महिदपुर रोड में साध्वी निरागरशा श्रीजी ने रचा स्वर्णिम इतिहास, 2 घंटे में किया 1250 गाथाओं का वाचन
बिना देखे खड़े-खड़े किया बारंसा सूत्र का धारा प्रवाह वाचन, जैन समाज ने बताया गौरव का विषय
महिदपुर रोड। पर्युषण महापर्व के अंतिम दिवस संवत्सरी पर्व के पावन अवसर पर महिदपुर रोड नगर में जैन समाज के लिए विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन हुआ। परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब की सुशिष्या साध्वी निरागरशा श्रीजी महाराज साहब ने श्री भद्रबाहु स्वामीजी द्वारा रचित श्री बारंसा सूत्र की 1200 से अधिक गाथाओं का कंठस्थ वाचन किया।
साध्वी निरागरशा श्रीजी ने बिना किसी पुस्तक या सामग्री को देखे, खड़े-खड़े करीब दो घंटे में 1250 गाथाओं का धारा प्रवाह वाचन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में समाजजन धर्मसभा में उपस्थित रहे और साध्वीजी की स्मरण शक्ति एवं प्रतिभा के साक्षी बने।
पहली बार हुआ ऐसा वाचन
जैन समाज के अनुसार महिदपुर रोड नगर के इतिहास में पहली बार किसी साध्वी भगवंत द्वारा बारंसा सूत्र की इतनी बड़ी संख्या में गाथाओं का बिना देखे और खड़े-खड़े इतने कम समय में वाचन किया गया। आयोजन के दौरान साध्वीजी ने मेघ की जलधारा के समान लगातार और स्पष्ट रूप से गाथाओं का वाचन किया।
समाजजनों ने साध्वीजी की इस प्रतिभा को जैन समाज के लिए गौरव का विषय बताया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने कहा कि इतनी कम आयु में इतनी बड़ी संख्या में गाथाओं को कंठस्थ करना उनकी अद्भुत स्मरण शक्ति, ज्ञान और साधना को दर्शाता है।

12 दिनों में कंठस्थ की 1200 से अधिक गाथाएं
परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब ने बताया कि साध्वी निरागरशा श्रीजी ने अपनी लगन, मेहनत और अद्भुत स्मरण शक्ति के बल पर मात्र 12 दिनों में 1200 से अधिक गाथाओं को कंठस्थ किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतिभा जैन साधु-साध्वी समुदाय के लिए गौरव और सौभाग्य का विषय है।
उन्होंने कहा कि साध्वीजी की यह उपलब्धि उनके ज्ञान, अनुशासन और निरंतर साधना का परिचायक है। जैन समाज के विभिन्न वर्गों ने भी साध्वीजी की प्रतिभा की अनुमोदना की।
पहले भी मिल चुकी है ‘द्विशतावधानी’ की उपाधि
जैन समाज मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने बताया कि साध्वी निरागरशा श्रीजी को पूर्व में ‘द्विशतावधानी’ की उपाधि से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनके अनुसार जावरा चातुर्मास के दौरान साध्वीजी ने 200 प्रश्नों के आरोही और अवरोही क्रम में बिना देखे, ध्यान मुद्रा में रहते हुए प्रश्नों के उत्तर दिए थे। इसके बाद जैन श्री संघ जावरा द्वारा उन्हें द्विशतावधानी पद से अलंकृत किया गया था।
महिदपुर रोड श्री संघ ने की अनुमोदना
महिदपुर रोड श्री संघ और चातुर्मास समिति ने साध्वी निरागरशा श्रीजी की प्रतिभा और स्मरण शक्ति की अनुमोदना करते हुए इसे नगर और जैन समाज के लिए गौरवपूर्ण अवसर बताया।
जैन समाज के अनुसार साध्वीजी का यह चातुर्मास महिदपुर रोड के धार्मिक इतिहास में विशेष रूप से स्मरणीय रहेगा। समाजजनों ने साध्वीजी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके ज्ञान, साधना और विलक्षण प्रतिभा की सराहना की तथा मंगलकामनाएं प्रेषित कीं।
जैन समाज मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी, महिदपुर रोड के अनुसार इस अवसर ने पूरे समाज में उत्साह और आध्यात्मिक भाव का संचार किया।
