Iran युद्ध में रूस का खुफिया समर्थन यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की का बड़ा दावा
पश्चिम एशिया में हाल के तनाव ने वैश्विक ऊर्जा और सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव डाला है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने Iran पर हाल ही में हुए अमेरिका और इज़रायल के हमलों के संदर्भ में रूस की भूमिका को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उनके पास प्रमाण हैं कि रूस ईरान को युद्ध के लिए खुफिया जानकारी मुहैया करा रहा है, जिससे ईरान अपने हमलों में और प्रभावी हो रहा है और संघर्ष लंबा खिंच रहा है।
जेलेंस्की ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा, “रूस Iran को खुफिया सहायता दे रहा है। यह केवल ईरान को युद्ध में टिकाए रखने और अपने सैन्य अभियान को तेज करने में मदद नहीं कर रहा, बल्कि क्षेत्रीय अस्थिरता को भी बढ़ा रहा है। सभी सभ्य राष्ट्रों के लिए यह जरूरी है कि वे सुरक्षा सुनिश्चित करें और एक बड़े वैश्विक संकट को रोकने के लिए कदम उठाएं।”
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यह भी चेतावनी दी कि रूस की इस सहायता से ऊर्जा बाजार पहले से ही अस्थिर है और कई देशों में ईंधन की स्थिति और जटिल हो गई है। जेलेंस्की ने कहा कि रूस के इस कदम से युद्ध लंबा खिंच रहा है, और इसका प्रभाव केवल मध्य पूर्व पर नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर भी पड़ रहा है।
रूस और ईरान की कूटनीतिक बातचीत
उधर, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और Iran के समकक्ष अब्बास अराघची के बीच भी बातचीत हुई। रूसी विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया ऐप X पर एक पोस्ट के जरिए जानकारी दी कि 23 मार्च को दोनों मंत्रियों ने फोन पर वार्ता की। इस बातचीत में उन्होंने अमेरिका और इज़रायल की आक्रामकता के कारण फारस की खाड़ी में बिगड़ती स्थिति पर चर्चा की। साथ ही, कैस्पियन क्षेत्र में संघर्ष के विस्तार को लेकर चिंता भी व्यक्त की।
लावरोव ने कहा कि अमेरिका और इज़रायल के हमलों ने ईरानी परमाणु बुनियादी ढांचे, जैसे बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र, पर गंभीर खतरा पैदा किया है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि क्षेत्र में इस तरह के कदम जारी रहे, तो इसके विनाशकारी पर्यावरणीय परिणाम हो सकते हैं और यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अस्वीकार्य है।
अमेरिका-इज़रायल और ईरान का गतिरोध
28 फरवरी को Iran पर अमेरिका और इज़रायल के हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव तेजी से बढ़ा। इस हमले ने न केवल ईरान को सीधे प्रभावित किया, बल्कि वैश्विक ऊर्जा संकट और खाद्य सुरक्षा पर भी असर डाला। भारत समेत कई देशों ने इस संकट को लेकर सतर्कता बरती है।
इस बीच, इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी महत्वपूर्ण बातचीत की। दोनों नेता ईरान के खिलाफ सैन्य और कूटनीतिक रणनीतियों पर चर्चा कर रहे हैं ताकि उनके राष्ट्रीय हित सुरक्षित रहें। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इज़रायल ईरान और लेबनान पर हमले जारी रखेगा। इस रणनीति का उद्देश्य न केवल ईरान की सैन्य क्षमताओं को सीमित करना है, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना भी है।
वैश्विक ऊर्जा संकट और सुरक्षा पर असर
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रूस के Iran को समर्थन देने की प्रक्रिया को वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि यह न केवल क्षेत्रीय संघर्ष को लंबा खींचता है, बल्कि ऊर्जा संकट और आर्थिक अस्थिरता को भी बढ़ावा देता है। यूरोप और एशिया में तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की पृष्ठभूमि में यह स्थिति और गंभीर हो गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रूस की खुफिया मदद से ईरान को अपने हमलों को अधिक सटीक और प्रभावी बनाने का अवसर मिल रहा है। इसके कारण न केवल सुरक्षा खतरे बढ़ रहे हैं, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं और वैश्विक व्यापार पर भी दबाव बढ़ गया है।
जेलेंस्की का वैश्विक समुदाय से आह्वान
जेलेंस्की ने वैश्विक समुदाय से अपील की कि रूस की इस भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “सभी सभ्य राष्ट्रों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि युद्ध की अस्थिरता और ऊर्जा संकट से वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित न हो। रूस का समर्थन केवल युद्ध को लंबा खींच रहा है और इससे उत्पन्न संकट को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।”
उन्होंने आगे कहा कि ईरान को रूस की मदद मिल रही है, जिससे युद्ध की तीव्रता बढ़ रही है और क्षेत्रीय राजनीतिक स्थिरता खतरे में है। जेलेंस्की का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, इज़रायल और रूस के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव चरम पर हैं।
निष्कर्ष
वर्तमान में Iran युद्ध न केवल क्षेत्रीय स्तर पर बल्कि वैश्विक स्तर पर गंभीर परिणाम ला रहा है। रूस की खुफिया सहायता, अमेरिका और इज़रायल की सैन्य कार्रवाइयाँ, और वैश्विक ऊर्जा संकट ने स्थिति को जटिल बना दिया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के दावों ने यह स्पष्ट कर दिया कि रूस की भूमिका केवल सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युद्ध की लंबाई और तीव्रता को प्रभावित कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गतिरोध जारी रहा, तो केवल मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में आर्थिक और सुरक्षा संबंधी गंभीर चुनौतियाँ सामने आएंगी। इस समय वैश्विक समुदाय के लिए आवश्यक है कि कूटनीतिक प्रयासों को तेज किया जाए और संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ।
