राधादेवी सोनी की द्वितीय पुण्यतिथि पर सेवा पहल, भीनमाल की चारों अन्नपूर्णा रसोइयों में कराया निःशुल्क भोजन
रिपोर्टर: मुकेश सोलंकी
भीनमाल। स्वर्गीय राधादेवी, धर्मपत्नी भीमराज सरुपा सोनी, पुनासा की द्वितीय पुण्यतिथि के अवसर पर शनिवार को सोनी परिवार ने जरूरतमंदों की सेवा के लिए विशेष पहल की। परिवार की ओर से शहर में संचालित चारों अन्नपूर्णा रसोइयों में सुबह का भोजन आमजन एवं जरूरतमंदों के लिए निःशुल्क रखा गया। इस अवसर पर भोजन करने वाले लोगों के लिए मिष्ठान सहित संपूर्ण भोजन की व्यवस्था की गई। परिवार ने माताजी की स्मृति में इस सेवा कार्य के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
भीमराज सरुपा सोनी परिवार, पुनासा ने भोजन कराने की व्यवस्था से संबंधित खर्च वहन किया। परिवारजनों ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य माताजी की स्मृति को सेवा कार्य से जोड़ना और जरूरतमंदों के प्रति सहयोग की भावना व्यक्त करना था। उन्होंने इसे दिवंगत माताजी के प्रति अपनी श्रद्धा और नमन का छोटा प्रयास बताया।
शहर की चारों रसोइयों में निःशुल्क भोजन
सेवा कार्य के अंतर्गत भीनमाल शहर की चारों अन्नपूर्णा रसोइयों में सुबह भोजन करने वाले लोगों से भोजन शुल्क नहीं लिया गया। आमजन और जरूरतमंदों के लिए भोजन निःशुल्क उपलब्ध कराया गया। परिवार ने इस व्यवस्था को किसी एक रसोई तक सीमित रखने के बजाय शहर में संचालित चारों रसोइयों में लागू किया।
इस पहल के माध्यम से माताजी की पुण्यतिथि पर भोजन सेवा को प्राथमिकता दी गई। परिवार की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, चारों रसोइयों में भोजन करने वाले सभी लोगों के लिए यह व्यवस्था रही। इससे वहां पहुंचने वाले लोगों को बिना शुल्क चुकाए भोजन करने का अवसर मिला।
मिष्ठान सहित संपूर्ण भोजन की व्यवस्था
पुण्यतिथि के अवसर पर नियमित भोजन के साथ मिष्ठान की व्यवस्था भी की गई। परिवार ने भोजन करने वाले सभी लोगों के लिए मिठाई सहित संपूर्ण भोजन उपलब्ध कराने का खर्च उठाया। भोजन सेवा के साथ मिष्ठान शामिल कर इस स्मृति आयोजन को विशेष स्वरूप दिया गया।
परिवारजनों ने बताया कि माताजी को श्रद्धांजलि देने के लिए ऐसा सेवा कार्य चुना गया, जिसका सीधा संबंध आमजन और जरूरतमंदों से हो। भोजन की व्यवस्था के माध्यम से उन्होंने अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इस आयोजन में भोजन करने वाले लोगों के लिए निःशुल्क सेवा और मिठाई, दोनों का प्रबंध परिवार की ओर से किया गया।
भोजन शुल्क और अतिरिक्त खर्च परिवार ने उठाया
आयोजन संबंधी जानकारी के अनुसार, योजना में प्रति थाली आठ रुपये भोजन शुल्क और 22 रुपये सरकारी अनुदान का प्रावधान बताया गया है। इस सेवा आयोजन में लोगों से लिया जाने वाला आठ रुपये का भोजन शुल्क परिवार ने वहन किया। सरकारी अनुदान के अतिरिक्त मिष्ठान एवं अन्य व्यवस्थाओं का शेष अतिरिक्त खर्च भी परिवार ने स्वयं उठाया।
इस तरह भोजन करने वाले लोगों को अपनी ओर से शुल्क नहीं देना पड़ा। परिवार ने पुण्यतिथि के अवसर पर निःशुल्क भोजन कराने के लिए आवश्यक आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया। मिष्ठान और अन्य व्यवस्थाओं का अतिरिक्त व्यय उठाकर सेवा कार्य को पूरा किया गया।
माताजी की स्मृति में जरूरतमंदों की सेवा
परिवारजनों के अनुसार, स्वर्गीय राधादेवी सोनी की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से यह आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि पुण्यतिथि पर जरूरतमंदों की सेवा के माध्यम से माताजी को श्रद्धांजलि अर्पित करना परिवार की भावना रही।
परिवार ने इस प्रयास को माताजी के प्रति सच्ची श्रद्धा और नमन बताया। उनके अनुसार, दिवंगत परिजनों की याद में जनहित के कार्य करना स्मृतियों को समाज सेवा से जोड़ने का माध्यम है। इसी भावना के साथ चारों अन्नपूर्णा रसोइयों में भोजन सेवा का निर्णय लिया गया।
परोपकार और सहयोग का संदेश देने का उद्देश्य
सोनी परिवार ने स्पष्ट किया कि सेवा कार्य का उद्देश्य प्रचार-प्रसार करना नहीं, बल्कि समाज में परोपकार और जरूरतमंदों की सहायता के लिए प्रेरणा देना है। परिवारजनों ने कहा कि माताजी की स्मृति में किया गया यह प्रयास सेवा भावना की अभिव्यक्ति है।
उनका मानना है कि दिवंगत आत्माओं की याद में किए गए सामाजिक और जनहित के कार्य सकारात्मक संदेश देते हैं। ऐसे प्रयास अन्य लोगों को भी दान-पुण्य और सहायता गतिविधियों से जुड़ने की प्रेरणा दे सकते हैं। परिवार ने पुण्यतिथि को इसी भावना के साथ भोजन सेवा के अवसर में बदला।
स्मृति आयोजन को दिया जनसेवा का स्वरूप
स्वर्गीय राधादेवी सोनी की द्वितीय पुण्यतिथि पर आयोजित इस पहल में श्रद्धांजलि और जनसेवा एक साथ जुड़ी रहीं। शहर की चारों अन्नपूर्णा रसोइयों में सुबह निःशुल्क भोजन तथा मिष्ठान उपलब्ध कराकर परिवार ने जरूरतमंदों के प्रति सहयोग व्यक्त किया।
भीमराज सरुपा सोनी परिवार, पुनासा ने आयोजन का संबंधित खर्च उठाते हुए माताजी की स्मृति को सेवा कार्य के माध्यम से सम्मान दिया। परिवारजनों ने ऐसे प्रयासों से समाज में परोपकार, सहयोग और जरूरतमंदों की सहायता की भावना बढ़ने की आशा व्यक्त की।
