रूस देगा पाकिस्तान को फाइटर जेट इंजन, पर जानकार बोले — “भारत को ही होगा असली फायदा”
मॉस्को / नई दिल्ली।
हाल ही में सामने आई खबरों ने अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलचल बढ़ा दी है — बताया जा रहा है कि रूस, पाकिस्तान को फाइटर जेट इंजन देने जा रहा है। इस कथित डील के बाद भारत समेत कई देशों ने चिंता जताई है। हालांकि, रूस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसके बावजूद, रूसी रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता भारत के लिए हानिकारक नहीं, बल्कि फायदेमंद साबित हो सकता है।
🔹 रूस-पाकिस्तान इंजन डील पर मचा बवाल
रिपोर्टों के मुताबिक, रूस पाकिस्तान को JF-17 लड़ाकू विमानों के लिए RD-93 इंजन देने पर विचार कर रहा है। ये वही इंजन हैं जिन्हें चीन और पाकिस्तान ने संयुक्त रूप से विकसित JF-17 ‘थंडर’ जेट में लगाया है।
इस खबर के बाद भारत ने रूस से अपनी नाराज़गी जताई, जबकि विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से इस पर सवाल उठाए।
🔹 रूस ने भारत को दी सफाई
एक रूसी विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मॉस्को ने इस मामले में भारत को विस्तार से समझाया है।
उन्होंने कहा,
“मॉस्को ने नई दिल्ली को भरोसा दिलाया है कि यह सौदा पूरी तरह व्यावसायिक है, इसमें कोई तकनीकी हस्तांतरण (ToT) शामिल नहीं है।”
भारत को पहले ही रूस की ओर से RD-33 इंजन का लाइसेंस तकनीकी हस्तांतरण के तहत दिया जा चुका है, जो RD-93 से अधिक उन्नत है।
🔹 विशेषज्ञ बोले — “भारत को दोहरा फायदा”
मॉस्को के प्रिमाकोव इंस्टीट्यूट में दक्षिण-पूर्व एशिया मामलों के प्रोफेसर प्योत्र तोपीचकानोव ने इस विवाद पर कहा कि भारत की आलोचना “अनुचित” है।
उन्होंने कहा —
“अगर रूस सच में JF-17 के लिए इंजन दे रहा है, तो इससे भारत को दो प्रमुख फायदे होंगे।”
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पहला, यह दिखाता है कि चीन और पाकिस्तान अब तक रूसी इंजन का विकल्प नहीं बना सके हैं, यानी उनकी तकनीकी निर्भरता बनी हुई है।
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दूसरा, चूंकि भारत पहले से RD-33 इंजन का उपयोग करता है, इसलिए JF-17 का इंजन भारत के लिए परिचित और अनुमानित रहेगा।
तोपीचकानोव ने यह भी कहा कि भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” (मई 2025 संकट) के दौरान पाकिस्तान के JF-17 जेट्स की क्षमताएं देख ली थीं, जिससे उसे उनकी ताकत और सीमाएं दोनों का स्पष्ट अंदाज़ा है।
🔹 पुराना त्रिपक्षीय समझौता भी आया चर्चा में
विशेषज्ञों के अनुसार, रूस, चीन और पाकिस्तान के बीच पहले से एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौता मौजूद है।
इसी के तहत रूस 2000 के दशक की शुरुआत से पाकिस्तान को पूरी तरह असेंबल किए गए RD-93 इंजन की आपूर्ति करता रहा है।
अब पाकिस्तान अपडेटेड वर्जन की मांग कर रहा है, जो फिलहाल विकास के चरण में है।
इन इंजनों का निर्माण रूस के क्लिमोव (Klimov) संयंत्र में होता है —
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RD-33 इंजन: अधिक थ्रस्ट देता है लेकिन इसकी सेवा अवधि लगभग 2,200 घंटे है।
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RD-93 इंजन: अपेक्षाकृत कम थ्रस्ट देता है लेकिन इसकी सेवा अवधि 4,000 घंटे तक की है।
🔹 भारत की रणनीतिक स्थिति बरकरार
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे मामले में भारत को घबराने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि—
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भारत को पहले से ही रूस की उन्नत इंजन तकनीक उपलब्ध है।
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पाकिस्तान और चीन की निर्भरता रूसी इंजन पर बनी रहना, भारत की सामरिक बढ़त को बनाए रखेगा।
इस तरह, रूस का यह कदम भले ही देखने में पाकिस्तान के पक्ष में लगे, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से भारत के हित में ही साबित हो सकता है।
📰 निष्कर्ष:
रूस-पाकिस्तान इंजन डील पर मचे शोर के बीच विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है —
“यह डील भारत के लिए खतरा नहीं, बल्कि रणनीतिक लाभ का संकेत है।”
