—Advertisement—

तीन दिनों में Sensex 2400 अंक गिरा, निवेशकों के 7 लाख करोड़ डूबे, तेल कीमतों में उछाल और FII बिकवाली का दबाव

Author Picture
Published On: 24 April 2026
Sensex

—Advertisement—

शेयर बाजार में भारी गिरावट: 3 दिनों में Sensex 2400 अंक टूटा, निवेशकों के 7 लाख करोड़ रुपये साफ

भारतीय शेयर बाजार में पिछले तीन कारोबारी दिनों से लगातार गिरावट का दौर जारी है, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार को भी बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जहां Sensex 800 से अधिक अंक टूट गया और निफ्टी 24,000 के स्तर से नीचे फिसल गया। इस लगातार गिरावट के चलते तीन दिनों में निवेशकों की संपत्ति करीब 7 लाख करोड़ रुपये तक घट गई है।

यह गिरावट केवल एक दिन की नहीं है, बल्कि एक व्यापक वैश्विक और घरेलू आर्थिक दबाव का परिणाम है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बनी रहेगी, तब तक भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता जारी रह सकती है।

तीन दिनों में बड़ा नुकसान

पिछले तीन कारोबारी सत्रों में शेयर बाजार ने निवेशकों को भारी नुकसान पहुंचाया है। सेंसेक्स लगभग 2400 अंक यानी करीब 3 प्रतिशत तक गिर चुका है, जबकि निफ्टी में 2.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 469 लाख करोड़ रुपये से घटकर 462 लाख करोड़ रुपये पर आ गया है। इसका मतलब है कि केवल एक दिन में ही करीब 4 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति खत्म हो गई। लगातार तीन दिनों की गिरावट को मिलाकर यह नुकसान 7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

बाजार गिरावट के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल है।

1. अमेरिका-ईरान तनाव

वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव बाजार पर भारी दबाव बना रहा है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अनिश्चितता ने वैश्विक तेल आपूर्ति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और एक-तिहाई गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा दिए गए सख्त बयानों और ईरान की प्रतिक्रिया ने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। इस कारण निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी है।

2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

पिछले एक सप्ताह में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 18 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। यह भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए बड़ा झटका है।

तेल की कीमतें बढ़ने से न केवल कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ती है, बल्कि महंगाई भी बढ़ने लगती है। इससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ता है और शेयर बाजार में बिकवाली बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाली तिमाही में कंपनियों की कमाई पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है।

3. रुपये में लगातार कमजोरी

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहा है और 94.25 के स्तर तक पहुंच गया है। यह गिरावट लगातार पांचवें दिन दर्ज की गई है।

जब रुपया कमजोर होता है, तो विदेशी निवेशकों को नुकसान की आशंका बढ़ती है, जिससे वे बाजार से पैसा निकालने लगते हैं। इसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ता है।

4. विदेशी निवेशकों की बिकवाली

कुछ समय पहले विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय बाजार में खरीदारी शुरू की थी, जिससे उम्मीद जगी थी कि बाजार में स्थिरता लौटेगी। लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी।

पिछले चार कारोबारी सत्रों में FII ने कैश सेगमेंट में लगभग 8,300 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की है। यह बिकवाली बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक अनिश्चितता बनी रहेगी, तब तक विदेशी निवेशक जोखिम कम करने के लिए बिकवाली करते रहेंगे।

5. तकनीकी स्तरों का टूटना

तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, निफ्टी 24,000 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट था, जो अब टूट चुका है। इस स्तर के टूटने के बाद बाजार में और गिरावट की संभावना बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अब 24,300 का स्तर प्रतिरोध का काम करेगा। यदि बाजार इसमें टिकने में असफल रहता है, तो निफ्टी 23,900 तक भी गिर सकता है।

तकनीकी संकेत यह बताते हैं कि फिलहाल बाजार में मजबूती के संकेत कमजोर हैं और अस्थिरता बनी रह सकती है।

निवेशकों में बढ़ी चिंता

लगातार गिरावट के कारण छोटे और बड़े निवेशकों में चिंता का माहौल है। कई निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है, खासकर उन लोगों को जिन्होंने हाल ही में बाजार में निवेश किया था।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में घबराहट में निवेश निकालना सही नहीं होता, क्योंकि इससे नुकसान और बढ़ सकता है। हालांकि, बिना रणनीति के निवेश बनाए रखना भी जोखिम भरा हो सकता है।

बाजार विशेषज्ञों की राय

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक कारणों से प्रेरित है, इसलिए इसमें जल्द सुधार की संभावना तभी बनेगी जब अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होगा।

एक प्रमुख निवेश रणनीतिकार के अनुसार, जब तक होर्मुज स्ट्रेट खुलने और तेल आपूर्ति को लेकर स्पष्टता नहीं आती, तब तक बाजार की दिशा तय करना मुश्किल रहेगा।

आगे का अनुमान

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। कच्चे तेल की कीमतें, रुपये की स्थिति और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करेंगी।

यदि वैश्विक स्थिति में सुधार होता है, तो बाजार में रिकवरी संभव है। लेकिन यदि तनाव बढ़ता है, तो और गिरावट से इंकार नहीं किया जा सकता।

निष्कर्ष

पिछले तीन दिनों में भारतीय शेयर बाजार में आई भारी गिरावट ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। लगभग 7 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान इस बात का संकेत है कि वैश्विक घटनाएं भारतीय बाजार पर गहरा असर डालती हैं।

फिलहाल बाजार दबाव में है और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहने और सोच-समझकर निर्णय लेने की आवश्यकता है। आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम और आर्थिक संकेतक बाजार की दिशा तय करेंगे।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp