एकल अभियान की संभाग स्तरीय सत्संग प्रतियोगिता सम्पन्न
28 फरवरी 2026 को क्षेमंकरी माता मंदिर तलेटी परिसर में एकल अभियान संभाग Rajasthanकी संभाग स्तरीय सत्संग प्रतियोगिता भव्य रूप से सम्पन्न हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ मां भारती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से किया गया। इस अवसर पर प्रमुख अतिथि थे स्वामी दिव्यस्वरूपदास महाराज, क्षेमकरी माता मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष कोलचंद सोनी, और पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष जयरूपाराम माली। अतिथियों ने प्रतियोगिता की महत्ता और समाज में इसके उद्देश्य पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह और भाग लेने वाले प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव का रूप देने में विशेष योगदान दिया।
प्रतियोगिता का उद्देश्य
संभाग सचिव रेवाशंकर रावल ने बताया कि प्रतियोगिता का प्रमुख लक्ष्य समाज को संगठित करना, सनातन संस्कृति का जागरण करना और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में सत्संग के माध्यम से सांस्कृतिक मूल्यों का प्रचार करना है। उन्होंने यह भी बताया कि संभाग स्तर की विजेता मंडली केंद्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में अयोध्या में भाग लेगी। यह प्रतियोगिता केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि देशभर में धार्मिक चेतना और संगठन क्षमता का विकास भी सुनिश्चित करती है।
सत्संग प्रतियोगिता के माध्यम से युवाओं और बच्चों में धार्मिक शिक्षाओं का आत्मसात, नैतिक मूल्यों की समझ, और सामूहिक अनुशासन की भावना विकसित की जाती है। आयोजकों ने यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक प्रतिभागी को मंच पर अभिनय, गायन, प्रवचन और संस्कार शिक्षा के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले।
भाग लेने वाली मंडलियाँ और परिणाम
प्रतियोगिता में राजस्थान के आठ अंचलों की मंडलियाँ शामिल हुईं: भरतपुर, बारा, पाली, झाडौल, सिरोही, भीनमाल, बाड़मेर, जिसमें प्रत्येक मंडली ने अपने क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक विशेषताओं को प्रस्तुत किया। परिणाम इस प्रकार रहे:
- प्रथम स्थान: भीनमाल मंडली
- द्वितीय स्थान: बाड़मेर मंडली
- तृतीय स्थान: पाली अंचल मंडली
विजेता मंडलियों को पारितोषिक और अन्य प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए। इस प्रतियोगिता ने प्रतिभागियों को सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना के साथ-साथ सामूहिक अनुशासन और संगठन कौशल का अनुभव भी दिया।

जज और निर्णायक मंडल
प्रतियोगिता में जज की भूमिका में शामिल थे:
- सुप्रसिद्ध भजन गायक पूनम माली
- भजन गायिका रेखा परमार भारजा
- हिन्दू सेवा समिति के जबराराम भाटी
- सीबीईओ गजेन्द्र देवासी
- गायत्री मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष जोगाराम चौधरी
जजों ने प्रतिभागियों की प्रस्तुति का निष्पक्ष मूल्यांकन किया और कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
आयोजन और संयोजन
कार्यक्रम का आयोजन और संयोजन संभाग युवा प्रभारी मुकेश सोलंकी ने किया। कार्यक्रम की सफलता में नगर के भामाशाहों, समिति पदाधिकारियों और सेवाव्रती कार्यकर्ताओं का योगदान सराहनीय रहा। उन्होंने प्रतियोगिता के संचालन में सहयोग करते हुए प्रतिभागियों और दर्शकों को सुगम अनुभव प्रदान किया।
मंच संचालन और उपस्थितिगण
मंच संचालन सुप्रसिद्ध एंकर मीठालाल जांगिड़ ने किया। इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य नागरिकों में शामिल थे:
डॉ. अक्षय बोहरा, पारसमल जीनगर, राव विक्रम सिंह आर्य, राजु सिंह माली, भजन गायक आकाश बंजारा, भावेश देवासी, रघु पारिक, मुन्नी देवी, लता परमार भारजा, जगदिश सिंह राव, सकुतला देवी, सन्तोष देवी, इन्द्र सिंह राव, सुरेश वोरा, नरपतसिंह राव, दिलीप कुमार, जितेन्द्र सोनी, सुनील कुमार, जितेन्द्र माली सहित अनेक गणमान्य नागरिक।
आयोजन की विशेषताएँ
प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने भजन, प्रवचन, कथा, गीत और नाटक के माध्यम से धार्मिक और नैतिक शिक्षा का संदेश दिया। इस अवसर पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के युवा, बालक, महिलाएँ और वृद्धजन सक्रिय रूप से शामिल हुए। आयोजन में सुरक्षा, व्यवस्था और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा गया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न मंडलों ने अपनी प्रस्तुतियों में स्थानीय परंपराओं, धार्मिक कथाओं और सांस्कृतिक गीतों को शामिल किया। इससे दर्शकों को न केवल धार्मिक ज्ञान, बल्कि सांस्कृतिक जागरूकता भी प्राप्त हुई।
समाज और सांस्कृतिक प्रभाव
इस कार्यक्रम ने समाज के युवाओं और बच्चों को धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों की समझ दी। बच्चों और युवाओं ने मंच पर सत्संग और भजन प्रदर्शन के माध्यम से अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित की।
संभाग स्तर की प्रतियोगिता ने यह भी सुनिश्चित किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में धर्म और संस्कृति का प्रसार निरंतर हो। यह आयोजन समाज के लिए सांस्कृतिक उत्सव के रूप में यादगार बना।
युवा और बाल प्रतिभागियों का योगदान
प्रतिभागियों में चार वर्ष के बच्चे से लेकर वृद्धजन तक शामिल हुए। यह दर्शाता है कि धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम हर आयु वर्ग के लिए प्रेरणास्पद हो सकते हैं। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि सामाजिक और धार्मिक चेतना को जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है।
निष्कर्ष
एकल अभियान की यह संभाग स्तरीय सत्संग प्रतियोगिता न केवल सांस्कृतिक और धार्मिक जागरूकता का प्रतीक बनी, बल्कि समाज में संगठन, अनुशासन और एकता का भी उदाहरण प्रस्तुत किया। यह कार्यक्रम स्पष्ट रूप से दिखाता है कि सत्संग और धर्म प्रचार के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
इस प्रकार, यह कार्यक्रम राजस्थान में सनातन धर्म और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार में सफल रहा और भविष्य में भी इसे निरंतर आयोजित करने का महत्व स्पष्ट करता है। आयोजन की भव्यता, लाखों प्रतिभागियों की भागीदारी और युवा व बच्चों का सक्रिय योगदान इसे विशेष बनाता है।
