श्री चंद्रप्रभ भगवान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर इंदौर के शक्कर बाजार स्थित दिगंबर जैन तेरापंथी मंदिर में भव्य अभिषेक, ध्वजा रोहण एवं विधान का आयोजन सम्पन्न हुआ। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
राजेश जैन दद्दू इंदौर
- श्री चंद्रप्रभ भगवान जन्मोत्सव का आध्यात्मिक महत्व
- शक्कर बाजार इंदौर में भव्य आयोजन
- वार्षिक अभिषेक एवं ध्वजा रोहण समारोह
- दो दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान
- प्रमुख पुण्यलाभार्थी परिवार
- श्रद्धालुओं की आस्था और सहभागिता
- जैन समाज के लिए संदेश और प्रेरणा
श्री चंद्रप्रभ भगवान जन्मोत्सव: आस्था, भक्ति और भव्यता का संगम
श्री चंद्रप्रभ भगवान जन्मोत्सव जैन धर्म के प्रमुख पावन पर्वों में से एक है, जो श्रद्धा, तप और आत्मशुद्धि का संदेश देता है। इसी पावन अवसर पर इंदौर के शक्कर बाजार स्थित श्री दिगंबर जैन तेरापंथी मंदिर में अति प्राचीन, चमत्कारी एवं प्राकृतिक स्फटिक मणि से निर्मित भारतवर्ष की सबसे बड़ी श्री चंद्रप्रभ भगवान की प्रतिमा का वार्षिक अभिषेक एवं मंदिर शिखर पर ध्वजा चढ़ाने का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ।
शक्कर बाजार इंदौर में भव्य धार्मिक आयोजन
इस ऐतिहासिक श्री चंद्रप्रभ भगवान जन्मोत्सव के आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मंदिर परिसर भक्ति, जयकारों और भक्तामर स्तोत्र के मधुर स्वरों से गूंज उठा। आयोजन की भव्यता देखते ही बनती थी, जहाँ श्रद्धालुओं ने अनुशासन और श्रद्धा के साथ धर्मलाभ प्राप्त किया।
वार्षिक अभिषेक एवं ध्वजा रोहण का सौभाग्य
मंदिर अध्यक्ष श्री प्रदीप चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष प्रथम कलश अभिषेक एवं मुख्य ध्वजा चढ़ाने का पुण्यलाभ
श्री तेजकुमार–ललितकुमार बड़जात्या (गौरव ज्वैलर्स परिवार) को प्राप्त हुआ। यह क्षण सम्पूर्ण जैन समाज के लिए गर्व और आध्यात्मिक आनंद का विषय रहा।

दो दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान
श्री चंद्रप्रभ भगवान जन्मोत्सव के अंतर्गत दो दिवसीय धार्मिक आयोजन सम्पन्न हुए, जिनमें शामिल रहे—
- श्री चंद्रप्रभ विधान
- श्री पार्श्वनाथ विधान
- श्री भक्तामर पाठ
इन विधानों के माध्यम से आत्मशुद्धि, संयम और अहिंसा का संदेश समाज तक पहुँचा।
इन परिवारों ने कमाया पुण्यलाभ
इस पावन अवसर पर अनेक श्रद्धालु परिवारों ने धर्मलाभ प्राप्त किया, जिनमें प्रमुख रूप से—
- श्री ललित–चिराग गोधा परिवार
- चौधरी परिवार
- प्रांजल जैन
- जैन मेडिकल
- नितिन सेठी
- सत्येंद्र रावका
इन सभी ने श्री चंद्रप्रभ भगवान जन्मोत्सव के आयोजन को सफल और स्मरणीय बनाया।
श्रद्धालुओं की उमड़ी आस्था
सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। बच्चों से लेकर वृद्धजनों तक सभी ने भगवान चंद्रप्रभ के दर्शन कर पुण्य अर्जित किया। वातावरण पूरी तरह से आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।
जैन समाज के लिए संदेश
श्री चंद्रप्रभ भगवान जन्मोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा है। ऐसे आयोजन समाज में संस्कार, एकता और शांति का संचार करते हैं।
निष्कर्ष
इंदौर में सम्पन्न हुआ श्री चंद्रप्रभ भगवान जन्मोत्सव न केवल भव्य रहा, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और जैन संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का जीवंत उदाहरण भी बना।
