ग्राम विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं प्रस्फुटन समितियां: मधु चौहान
आठनेर। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद, विकासखंड आठनेर के निर्देशन में सेक्टर हिडली की ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों के लिए एक दिवसीय ‘प्रस्फुटन समिति शक्ति संचय प्रशिक्षण कार्यक्रम’ ग्राम आष्टी में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन नवांकुर संस्था जागृति ग्राम विकास समिति, बरखेड़ के तत्वावधान में हुआ। प्रशिक्षण का उद्देश्य चयनित गांवों में गठित प्रस्फुटन समितियों की कार्यक्षमता बढ़ाना, ग्राम विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना और जनभागीदारी को प्रोत्साहित करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ ग्राम पंचायत आष्टी की सरपंच सरस्वती कुमरे और ग्रामीण नगर मंडल अध्यक्ष सुनील टेकपूरे ने मां भारती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन कर किया। प्रशिक्षण में विभिन्न गांवों से आए प्रस्फुटन समिति पदाधिकारियों, सदस्यों और नवांकुर सखियों ने हिस्सा लिया। दिनभर चले कार्यक्रम में चार अलग-अलग सत्रों के माध्यम से समिति संचालन और गांवों में सामाजिक विकास के कार्यों से जुड़ी जानकारी दी गई।
गांवों में छोटे प्रयासों से बड़े बदलाव का आह्वान


प्रथम सत्र में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद, विकासखंड आठनेर की विकासखंड समन्वयक मधु चौहान ने परिषद की अवधारणा, उद्देश्यों, नियमों और लक्ष्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियां गांवों के विकास की धुरी बन सकती हैं। इसके लिए समितियों को स्थानीय जरूरतों को समझकर लोगों को साथ जोड़ना होगा और योजनाबद्ध तरीके से काम करना होगा।
चौहान ने गांवों को आदर्श ग्राम बनाने के लिए स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण, पौधारोपण, नशामुक्ति और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गांव में छोटे स्तर से शुरू किए गए प्रयास आगे चलकर बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं। समितियां ग्रामीणों के साथ मिलकर स्थानीय समस्याओं की पहचान करें और उनके समाधान के लिए सामूहिक पहल करें। जनभागीदारी और निरंतर प्रयास से विकास कार्यों को गांव के लोगों से जोड़ा जा सकता है।
स्वैच्छिक संस्था के रूप में काम करने की जानकारी
द्वितीय सत्र में नवांकुर संस्था जागृति सेवा समिति के अध्यक्ष देविदास गांवड़े ने प्रस्फुटन समितियों के स्वयंसेवी संगठन यानी एनजीओ के रूप में उन्नयन और पंजीयन की प्रक्रिया पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वयंसेवी संस्था के रूप में संगठित होकर समितियां ग्राम और प्रदेश के विकास में योगदान दे सकती हैं। उन्होंने समाजसेवा के कार्यों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने और संस्था की गतिविधियों को मजबूत बनाने के बारे में भी बताया।
गांवड़े ने कहा कि स्वैच्छिक संस्था के माध्यम से समाज के लिए सेवा कार्य किए जा सकते हैं। इसके लिए समिति के सदस्यों को अपने उद्देश्य स्पष्ट रखने, जिम्मेदारियों को समझने और सामूहिक रूप से कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने संस्था के गठन और पंजीयन से जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी देते हुए प्रतिभागियों के सवालों के जवाब भी दिए।
संवाद कौशल और अभिलेख संधारण पर सत्र
तृतीय सत्र में सामाजिक कार्यकर्ता आशुतोष सिंह चौहान ने ग्रामीण स्तर पर काम करने के लिए आवश्यक संवाद कौशल और तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि प्रभावी और सारगर्भित संवाद से किसी भी विषय को सरलता से लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। ग्रामीणों के साथ बातचीत में उनकी जरूरतों और परिस्थितियों को समझना जरूरी है। स्पष्ट संवाद से कार्यक्रमों की योजना बनाना और लोगों को उनमें सहभागी बनाना आसान होता है।
चतुर्थ सत्र में परामर्शदाता दीपाली पातुलकर ने समितियों के दस्तावेजीकरण और अभिलेख संधारण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठकों, गतिविधियों और किए गए कार्यों का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखना समिति के काम को मजबूत बनाता है। अभिलेखों के आधार पर समिति अपने कार्यों का मूल्यांकन कर सकती है और आगे के कार्यक्रमों की बेहतर योजना तैयार कर सकती है। उन्होंने प्रतिभागियों को दस्तावेजों को सुव्यवस्थित ढंग से रखने के महत्व से अवगत कराया।
प्रमाण पत्र वितरण के साथ हुआ समापन
समापन सत्र में अतिथियों ने प्रशिक्षण में शामिल प्रस्फुटन समितियों के पदाधिकारियों, सदस्यों और नवांकुर सखियों को सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किए। आयोजकों ने प्रशिक्षण में मिली जानकारी को गांवों में किए जाने वाले कार्यों में उपयोग करने की बात कही। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों और अतिथियों के सामूहिक समरस भोजन के साथ हुआ। सभी ने एक पंगत में बैठकर भोजन किया। आयोजकों के अनुसार, प्रशिक्षण का उद्देश्य समितियों को ग्राम विकास के कार्यों में अधिक सक्रिय और सक्षम बनाना तथा गांवों में जनभागीदारी को बढ़ावा देना रहा।
