शीतला सप्तमी 2026 पर महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए व्रत रखेंगी। जानिए शीतला सप्तमी का महत्व, पूजा विधि, ठंडे भोजन का भोग और इंदौर के प्रमुख मंदिरों में होने वाला पूजन।
शीतला सप्तमी 2026: महिलाएं रखेंगी व्रत, परिवार की खुशहाली के लिए होगा पूजन
शीतला सप्तमी 2026 का पर्व इस वर्ष होली के सातवें दिन मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं माता शीतला की पूजा-अर्चना कर परिवार के स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं।
धार्मिक मान्यता है कि शीतला माता की पूजा करने से घर में रोग, महामारी और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है तथा परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसी कारण इस दिन विशेष रूप से महिलाएं व्रत रखती हैं और माता को ठंडे भोजन का भोग लगाती हैं।
इंदौर सहित प्रदेश के कई शहरों में इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा और दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
शीतला सप्तमी का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में शीतला सप्तमी 2026 का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। शीतला माता को रोगों की देवी माना जाता है और उन्हें स्वास्थ्य की रक्षक देवी के रूप में पूजा जाता है।
मान्यता है कि शीतला माता की कृपा से घर में रोग, विशेष रूप से त्वचा और संक्रामक रोगों से रक्षा होती है। इसलिए इस दिन महिलाएं पूरे विधि-विधान से माता की पूजा करती हैं।
धार्मिक ग्रंथों में भी उल्लेख मिलता है कि माता शीतला की आराधना करने से परिवार में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य बना रहता है।
क्यों चढ़ाया जाता है ठंडे भोजन का भोग
शीतला सप्तमी 2026 की एक खास परंपरा यह है कि इस दिन माता को ठंडा भोजन चढ़ाया जाता है।इसके लिए महिलाएं एक दिन पहले यानी सप्तमी से पूर्व वाले दिन भोजन बनाकर रखती हैं। अगले दिन उसी ठंडे भोजन का भोग माता को लगाया जाता है।
भोग में आमतौर पर ये व्यंजन शामिल होते हैं:
- पूड़ी
- दही
- गुड़
- बासी रोटी
- चने
- मीठे पकवान
यह परंपरा इस बात का प्रतीक मानी जाती है कि शीतलता और संयम जीवन में स्वास्थ्य और संतुलन बनाए रखते हैं।
इंदौर के प्रमुख शीतला माता मंदिर
शीतला सप्तमी 2026 के अवसर पर इंदौर शहर के कई मंदिरों में विशेष पूजा और दर्शन का आयोजन होगा।
इन प्रमुख स्थानों पर बड़ी संख्या में महिलाएं पूजन के लिए पहुंचेंगी:
- गांधी हॉल क्षेत्र का शीतला माता मंदिर
- कोठारी मार्केट क्षेत्र
- अन्नपूर्णा मंदिर परिसर
- हरसिद्धि माता मंदिर
- तिलक नगर स्थित शीतला माता मंदिर
इन मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना, आरती और भोग का आयोजन होगा।
शीतला सप्तमी व्रत की पूजा विधि
शीतला सप्तमी 2026 के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं।
इसके बाद माता शीतला की प्रतिमा या चित्र के सामने पूजा की जाती है।
पूजा की मुख्य विधि:
- माता शीतला का ध्यान करना
- दीपक और अगरबत्ती जलाना
- ठंडे भोजन का भोग लगाना
- माता की आरती करना
- परिवार के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करना
इसके बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में वितरित किया जाता है।
परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार शीतला सप्तमी 2026 का व्रत रखने से परिवार में स्वास्थ्य और खुशहाली बनी रहती है।कई महिलाएं यह व्रत विशेष रूप से अपने बच्चों की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखती हैं।यह पर्व परिवार और समाज में सकारात्मक ऊर्जा और आस्था को मजबूत करता है।
समाज में शीतला सप्तमी की परंपरा
भारत में कई राज्यों में शीतला सप्तमी 2026 को बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।यह केवल धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का भी प्रतीक है।इस दिन महिलाएं मंदिरों में एकत्रित होकर पूजा करती हैं और परिवार के लिए मंगलकामना करती हैं।समय के साथ भले ही जीवन शैली बदल गई हो, लेकिन शीतला सप्तमी की आस्था और परंपरा आज भी समाज में उतनी ही मजबूत बनी हुई है।
