एसआईआर पर कांग्रेस का हमला: ‘नोटबंदी और लॉकडाउन की तरह जल्दबाज़ी में लागू हुआ आदेश’, बीएलओ की मौतों से बढ़ी राजनीतिक गर्माहट
देशभर में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के बीच कई राज्यों से बीएलओ (Booth Level Officer) और पोलिंग अफसरों की मौतों की खबरें सामने आने के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि एसआईआर को जल्दबाजी में, बिना योजना के लागू किया गया, जिसकी वजह से बीएलओ पर असामान्य काम का बोझ बढ़ा और कई मौतें हुईं। पार्टी के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया नोटबंदी और लॉकडाउन जैसे अचानक लिए गए फैसलों की याद दिलाती है, जिनका असर लोगों की जान पर पड़ा था।
खरगे का बड़ा आरोप—‘एसआईआर और वोट चोरी अब जानलेवा बनी’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा की सत्ता की भूख अब जानलेवा साबित हो रही है। उन्होंने दावा किया कि सिर्फ 19 दिनों में 16 बीएलओ की मौत हो चुकी है, और इसकी असली संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है।
खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा—
“19 दिनों में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 16 बीएलओ की मौत हो गई है। काम का बोझ उन्हें आत्महत्या की ओर धकेल रहा है। जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया है, उनके साथ मेरी गहरी संवेदनाएँ हैं। सच यह है कि जमीनी स्तर पर यह संख्या कहीं अधिक है।”
उन्होंने आगे कहा कि इन मौतों के लिए जिम्मेदार वे लोग हैं जो एसआईआर की खामियों और वोट चोरी पर चुप हैं।
खरगे ने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग “मूकदर्शक बनकर सब देख रहा है” जबकि भाजपा “चोरी की सत्ता का मजा ले रही है।”
‘नोटबंदी और लॉकडाउन जैसे फैसले की याद दिलाता है एसआईआर’
कांग्रेस का आरोप है कि जिस तरह सरकार ने नोटबंदी और लॉकडाउन को बिना सोचे-समझे लागू किया था, उसी तरह एसआईआर को भी जल्दबाजी में लागू कर दिया गया, जिससे लाखों कर्मचारियों पर अचानक बड़ा काम का दबाव आ गया।
खरगे ने कहा—
“एसआईआर को बिना योजना के, अचानक और जबरदस्ती लागू किया गया। यह सीधे-सीधे नोटबंदी और कोविड लॉकडाउन जैसे फैसलों की याद दिलाता है, जो आम जनता और कर्मचारियों के लिए भारी साबित हुए थे।”
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सिर्फ सत्ता बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा रही है—
“भाजपा की सत्ता की भूख संस्थाओं को आत्महत्या करने, संविधान को कमजोर करने और लोकतंत्र को खत्म करने की ओर धकेल रही है।”
बीएलओ की मौतों पर गहराता विवाद
कई राज्यों से खबरें आई हैं कि एसआईआर के दबाव ने बीएलओ को गंभीर मानसिक तनाव में डाल दिया। कांग्रेस ने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य का बोझ इतना अधिक है कि कर्मचारी लगातार 12–14 घंटे काम करने को मजबूर हैं।
सबसे ताजा मामला पश्चिम बंगाल के नादिया जिले से आया, जहाँ एक महिला बीएलओ अपने घर पर मृत पाई गई।
परिवार का आरोप है कि वह पिछले कई दिनों से एसआईआर के अत्यधिक प्रेशर में थी और इसी तनाव में उसने आत्महत्या कर ली।
स्थानीय प्रशासन जांच की बात कर रहा है लेकिन कांग्रेस और विपक्ष इसे सरकारी लापरवाही और गलत नीतियों का नतीजा बता रहे हैं।
चुनाव आयोग की चुप्पी पर सवाल
खरगे ने कहा कि चुनाव आयोग को इन मौतों का संज्ञान लेना चाहिए, लेकिन संस्थान खामोश बैठा है।
उनका आरोप है—
- चुनाव आयोग एसआईआर की समीक्षा नहीं कर रहा
- बीएलओ को पर्याप्त संसाधन नहीं दिए जा रहे
- काम का बोझ कम करने का कोई प्रयास नहीं
- बीएलओ के परिवार को मुआवजा देने की कोई व्यवस्था नहीं
कांग्रेस ने यह भी कहा कि बीएलओ की मौतों और तनाव को लेकर केंद्र सरकार पूरी तरह असंवेदनशील है।
‘अगर अब नहीं जागे तो लोकतंत्र बचाना मुश्किल होगा’
अपनी पोस्ट में खरगे ने चेतावनी दी—
“बस बहुत हो गया! अगर हम अब भी नहीं जागे, तो लोकतंत्र के आखिरी खंभे गिरने से कोई नहीं बचा सकता।”
उन्होंने कहा कि
“जो लोग एसआईआर की खामियों और वोट चोरी पर चुप हैं, वे इन बेगुनाह बीएलओ की मौतों के जिम्मेदार हैं।”
कांग्रेस ने मांग की—
- एसआईआर प्रक्रिया की तुरंत समीक्षा हो
- बीएलओ की सुरक्षा और सुविधा बढ़ाई जाए
- मौतों की न्यायिक जांच कराई जाए
- परिवारों को मुआवजा दिया जाए
एसआईआर क्या है और विवाद क्यों बढ़ा?
Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण किया जाता है ताकि—
- मृत मतदाताओं का नाम हटाया जा सके
- डुप्लीकेट वोटरों की जांच हो
- नए मतदाताओं को सूची में जोड़ा जा सके
- फर्जी वोटिंग की संभावना खत्म हो
लेकिन बीएलओ संगठनों ने आरोप लगाया है कि—
- समय सीमा बेहद कम है
- क्षेत्र का कवरेज बहुत बड़ा है
- ऑनलाइन फॉर्म और नियम जटिल हैं
- सिस्टम में तकनीकी दिक्कतें हैं
- स्टाफ की भारी कमी है
इस वजह से यह काम कर्मचारियों के लिए मानसिक और शारीरिक तौर पर भारी साबित हो रहा है।
राजनीति और भी गर्म होने की उम्मीद
बीएलओ के काम के बोझ और मौतों को लेकर विपक्ष ने हमला तेज कर दिया है।
कांग्रेस का कहना है कि सरकार मतदाता सूची में गड़बड़ी कर “वोट चोरी” का खेल खेल रही है, जबकि भाजपा इन आरोपों को राजनीति बताकर ख़ारिज कर रही है।
आने वाले दिनों में यह विवाद और बड़ा हो सकता है क्योंकि—
- कई राज्य एसआईआर चरण में हैं
- बीएलओ संगठनों द्वारा विरोध की तैयारी चल रही है
- विपक्ष इसे चुनावी मुद्दा बना सकता है
