साध्वी मयूरकलाश्री जी का पिटोल में भव्य मंगल प्रवेश, राजगढ़ श्री संघ ने की चातुर्मास हेतु भावभरी विनती
पिटोल/राजगढ़ (धार): Jain समाज के लिए अत्यंत हर्ष और श्रद्धा का अवसर तब देखने को मिला जब परम पूज्य साध्वी श्री मयूरकलाश्री जी आदि ठाणा का पिटोल नगरी में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इस पावन अवसर पर आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़े। साध्वी भगवंतों के आगमन से पूरा वातावरण धर्ममय और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
इस विशेष अवसर पर त्रिस्तुतिक जैन श्री संघ, राजगढ़ का एक प्रतिनिधिमंडल भी पिटोल पहुँचा। प्रतिनिधिमंडल ने साध्वी श्री जी के दर्शन कर उनसे आगामी चातुर्मास राजगढ़ में करने की भावपूर्ण विनती की। श्रद्धालुओं ने विनम्रता और भक्ति भाव के साथ साध्वी जी के समक्ष अपनी अर्जी प्रस्तुत की और राजगढ़ की धर्मप्रेमी जनता की ओर से चातुर्मास का लाभ प्रदान करने का आग्रह किया।
भव्य स्वागत के साथ हुआ मंगल प्रवेश
पिटोल नगरी में साध्वी श्री मयूरकलाश्री जी के मंगल प्रवेश के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। समाज के लोगों ने साध्वी भगवंतों का भक्ति और श्रद्धा के साथ स्वागत किया। मंगल प्रवेश के दौरान धर्म ध्वजाएं, जयकारों और भक्ति गीतों से वातावरण गूंज उठा।
श्रद्धालुओं ने साध्वी जी के चरणों में वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर उपस्थित समाजजनों ने इसे अत्यंत सौभाग्यपूर्ण क्षण बताया। धार्मिक वातावरण में भक्तों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी भव्य बना दिया।
राजगढ़ श्री संघ की उत्साहपूर्ण उपस्थिति
इस पावन अवसर पर राजगढ़ श्री संघ के सदस्यों ने विशेष उत्साह के साथ भाग लिया। श्री संघ के अध्यक्ष संदीप खंजाची और संरक्षक सुरेश तातेड के नेतृत्व में समाज के अनेक सदस्य पिटोल पहुंचे।
राजगढ़ से श्रद्धालुओं का एक बड़ा काफिला लगभग छह गाड़ियों में पिटोल के लिए रवाना हुआ। सभी श्रद्धालु साध्वी श्री जी के दर्शन और चातुर्मास की विनती के लिए उत्साहपूर्वक पहुंचे। समाजजनों ने एक स्वर में साध्वी जी से आग्रह किया कि वे आगामी चातुर्मास राजगढ़ में कर समाज को धर्म लाभ प्रदान करें।
राजगढ़ श्री संघ के प्रतिनिधिमंडल ने साध्वी भगवंतों के समक्ष सामूहिक रूप से चातुर्मास की अर्जी रखी। इस अवसर पर समाजजनों की श्रद्धा और समर्पण स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था।
विनती करने पहुंचे समाज के प्रमुख श्रावक
चातुर्मास की विनती करने के लिए राजगढ़ श्री संघ के कई वरिष्ठ और सक्रिय सदस्य पिटोल पहुंचे। इन श्रद्धालुओं ने साध्वी श्री जी के चरणों में वंदन कर विनम्र भाव से निवेदन प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख श्रावकों में शामिल थे:
- अशोक जी भण्डारी
- राकेश राजावत
- राकेश हरण
- सुनिल छजलानी
- संजय पूराणी
- सुभाष चत्तर
- दिनेश चत्तर
- निलेश सराफ
- अक्षय भण्डारी
- राजेन्द्र भंडारी
- हेमन्त रोकडीया
- सोनू भंडारी
- दिलीप जैन
इन सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर साध्वी भगवंतों के समक्ष राजगढ़ में चातुर्मास करने की सामूहिक अर्जी प्रस्तुत की।
चातुर्मास का धार्मिक महत्व
जैन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व माना जाता है। वर्षा ऋतु के चार महीनों के दौरान साधु-साध्वियां एक स्थान पर निवास कर धर्म प्रवचन, तप और साधना करते हैं। इस दौरान श्रद्धालुओं को धर्म सुनने, साधना करने और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर मिलता है।
यदि किसी नगर को चातुर्मास का लाभ मिलता है तो वहां पूरे चार महीने तक धार्मिक कार्यक्रम, प्रवचन, तप, स्वाध्याय और समाज सेवा के कार्य होते हैं। यही कारण है कि समाज के लोग चातुर्मास के लिए साधु-साध्वियों से विशेष विनती करते हैं।
राजगढ़ श्री संघ भी यही उम्मीद लेकर साध्वी मयूरकलाश्री जी से चातुर्मास के लिए निवेदन करने पिटोल पहुंचा।
धर्ममय बना पिटोल का वातावरण
साध्वी श्री जी के मंगल प्रवेश के दौरान पिटोल में श्रद्धा और भक्ति का अनूठा माहौल देखने को मिला। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या, भक्ति गीतों की गूंज और जयकारों से पूरा नगर धर्ममय वातावरण में डूब गया।
श्रावकों और श्राविकाओं ने साध्वी भगवंतों के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। इस दौरान कई श्रद्धालुओं ने साध्वी श्री जी से आशीर्वाद भी प्राप्त किया।
राजगढ़ श्री संघ को चातुर्मास की आशा
राजगढ़ श्री संघ के सदस्यों ने पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ चातुर्मास की विनती की है। समाजजनों को उम्मीद है कि साध्वी मयूरकलाश्री जी अपनी कृपा बरसाते हुए राजगढ़ को चातुर्मास का लाभ प्रदान करेंगी।
यदि राजगढ़ को यह अवसर प्राप्त होता है तो यह पूरे क्षेत्र के जैन समाज के लिए अत्यंत हर्ष और सौभाग्य का विषय होगा। इससे समाज में धार्मिक गतिविधियां बढ़ेंगी और लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
निष्कर्ष
पिटोल में साध्वी मयूरकलाश्री जी का मंगल प्रवेश जैन समाज के लिए एक अत्यंत पावन और प्रेरणादायक अवसर रहा। इस अवसर पर राजगढ़ श्री संघ द्वारा की गई चातुर्मास की विनती समाज की श्रद्धा और धर्म के प्रति समर्पण को दर्शाती है।
अब सभी श्रद्धालुओं को इस बात की प्रतीक्षा है कि साध्वी श्री जी राजगढ़ की विनती को स्वीकार करते हुए वहां चातुर्मास करने का आशीर्वाद प्रदान करें।
