सारंगपुर स्मार्ट मीटर विरोध के बीच करणी सेना और कांग्रेस ने बिजली विभाग का घेराव किया। बढ़े बिजली बिलों पर उपभोक्ताओं ने नाराजगी जताई, अधिकारियों ने जरूरत पड़ने पर पुराना मीटर लगाने का आश्वासन दिया।
सारंगपुर स्मार्ट मीटर विरोध: बढ़े बिजली बिलों पर फूटा गुस्सा, करणी सेना-कांग्रेस ने घेरा बिजली दफ्तर, अधिकारियों ने कहा- चाहें तो पुराना मीटर फिर लगा देंगे
सारंगपुर स्मार्ट मीटर विरोध सोमवार को पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। बढ़े हुए बिजली बिलों और स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया। करणी सेना और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में स्थानीय उपभोक्ताओं के साथ बस स्टैंड से रैली निकालकर मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (एमपीईबी) कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने स्मार्ट मीटर हटाने, गलत बिजली बिलों में सुधार करने और उपभोक्ताओं की समस्याओं का तत्काल समाधान करने की मांग उठाई।प्रदर्शनकारियों ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
करणी सेना और कांग्रेस ने निकाली विशाल रैली
सारंगपुर स्मार्ट मीटर विरोध के तहत सोमवार को बस स्टैंड से बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। करणी सेना और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने आम उपभोक्ताओं के साथ बिजली विभाग कार्यालय तक पैदल मार्च किया।प्रदर्शन के दौरान लोगों ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद बिजली बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, जिससे आम उपभोक्ता आर्थिक रूप से परेशान हो रहे हैं।लोगों का कहना था कि विभाग उनकी शिकायतों का समय पर समाधान नहीं कर रहा है।
उपभोक्ताओं ने विभाग पर लगाए गंभीर आरोप
प्रदर्शन के दौरान कई उपभोक्ता अपने बिजली बिल लेकर पहुंचे और अधिकारियों के सामने अपनी शिकायतें रखीं।लोगों ने आरोप लगाया कि कई महीनों से मीटर रीडिंग सही तरीके से नहीं ली जा रही है और बाद में एक साथ यूनिट जोड़कर भारी भरकम बिल जारी किए जा रहे हैं।उपभोक्ताओं ने मांग की कि सभी विवादित बिलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
सुमित्रा मेवाड़े ने सुनाई अपनी परेशानी
प्रदर्शन में शामिल सुमित्रा मेवाड़े ने बताया कि उनके घर का बिजली बिल 5 हजार रुपए से अधिक आ गया, जबकि इससे पहले कभी इतना बिल नहीं आया।उन्होंने कहा कि परिवार सामान्य बिजली उपयोग करता है, इसके बावजूद इतना अधिक बिल समझ से परे है।उन्होंने विभाग से बिल की जांच कराने की मांग की।
कांग्रेस नेता अखिलेश राठी ने लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता अखिलेश राठी ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले पांच महीनों तक मीटर रीडिंग शून्य दिखाई गई और छठे महीने अचानक 360 यूनिट जोड़कर बिल जारी कर दिया गया।उन्होंने इसे विभागीय लापरवाही बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।राठी ने कहा कि उपभोक्ताओं को गलत बिल देकर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।
किन्नर ममता ने भी उठाए सवाल
प्रदर्शन में शामिल किन्नर ममता ने भी बिजली विभाग पर मनमानी का आरोप लगाया।उन्होंने बताया कि पिछले महीने उन्हें बिजली बिल ही प्राप्त नहीं हुआ, लेकिन विभाग ने सीधे 7,691 रुपए बकाया दर्शा दिया।इसके बाद इस महीने 4,893 रुपए का नया बिल जोड़ दिया गया।उन्होंने कहा कि जब शिकायत लेकर विभाग पहुंचे तो कर्मचारियों का व्यवहार भी संतोषजनक नहीं रहा।
बिजली विभाग ने क्या कहा?
बढ़ते विरोध को देखते हुए बिजली विभाग के असिस्टेंट इंजीनियर विद्यासागर मिश्रा प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे और उनकी समस्याएं सुनीं।उन्होंने स्पष्ट किया कि स्मार्ट मीटर विभाग की मनमर्जी से नहीं लगाए जा रहे हैं।उनके अनुसार यह कार्य केंद्र सरकार की आरडीएसएस (Revamped Distribution Sector Scheme) योजना के तहत पूरे देश में किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि विभाग केवल शासन के निर्देशों का पालन कर रहा है।
जरूरत पड़ी तो पुराना मीटर फिर लगाया जाएगा
विद्यासागर मिश्रा ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि यदि किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर से परेशानी है और वह आवेदन देता है, तो विभाग उसकी जांच करेगा।यदि जांच में आवश्यकता महसूस हुई तो संबंधित उपभोक्ता के यहां पुराना मीटर दोबारा लगाया जा सकता हैzइस आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन सौंपा।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
करणी सेना और कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि बढ़े हुए बिजली बिलों और स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और बड़ा किया जाएगा।
उन्होंने प्रशासन से पारदर्शी व्यवस्था अपनाने और सभी विवादित बिजली बिलों की जांच कराने की मांग की।
उपभोक्ताओं की प्रमुख मांगें
- स्मार्ट मीटर हटाए जाएं।
- गलत बिजली बिलों की जांच हो।
- पुराने विवादित बिलों में सुधार किया जाए।
- उपभोक्ताओं की शिकायतों का समय पर निराकरण हो।
- विभागीय कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।
निष्कर्ष
सारंगपुर स्मार्ट मीटर विरोध अब केवल बिजली बिलों तक सीमित मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह उपभोक्ताओं के विश्वास और विभागीय कार्यप्रणाली से जुड़ा विषय बन चुका है। करणी सेना और कांग्रेस के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन ने बिजली विभाग के सामने कई सवाल खड़े किए हैं। हालांकि विभाग ने जांच और आवश्यकता पड़ने पर पुराना मीटर लगाने का आश्वासन दिया है, लेकिन अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान कितनी जल्दी और किस स्तर पर किया जाता है।
