इंदौर एयरपोर्ट पर चूहा कांड: यात्री की पेंट में घुसा चूहा, काटने के बाद नहीं मिला रैबीज इंजेक्शन, शासन और एयरपोर्ट प्रबंधन की खुली पोल
इंदौर एयरपोर्ट, जिसे इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दर्जा प्राप्त है, इन दिनों एक बेहद शर्मनाक घटना के कारण चर्चा में है। यहां एक यात्री की पैंट में चूहा घुस गया और उसने यात्री को काट लिया। इस घटना ने न केवल एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था बल्कि स्वास्थ्य सुविधाओं की भी पूरी तरह पोल खोल दी है।
यात्री की पैंट में घुसा चूहा
बेंगलुरु की आईटी कंपनी में कार्यरत और भोपाल निवासी यात्री अरुण मोदी अपनी पत्नी के साथ इंदौर एयरपोर्ट पहुंचे थे। इंडिगो की फ्लाइट का टिकट लेकर वे पैसेंजर ब्लॉक में बैठे थे। तभी अचानक एक चूहा वहां आ पहुंचा और सीधा उनकी पैंट में घुस गया।
चूहे को निकालने की कोशिश में मोदी को उसने घुटने के ऊपर काट लिया। मजबूरी में यात्री को अपनी पैंट उतारकर चूहे को बाहर करना पड़ा। यह नजारा एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील स्थान पर यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े करता है।
मेडिकल सुविधा फेल – जिम्मेदार कौन?
घटना के बाद यात्री ने तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क किया, जिन्होंने रैबीज इंजेक्शन लगाने की सलाह दी। लेकिन एयरपोर्ट की मेडिकल डेस्क पर न तो रैबीज इंजेक्शन था और न ही टिटनेस का इंजेक्शन। काफी देरी और नाराजगी के बाद टिटनेस का इंजेक्शन तो किसी तरह उपलब्ध कराया गया, लेकिन रैबीज का इंजेक्शन नहीं मिल सका।
नतीजा यह हुआ कि यात्री को मजबूरी में बेंगलुरु पहुंचने के बाद रैबीज इंजेक्शन लगवाना पड़ा।
जिम्मेदारी सिर्फ डॉक्टर की नहीं
इस पूरे मामले में ड्यूटी डॉक्टर हर्षवर्धन सिंह को हटाकर नोटिस जारी कर दिया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर एयरपोर्ट अथॉरिटी और शासन द्वारा आवश्यक दवाइयाँ ही उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो इसकी असली जिम्मेदारी किसकी है?
एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्रियों के लिए बेसिक मेडिकल सुविधाएं न होना गंभीर लापरवाही है। केवल डॉक्टर पर कार्रवाई कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। असल जिम्मेदारी एयरपोर्ट प्रबंधन और शासन-प्रशासन की है, जिन्होंने पेस्ट कंट्रोल और मेडिकल सप्लाई की उपेक्षा की।
कांग्रेस का आरोप – घोटाले की वजह से चूहों का आतंक
कांग्रेस प्रवक्ता अमित चौरसिया ने कहा कि एयरपोर्ट परिसर में पेस्ट कंट्रोल के नाम पर विभाग केवल कागजी खानापूर्ति कर रहे हैं और घोटाले किए जा रहे हैं। इसी वजह से एयरपोर्ट पर कुत्तों और चूहों की समस्या बनी हुई है।
इंटरनेशनल एयरपोर्ट की हालत पर सवाल
यात्रियों का कहना है कि इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दर्जा होने के बावजूद यहां कुत्ते खुलेआम घूमते हैं और चूहों के दिखने की घटनाएँ आम हैं। चूहा कांड ने साफ कर दिया कि एयरपोर्ट प्रबंधन यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर गंभीर नहीं है।
घटना के बाद भले ही पेस्ट कंट्रोल की कार्रवाई करवाई गई हो, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या एयरपोर्ट अथॉरिटी और शासन इस लापरवाही की जिम्मेदारी लेंगे या केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई करके मामले को दबा देंगे?

