जानिए कैसे सिंहस्थ 2028 की तैयारी के लिए MP के CM मोहन यादव ने काशी विश्वनाथ मंदिर की SOP को समझा। धार्मिक पर्यटन से अर्थव्यवस्था बदलने का बड़ा दावा।
वाराणसी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एक ऐतिहासिक और प्रशासनिक पहल की शुरुआत की। उनका यह दौरा केवल आस्था का संगम नहीं था, बल्कि सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए एक ‘मैनेजमेंट गुरुक्षर’ के रूप में था। सीएम यादव ने बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लेने के साथ-साथ काशी विश्वनाथ धाम की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को बारीकी से समझा, ताकि 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ कुंभ को विश्वस्तरीय आयोजन बनाया जा सके।
काशी का ‘मैनेजमेंट मॉडल’ से सजेगा उज्जैन का सिंहस्थ 2028
वाराणसी एयरपोर्ट पर उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्रियों ने डॉ. मोहन यादव का भव्य स्वागत किया। इसके बाद वह सीधे काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे, जहां उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना की। लेकिन इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को अंतिम रूप देना था। सीएम ने मंदिर के सीईओ और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लंबी बैठक की, जिसमें काशी विश्वनाथ धाम की हर SOP का गहन विश्लेषण किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, “काशी और उज्जैन का रिश्ता सदियों पुराना है। हम सिंहस्थ 2028 को भव्य, दिव्य और डिजिटल बनाने के लिए काशी के मॉडल को अपनाएंगे।”
सिंहस्थ 2028 के लिए सीएम ने समझी भीड़ प्रबंधन की रणनीति
जिस तरह काशी विश्वनाथ धाम में लाखों श्रद्धालुओं के बीच सुगम दर्शन कराए जाते हैं, उसी तकनीक को उज्जैन में लागू किया जाएगा। सीएम यादव ने बताया कि काशी में 115 विग्रह हैं, जिनमें 14 प्रधान महादेव शामिल हैं।
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डिजिटल डायवर्जन: श्रद्धालुओं को डिजिटल माध्यमों और बुकलेट के जरिए अलग-अलग स्थानों पर डाइवर्ट किया जाता है।
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टेक्नोलॉजी का उपयोग: सिंहस्थ 2028 के दौरान शिप्रा तट पर आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए रियल-टाइम भीड़ प्रबंधन प्रणाली लागू की जाएगी।
प्रतिस्पर्धा नहीं, राज्यों के बीच ‘सहयोग और सौहार्द’ का युग
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि सहयोग का दौर है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ऊर्जा, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में कंधे से कंधा मिलाकर काम करेंगे। उन्होंने योगी आदित्यनाथ सरकार के काशी कॉरिडोर परियोजना की भूरी-भूरी प्रशंसा की और कहा कि इसी तर्ज पर उज्जैन को विकसित किया जाएगा।
धार्मिक पर्यटन: अर्थव्यवस्था बदलने का नया आधार
सीएम डॉ. मोहन यादव ने इस दौरे के दौरान सबसे बड़ी बात कही कि धार्मिक पर्यटन केवल आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था बदलने की ताकत रखता है।
“महाकाल लोक के बाद उज्जैन की अर्थव्यवस्था में क्रांति आई है। वाराणसी में काशी कॉरिडोर ने स्थानीय व्यापार को 400% से अधिक बढ़ाया है। यही मॉडल सिंहस्थ 2028 को वैश्विक पहचान दिलाएगा।”
उन्होंने बताया कि धार्मिक पर्यटन से MSME उद्योगों, हस्तशिल्प, होटल और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा।
सम्राट विक्रमादित्य की विरासत और आगामी भव्य आयोजन
सीएम यादव ने विक्रमादित्य शोध संस्थान के माध्यम से गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित करने की योजना बताई। उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल के बीच सम्राट विक्रमादित्य के जीवन और उनकी न्यायप्रिय शासन व्यवस्था पर आधारित एक भव्य नाट्य मंचन किया जाएगा। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को भारत की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।
MP में निवेश का सुनहरा अवसर
वाराणसी में मौजूद उत्तर प्रदेश के उद्यमियों और निवेशकों को संबोधित करते हुए सीएम ने मध्य प्रदेश की निवेश-अनुकूल नीतियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में अब सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध है।
डॉ. मोहन यादव ने कहा, “मैं यूपी के सभी निवेशकों को मध्य प्रदेश आमंत्रित करता हूं। हमने सिंहस्थ 2028 को एक आर्थिक धारा बनाने का संकल्प लिया है।”
निष्कर्ष: आस्था, प्रशासन और अर्थव्यवस्था का अनूठा संगम
मुख्यमंत्री मोहन यादव का यह वाराणसी दौरा सिंहस्थ 2028 की सफलता के लिए एक टर्निंग प्वाइंट साबित होगा। काशी से सीखे गए ‘मैनेजमेंट के पाठ’ निश्चित रूप से उज्जैन के सिंहस्थ को एक वैश्विक मानक प्रदान करेंगे। साथ ही, धार्मिक पर्यटन को अर्थव्यवस्था से जोड़ने का उनका विजन देश के अन्य राज्यों के लिए भी रोल मॉडल बनेगा।
