—Advertisement—

समाधि संलेखना सूचना: 7 महत्वपूर्ण तथ्य | पूज्य मुनि श्री मनोज्ञसागर जी महाराज का पावन समाधि मरण

Author Picture
Published On: 25 February 2026
WhatsApp Image 2026 02 24 at 10.55.20 PM

—Advertisement—

समाधि संलेखना सूचना – पूज्य मुनि श्री मनोज्ञसागर जी महाराज का 24 फरवरी 2026 को सम्मेद शिखर जी में संलेखनापूर्वक समाधि मरण। जानें 7 महत्वपूर्ण तथ्य, जैन समाज की श्रद्धांजलि और आध्यात्मिक संदेश।

डॉ जैनेंद्र जैन, राजेश जैन दद्दू

समाधि संलेखना सूचना – पावन क्षण

समाधि संलेखना सूचना के अनुसार, परम पूज्य श्रमण संस्कृति के महामहिम पट्टाचार्य विशुद्धसागर जी महाराज के परम शिष्य पूज्य मनोज्ञसागर जी महाराज का संलेखनापूर्वक समाधि मरण दिनांक 24 फरवरी 2026, मंगलवार, रात्रि 10:05 बजे सम्मेद शिखर जी की पावन धरा पर हुआ।

यह समाधि मरण पूज्य वैराग्यनंदी जी महाराज के ससंघ सानिध्य में संपन्न हुआ। जैन समाज के लिए यह क्षण अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा।

सम्मेद शिखर जी – मोक्षभूमि

https://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/0/0c/Shikharji_Parasnath_Giridih.jpg
समाधि संलेखना सूचना में वर्णित है कि यह पावन घटना जैन धर्म के महान तीर्थ सम्मेद शिखर जी में हुई, जहाँ 20 तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया। यह स्थान जैन आस्था का सर्वोच्च केंद्र माना जाता है।

जीवन यात्रा और दीक्षा प्रसंग

वर्ष 2007 में जब आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज ने आचार्य पद ग्रहण किया, तब उनका प्रथम शुभागमन इंदौर नगर में हुआ। छत्रपति नगर, बुंदेलखंड बहुल क्षेत्र में उनका वर्षायोग स्थापित हुआ था।उस समय संघ में ऐलक रूप में संघस्थ रहे मनोज्ञ सागर जी को बाद में दलाल बाग, छत्रपति नगर में जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान की गई। उसी क्षण से वे मुनि मनोज्ञ सागर बन गए।यह स्मृति आज भी हजारों श्रद्धालुओं के हृदय पटल पर अंकित है।

संलेखनापूर्वक समाधि मरण का महत्व

समाधि संलेखना सूचना केवल एक समाचार नहीं, बल्कि जैन दर्शन का जीवंत उदाहरण है।

संलेखना क्या है?

संलेखना आत्मा की शुद्धि और देह त्याग की वह प्रक्रिया है जिसमें साधक पूर्ण वैराग्य, संयम और ध्यान के साथ मृत्यु को स्वीकार करता है।

जैन समाज की भावभीनी श्रद्धांजलि

इंदौर दिगम्बर जैन समाज के सामाजिक सांसद अमित कासलीवाल, डॉ. जैनेन्द्र जैन आजाद, सुशील पांड्या, भूपेंद्र जैन, हंसमुख गांधी, टीके वेद सहित अनेक समाजजनों ने इसे समाज की अपूर्णीय क्षति बताया।

समाधि संलेखना सूचना ने पूरे समाज को शोकाकुल कर दिया, परंतु साथ ही आध्यात्मिक प्रेरणा भी दी।

श्रद्धांजलि चित्र

https://i.pinimg.com/736x/e7/5b/48/e75b48802516edf13aab3f9574965179.jpg

आध्यात्मिक प्रेरणा और संदेश

समाधि संलेखना सूचना हमें सिखाती है कि जीवन अनित्य है, पर आत्मा शाश्वत है।मुनि श्री पिछले काफी समय से अस्वस्थ थे और शिखरजी में साधनारत थे। उन्होंने पूर्ण संयम और वैराग्य के साथ देह त्याग कर जैन साधना की सर्वोच्च परंपरा को जीवंत किया।

समाज के लिए अपूर्णीय क्षति

समाधि संलेखना सूचना केवल एक आध्यात्मिक घटना नहीं, बल्कि समाज के लिए एक भावनात्मक क्षण है।

डॉ. जैनेंद्र जैन और राजेश जैन दद्दू सहित समस्त समाज ने पूज्य मुनि श्री के श्रीचरणों में कोटि-कोटि नमन किया और “ओम शांति” के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की।

निष्कर्ष

समाधि संलेखना सूचना जैन परंपरा की महान साधना और वैराग्य का दिव्य उदाहरण है।पूज्य मुनि श्री मनोज्ञसागर जी महाराज का संलेखनापूर्वक समाधि मरण जैन समाज के इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा।उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन।
ॐ शांति।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp