भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बुधवार को बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ऐतिहासिक ‘सनातन हिंदू एकता पदयात्रा’ में शिरकत करते हुए एक चौंकाने वाला और चर्चा का विषय बनने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि “सनातन अमृत है, लेकिन कई लोगों को यह हजम नहीं होता।” उन्होंने सनातन धर्म के विरोधियों को ‘कीचड़ और लीचड़’ तक कह डाला, जिसने इस पदयात्रा को और भी अधिक चर्चा में ला दिया है।
सनातन अमृत है, पर हजम नहीं होता: नरोत्तम मिश्रा का दमदार बयान
पदयात्रा के छठे दिन जनसभा को संबोधित करते हुए डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने सनातन धर्म की महानता को रेखांकित करने के लिए एक अनूठा उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा, “जो लोग सनातन का विरोध कर रहे हैं, वे कीचड़ और लीचड़ के समान हैं। कीचड़ तन खराब करता है और लीचड़ मन खराब करता है, इसलिए इनसे दूर रहना ही बेहतर है।”
उन्होंने अपने बयान को और स्पष्ट करते हुए कहा, “सनातन अमृत है, लेकिन जैसे देशी घी, शहद और मिश्री औषधि हैं, फिर भी जिन्हें नहीं हजम होती, वे मर जाते हैं। वैसे ही सनातन भी अमृत है, लेकिन कई लोगों को हजम नहीं होता।” डॉ. मिश्रा ने जोर देकर कहा कि वे किसी की तुलना जानवरों से नहीं कर रहे हैं, बल्कि यह समझाना चाहते हैं कि सनातन धर्म की गहराई और महानता को हर कोई समझ नहीं सकता। यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से वायरल हो रहा है।
हिंदू एकता, जातिवाद उन्मूलन और हिंदू राष्ट्र का संदेश लेकर निकली पदयात्रा
यह सनातन हिंदू एकता पदयात्रा एक राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा है जिसका उद्देश्य पूरे उत्तर भारत में हिंदू एकता का संदेश फैलाना, जातिवाद के उन्मूलन को बढ़ावा देना और हिंदू राष्ट्र की स्थापना के विचार को मजबूत करना है। इस पदयात्रा का नेतृत्व बागेश्वर धाम के करिश्माई गुरु पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री कर रहे हैं, जो पिछले कुछ समय से राम कथा के माध्यम से लाखों लोगों तक पहुंच बना चुके हैं।
डॉ. मिश्रा ने इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि “महाराज धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जो अभियान चला रहे हैं, वह भारत की आत्मा को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास है।” उन्होंने आगे कहा, “सनातन विरोधी समाज में जहर घोलना चाहते हैं लेकिन सनातन सच्चाई, सद्भाव और आत्मबल का प्रतीक है।”
पदयात्रा का मार्ग और अगली मंजिल: मथुरा में दिखा जनसैलाब
यह ऐतिहासिक पदयात्रा 7 नवंबर को दिल्ली के छतरपुर स्थित कात्यायनी मंदिर से शुरू हुई थी और इसकी समाप्ति 16 नवंबर को वृंदावन में होगी। आज, गुरुवार को पदयात्रा का सातवां दिन है। आज यह यात्रा कोटवन बॉर्डर होते हुए मथुरा में प्रवेश करेगी और अगले चार दिनों तक मथुरा जिले के विभिन्न हिस्सों में संदेश का प्रसार करते हुए वृंदावन की ओर बढ़ेगी।
मथुरा, जो भगवान कृष्ण की जन्मस्थली है, में इस पदयात्रा के प्रवेश को एक विशेष महत्व दिया जा रहा है। यहां भारी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय निवासी सड़कों पर उमड़े हैं ताकि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का आशीर्वाद ले सकें और हिंदू एकता के इस पवित्र अभियान में अपना योगदान दे सकें।
सनातन धर्म की महानता और वर्तमान संदर्भ
डॉ. नरोत्तम मिश्रा के इस बयान ने एक बार फिर सनातन धर्म और उसके सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव पर बहस छेड़ दी है। सनातन धर्म, जिसे अक्सर हिंदू धर्म के मूल स्वरूप के रूप में जाना जाता है, अपनी सहिष्णुता, विविधता और दार्शनिक गहराई के लिए प्रसिद्ध है। हालांकि, समय-समय पर इसकी आलोचना और विरोध भी देखने को मिलता है।
डॉ. मिश्रा का बयान इसी विरोध के प्रति एक तीखी प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने सनातन के विरोधियों पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वे समाज में विष घोलने का काम कर रहे हैं, जबकि सनातन स्वयं सत्य और सद्भाव का मार्ग प्रशस्त करता है। यह बयान उन लोगों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी की तरह है जो हिंदू समाज को बांटने का प्रयास करते हैं।
निष्कर्ष: एक ऐतिहासिक पदयात्रा जो मजबूत कर रही है हिंदू अस्मिता
बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की यह सनातन हिंदू एकता पदयात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि एक सामाजिक-सांस्कृतिक आंदोलन बनती जा रही है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा जैसे वरिष्ठ राजनेताओं का इसमें शामिल होना इसके राजनीतिक प्रभाव को भी दर्शाता है। यह पदयात्रा हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को लोकप्रिय बनाने, जातिवाद जैसी सामाजिक बुराइयों को खत्म करने और एक सशक्त व एकजुट हिंदू समाज के निर्माण का प्रयास है। मथुरा से वृंदावन तक का यह सफर निश्चित रूप से भारत के सांस्कृतिक और धार्मिक परिदृश्य पर एक गहरी छाप छोड़ेगा।
