राम दादा राम के नाम से प्रसिद्ध सुदामा मिस्त्री पंचतत्व में विलीन, क्षेत्र में शोक की लहर
सरल और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे सुदामा मिस्त्री
झकनावदा। (मनीष कुमट) नगर के सरल, सहज और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी तथा धार्मिक आयोजनों में हमेशा सक्रिय भूमिका निभाने वाले प्रतिष्ठित नागरिक श्री सुदामा जी मिस्त्री का बुधवार को निधन हो गया। वे नगर एवं आसपास के क्षेत्र में ‘राम दादा राम’ के नाम से अपनी अलग और अमिट पहचान बना चुके थे।
उनके देवलोक गमन का समाचार मिलते ही झकनावदा सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। उनके निधन की खबर से परिवारजनों, रिश्तेदारों, मित्रों, परिचितों और शुभचिंतकों में गहरा दुःख व्याप्त हो गया।
अंतिम दर्शन के लिए उमड़े समाजजन
श्री सुदामा जी मिस्त्री के निधन का समाचार मिलते ही बड़ी संख्या में समाजजन एवं क्षेत्रवासी उनके निज निवास पर पहुंचे। लोगों ने शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और इस कठिन समय में परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
इस दौरान उपस्थित लोगों ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि वे पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
गमगीन माहौल में निकली अंतिम यात्रा
गुरुवार को प्रातः 11 बजे श्री सुदामा जी मिस्त्री की अंतिम यात्रा उनके निज निवास स्थान झकनावदा से निकाली गई। अंतिम यात्रा में परिवारजनों और रिश्तेदारों के साथ बड़ी संख्या में मित्र, परिचित, समाजजन एवं क्षेत्रवासी शामिल हुए।
अंतिम यात्रा के दौरान वातावरण पूरी तरह गमगीन रहा। लोगों ने नम आंखों से अपने प्रिय और मिलनसार व्यक्तित्व को अंतिम विदाई दी। रास्ते भर उनके परिचित और शुभचिंतक उनके सरल स्वभाव एवं सामाजिक सहभागिता को याद करते नजर आए।
मधु कन्या नदी के तट पर हुआ अंतिम संस्कार
अंतिम यात्रा मधु कन्या नदी के तट पर पहुंची, जहां पूरे विधि-विधान के साथ उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। गमगीन माहौल के बीच श्री सुदामा जी मिस्त्री पंचतत्व में विलीन हो गए।
अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार को संबल प्रदान करने की कामना की।
धार्मिक आयोजनों में निभाते थे सक्रिय भूमिका
श्री सुदामा जी मिस्त्री अपने सरल एवं सहज व्यवहार के लिए क्षेत्र में विशेष रूप से पहचाने जाते थे। वे धार्मिक आयोजनों में हमेशा सक्रिय भूमिका निभाते थे और सामाजिक गतिविधियों में भी सहभागिता करते थे।
उनका मिलनसार स्वभाव उन्हें समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के करीब लाता था। यही कारण है कि उनके निधन से नगर और आसपास के क्षेत्र में लोगों ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
भरा-पूरा परिवार छोड़ गए पीछे
श्री सुदामा जी मिस्त्री अपने पीछे पुत्र एवं परिवार सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन से परिवार को हुई अपूरणीय क्षति पर क्षेत्रवासियों ने गहरा दुःख व्यक्त किया है।
लोगों ने कहा कि सुदामा जी मिस्त्री का निधन परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र के लिए भी एक बड़ी क्षति है। उनके सरल स्वभाव, आत्मीय व्यवहार और धार्मिक-सामाजिक गतिविधियों में योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
क्षेत्रवासियों ने दी श्रद्धांजलि
अंतिम यात्रा में ठाकुर घनश्याम सिंह राठौर सेमलिया, मोतीलाल चौधरी, शैतानमल कुमट, राकेश मग, जगपाल सिंह राठौर, मनोहर सिंह राठौर सेमलिया, हेमेंद्र कुमार जोशी, जितेंद्र राठौड़, राजेश कांसवा, परीक्षित सिंह राठौर, गोपाल राठौड़, नरेंद्र कोठारी, ऋषभ कोटड़िया, अभय कोठारी, राम जोशी, आशीष भांगू, फकीरचंद माली सहित बड़ी संख्या में समाजजन एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
सभी ने नम आंखों से दिवंगत सुदामा जी मिस्त्री को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। उपस्थित लोगों ने कहा कि उनका सरल, सहज और मिलनसार व्यक्तित्व सदैव लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेगा।
हमेशा याद किया जाएगा ‘राम दादा राम’ नाम
झकनावदा एवं आसपास के क्षेत्र में ‘राम दादा राम’ के नाम से अपनी पहचान बनाने वाले सुदामा जी मिस्त्री का निधन निश्चित रूप से क्षेत्रवासियों के लिए भावुक कर देने वाला क्षण है। उनकी आत्मीयता, सहज व्यवहार और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय सहभागिता के कारण वे लोगों के बीच हमेशा याद किए जाते रहेंगे।
क्षेत्रवासियों ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य एवं शक्ति देने की प्रार्थना की है।
