गौशाला की अव्यवस्थाओं और गोवंश की मौतों के विरोध में संतों-गोभक्तों की मौन रैली,
जावद में संतों के सानिध्य में निकली विशाल रैली, बस स्टैंड पर धरना देकर सौंपा ज्ञापन; सुधार नहीं होने पर चक्काजाम की चेतावनी
जावद। नगर परिषद द्वारा संचालित स्थानीय गौशाला में कथित अव्यवस्थाओं और लगातार हो रही गोवंश की मौतों को लेकर मंगलवार को संतों एवं गोभक्तों का आक्रोश सामने आया। संतों के सानिध्य में बड़ी संख्या में गोभक्तों ने नगर में विशाल मौन रैली निकालकर गौशाला की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार की मांग की।
रैली में शामिल संतों और गोभक्तों के हाथों में विभिन्न मांगों से संबंधित तख्तियां थीं। प्रदर्शनकारियों ने गौशाला में गोवंश के लिए पर्याप्त चारा-पानी, साफ-सफाई और बेहतर देखरेख की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
प्रमुख मार्गों से होते हुए बस स्टैंड पहुंची रैली
मौन रैली नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए बस स्टैंड पहुंची। यहां संतों और गोभक्तों ने सड़क पर बैठकर धरना दिया और गौशाला की व्यवस्थाओं को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गौशाला में पर्याप्त सुविधाओं और उचित देखरेख के अभाव में गोवंश को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार गौशाला में लगातार गोवंश की मौतों की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिसके चलते संत समाज और गोभक्तों में नाराजगी है।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि गौशाला की व्यवस्थाओं की तत्काल समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जाएं, ताकि गोवंश को पर्याप्त भोजन, पानी और सुरक्षित वातावरण मिल सके।
चारा-पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था सुधारने की मांग
धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने गौशाला में मूलभूत सुविधाओं को लेकर कई मांगें रखीं। इनमें गोवंश के लिए पर्याप्त मात्रा में चारा और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना प्रमुख मांग रही।
इसके साथ ही गौशाला परिसर में नियमित साफ-सफाई, बीमार और कमजोर गोवंश की उचित देखरेख तथा आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई।
संतों और गोभक्तों का कहना है कि गौशाला में रहने वाले गोवंश की देखभाल में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। प्रशासन को नियमित निगरानी और व्यवस्थाओं की समीक्षा करनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की अनदेखी के कारण गोवंश को परेशानी न हो।

प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
धरने के बाद संतों एवं गोभक्तों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में गौशाला की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार करने और गोवंश की बेहतर देखरेख सुनिश्चित करने की मांग की गई।
ज्ञापन के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से चारा-पानी, स्वच्छता, उपचार और अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था करने की मांग रखी। साथ ही गौशाला में होने वाली गोवंश की मौतों के मामले में भी गंभीरता से ध्यान देने की बात कही गई।
प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम
संतों और गोभक्तों ने प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि में यदि गौशाला की व्यवस्थाओं में ठोस सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि गोवंश की सुरक्षा और बेहतर देखभाल से जुड़ी मांगों को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि सात दिनों के भीतर प्रशासन की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो संत समाज और गोभक्त आगे की रणनीति तय करेंगे।
चक्काजाम और उग्र आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन में प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर उनकी मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती है तो आगामी दिनों में धरना-प्रदर्शन, चक्काजाम और व्यापक आंदोलन किया जा सकता है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनकी मांगें किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि गौशाला में गोवंश को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने से जुड़ी हैं। उन्होंने प्रशासन से समय रहते व्यवस्था सुधारने की अपील की।
साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि मांगों की अनदेखी हुई और आंदोलन की स्थिति बनी तो उससे उत्पन्न परिस्थितियों की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

अधिकारियों ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन प्राप्त किया और उनकी शिकायतों तथा मांगों पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।
अब संतों और गोभक्तों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है। सात दिन की निर्धारित अवधि में गौशाला की व्यवस्थाओं में क्या सुधार किए जाते हैं, इसे लेकर नगरवासियों में भी चर्चा बनी हुई है।
नगर में चर्चा का विषय बना मामला
गौशाला में गोवंश की मौतों और व्यवस्थाओं को लेकर उठे इस मुद्दे ने जावद नगर में चर्चा तेज कर दी है। संतों और गोभक्तों द्वारा निकाली गई मौन रैली में उठाई गई मांगों के बाद अब प्रशासन के सामने गौशाला की व्यवस्थाओं को लेकर प्रभावी कदम उठाने की चुनौती है।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य गौशाला में गोवंश के लिए बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित कराना है। उनका कहना है कि चारा, पानी, स्वच्छता और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध रहनी चाहिए।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
संतों एवं गोभक्तों द्वारा दिए गए सात दिन के अल्टीमेटम के बाद अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि इस अवधि में गौशाला की व्यवस्थाओं में सुधार दिखाई देता है तो विवाद का समाधान हो सकता है, वहीं मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन के और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल प्रशासन ने शिकायतों पर उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है। आने वाले दिनों में गौशाला की व्यवस्थाओं में होने वाले बदलाव इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।
दैनिक स्वराज वाणी | प्रियंका गुजराती
