देव सिंह गुर्जर ठहाका महोत्सव में वीर रस की कविताओं से छा गए। उज्जैन के कालिदास अकादमी में हुए आयोजन में साहित्यकारों ने की जमकर सराहना।
देव सिंह गुर्जर ठहाका महोत्सव में छा गए
नागदा जं. निप्र: देव सिंह गुर्जर ठहाका महोत्सव में शहर के युवा कवि देव सिंह गुर्जर ने अपनी ओजस्वी और वीर रस से भरी कविताओं से ऐसा समा बांधा कि पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। उज्जैन स्थित कालिदास अकादमी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ठहाका महोत्सव के 26वें संस्करण में उनकी प्रस्तुति ने उन्हें रातोंरात नई पहचान दिला दी।
देव सिंह गुर्जर ने समसामयिक विषयों, देशभक्ति, समाज और युवा चेतना पर आधारित कविताएं सुनाकर यह साबित कर दिया कि नई पीढ़ी के कवि भी परंपरा और विचार दोनों को साथ लेकर चल सकते हैं।
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देव सिंह गुर्जर ठहाका महोत्सव की शुरुआत
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कार्यक्रम का भव्य मंच
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कविताओं में वीर रस की गूंज
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सम्मान और अतिथियों की उपस्थिति
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श्रोताओं की प्रतिक्रिया
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युवा कवियों के लिए प्रेरणा
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सोशल मीडिया पर चर्चा
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निष्कर्ष
देव सिंह गुर्जर ठहाका महोत्सव की शुरुआत
देव सिंह गुर्जर ठहाका महोत्सव में रविवार को जैसे ही देव सिंह गुर्जर का नाम पुकारा गया, पूरा सभागार उत्साह से भर गया। मंच पर आते ही उन्होंने आत्मविश्वास के साथ अपनी पहली कविता सुनाई, जिसमें मातृभूमि, बलिदान और शौर्य का वर्णन था।
उनकी आवाज़ में जो जोश था, उसने सीधे श्रोताओं के दिल को छू लिया। यह साफ दिख रहा था कि मंच पर सिर्फ एक कवि नहीं, बल्कि एक सशक्त विचारधारा खड़ी है।
कार्यक्रम का भव्य मंच
उज्जैन की प्रसिद्ध कालिदास अकादमी में आयोजित यह आयोजन साहित्य प्रेमियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं था। देशभर से आए कवि, लेखक और श्रोता इस मंच पर एकत्र हुए।
कार्यक्रम के संस्थापक संयोजक डॉ. महेंद्र यादव ने कहा कि ठहाका महोत्सव का उद्देश्य हास्य, व्यंग्य और ओजस्वी कविता के माध्यम से समाज को सकारात्मक संदेश देना है।
कविताओं में वीर रस की गूंज
देव सिंह गुर्जर ठहाका महोत्सव में देव सिंह गुर्जर की कविताओं का मुख्य स्वर वीर रस रहा। उन्होंने एक कविता में कहा—
“जब-जब रण में उठे शंखनाद,
तब-तब जागे भारत के लाल।”
इस तरह की पंक्तियों ने युवाओं में जोश भर दिया। उनकी कविताओं में सिर्फ भावनाएं नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला संदेश भी था।
सम्मान और अतिथियों की उपस्थिति
देव सिंह गुर्जर की उत्कृष्ट प्रस्तुति से प्रभावित होकर उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
सम्मान देने वालों में शामिल थे—
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कार्यक्रम के संस्थापक संयोजक: डॉ. महेंद्र यादव
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वरिष्ठ साहित्यकार: अशोक भाटी
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वित्त मंत्रालय भारत सरकार में पदस्थ: राजेंद्र कुमार
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कार्यक्रम संचालक: श्रीमती नमिता नमन
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कवि: सौरभ चातक
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महोत्सव के अन्य आयोजक
इन सभी ने एक स्वर में कहा कि देव सिंह गुर्जर आने वाले समय के सशक्त कवि बन सकते हैं।
श्रोताओं की प्रतिक्रिया
देव सिंह गुर्जर ठहाका महोत्सव में जैसे ही उन्होंने कविता समाप्त की, पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। कई श्रोताओं ने खड़े होकर उनका अभिनंदन किया।
एक श्रोता ने कहा—
“ऐसी कविता बहुत कम सुनने को मिलती है, जिसमें जोश, भाषा और भाव तीनों साथ हों।”
युवा कवियों के लिए प्रेरणा
देव सिंह गुर्जर की यह सफलता उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कविता और साहित्य को अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। उन्होंने यह दिखा दिया कि छोटे शहर से निकलकर भी राष्ट्रीय मंच पर पहचान बनाई जा सकती है।
सोशल मीडिया पर चर्चा
कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी देव सिंह गुर्जर ठहाका महोत्सव ट्रेंड करने लगा। कई लोगों ने उनकी कविताओं की छोटी-छोटी क्लिप साझा की।
Instagram और Facebook पर लोग लिख रहे हैं—
“आज कविता ने फिर से दिल जीत लिया।”
आयोजन की खास बातें
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देशभर से साहित्यकारों की मौजूदगी
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ओज, हास्य और व्यंग्य का सुंदर संगम
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युवाओं की भारी भागीदारी
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सांस्कृतिक एकता का संदेश
निष्कर्ष
देव सिंह गुर्जर ठहाका महोत्सव में सिर्फ कविता नहीं पढ़ रहे थे, बल्कि वह नई पीढ़ी की आवाज़ बनकर उभरे। उनकी प्रस्तुति ने यह साबित कर दिया कि कविता आज भी लोगों के दिलों में ज़िंदा है।
यह आयोजन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति और युवा ऊर्जा का संगम था। देव सिंह गुर्जर जैसे कवि आने वाले समय में हिंदी साहित्य को नई ऊंचाइयों तक जरूर ले जाएंगे।
संवाददाता जीवन लाल जैन नागदा की रिपोर्ट
