Rajya Sabha Elections 2026: कांग्रेस की पहली सूची जारी, मप्र से मीनाक्षी नटराजन उम्मीदवार, खड़गे कर्नाटक से मैदान में
कांग्रेस ने पांच राज्यों के 7 उम्मीदवारों की घोषणा की
Rajya Sabha Elections 2026: को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच कांग्रेस पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पांच राज्यों के लिए कुल सात उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है।
इस सूची में मध्य प्रदेश से पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि कर्नाटक से खुद मल्लिकार्जुन खड़गे चुनाव मैदान में उतरेंगे।
मप्र से मीनाक्षी नटराजन को मिला टिकट
मध्य प्रदेश की राजनीति में सक्रिय और अनुभवी नेता मीनाक्षी नटराजन को कांग्रेस ने राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है। वे लंबे समय से पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाती रही हैं और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के भरोसेमंद चेहरों में से एक मानी जाती हैं।
मीनाक्षी नटराजन का संबंध मध्य प्रदेश के उज्जैन क्षेत्र से है। उनका जन्म नागदा (बिरलाग्राम) में हुआ था, जिससे उनका राज्य से गहरा जुड़ाव माना जाता है।
गांधी परिवार के करीबी नेताओं में शामिल
मीनाक्षी नटराजन को कांग्रेस में गांधी परिवार के बेहद करीबी नेताओं में गिना जाता है। पार्टी संगठन में उनकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण रही है और उन्हें कई बड़े पदों पर जिम्मेदारी दी गई है।
उनकी पहचान एक मजबूत संगठनकर्ता और जमीनी नेता के रूप में रही है, जिन्होंने कांग्रेस की युवा इकाई से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई है।
शिक्षा और शैक्षणिक पृष्ठभूमि
मीनाक्षी नटराजन ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा मध्य प्रदेश में ही प्राप्त की है। उन्होंने इंदौर स्थित Devi Ahilya Vishwavidyalaya से पढ़ाई की है।
उन्होंने जैव रसायन (Biochemistry) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है और इसके साथ ही उन्होंने कानून (Law) में स्नातक की डिग्री भी हासिल की है। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें एक बहुआयामी नेता के रूप में स्थापित करती है।
एनएसयूआई से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
मीनाक्षी नटराजन का राजनीतिक करियर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। वे 1999 से 2002 तक एनएसयूआई (NSUI) की अध्यक्ष रहीं। इसके बाद उन्होंने युवा कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभाई।
2005 तक वे मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
2008 में उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) का सचिव बनाया गया, जहां उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं।
2009 में बनीं लोकसभा सांसद
2009 के लोकसभा चुनाव में मीनाक्षी नटराजन ने मध्य प्रदेश की मंदसौर सीट से चुनाव लड़ा और लगभग 30 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। यह उनकी राजनीतिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था, जिसने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में पहचान दिलाई।
सांसद के रूप में उन्होंने कई संसदीय समितियों में सक्रिय भूमिका निभाई, जिनमें कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय से जुड़ी समितियां शामिल हैं।
इसके अलावा वे महिला सशक्तिकरण से जुड़ी समितियों में भी सदस्य रहीं और महिला अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम किया।
2014 के चुनाव में मिली हार
2014 के लोकसभा चुनाव में मीनाक्षी नटराजन को मंदसौर सीट से बड़ी हार का सामना करना पड़ा। उस चुनाव में वे लगभग 3 लाख वोटों के बड़े अंतर से पराजित हुईं।
हालांकि हार के बाद भी उन्होंने राजनीति और संगठन में सक्रियता बनाए रखी और कांग्रेस पार्टी में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाती रहीं।
कांग्रेस की रणनीति और राज्यसभा उम्मीदवार
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस का यह फैसला संगठन और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर लिया गया है। मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाना पार्टी के महिला नेतृत्व को भी मजबूत करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
वहीं कर्नाटक से मल्लिकार्जुन खड़गे का राज्यसभा चुनाव लड़ना पार्टी नेतृत्व की मजबूती और संगठन पर पकड़ को दर्शाता है।
राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज
Rajya Sabha Elections 2026: को लेकर सभी राजनीतिक दलों में तैयारियां तेज हो गई हैं। उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही राजनीतिक समीकरण भी बदलते नजर आ रहे हैं।
कांग्रेस की इस पहली सूची के बाद अन्य दलों की रणनीति पर भी नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में और भी उम्मीदवारों की घोषणा होने की संभावना है।
निष्कर्ष
कांग्रेस द्वारा जारी इस सूची में मीनाक्षी नटराजन को मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार बनाना पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम माना जा रहा है। उनका संगठनात्मक अनुभव, राजनीतिक पृष्ठभूमि और गांधी परिवार से निकटता उन्हें इस भूमिका के लिए मजबूत उम्मीदवार बनाती है।
अब देखना होगा कि राज्यसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस की यह रणनीति कितना राजनीतिक लाभ दिला पाती है।
