सल्लेखना समाधि की प्रेरणादायी मिसाल: आचार्य विशुद्धसागर जी महाराज के सानिध्य में भिंड निवासी विनोद वर्णी जी ने 8 दिन चारों आहार त्याग कर दिल्ली में समाधि प्राप्त की।
सल्लेखना समाधि की प्रेरणादायी मिसाल: आचार्य विशुद्धसागर जी के सानिध्य में भिंड निवासी विनोद वर्णी जी ने ली समाधि
रिपोर्टर – राजेश जैन दद्दू, दिल्ली/इंदौर
नई दिल्ली। सल्लेखना समाधि की प्रेरणादायी मिसाल प्रस्तुत करते हुए श्रमण संस्कृति के उन्नायक परम पूज्य पट्टाचार्य आचार्य भगवंत श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में भिंड निवासी श्रावक श्री विनोद जैन वर्णी जी ने सल्लेखनापूर्वक समाधि प्राप्त की। आठ दिन तक चारों प्रकार के आहार का त्याग कर श्री 1008 आदिनाथ भगवान के दर्शन और गुरु संघ के समागम में उन्होंने देह विसर्जन किया।धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि उनकी यह उत्कृष्ट सल्लेखना समाधि जैन समाज के लिए त्याग, संयम, श्रद्धा और गुरु भक्ति की प्रेरणादायी मिसाल बन गई है।
स्वास्थ्य खराब होने पर व्यक्त की गुरु चरणों में समाधि मरण की अंतिम इच्छा
दद्दू ने बताया कि स्वास्थ्य खराब होने पर विनोद जैन वर्णी जी ने गुरु चरणों में समाधि मरण की अंतिम इच्छा व्यक्त की थी। आकाश जैन के अनुसार विनोद जैन वर्णी जी कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। लगभग 10 दिन पूर्व स्वास्थ्य अधिक खराब होने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां वर्णी जी ने चिकित्सकों से उपचार नहीं लेने और गुरु चरणों में जाने की इच्छा व्यक्त की।इसके पश्चात उन्होंने अपने परिवारजनों से अपनी अंतिम साधना दिल्ली में वर्षायोगरत श्रमण संस्कृति के महाश्रमण गुरु आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज के चरणों में करने के लिए दिल्ली ले चलने की इच्छा व्यक्त की। परिवारजन उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए उन्हें तत्काल गुरु चरणों में दिल्ली लेकर आए।
सल्लेखना समाधि से पहले ऋषभोदय तीर्थ दिल्ली में 8 दिन की कठोर साधना
दिल्ली पहुंचने के बाद विनोद जैन वर्णी जी श्री ऋषभोदय तीर्थ क्षेत्र, ऋषभ विहार, दिल्ली स्थित श्री मंदिर जी में आचार्य भगवंत श्री विशुद्धसागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में रहे।यहां उन्होंने लगभग आठ दिनों तक चारों प्रकार के आहार का पूर्ण त्याग किया और अपना सम्पूर्ण समय आत्मसाधना एवं धार्मिक आराधना में व्यतीत किया। गुरु सानिध्य में उनकी यह कठिन साधना त्याग, संयम और आत्मकल्याण के प्रति उनके दृढ़ भावों को प्रकट करती रही।
शांत, संयमित और भक्तिपूर्ण अंतिम क्षण
विनोद जैन वर्णी जी ने श्री 1008 आदिनाथ भगवान के दर्शन एवं गुरु समागम में रहते हुए अत्यंत शांत, संयमित एवं भक्तिपूर्ण भावों के साथ अपनी जीवन-यात्रा को विराम दिया और सल्लेखना समाधि मरण को प्राप्त किया।उनके अंतिम समय में गुरु भक्ति, धार्मिक आराधना और आत्मसाधना के भाव बने रहे। आठ दिनों तक आहार का त्याग करते हुए उन्होंने अपनी साधना जारी रखी। उनकी समाधि की जानकारी मिलने पर जैन समाज के लोगों ने श्रद्धापूर्वक उन्हें विनयांजलि अर्पित की।
पालकी यात्रा में जयकारों के साथ श्रद्धालुओं ने दी विदाई
विनोद जैन वर्णी जी की पालकी यात्रा भी श्रद्धा और धार्मिक भावनाओं के साथ निकाली गई। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाते हुए उन्हें अंतिम विदाई दी।आचार्य श्री के चरणों में उनकी आत्मा की उत्तम गति एवं भावी मंगलमय यात्रा की मंगलकामना करते हुए सकल जैन समाज दिल्ली ने विनम्र विनयांजलि अर्पित की। समाजजनों ने उनके त्याग, संयम, श्रद्धा और गुरु भक्ति को प्रेरणादायी बताया।
विनोद जैन वर्णी जी की सल्लेखना समाधि जैन समाज में त्याग और आत्मसाधना के प्रति उनकी निष्ठा के रूप में स्मरण की जाएगी। गुरु चरणों में अंतिम साधना करने की उनकी इच्छा और आठ दिनों तक की गई कठोर साधना ने समाज के लोगों को भावविभोर कर दिया।
जीवन परिचय
नाम: श्रावक श्री विनोद वर्णी जी
निवासी: भिंड, मध्य प्रदेश
समाधि स्थल: श्री ऋषभोदय तीर्थ, ऋषभ विहार, दिल्ली
सानिध्य: आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज
साधना: 8 दिन तक चारों प्रकार के आहार का त्याग
आराधना: श्री 1008 आदिनाथ भगवान के दर्शन एवं गुरु संघ का समागम


