बाद पूर्व नियुक्तियों को लेकर विवाद और कानूनी चुनौती ने स्थिति को और जटिल बना दिया।

इसी कारण यह मुद्दा प्रशासनिक के साथ-साथ राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है।

निष्कर्ष

मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग में लंबे समय से लंबित नियुक्तियां अब एक गंभीर प्रशासनिक और कानूनी चुनौती बन चुकी हैं। शोभा ओझा से जुड़े कोर्ट केस ने पूरी प्रक्रिया को रोक दिया है।

हालांकि सरकार ने नए नाम तय कर लिए हैं, लेकिन अंतिम निर्णय न्यायालय के आदेश और कानूनी सलाह पर निर्भर करेगा। इस बीच आयोग की निष्क्रियता महिलाओं से जुड़े मामलों के निपटारे में बाधा बन रही है, जिसे जल्द हल करना आवश्यक है

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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