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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती: गौमाता ही सनातन धर्म का प्रमुख प्रतीक और धरती का आधार

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Published On: 18 September 2025
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बोले – गौमाता सनातन धर्म का प्रमुख प्रतीक, धरती का आधार

पूर्णिया (बिहार), 18 सितम्बर 2025।
ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने पूर्णिया में आयोजित गौमतदाता संकल्प सभा में कहा कि सनातन धर्म के मूल प्रतीकों में गौमाता सबसे प्रमुख हैं और धरती का आधार भी गौमाता ही हैं। उन्होंने कहा कि जैसे भारत सरकार का अमूर्त स्वरूप तिरंगे और अशोक चिन्ह में दिखता है, वैसे ही सनातन धर्म का अमूर्त स्वरूप गौमाता के रूप में दिखाई देता है।

गौमाता ही भारत माता और धरती माता

शंकराचार्य जी ने कहा कि जब हम “भारत माता की जय” बोलते हैं तो यह प्रश्न उठता है कि भारत माता कौन है? वेद, पुराण और सनातन साहित्य में इसका उल्लेख नहीं मिलता। वास्तव में भारत माता और धरती माता का स्वरूप गौमाता ही हैं। इसलिए भारत माता और धरती माता की रक्षा करनी है तो हमें गौमाता की रक्षा करनी होगी।

उन्होंने तुलसीदास का उल्लेख करते हुए कहा – “संग भूमि बेचारी गो तन धारी”, यानी जब धरती संकट में होती है तो वह गाय का रूप धारण कर भगवान से शरण मांगती है।

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गौहत्या अधर्म – योजनाबद्ध प्रयास से हो रही हत्या

शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि आज धर्मविरोधी ताकतें योजनाबद्ध तरीके से गौहत्या कर रही हैं, क्योंकि वे जानती हैं कि गाय का घी हवन में भगवान को प्रसन्न करता है और धर्म की रक्षा करता है। इसलिए सनातनधर्मियों को भी अब संगठित होकर योजनाबद्ध तरीके से गौमाता की रक्षा करनी होगी।

चारों वर्ण मिलकर करें सनातन धर्म की रक्षा

सभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य जी ने कहा कि सनातन समाज में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र – सभी एक ही परमात्मा की संतान हैं। विरोधी ताकतें हमें आपस में लड़ाने का षड्यंत्र कर रही हैं, जबकि इतिहास गवाह है कि शूद्र भी राजा, मंत्री और विद्वान रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट कहा – “शूद्र को नीचा कहने वाले पहले अपना पैर काटकर दिखाएं, क्योंकि विराट पुरुष के शरीर से ही चारों वर्ण उत्पन्न हुए हैं।”

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राजनीति और धर्म पर तीखी टिप्पणी

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ने कहा कि जो लोग यह कहते हैं कि संत राजनीति में न आएं, वे यह क्यों नहीं कहते कि राजनेता भी धर्म में हस्तक्षेप न करें? उन्होंने चेताया कि “मंथरा विचार” समाज को गर्त में ले जा रहा है और इससे सनातन धर्म का अस्तित्व संकट में है।

संकल्प सभा में बड़ी संख्या में लोग जुटे

सभा में हजारों की संख्या में सनातनधर्मी मौजूद रहे। भक्तों ने मंच पर शंकराचार्य जी महाराज के चरण पादुका पूजन के बाद उनकी आरती उतारी।
गौमतदाता संकल्प यात्रा के संयोजक स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुंदानंद गिरी जी महाराज, श्रीलाल बाबा, श्री नीलमणि जी, सुबोध कुमार चौधरी, देवेंद्र पाण्डेय सहित कई संत-महात्माओं ने भी सभा को संबोधित किया।

यह जानकारी शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय और शैलेन्द्र योगी द्वारा दी गई।

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