निर्मल चित्त वाला मनुष्य करता है भगवान के वचनानुसार प्रत्येक कार्य
धर्म चक्रवर्ती जयकीर्ति जी गुरुदेव की राजस्थान कोटा में भव्य धर्म सभा
रामपुरा स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में चल रहा ध्यान-दिवाकर अनुष्ठान | 21–30 नवम्बर श्री राम कथा
कोटा, राजस्थान।
धर्म चक्रवर्ती जयकीर्ति जी गुरुदेव—ध्यान दिवाकर, अनुष्ठान विशेषज्ञ—इन दिनों कोटा के रामपुरा स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। यहां 21 नवम्बर से 30 नवम्बर तक पहली बार पद्म पुराण आधारित श्री राम कथा संगीत की सुमधुर धुनों के साथ गरिमामयी वातावरण में आयोजित की जा रही है।
यह जानकारी राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन “पार्श्वमणि” ने दी।
मां जिनवाणी की पालकी यात्रा से हुआ शुभारंभ
अकलंक स्कूल परिसर में आयोजित कथा का शुभारंभ मां जिनवाणी की पालकी यात्रा से हुआ।
श्री लादूलाल, लाड़बाई, पदम मिनल, संयोग अजमेर परिवार ने गुरु चरणों में पालकी समर्पित करने का सौभाग्य प्राप्त किया।
इसके बाद राजा श्रेणिक बनने का सौभाग्य
श्री संजय–श्रीमती विनोद, संकेत, सलोनी, यश जैन परिवार को मिला।
अकलंक संस्था के अध्यक्ष पीयूष बज एवं महेश जैन गंगवाल ने कार्यक्रम का संचालन एवं मार्गदर्शन किया।
गुरुदेव जयकीर्ति जी का प्रेरक प्रवचन
धर्मसभा को संबोधित करते हुए धर्म चक्रवर्ती जयकीर्ति जी गुरुदेव ने कहा:
“निर्मल चित्त के धारक मनुष्य का प्रत्येक कार्य भगवान के वचनानुसार होता है।
जीवन में अपने परिणाम सदैव निर्मल रखें।”
गुरुदेव ने पद्म पुराण की घटनाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया—
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सीता और मंडोदरी का संवाद
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रावण का सीता को भयभीत करना
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विभीषण और मारीच की समझाइश
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अशोक वाटिका का प्रसंग
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सुग्रीव, राम और लक्ष्मण का संवाद
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बालि मुनिराज की दीक्षा का राज
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दशानन का ‘रावण’ नामकरण
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रावण का पश्चाताप और धरणेन्द्र का आना
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रावण द्वारा ‘अमोघ विजया’ विद्या प्राप्त करना
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हनुमान को दूत रूप में प्रेषित करने का निर्णय
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हनुमान का अंजना माता के कष्टों का स्मरण
आदि अनेक प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक एवं विस्तारपूर्वक वर्णन किया। 
गुरुदेव की जीवन-नीतियाँ
गुरुदेव ने बताया—
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जीव को सुख–दुःख उसके कर्मों के अनुकूल या प्रतिकूल ही देते हैं।
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उपकार का स्मरण करने वाला सदैव यश प्राप्त करता है।
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महापुरुषों के चित्त की शांति तो मात्र प्रणाम से हो जाती है,
परंतु दुर्जनों की शांति महादान से भी नहीं होती। -
पुण्य के बिना सौभाग्य का निर्माण नहीं होता, इसलिए योग्यता अनुसार सतत पुण्य करना चाहिए।
कथा में अनेक गणमान्य उपस्थित
आज की कथा में प्रमुख रूप से—
राजेंद्र पापड़ीवाल, भागचंद लुहाड़िया, पारस पोरवाल, विनोद बज, सन्मति पाटनी, योगेश मित्तल, पंडित जगदीश जैन, ललित लुहाड़िया, चेतन प्रकाश जैन, हेमंत निखिल आदि उपस्थित रहे।


