स्वच्छता अभियान के तहत कचरा दान हटाने पर उठे सवाल, जांच की मांग
वार्ड क्रमांक 5 में लगाए गए कचरा दान को ट्रैक्टर में लोड किए जाने का फोटो सामने आया, नगर पालिका की संपत्ति और कार्रवाई पर सवाल
अनूपपुर। नगर को स्वच्छ एवं व्यवस्थित रखने के उद्देश्य से नगर पालिका परिषद द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए कचरा दानों की सुरक्षा और देखरेख को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जिला मुख्यालय के पुराने पोस्ट ऑफिस रोड स्थित वार्ड क्रमांक 5 में सब्जी मंडी के पास लगाए गए कचरा दान को हटाकर ट्रैक्टर में लोड किए जाने का एक फोटो सामने आया है। फोटो में दो व्यक्ति कचरा दान जैसी संरचना को उठाकर वाहन में रखने का प्रयास करते दिखाई दे रहे हैं। इस फोटो के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर मामले की जांच की मांग उठ रही है।
कचरा दान हटाने की कार्रवाई पर स्पष्टता का अभाव
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, उक्त स्थान पर नगर पालिका की स्वच्छता व्यवस्था के तहत कचरा दान लगाया गया था। आरोप है कि बाद में इसे निर्धारित स्थान से हटाया गया और कथित रूप से तोड़कर कचरा संग्रहण करने वाले ट्रैक्टर में लोड कर दिया गया। हालांकि, इस कार्रवाई के संबंध में नगर पालिका की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि कचरा दान हटाने का आदेश किस अधिकारी ने दिया था और हटाई गई सामग्री वर्तमान में कहां रखी गई है।
कचरा दान हटाने का आदेश किसने दिया?
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सार्वजनिक स्थान पर लगाए गए कचरा दान को हटाने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया। यदि यह नगर पालिका की संपत्ति थी, तो क्या इसे हटाने, क्षतिग्रस्त करने अथवा अनुपयोगी घोषित करने के लिए कोई लिखित आदेश जारी किया गया था? यदि कचरा दान अनुपयोगी हो चुका था, तो क्या नियमानुसार उसका उल्लेख स्टॉक रजिस्टर या संपत्ति रजिस्टर में किया गया? साथ ही, क्या उसके निस्तारण के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाई गई?
कबाड़ में निस्तारण की आशंका की भी जांच जरूरी
स्थानीय स्तर पर यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं हटाए गए कचरा दान को कबाड़ के रूप में निस्तारित तो नहीं किया गया। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में किसी कर्मचारी या अधिकारी पर सीधे आरोप लगाने के बजाय नगर पालिका प्रशासन द्वारा संबंधित रिकॉर्ड, मौके की स्थिति और कार्रवाई में शामिल कर्मचारियों की भूमिका की जांच किया जाना आवश्यक है।
जांच में इन बिंदुओं को शामिल करने की मांग
स्थानीय नागरिकों ने मामले की जांच के दौरान कई बिंदुओं को स्पष्ट करने की मांग की है। इनमें वार्ड क्रमांक 5 में लगाए गए कचरा दान को हटाने का आदेश किस अधिकारी ने दिया, क्या कार्रवाई से संबंधित कोई लिखित अनुमति मौजूद है और फोटो में दिखाई दे रहे वाहन व कर्मचारियों की अधिकृत भूमिका क्या थी, जैसे सवाल शामिल हैं।
इसके अलावा हटाए गए कचरा दान को नगर पालिका के किस स्टॉक या संपत्ति रजिस्टर में दर्ज किया गया है, यदि उसे अनुपयोगी घोषित किया गया है तो नीलामी अथवा निस्तारण की कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई और वर्तमान में सामग्री कहां मौजूद है, इसकी जानकारी भी सामने आनी चाहिए। नगर में लगाए गए अन्य कचरा दानों का भौतिक सत्यापन कराया गया है या नहीं, इसकी भी जांच किए जाने की मांग की गई है।
सार्वजनिक संपत्ति की निगरानी और रिकॉर्ड रखना जरूरी
स्वच्छता व्यवस्था के लिए सार्वजनिक धन से खरीदे गए संसाधनों की स्थापना के साथ उनकी सुरक्षा, देखरेख और नियमित निगरानी भी आवश्यक है। यदि कोई कचरा दान क्षतिग्रस्त या अनुपयोगी हो जाता है, तो उसके निस्तारण के लिए निर्धारित नियमों का पालन किया जाना चाहिए। ऐसे में वार्ड क्रमांक 5 के मामले में दस्तावेजों और मौके की स्थिति की जांच के बाद ही वास्तविक तथ्य सामने आ सकते हैं।
जांच के बाद तय हो जिम्मेदारी
मामले में किसी कर्मचारी अथवा अधिकारी को दोषी ठहराने से पहले निष्पक्ष जांच जरूरी है। यदि जांच में नियमों के विपरीत कार्रवाई या नगर पालिका की संपत्ति के अनधिकृत निस्तारण की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका परिषद और जिला प्रशासन से वार्ड क्रमांक 5 में लगाए गए कचरा दान की स्थिति स्पष्ट कराने, संबंधित रिकॉर्ड की जांच करने तथा नगर क्षेत्र में स्थापित अन्य कचरा दानों का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।
संवाददाता -मदन मोहन मिश्रा
