Rewa माताजी टक्कर कांड कविता में चंदेरी के युवा अधिवक्ता एड. अमित कुमार जैन ने आर्यिका माताजी दुर्घटना पर समाज का दर्द और आक्रोश व्यक्त किया। कविता सोशल मीडिया पर वायरल, साधु सुरक्षा को लेकर उठे बड़े सवाल।
Rewa माताजी टक्कर कांड कविता : समाज की पीड़ा और आक्रोश की आवाज
साभार : राजेश जैन दद्दू, इंदौर
मध्यप्रदेश के Rewa में जैन साध्वी आर्यिका 105 श्री श्रुतमति माताजी एवं 105 श्री उपशममति माताजी के साथ हुई हृदय विदारक दुर्घटना ने पूरे जैन समाज को गहरे सदमे में डाल दिया है। यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को झकझोर देने वाली पीड़ा बन गई है।इसी दर्द और आक्रोश को शब्दों में ढालते हुए चंदेरी, जिला अशोकनगर के युवा अधिवक्ता एड. अमित कुमार जैन ने अपनी मार्मिक कविता “माताजी को टक्कर मारी” लिखी है, जो इस समय सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।यह कविता न केवल समाज की भावनाओं को व्यक्त करती है, बल्कि शासन-प्रशासन और साधु-संतों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
रीवा की हृदय विदारक घटना पर समाज में भारी आक्रोश
Rewa में हुई इस दुखद घटना के बाद पूरे देश के जैन समाज में गहरा रोष देखा जा रहा है। साधु-संतों का जीवन त्याग, तपस्या और अहिंसा का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में उनके साथ हुई यह घटना श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पीड़ादायक बन गई।सोशल मीडिया पर हजारों लोग साधु सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। जगह-जगह श्रद्धांजलि सभाएं, मौन रैलियां और विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं।इसी बीच चंदेरी के युवा अधिवक्ता एड. अमित कुमार जैन की यह कविता लोगों की भावनाओं की आवाज बनकर सामने आई है।
युवा अधिवक्ता एड. अमित कुमार जैन की कलम में दिखा समाज का दर्द
चंदेरी निवासी युवा अधिवक्ता एड. अमित कुमार जैन ने इस घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कविता लिखी।कविता की शुरुआती पंक्तियां ही समाज के आक्रोश को प्रकट करती हैं—
“कैसे हम नादान कहें, और कैसे इसको कहें अनाड़ी
इस उन्मादी-नीच-नराधम, को हम सब क्यों न दें गारी।”
कवि ने साफ शब्दों में कहा कि यह कोई सामान्य दुर्घटना प्रतीत नहीं होती, बल्कि योजनाबद्ध हमला जैसा लगता है।उनकी कविता की यह पंक्तियां सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा साझा की जा रही हैं—“घात लगाकर ज्यों शिकार पर, झपटे वन में कोई शिकारी
उसी तरह इस आतंकी ने, माताजी को टक्कर मारी।”
“माताजी को टक्कर मारी” कविता क्यों हो रही वायरल
यह कविता समाज की भावनाओं को सीधे स्पर्श करती है।इसमें केवल शोक नहीं बल्कि आक्रोश, पीड़ा और व्यवस्था के प्रति सवाल भी हैं।लोगों का कहना है कि साधु-संत वर्षों से पग विहार करते हुए धर्म और अहिंसा का संदेश देते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था दिखाई नहीं देती।कविता में कवि ने यही पीड़ा व्यक्त करते हुए लिखा—
“जैन साध्वी और सन्तों की, कोई न समझे लाचारी
पग विहार करते हैं हरदम, छोड़के सारे सुख संसारी।”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और एक्स (ट्विटर) पर यह कविता हजारों बार शेयर की जा चुकी है।
शासन और प्रशासन से उठे तीखे सवाल
Rewa माताजी टक्कर कांड कविता का सबसे प्रभावशाली हिस्सा वह है जहां कवि ने शासन और प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।कविता की ये पंक्तियां लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं—
“पत्रकार भी चुप हैं सारे, चुप हैं सारे ही अधिकारी
हृदय विदारक इस घटना पर, मौन खड़े क्यों सत्ताधारी।”
कवि ने सरकार की निष्क्रियता पर कटाक्ष करते हुए लिखा—
“हमें समझ ये नहीं आ रहा, क्यों सरकार बनी गांधारी।”
इन पंक्तियों ने समाज में गहरी प्रतिक्रिया उत्पन्न की है। कई लोगों ने इसे व्यवस्था की संवेदनहीनता पर सीधा प्रहार बताया है।
साधु-संतों की सुरक्षा पर बढ़ती चिंता
जैन समाज लंबे समय से साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताता रहा है।देशभर में पग विहार करने वाले साधु-संत बिना किसी व्यक्तिगत सुरक्षा के यात्रा करते हैं।ऐसे में Rewa की यह घटना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।समाज के कई संगठनों ने मांग की है कि साधु-संतों के विहार मार्गों पर विशेष सुरक्षा प्रबंध किए जाएं।धर्माचार्यों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं।
इंदौर की मौन रैली से जुड़ा भावनात्मक माहौल
25 मई को इंदौर में प्रस्तावित मौन रैली को लेकर भी समाज में भावनात्मक माहौल देखा जा रहा है।श्रद्धालुओं का कहना है कि यह रैली केवल विरोध नहीं बल्कि साधु-संतों के सम्मान और सुरक्षा की मांग का प्रतीक है।राजेश जैन दद्दू, इंदौर द्वारा साझा की गई यह कविता अब उस मौन रैली का भावनात्मक आधार बनती दिखाई दे रही है।
कविता का मूल पाठ
(माताजी को टक्कर मारी)
कैसे हम नादान कहें, और कैसे इसको कहें अनाडी !
इस उन्मादी-नीच-नराधम, को हम सब क्यों न दें गारी !!
घटना का चलचित्र देखकर, साफ नजर ये आता है कि !
हमला है ये उसी तरह का, ज्यों शिकार पर करे शिकारी !!-2
कहां चल रहा था ये देखो, कहां पहुंच गई इसकी गाडी !
लगता है इस घटनाक्रम की, पहले से ही थी तैयारी !!
घात लगाकर ज्यों शिकार पर, झपटे वन में कोई शिकारी !
उसी तरह इस आतंकी ने, माताजी को टक्कर मारी !!-2
जैन साध्वी और सन्तों की, कोई न समझे लाचारी !
पग विहार करते हैं हर-दम, छोड़के सारे सुख संसारी !!
सारी दुनिया में फिरते हैं, बनकर इस जग के हितकारी !
फिर भी इन पर युगों-युगों से, सितम ढा रहे अत्याचारी !!-2
किस मद में ये चूर हुए हैं, कैसी इन पर चढी खुमारी !
पत्रकार भी चुप हैं सारे, चुप हैं सारे ही अधिकारी !!
हृदय विदारक इस घटना पर, मौन खडे क्यों सत्ताधारी !
हमें समझ ये नहीं आ रहा, क्यों सरकार बनी गांधारी !!-2
(एड. अमित कुमार जैन, चंदेरी)
मो. 9407214181
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया
रीवा माताजी टक्कर कांड कविता को लोग “समाज की आवाज” बता रहे हैं।कई श्रद्धालुओं ने कहा कि यह कविता उनके दिल की पीड़ा को शब्द देती है।इंस्टाग्राम और फेसबुक पर हजारों लोगों ने कविता साझा करते हुए साधु सुरक्षा कानून बनाने की मांग की है।युवा वर्ग विशेष रूप से इस कविता से जुड़ता दिखाई दे रहा है।
निष्कर्ष
Rewa की यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को झकझोर देने वाला विषय बन चुकी है।चंदेरी के युवा अधिवक्ता एड. अमित कुमार जैन द्वारा लिखी गई “माताजी को टक्कर मारी” कविता आज समाज के आक्रोश, पीड़ा और न्याय की मांग का प्रतीक बन गई है।यह कविता साधु-संतों की सुरक्षा, शासन की जिम्मेदारी और समाज की भावनाओं पर गंभीर विमर्श खड़ा करती है।
